भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) बच्चों की संख्या अब शून्य प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2002-03 में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 15 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025-26 में घटकर शून्य पर आ गई। वहीं, इसी अवधि में माध्यमिक स्तर की ड्रॉपआउट दर भी 24.70% से घटकर 6.2% रह गई है।
गृह संपर्क अभियान से 3 लाख बच्चे लौटे स्कूल
स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे 'गृह संपर्क अभियान' के तहत अब तक 3 लाख से अधिक बच्चों को पुनः स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है। इसके अलावा, वर्ष 2004-05 से लागू साइकिल योजना से अब तक 1 करोड़ से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं, जिस पर सरकार ₹2,942 करोड़ से अधिक खर्च कर चुकी है।
स्कूटी और लैपटॉप योजना का मिल रहा लाभ
मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए 'मुख्यमंत्री स्कूटी योजना' के तहत अब तक 23,487 मेधावियों को ई-स्कूटी व मोटराइज्ड स्कूटी के लिए राशि दी गई है। वहीं, हायर सेकेंडरी में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले 6.47 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रोत्साहन राशि के रूप में ₹25,000 प्रति छात्र दिए जा चुके हैं।
शिक्षा बजट में 4 गुना वृद्धि और वोकेशनल कोर्स
प्रदेश का शिक्षा बजट वर्ष 2002-03 के ₹2,456 करोड़ से लगभग चार गुना बढ़कर वर्ष 2026-27 में ₹9,623.12 करोड़ हो गया है। मध्य प्रदेश देश में सर्वाधिक 3,367 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल कोर्स) दे रहा है, जिसमें 5.98 लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। साथ ही प्रदेश में 799 'पीएमश्री स्कूल' और 368 'सांदीपनि विद्यालय' संचालित किए जा रहे हैं।
छात्राओं को डीबीटी और स्मार्ट क्लासेस पर जोर
कक्षा 7वीं से 12वीं की लगभग 19 लाख छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन के लिए प्रतिवर्ष ₹300 सीधे बैंक खाते में भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा, कक्षा 1 से 8 तक के 60 लाख बच्चों को गणवेश के लिए ₹600 सालाना दिए जाते हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 7,405 हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस और 3,706 आईसीटी लैब पूरी तरह से कार्यशील हैं।









