अब दिल्ली में विस्तार की तैयारी, जन सुराज पार्टी रविवार को करेगी अहम बैठक

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नई दिल्ली। जन सुराज पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपने सांगठनिक विस्तार और चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी की एक संभावित स्टीयरिंग कमेटी के गठन पर विचार चल रहा है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के कई दिग्गज चेहरों को शामिल किए जाने की चर्चा है।

संभावित स्टीयरिंग कमेटी में कई जाने-माने चेहरे शामिल

प्रस्तावित स्टीयरिंग कमेटी के लिए जिन प्रमुख नामों पर चर्चा चल रही है, उनमें अधिवक्ता तथागत हर्षवर्धन का नाम प्रमुख है। वह पूर्व बक्सर सांसद केके तिवारी के पुत्र हैं और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बक्सर से पार्टी के उम्मीदवार रह चुके हैं। इसके साथ ही, दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज के प्रोफेसर शांतनु कुमार, हिमाचल प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) जेपी सिंह और पूर्व भारतीय आर्थिक सेवा अधिकारी कुंवर चंद्रेश को भी संभावित सदस्यों के रूप में देखा जा रहा है। इनके अतिरिक्त, समिति में अधिवक्ता अबू अफान फारूकी, प्रियंका सिंह, कारोबारी अजय सिंह और पूर्व ओएनजीसी निदेशक बादी-उद-दोजा के नाम भी चर्चा में हैं।

निगम से लेकर विधानसभा चुनाव तक की तैयारी

नियोजित स्टीयरिंग कमेटी का मुख्य दायित्व दिल्ली में पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूत करना होगा। इसके तहत पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जन सुराज दिल्ली में आगामी सभी प्रमुख चुनावों में अपनी पूरी ताकत के साथ उतरने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत पार्टी 2027 के दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव, 2029 के लोकसभा चुनाव और 2030 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। पार्टी नेता शांतनु कुमार ने स्पष्ट किया है कि संगठन दिल्ली में किसी एक विशेष समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया जाएगा।

पूर्वांचली मतदाताओं पर रहेगा विशेष फोकस

दिल्ली की राजनीति में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) से ताल्लुक रखने वाली बड़ी आबादी की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। जन सुराज इस बड़े मतदाता वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए खास रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि राष्ट्रीय राजधानी की कई विधानसभा सीटों पर पूर्वांचली मतदाता चुनावी परिणामों को तय करने में निर्णायक साबित होते हैं, इसलिए पार्टी इस वर्ग के बीच अपनी पैठ मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है।