जवानी में आपा खोना नई बात नहीं, कई महान खिलाड़ियों का भी रहा है ऐसा इतिहास

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भारत ए और श्रीलंका ए के बीच हुए कड़े मुकाबले के बाद 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी सुर्खियों में हैं। खबरों के अनुसार, श्रीलंकाई खिलाड़ी की एक टिप्पणी के बाद वैभव ने मैदान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके आचरण को लेकर चर्चा छिड़ गई है। लेकिन खेल के इतिहास पर नज़र डालें, तो यह कोई पहली घटना नहीं है। दुनिया के कई महानतम खिलाड़ियों ने अपने शुरुआती दिनों में भावनाओं पर से नियंत्रण खोया है, पर बाद में उसी जुनून को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।

क्या था पूरा विवाद?

कोलंबो में खेला गया यह मैच 265 रनों पर बराबरी (टाई) पर छूटा था। इसके बाद खराब रोशनी के बावजूद विवादित सुपर ओवर हुआ, जिसमें मेजबान श्रीलंका ए ने जीत हासिल की। मैच के तुरंत बाद श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे ने वैभव सूर्यवंशी से कथित तौर पर कहा, "खेल खत्म हो गया है, अब घर जाओ।" इस तंज ने युवा खिलाड़ी को नाराज कर दिया और दोनों के बीच जमकर कहासुनी हुई। वीडियो में दोनों को एक-दूसरे के करीब आकर बहस करते देखा गया, जिसके बाद टीम स्टाफ को दखल देना पड़ा।

जब दिग्गज भी नहीं रह पाए 'कूल'

भारतीय क्रिकेट में आक्रामकता की बात करें तो विराट कोहली का नाम सबसे ऊपर आता है। करियर के शुरुआत में कोहली कई बार विरोधियों और दर्शकों से उलझते दिखे थे, लेकिन बाद में यही तेवर उनकी पहचान और ताकत बने। पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट लहराना हो या वर्तमान कोच गौतम गंभीर की मैदान पर तीखी बहसें, आक्रामकता हमेशा भारतीय क्रिकेट का हिस्सा रही है।

इतना ही नहीं, महेंद्र सिंह धोनी जैसे शांत खिलाड़ी भी कई बार आपा खो चुके हैं। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू का 1996 में अंपायर से बहस कर मैदान छोड़ना आज भी याद किया जाता है। विदेशी खिलाड़ियों में इंजमाम-उल-हक का स्टैंड्स में घुसकर एक दर्शक की पिटाई करना हो या शोएब अख्तर और हरभजन सिंह की प्रसिद्ध लड़ाई, खेल के मैदान पर भावनाएं अक्सर उफान पर रही हैं।

फुटबॉल और टेनिस में भी दिखा है गुस्सा

फुटबॉल के महान सितारे क्रिस्टियानो रोनाल्डो, लियोनल मेसी और नेमार भी मैदान पर झड़पों से अछूते नहीं रहे हैं। 2006 विश्व कप फाइनल में जिनेदिन जिदान का हेडबट हो या डिएगो माराडोना की मैदान पर सामूहिक लड़ाई, ये घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं। टेनिस की बात करें तो शालीन माने जाने वाले रोजर फेडरर भी युवावस्था में कई रैकेट तोड़ चुके हैं। वर्तमान में नोवाक जोकोविच, ज्वेरेव और अल्कारेज जैसे खिलाड़ी भी अक्सर अपना गुस्सा रैकेट पर निकालते दिखते हैं।

क्या वैभव सूर्यवंशी पर होगी कार्रवाई?

चूंकि यह मैच आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय न होकर 'ए' टीमों के बीच खेला गया मुकाबला था, इसलिए फिलहाल वैभव पर किसी कड़े प्रतिबंध की संभावना कम है। वह 18 जून को अफगानिस्तान ए के खिलाफ होने वाले अगले महत्वपूर्ण मैच के लिए चयन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव अभी मात्र 15 वर्ष के हैं और उन पर बढ़ते दबाव के बीच ऐसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। खेल मनोविज्ञान के अनुसार, युवा खिलाड़ियों को कड़ी सजा देने के बजाय उन्हें अनुशासन सिखाना और सही दिशा देना अधिक प्रभावी होता है। असली सवाल यह नहीं है कि उन्होंने क्या प्रतिक्रिया दी, बल्कि यह है कि वे इस अनुभव से क्या सीखते हैं।