सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले में सुरक्षा एजेंसियों और जिला पुलिस ने एक साझा अभियान के तहत देश विरोधी गतिविधियों के एक बहुत बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की इस त्वरित और गुप्त कार्रवाई से आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है। खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने गाढ़ा थाना क्षेत्र के टकौर गांव में छापेमारी कर दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया है। प्राथमिक जांच और पूछताछ के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं, क्योंकि इन दोनों के तार सीधे तौर पर सीमा पार बैठे दुश्मनों से जुड़े हुए हैं।
देश को दहलाने की बड़ी साजिश का पर्दाफाश
गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्धों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो देश विरोधी ताकतों के एक बड़े मंसूबे का खुलासा हुआ। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ये युवक देश के विभिन्न हिस्सों में सिलसिलेवार बड़े बम धमाके करने की खतरनाक साजिश रच रहे थे। उनके इस खतरनाक इरादे का मकसद देश में अशांति फैलाना और बड़ी तबाही मचाना था। सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता के कारण वक्त रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा संभावित खतरा टल गया है।
संदिग्धों की पहचान और उनके सीमा पार संपर्क
पुलिस की गिरफ्त में आए इन दोनों आरोपियों की पहचान मोहम्मद अखलाक और मोहम्मद अरमान के रूप में की गई है। पुलिस की तफ्तीश में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि यह दोनों स्थानीय स्तर पर केवल मोहरे के रूप में काम कर रहे थे, जबकि इन्हें संचालित करने वाले आका अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार बैठे हैं। डिजिटल फोरेंसिक जांच में इनके फोन और इंटरनेट डेटा से यह प्रमाणित हुआ है कि ये दोनों काफी समय से विदेशी अपराधियों और देश विरोधी तत्वों के नियमित संपर्क में बने हुए थे।
सोशल मीडिया के जरिए 'राणा भाई ग्रुप' से जुड़ाव
पूछताछ के दौरान यह बेहद संवेदनशील जानकारी भी हाथ लगी है कि दोनों आरोपी इंटरनेट मीडिया और विभिन्न एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके जरिए वे सीमा पार सक्रिय कुख्यात 'राणा भाई ग्रुप' के साथ सीधे संवाद में थे। यह ग्रुप पाकिस्तानी गैंगस्टर्स और वहां की खुफिया एजेंसियों के इशारे पर भारत में स्लीपर सेल तैयार करने और आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करने का काम करता है। गिरफ्तार युवक इसी नेटवर्क का हिस्सा बनकर उनके दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे थे।
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रेकी और सुरक्षा पर खतरा
देश के खिलाफ रची जा रही इस साजिश में यह दोनों आरोपी केवल बातचीत तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि वे जमीनी स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। जांच में यह पाया गया है कि वे देश के कई बेहद संवेदनशील ठिकानों और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे थे। इन जगहों की सटीक लोकेशन, तस्वीरें और अन्य गोपनीय जानकारियां जुटाकर वे इंटरनेट के माध्यम से अपने पाकिस्तानी आकाओं को भेज रहे थे। पुलिस अब इनके पूरे नेटवर्क को खंगालने और इनके अन्य सहयोगियों का पता लगाने के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।









