इंदौर। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों इंदौर और भोपाल में व्यापारियों द्वारा आज ‘नो यूपीआई डे’ मनाया जा रहा है। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज का पुरजोर विरोध करना है। व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि तय सीमा से अधिक के भुगतान के लिए अब ग्राहकों को नकद (कैश) देना होगा।
काले कपड़े से ढंके स्कैनर और साउंड बॉक्स
व्यापारिक राजधानी इंदौर में स्थानीय कारोबारियों ने आज यूपीआई भुगतान स्वीकार न करने का निर्णय लिया है। इसके तहत दुकानों पर लगे क्यूआर कोड स्कैनर और पेमेंट साउंड बॉक्स को काले कपड़ों से ढंक दिया गया है। इंदौर के रीगल चौराहे पर टाइल्स और सेनेटरी वेयर से जुड़े 150 से अधिक व्यापारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ‘यूपीआई लूट नहीं धंधा है’ और ‘डिजिटल लेन-देन का धंधा बंद करो’ जैसी नारेबाज़ी भी की गई। भोपाल में भी व्यापारियों ने इसी तर्ज पर विरोध दर्ज कराने की पूरी तैयारी की है।
क्या है व्यापारियों की नाराजगी की मुख्य वजह?
केंद्र सरकार द्वारा 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इस अतिरिक्त शुल्क का वित्तीय भार व्यापारियों को वहन करना होगा, हालांकि ग्राहकों को इससे मुक्त रखा गया है। व्यापारी संघों का कहना है कि यह शुल्क उनके मुनाफे पर सीधा असर डालेगा और इससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
पेट्रोल पंप संचालकों ने भी किया ऐलान
इस विरोध की कड़ी में मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी बड़ा कदम उठाया है। एसोसिएशन ने घोषणा की है कि 16 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक का ईंधन भुगतान यूपीआई के जरिए नहीं लिया जाएगा, क्योंकि सरकार द्वारा यह चार्ज 15 अक्टूबर से प्रभावी किया जा रहा है।
नियमों से जुड़ी खास बातें
आम नागरिकों के बीच होने वाले व्यक्तिगत पैसों के लेन-देन पर किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं लगेगा।
2000 रुपये से अधिक के व्यावसायिक यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों को 0.4% MDR देना होगा।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन (पेट्रोल-डीजल) जैसी विशेष श्रेणियों में 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर फ्लैट 5 रुपये का शुल्क तय किया गया है।









