हाईकोर्ट ने शासन को दी आखिरी मोहलत? IPS डांगी केस में एक सप्ताह का समय

0
8

बिलासपुर: निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगे अश्लील हरकतों और उत्पीड़न के अति संवेदनशील मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य शासन के सुस्त रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत पर अब तक हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत न किए जाने पर न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने शासन को एक सप्ताह की अंतिम मोहलत प्रदान की है।

अदालत में पूर्व में जारी 12 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में राज्य शासन द्वारा वांछित जानकारी पेश नहीं की जा सकी थी। उच्च न्यायालय ने इस ढिलाई पर सख्त चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित एक सप्ताह की अवधि में शिकायत पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित उच्च अधिकारी को 29 सितंबर 2026 को होने वाली आगामी सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पैरवी की।

क्या है पूरा मामला?

बिलासपुर निवासी एक महिला योग प्रशिक्षिका ने आईपीएस रतनलाल डांगी पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपों के अनुसार, ऑनलाइन योग कक्षाओं के दौरान डांगी ने अनुचित व अश्लील व्यवहार किया। बात न मानने पर पीड़िता के सब-इंस्पेक्टर पति को फर्जी आपराधिक प्रकरण में फंसाने तथा अत्यंत संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरित करने की धमकियां दी गईं। पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष डिजिटल साक्ष्यों के साथ शिकायत प्रस्तुत की थी, जिसके उपरांत मार्च में डांगी को निलंबित कर दिया गया था।

वरिष्ठ महिला आईएएस से जांच कराने की मांग

डीजीपी द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच हेतु तत्कालीन आईजीपी आनंद छाबड़ा तथा तत्कालीन डीआईजीपी मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। हालांकि, पीड़िता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि प्राथमिक जांच अधिकारी आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने मामले की पारदर्शी जांच किसी वरिष्ठ महिला आईएएस (IAS) अधिकारी से कराने की गुहार लगाई है।