पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के सभी जिलों के डीएम और एसपी को स्पष्ट चेतावनी दी है कि राज्य में सुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने अधिकारियों को न केवल अपराधियों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ने को कहा, बल्कि कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव के भी निर्देश दिए।
जघन्य अपराधों पर 'त्वरित न्याय' का आदेश
मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर बेहद भावुक और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वालों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो कि "पीड़ित बच्ची की तेरहवीं होने से पहले ही अपराधी की फोटो पर माला टंग जाए।" उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में तत्काल प्राथमिकी, त्वरित चार्जशीट और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सजा सुनिश्चित की जाए।
अधिकारियों के लिए 'ऑफिस ऑवर्स' और जवाबदेही तय
प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने नया नियम लागू किया है। अब सभी DM और SP को सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने दफ्तर में मौजूद रहना होगा। इस दौरान उन्हें जनता की शिकायतों का सीधा निवारण करना होगा। सीएम ने अपने 27 साल के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि अगर जिला स्तर के अधिकारी सही मानसिकता से काम करें, तो 75% समस्याएं मुख्यालय तक पहुँचने से पहले ही खत्म हो सकती हैं।
'स्मार्ट पुलिसिंग' और निवेशकों को सुरक्षा का कवच
बिहार में निवेश बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। उन्होंने निर्देश दिया कि हर निवेशक के साथ एक 'नोडल अधिकारी' तैनात किया जाए। साथ ही, बिहार पुलिस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 'डायल 112' जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस कर 'स्मार्ट पुलिसिंग' की दिशा में ले जाने पर जोर दिया गया। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी अधिकारियों को अपनी पूरी क्षमता से काम करने की नसीहत दी।









