लैब टेक्नीशियन ने बिना टेस्ट के जारी कर दी रिपोर्ट, निलंबित

0
9

नीमच। जिले के जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं की सेहत के साथ किए जा रहे गंभीर खिलवाड़ पर जिला प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। पैथोलॉजी लैब में बिना यूरिन सैंपल की जांच किए ही फर्जी रिपोर्ट थमा देने के सनसनीखेज मामले में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने सख्त रुख अपनाया है। उनके कड़े आदेशों के बाद लापरवाही और फर्जीवाड़े के दोषी लैब टेक्नीशियन अंकित शर्मा और लीना सिंघाडिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

मातृत्व सुरक्षा शिविर में चल रहा था जांच का बड़ा खेल

जीरन सीएचसी में 25 मई को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर का मकसद गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना था, लेकिन इसके उलट वहां जांच के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा था। पालसोड़ा निवासी रीना राठौर के पति अनिल राठौर ने जब इस अंधेरगर्दी के खिलाफ आवाज उठाई और मामला उजागर हुआ, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। जांच में साफ हुआ कि लैब स्टाफ द्वारा यूरिन, ब्लड शुगर और एल्बुमिन की वास्तविक जांच किए बिना ही मनगढ़ंत रिपोर्ट बांटी जा रही थी।

जच्चा-बच्चा दोनों की जान के लिए बड़ा खतरा थी यह लापरवाही

प्रशासनिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि लैब में सरकारी सप्लाई की यूरिन एल्बुमिन स्ट्रिप का इस्तेमाल तक नहीं किया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह महज एक चूक नहीं बल्कि मां और गर्भस्थ शिशु की जिंदगी से सीधा खिलवाड़ था। यदि यूरिन और ब्लड की सही जांच न हो, तो गर्भवती महिलाओं में होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज, हाइपरटेंशन, प्री-एक्लेमप्सिया और एक्लेमप्सिया जैसी साइलेंट और जानलेवा बीमारियों का समय पर पता नहीं चल पाता। इस घोर लापरवाही के कारण प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत तक का जोखिम बना रहता है।

जागरूक पति ने वीडियो बनाकर खोला फर्जीवाड़े का राज

इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश अनिल राठौर नाम के एक जागरूक नागरिक की सूझबूझ से हुआ। अनिल अपनी गर्भवती पत्नी की जांच कराने शिविर में पहुंचे थे। दोपहर 12:48 बजे उनकी पत्नी का यूरिन सैंपल लिया गया और बिना किसी जांच के ठीक 8 मिनट बाद यानी 12:56 बजे उन्हें फाइनल रिपोर्ट थमा दी गई। अनिल ने जब यह गड़बड़ी देखी, तो उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से वहां का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। टेबल पर 11 और सैंपल रखे थे। जैसे ही लैब टेक्नीशियन को भनक लगी कि उनकी करतूत कैमरे में रिकॉर्ड हो रही है, उन्होंने घबराहट में आनन-फानन में सैंपलों के अंदर स्ट्रिप्स डालना शुरू कर दिया।

'खून देखकर यूरिन जांच लेते हैं'—पकड़े जाने पर टेक्नीशियन का अजीब दावा

जब अनिल ने मोबाइल रिकॉर्डिंग जारी रखते हुए इस फर्जीवाड़े पर सवाल किया, तो लैब टेक्नीशियन ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा, "हम ब्लड देखकर ही यूरिन की जांच का अंदाजा लगा लेते हैं।" जब अनिल ने कड़े प्रतिप्रश्न किए तो आरोपी टेक्नीशियन का मुंह सूख गया और वह बिना कुछ बोले वहां से खिसक गया। इसके बाद अनिल ने मामले की लिखित शिकायत और वीडियो साक्ष्य ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) को सौंपे। बीएमओ डॉ. विजय भारती की जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने दोनों कर्मचारियों को सस्पेंड कर उनका मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिंगोली तय कर दिया है।

सिस्टम और दिखावे के निरीक्षण पर खड़े हुए बड़े सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम जनता का पूछना है कि जब एक आम नागरिक इस तरह का फर्जीवाड़ा पकड़ सकता है, तो समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करने वाले बड़े अधिकारियों को यह सब क्यों दिखाई नहीं देता? इस बात की क्या गारंटी है कि नीमच जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में इस तरह से मरीजों की जिंदगी के साथ सौदा नहीं हो रहा होगा? यह घटना सरकारी दावों की पोल खोलती है और स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर एक बड़ा धब्बा है।