रीवा. जिले के सिरमौर इलाके में प्रस्तावित करीब अठ्ठाइस हजार करोड़ रुपए के विशाल परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है और विरोध प्रदर्शन गांवों की बैठकों तक पहुंच गया है। स्थिति तब और गर्मा गई जब परियोजना के सिलसिले में जमीन की जांच और सर्वे करने के लिए पहुंची ड्रिलिंग मशीनों को ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए वापस लौटा दिया। लोगों का साफ तौर पर कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने क्षेत्र में परमाणु प्लांट नहीं लगने देंगे।
लाड़ली बहना और राशन रोकने की बात, पर जमीन नहीं देंगे
सर्वे और जांच की प्रक्रिया शुरू होते ही ग्रामीणों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनता का कहना है कि सरकार चाहे तो लाड़ली बहना योजना की राशि बंद कर दे या मिलने वाला मुफ्त राशन रोक दे, लेकिन गांव की उपजाऊ जमीन पर परमाणु संयंत्र लगाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। विरोध का सिलसिला तेज होते हुए सिरमौर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरई कला गांव की ग्रामसभा ने भी इस महत्वकांक्षी परियोजना के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पूरी तरह खारिज कर दिया है।
पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों पर मंडराता खतरा
ग्रामीणों का मानना है कि यह लड़ाई केवल जमीन छिनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी और घातक परिणाम हैं। परमाणु परियोजना की वजह से भविष्य में पानी के स्रोतों, आसपास के पर्यावरण और उनकी आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर जो बुरा असर पड़ेगा, उसे लेकर लोगों में गहरी चिंता और डर बना हुआ है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए ग्रामीण इस परियोजना का लगातार और डटकर विरोध कर रहे हैं।









