भोपाल. भोपाल शहर में इलेक्ट्रॉनिक्स कचरे (ई-कचरा) के असुरक्षित निस्तारण, खुले में जलाने और अनधिकृत इकाइयों द्वारा इसके अवैध प्रसंस्करण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की तथ्यात्मक स्थिति की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन करते हुए चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
ई-कचरा जलाने से वायु, जल और मिट्टी में जहरीले तत्वों का खतरा
नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने माना कि भोपाल में उत्पन्न होने वाले ई-कचरे का एक बड़ा हिस्सा अवैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जा रहा है। पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों को खुले में तोड़ने या जलाने से सीसा (Lead), पारा (Mercury), कैडमियम और क्रोमियम जैसी बेहद जहरीली भारी धातुएं पर्यावरण में घुल रही हैं। इससे हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषित होने के साथ-साथ जनस्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभावों की आशंका व्यक्त की गई है।
मध्य प्रदेश में ई-कचरे का उत्पादन 10 गुना बढ़ा
याचिका में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में ई-कचरे का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। राज्य में वर्ष 2019 में जहां केवल 500 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न होता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 5,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष तक पहुंच गया है। भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में भी ई-कचरे का प्रबंधन एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
संयुक्त जांच समिति का गठन, कई विभागों से मांगा जवाब
एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, नगर निगम आयुक्त तथा पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभागों के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किए हैं।
जांच समिति के सदस्य: मामले की जमीनी जांच के लिए गठित समिति में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
अगली सुनवाई: समिति को ई-कचरे के अवैधानिक प्रसंस्करण और पर्यावरण क्षति की पूरी रिपोर्ट ई-फाइलिंग के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।









