राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड भाजपा रेडी: 5 जून को रांची में जुटेगी विधायक दल की बैठक, रणनीति पर होगा महामंथन

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रांची | झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सत्ताधारी महागठबंधन और मुख्य विपक्षी खेमा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तमाम सिपहसालार अपने-अपने उम्मीदवारों को उच्च सदन भेजने के लिए गोटियां बिछाने में जुट गए हैं। इस सियासी महामुकाबले में एनडीए की मुख्य धुरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरी ताकत झोंक दी है। अंदरूनी सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, आगामी 5 जून को रांची में भाजपा विधायक दल की एक आपात और बेहद अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में प्रदेश भाजपा के सभी 21 विधायकों की मौजूदगी अनिवार्य की गई है, जिसे चुनाव के लिहाज से टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।

वोटिंग के गणित और संगठनात्मक एकजुटता पर होगा मंथन

भाजपा विधायक दल की इस महाबैठक के एजेंडे में राज्यसभा चुनाव की बारीकियां, मतदान की तकनीकी प्रक्रिया और क्रास वोटिंग के खतरे से बचने के उपायों पर विस्तार से माथापच्ची की जाएगी। इस बैठक के जरिए पार्टी आलाकमान अपने सभी विधायकों को एकजुट रहने और व्हिप के मुताबिक मतदान करने के कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस चुनाव को महज संसद की एक सीट के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसके जरिए वह विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अपनी संगठनात्मक ताकत और विपक्षी एकजुटता में सेंध लगाने की क्षमता का प्रदर्शन करना चाहती है।

नितिन नवीन का दो दिवसीय झारखंड दौरा, बढ़ेगा कार्यकर्ताओं का जोश

विधायक दल की इस रणनीतिक बैठक के ठीक अगले दिन, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिनों के संगठनात्मक दौरे पर झारखंड आ रहे हैं। उनके इस दौरे को राज्यसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने और एनडीए खेमे में जोश फूंकने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान वे प्रदेश कोर कमेटी, प्रमुख पदाधिकारियों और सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं के साथ बंद कमरे में मैराथन बैठकें करेंगे। इस शीर्ष दौरे का मुख्य उद्देश्य चुनाव के वक्त पार्टी की कमान को पूरी तरह दुरुस्त रखना और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचाना है।

संख्या बल की कमी के बावजूद मैदान में उतरी भाजपा, सस्पेंस गहराया

इस समय झारखंड के राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा और कौतूहल इस बात को लेकर है कि पर्याप्त संख्या बल (बहुमत का आंकड़ा) न होने के बावजूद भाजपा ने इस रेस से पीछे हटने के बजाय चुनावी रण में उतरने का साहसिक फैसला क्यों किया। वर्तमान आंकड़ों के खेल में भाजपा के पास अपने दम पर जीत दर्ज करने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या कम है, जिसके चलते सियासी हलकों में विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) या सत्तापक्ष के असंतुष्ट विधायकों के गुप्त समर्थन को लेकर अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। अब सभी की निगाहें 5 जून को होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं, जहां से पार्टी के 'प्लान-बी' का खुलासा हो सकता है।