नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'पितृसत्तात्मक सोच को समाप्त करने' से जुड़े वक्तव्य पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सामाजिक सुधारों और नारी अधिकारों के मुद्दे पर विपक्षी दल का दृष्टिकोण हमेशा से पक्षपातपूर्ण और एकतरफा रहा है।
केवल एक वर्ग पर ध्यान केंद्रित करने पर उठाए सवाल
रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि जब भी सामाजिक बदलावों और महिला सुरक्षा या अधिकारों की बात आती है, तब राहुल गांधी और उनकी पार्टी केवल हिंदू रीति-रिवाजों और मान्यताओं को ही निशाना क्यों बनाते हैं? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में पूछा कि आखिर अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके बुनियादी अधिकारों पर कांग्रेस मौन क्यों साध लेती है।
बिना भेदभाव के सभी महिलाओं के अधिकार सुनिश्चित हों
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि नारी सम्मान और लैंगिक समानता का विषय किसी एक विशेष मजहब या वर्ग तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सामाजिक सुधार तभी संभव है, जब समाज की हर बेटी को बराबरी का हक मिले। यदि विपक्षी दल रूढ़िवादी सोच और पितृसत्ता के विरुद्ध निष्पक्ष लड़ाई लड़ना चाहता है, तो उसे अल्पसंख्यक समाज की बहनों-बेटियों के मुद्दों पर भी उतनी ही गंभीरता और साहस से स्टैंड लेना होगा।
राजनीतिक लाभ के लिए समाज को न बांटने की सलाह
अपने वक्तव्य के अंतिम चरण में रिजिजू ने स्पष्ट किया कि महिलाओं से जुड़े संवेदनशील विषयों पर ऐसी राजनीति नहीं की जानी चाहिए जिससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो। उन्होंने अपील की कि बेटियों के अधिकारों के नाम पर समाज को विभाजित करने के प्रयासों पर विराम लगना चाहिए। जब तक नीतियों में धर्म और जाति का भेद समाप्त नहीं होगा, तब तक महिला सशक्तिकरण के दावे पूरी तरह से अर्थहीन रहेंगे।









