कैंपबेल बे / नई दिल्ली | केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 92,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महा-योजना पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीखा हमला बोला है। अपने हालिया निकोबार दौरे के बाद उन्होंने इस पूरी परियोजना को पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है। राहुल गांधी का मानना है कि जिसे सरकार आर्थिक प्रगति का नाम दे रही है, वह वास्तव में भारत की अनमोल प्राकृतिक विरासत का विनाश है।
रेनफॉरेस्ट की तबाही और आदिवासी अधिकारों का हनन
निकोबार के घने जंगलों का मुआयना करने के बाद राहुल गांधी ने अपने अनुभव साझा करते हुए गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से संजोए गए इन जंगलों को सरकार विकास के नाम पर खत्म करने पर तुली है। उनके अनुसार, करीब 160 वर्ग किलोमीटर में फैले इस प्राचीन वर्षावन की कटाई से न केवल पर्यावरण का संतुलन बिगड़ेगा, बल्कि यहाँ रहने वाले आदिवासी समुदाय भी अपनी जड़ों से कट जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो विकास की भाषा में छुपाया गया एक क्रूर सच है।
प्राकृतिक विरासत के खिलाफ सदी का सबसे बड़ा घोटाला
कांग्रेस नेता ने इस परियोजना की तुलना एक बड़े अपराध से करते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। राहुल गांधी का दावा है कि ग्रेट निकोबार में जो कुछ भी हो रहा है, वह देश की आदिवासी विरासत और जैव विविधता के साथ किया गया सबसे बड़ा विश्वासघात है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इस विनाश को अपनी आंखों से देखें और इसे रोकने के लिए आगे आएं। उनके मुताबिक, कैम्पबेल बे के राजीव नगर में स्थानीय लोगों से हुई बातचीत में यह साफ हो गया है कि जनता के मन में अपने घरों और पारंपरिक जीवनशैली को खोने का गहरा डर है।
रणनीतिक महत्व बनाम पर्यावरणीय चुनौतियां
गौरतलब है कि सरकार का यह 92,000 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट एक विशाल पोर्ट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पर्यटन केंद्र बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। केंद्र का तर्क है कि यह परियोजना आर्थिक विकास के साथ-साथ हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक पकड़ को मजबूत करेगी। हालांकि, राहुल गांधी और पर्यावरण विशेषज्ञों का एक बड़ा समूह इसे पारिस्थितिक तंत्र के लिए आत्मघाती कदम मान रहा है। राहुल ने स्थानीय समुदायों को आश्वस्त किया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं और संसद से सड़क तक उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे।









