बालाघाट में गर्भवती महिला से थाने में कथित मारपीट, चार पुलिसकर्मियों पर FIR

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बालाघाट। चोरी के झूठे संदेह में हिरासत में लिए गए एक दंपती के साथ किरनापुर थाना परिसर में हुई कथित अमानवीय प्रताड़ना और मारपीट का मामला पुनः गरमा गया है। पीड़ित महिला सावित्री चौधरी, जो लगभग ढाई माह की गर्भवती बताई जा रही थीं, को 22 सितंबर की सायं पेट में तीव्र पीड़ा एवं अत्यधिक रक्तस्राव की शिकायत के पश्चात आनन-फानन में जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान गर्भस्थ शिशु की स्पंदन (धड़कन) न मिलने के कारण डॉक्टरों की सलाह पर महिला का गर्भपात कराना पड़ा। इस दुखद घटना ने पीड़ित परिवार को गहरे आघात में धकेल दिया है। अब पीड़ित पक्ष ने पुलिस अभिरक्षा के दौरान हुए शारीरिक उत्पीड़न को इस अनहोनी का मुख्य कारण बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर जन-आक्रोश बढ़ रहा है और सामाजिक संगठनों द्वारा बड़े जनांदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भ्रूण हत्या का आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी तेजी से उठ रही है।

घटनाक्रम की पृष्ठभूमि और पुलिसिया कार्रवाई

यह संपूर्ण विवाद 2 सितंबर को उस समय प्रारंभ हुआ, जब स्थानीय डाकघर में 50 हजार रुपये की धनराशि की चोरी के संबंध में चौधरी दंपती को संदिग्ध माना गया। आरोप है कि जांच-पड़ताल के नाम पर पुलिस सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी को थाने ले आई और वहां उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। प्रताड़ना से व्यथित होकर पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। मामला तूल पकड़ते ही चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और घटना की सूक्ष्मता से जांच हेतु एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।

विशेष जांच दल ने अपनी पड़ताल में महिला को थाने में अवैध रूप से निरुद्ध रखने, गिरफ्तारी के विधिक नियमों का उल्लंघन करने तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं पाईं। इसके उपरांत, 23 सितंबर को एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपी चार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ और जनांदोलन की चेतावनी

पीड़िता के परिजन कैलाश पांचे ने व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि दंपति का विवाह वर्ष 2020 में हुआ था। वैवाहिक जीवन के छह वर्षों के लंबे अंतराल के पश्चात परिवार में नए सदस्य के आगमन की खुशियां आई थीं, किंतु पुलिस की कथित हिंसा ने इस उम्मीद को सदा के लिए समाप्त कर दिया।

स्वास्थ्य बिगड़ने पर महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां 22 सितंबर की रात्रि एवं 23 सितंबर की प्रातः सोनोग्राफी जांच की गई। रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु का हृदय स्पंदन बंद होने की पुष्टि होने पर चिकित्सकों को विवश होकर गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

इस हृदयविदारक घटना से परिजनों में गहरा शोक व्याप्त है और आम जनता का आक्रोश भड़क उठा है। सामाजिक व नागरिक संगठनों द्वारा निरंतर बैठकें आयोजित की जा रही हैं और दोषियों के विरुद्ध कठोरतम धाराओं, विशेषकर भ्रूण-हत्या का मामला जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।