Anu Meena : मौत से पहले रिकॉर्ड हुए वीडियो-ऑडियो से खुलेंगे कई राज!

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जयपुर। मुहाना थाना इलाके के बालाजी विहार में विवाहिता अनु मीणा द्वारा खुदकुशी किए जाने के मामले में पुलिस तफ्तीश तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान पुलिस को मृतका को प्रताड़ित किए जाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस ने मौके से दो वीडियो, पांच ऑडियो क्लिप और कुछ वॉट्सऐप चैट बरामद की हैं, जिन्हें पुख्ता वैज्ञानिक जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेज दिया गया है। वहीं, मामले का मुख्य आरोपी और जल संसाधन विभाग में एक्सईएन (XEN) पद पर तैनात पति गौतम मीणा वारदात के बाद से ही अपनी लोकेशन बदलकर फरार है। आरोपी ने अपना मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

वीडियो कॉल के दौरान लगाया था फंदा, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मानसरोवर के एसीपी आदित्य काकड़े के मुताबिक, मृतका के परिवार की ओर से सौंपे गए सभी डिजिटल सबूतों को जांच के लिए एफएसएल भिजवाया गया है। मृतका के भाई नीरज मीणा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उनकी 36 वर्षीय बहन अनु मीणा को उसका पति गौतम मीणा लंबे समय से शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। इसी क्रूरता से तंग आकर अनु ने बीते 7 अप्रैल को अपने पति से वीडियो कॉल पर बात करते समय ही मोबाइल कैमरे के सामने चुन्नी का फंदा बनाकर अपनी जान दे दी थी।

अस्पताल ले जाने के बजाय घर पर ही सीपीआर देता रहा पति

इस पूरे घटनाक्रम के बाद का एक और चौंकाने वाला वीडियो पुलिस के सामने आया है। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि फंदे से उतारे जाने के बाद अनु की गंभीर स्थिति को देखते हुए भी आरोपी पति उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय घर पर ही सीपीआर (CPR) दे रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि गौतम अक्सर अत्यधिक शराब पीकर अनु और अपने बच्चों के साथ बेरहमी से मारपीट करता था और अनु को छोड़ कर दूसरी शादी करने की धमकियां भी देता था।

60 लाख की शादी और 20 लाख के कैश के बाद भी दहेज की भूख

पीड़ित परिवार ने बताया कि अनु और गौतम का विवाह साल 2015 में हुआ था, जिसमें करीब 60 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद गौतम की दहेज की मांग खत्म नहीं हुई। दोनों के दो बच्चे भी हैं। भाई नीरज मीणा ने खुलासा किया कि बहन का घर बचाने के लिए साल 2022 में भी परिवार ने गौतम को 20 लाख रुपये नकद दिए थे ताकि वह अनु को परेशान न करे, लेकिन इसके बाद भी उसकी प्रताड़ना और बढ़ती चली गई।

डेढ़ महीने बाद मोबाइल से खुला राज, पुलिस जांच में जुटी

परिजनों का कहना है कि घटना के करीब डेढ़ महीने बाद जब मृतका के मोबाइल की बारीकी से जांच की गई, तब उसमें मारपीट और प्रताड़ना के वीडियो व सबूत सामने आए। इसके तुरंत बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क कर मामला दर्ज कराया। फिलहाल पुलिस इन सभी डिजिटल साक्ष्यों, ऑडियो-वीडियो और वॉट्सऐप चैट्स को आधार बनाकर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।