नाम परिवर्तन की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट तक पहुंचे हजारों ग्रामीण

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झुंझुनूं। झुंझुनू पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले इस्लामपुर गांव का नाम परिवर्तित कर श्रीरामपुर रखे जाने के प्रस्ताव और इसके लिए आरंभ हुई सरकारी कवायद के खिलाफ सोमवार को स्थानीय निवासियों ने एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीण अंचल की ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक पहचान को अक्षुण्ण रखने की मांग को लेकर ग्रामीण बड़ी तादाद में लामबंद हुए और उन्होंने इस्लामपुर से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालना शुरू कर दिया। नाम बदलने की इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से खारिज करने की मांग के साथ सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की तरफ कूच कर चुके हैं।

अंबेडकर चौक से कलेक्ट्रेट के लिए पैदल रवाना हुए प्रदर्शनकारी

मिली जानकारी के मुताबिक, इस विरोध मार्च की शुरुआत इस्लामपुर गांव के मुख्य अंबेडकर चौक से हुई, जो समसपुर के रास्ते होते हुए झुंझुनूं जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) पर जाकर समाप्त होगी। वहां पहुंचकर सभी प्रदर्शनकारी एकत्रित होकर जिला प्रशासन को अपनी मांगों के समर्थन में एक औपचारिक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपेंगे। आंदोलनकारियों का स्पष्ट रूप से तर्क है कि इस्लामपुर नाम केवल एक भौगोलिक पहचान नहीं है, बल्कि यह गांव के सदियों पुराने इतिहास, सांस्कृतिक ताने-बाने और साझी विरासत से मजबूती से जुड़ा हुआ है। ऐसे में गांव का नाम बदलना पूरी तरह से जनभावनाओं के विपरीत और अनुचित कदम है।

स्थानीय जनप्रतिनिधि की सिफारिश के बाद गहराया पूरा विवाद

ग्रामवासियों ने इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि बताते हुए साझा किया कि क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा गांव का नाम बदलने का एक मांग पत्र स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू को प्रेषित किया गया था। इसके बाद विधायक ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताते हुए इसे अग्रिम कार्रवाई के लिए राज्य सरकार के पास भेज दिया। शासन स्तर से निर्देश मिलने के बाद अब जिला प्रशासन इस विषय पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है। जैसे ही प्रशासनिक स्तर पर इस नाम परिवर्तन की भनक गांव के एक बड़े वर्ग को लगी, वैसे ही इस प्रक्रिया के विरोध में लामबंदी और विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया।

सामाजिक और राजनीतिक दिग्गजों के समर्थन से तेज हुआ आंदोलन

इस पैदल मार्च को सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्रों से भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, आरएलपी नेता राजेंद्र फोजी, अंजुमन-ए-पठान संस्था के सचिव इब्राहिम खान और आमिन मणियार समेत कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और ग्रामीणों की मांग को जायज ठहराया। हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां और बैनर लिए लोग लगातार नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी स्थान का नाम वहां के सामाजिक और ऐतिहासिक जुड़ाव का प्रतीक होता है, इसलिए बिना सर्वसम्मति के ऐसा कोई भी निर्णय नहीं थोपा जाना चाहिए। यदि सरकार ने इस प्रक्रिया को जल्द ही वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस जन आंदोलन को और उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा।