केकड़ी। राजस्थान के केकड़ी नगर पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) की सीट पर आसीन होने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं कांग्रेस दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के मध्य तीव्र जोड़-तोड़ जारी है। दोनों ही दलों द्वारा अपना बोर्ड बनाने के दावे किए जा रहे हैं। फिलहाल विजयी पार्षद बाड़ेबंदी में हैं, परंतु स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि राजनीतिक दिग्गजों द्वारा पार्षदों के परिजनों से संपर्क साधकर समर्थन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मतदान के दौरान संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
21वें निर्णायक मत को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
40 वार्डों वाली नगर पालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा 21 है। चुनाव परिणामों के अनुसार कांग्रेस के पास 20, भाजपा के पास 18 तथा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के पास 2 सीटें हैं। स्पष्ट बहुमत किसी भी दल के पास न होने के कारण संपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम उस एक निर्णायक मत के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गया है, जो किसी भी खेमे के सिर जीत का सेहरा सजा सकता है।
कांग्रेस को एक तथा भाजपा को तीन अतिरिक्त मतों की आवश्यकता
अध्यक्ष पद हेतु कांग्रेस ने अनिल मित्तल तथा भाजपा ने विनीत चोरड़िया को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस को बहुमत हेतु मात्र एक अतिरिक्त मत की दरकार है, जबकि भाजपा को तीन पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। गुप्त सूत्रों के अनुसार, बाड़ेबंदी के मध्य रणनीतिकार गोपनीय तरीके से पार्षदों के परिजनों के माध्यम से समर्थन हासिल करने की जुगत में लगे हुए हैं, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को बल मिल रहा है।
आरएलपी के रुख पर टिकी नजरें
दो सीटों पर विजय प्राप्त कर निर्णायक भूमिका में आई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने यद्यपि आधिकारिक घोषणा नहीं की है, परंतु आरएलपी पार्षद राजेंद्र चौधरी नामांकन के दौरान तथा हालिया तस्वीरों में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल मित्तल के साथ दृश्यमान हुए हैं। यदि आरएलपी के पार्षद कांग्रेस के पक्ष में मतदान करते हैं, तो कांग्रेस का आंकड़ा 21 तक पहुंच सकता है।
ऐतिहासिक आंकड़ों में क्रॉस वोटिंग का इतिहास
विगत वर्ष 2021 के पालिका चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग का प्रकरण देखा गया था। उस समय कांग्रेस के 21, भाजपा के 17 तथा निर्दलीय 2 पार्षद चुनकर आए थे, किंतु अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को 24 मत प्राप्त हुए थे। वर्तमान चुनाव में किसी भी दल के पास स्वयं के बल पर स्पष्ट बहुमत न होने से प्रत्येक वोट का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है।
दोनों दलों के प्रमुख नेताओं ने झोंकी ताकत
चुनाव से पूर्व पूर्व पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल भाजपा छोड़ कांग्रेस में सम्मिलित हुए थे और उन्होंने वार्ड 25 से जीत दर्ज की। कांग्रेस के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा तथा भाजपा की ओर से क्षेत्रीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने चुनाव कमान संभाली। भाजपा प्रत्याशी विनीत चोरड़िया ने वार्ड 37 से पहली बार विजय प्राप्त की है। अब संपूर्ण क्षेत्र की दृष्टि 21 सितंबर को होने वाले अध्यक्ष पद के मतदान पर टिकी हुई है।









