रिटायर्ड IPS रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ FIR, जाति प्रमाणपत्र की जांच शुरू

0
8

भोपाल। मध्य प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी रघुवीर सिंह मीना की विधिक अड़चनें बढ़ने वाली हैं। पुलिस मुख्यालय (PHQ), भोपाल के कड़े निर्देशों के अनुपालन में उनके विरुद्ध गंभीर धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। उन पर कूटरचित एवं असत्य जाति प्रमाण पत्रों के अनुचित प्रयोग के आधार पर शासकीय सेवा में उप पुलिस अधीक्षक (DSP) बनने तथा तत्पश्चात त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लड़ने का आरोप है।

पूर्व IPS अधिकारी पर लगे संगीन आरोप

पूर्व पुलिस अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया। तत्पश्चात मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सम्मिलित होकर उप पुलिस अधीक्षक (DSP) का पद प्राप्त किया। शिकायत के अनुसार, इससे पूर्व उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय शिक्षक के रूप में भी सेवाएं दी थीं।

इसके अतिरिक्त उन पर आरोप है कि वर्ष 2022 में उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग हेतु आरक्षित सीट से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा। मीना के विरुद्ध कूटरचना (धोखाधड़ी), आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न दंडात्मक धाराओं में मामला पंजीकृत किया गया है।

प्रशासनिक सेवा से राष्ट्रपति पदक तक का सफर

रघुवीर सिंह मीना मूलतः गुना जिले के चाचौड़ा तहसील अंतर्गत अजगरी गांव के निवासी हैं। उन्होंने सर्वप्रथम ओबीसी प्रमाण पत्र के माध्यम से शासकीय शिक्षक की नौकरी प्राप्त की थी। वर्ष 1984 में उन्होंने विदिशा जिले का मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाया और तदोपरांत एसटी वर्ग का प्रमाण पत्र बनवाकर पीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 2001 में उन्हें आईपीएस (IPS) कैडर में पदोन्नत किया गया। सेवा अवधि में वे बड़वानी एवं आगर-मालवा जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) तथा रीवा व गुना में कमांडेंट के पदों पर पदस्थ रहे। उन्हें वर्ष 2005 में वीरता पदक एवं 2009 में सराहनीय सेवा हेतु राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त होने के उपरांत उन्होंने गुना जिला पंचायत के वार्ड-16 से चुनाव जीता था।

पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं राजनीतिक जुड़ाव

रघुवीर सिंह मीना की पत्नी ममता मीना वर्ष 2013 से 2018 के मध्य चाचौड़ा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक रह चुकी हैं। इससे पूर्व वे वर्ष 2000 से 2005 तक गुना जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रहीं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें दल द्वारा प्रत्याशी बनाया गया था।

जांच समिति ने निरस्त किया था प्रमाण पत्र

राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी ने वर्ष 2016 में इस मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। तत्पश्चात यह प्रकरण राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के समक्ष प्रस्तुत हुआ। समिति ने ऐतिहासिक राजस्व अभिलेखों का गहन परीक्षण करने के उपरांत पूर्व अधिकारी के विवादित जाति प्रमाण पत्र को अमान्य एवं निरस्त घोषित कर दिया था, जिसके आधार पर अब दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।