पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के आधिकारिक निवास को लेकर चल रहा सियासी गतिरोध अब चरम पर पहुंच गया है। राजधानी पटना के प्रतिष्ठित '10 सर्कुलर रोड' स्थित इस बंगले को खाली करने के लिए शासन और जिला प्रशासन द्वारा तय की गई 15 दिनों की मुहलत आज यानी 15 जून को खत्म हो रही है। इस समयसीमा के समाप्त होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि लालू-राबड़ी परिवार इस आवास को छोड़ देगा या फिर इस मुद्दे पर सूबे की राजनीति में कोई नया घमासान शुरू होगा।
प्रशासनिक नोटिस और नए बंगले का आवंटन
भवन निर्माण विभाग की ओर से बीते 30 मई को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर पूर्व मुख्यमंत्री को दो सप्ताह के भीतर यह बंगला खाली करने का हुक्म दिया गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से '39 हार्डिंग रोड' पर एक नया सरकारी बंगला काफी समय पहले ही अलॉट किया जा चुका है। नियमों के तहत नया ठिकाना मिलने के बाद पुराने आवास को छोड़ देना चाहिए था, लेकिन '10 सर्कुलर रोड' को खाली नहीं किए जाने की वजह से अब यह सस्पेंस गहरा गया है कि प्रशासन आज क्या रुख अपनाएगा।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख और लोकतांत्रिक दुहाई
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बिना नाम लिए राजद नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में किसी भी सरकारी बंगले को निजी बपौती नहीं माना जा सकता और हर किसी को नियमों के दायरे में आना ही होगा। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को यह भ्रम है कि उनसे उनका सरकारी घर कभी वापस नहीं लिया जा सकता, लेकिन उन्हें यह याद रखना चाहिए कि देश में राजतंत्र खत्म हो चुका है और कानून सबके लिए बराबर है, इसलिए आवास तो खाली करना ही पड़ेगा।
आर-पार के मूड में पूर्व मुख्यमंत्री और पुलिस की दस्तक
दूसरी तरफ, इस प्रशासनिक सख्ती के सामने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी बगावती तेवर अपनाते हुए सीधे मुख्यमंत्री को चुनौती दे डाली थी। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा था कि सरकार चाहे तो घर खाली कराने के लिए अपनी फौज भेज दे, वह खुद से इसे खाली नहीं करेंगी। इस तीखे बयान के बाद सचिवालय डीएसपी डॉ. अन्नू ने तत्काल राबड़ी आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि पुलिस अधिकारी ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को भांपते हुए उन्हें शांतिपूर्वक नया बंगला स्वीकार करने की समझाइश दी थी, जिसके बाद आज की कार्रवाई पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी हैं।









