तेजस्वी के इलाके में मुश्किल में लोग, नाव जब्त होने के बाद जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे ग्रामीण

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वैशाली। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद में हुए दर्दनाक नाव हादसे में 13 मासूम बच्चों की मौत के बाद भले ही प्रशासन ने जर्जर और जोखिम भरी नाव को जब्त कर लिया हो, लेकिन धरातल पर व्यवस्थाओं की हकीकत अब भी बदहाल बनी हुई है। हादसे के बाद लोगों की सुरक्षा के नाम पर नाव तो हटा ली गई, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों के पास नदी पार करने के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं कराया गया है। नतीजतन, आज भी कई इलाकों के लोग अपनी जान हथेली पर रखकर खतरनाक तरीके से आवागमन करने को मजबूर हैं।

रस्सी के सहारे नदी पार करने को विवश ग्रामीण

इसी पंचायत के रामपुर नौसहन गांव के वार्ड नंबर एक की तस्वीर प्रशासनिक दावों की पोल खोलती है। यहां के निवासियों के पास नदी पार करने के लिए कोई नाव या अन्य सुरक्षित साधन नहीं है। रामपुर भट्टी टोला के पास से गुजरने वाली इस नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों ने दोनों किनारों पर एक रस्सी बांध रखी है, जिसे पकड़कर लोग किसी तरह एक छोर से दूसरे छोर तक जाते हैं। इस नदी में पानी कम होने के बावजूद गहराई 10 फीट से अधिक है, जहां जरा सी भी चूक किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। नदी के उस पार बसे करीब 20 घरों के लोगों को अपनी मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए हर दिन इस जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है।

बाढ़ के दौरान भी नहीं मिली कोई मदद

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस साल राघोपुर प्रखंड में दो बार भीषण बाढ़ आई, लेकिन उनके इस इलाके के लिए प्रशासन की ओर से एक भी नाव उपलब्ध नहीं कराई गई। बाढ़ के समय जब पानी करीब 20 दिनों तक जमा रहा, तब भी प्रशासनिक अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों में से कोई सुध लेने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों के सामने समस्या केवल नदी पार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इलाके में राशन की दुकान न होने के कारण उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों और राशन के लिए भी कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

हादसों का पुराना इतिहास और लंबा वैकल्पिक रास्ता

स्थानीय निवासी विनोद राय ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि करीब दो साल पहले इसी पानी में डूबने से उनके जवान बेटे राम शंकर कुमार की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि हर साल बाढ़ और जलभराव के दौरान यहां इस तरह के खतरे बने रहते हैं। हालांकि एक अन्य लंबा रास्ता लोहे के पुल से होकर भी जाता है, लेकिन वहां हमेशा घुटने भर कीचड़ भरा रहता है, जिससे गुजरना बेहद मुश्किल होता है। यही वजह है कि ग्रामीण मजबूरी में रस्सी के सहारे नदी पार करने वाला खतरनाक रास्ता चुनते हैं।

13 बच्चों की मौत के बाद जर्जर नाव को जब्त करना एक प्रशासनिक कार्रवाई जरूर थी, लेकिन उसी पंचायत के दूसरे वार्ड में रहने वाले इन परिवारों के लिए सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था न होना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी अन्य बड़े हादसे के इंतजार में है, या फिर जल्द ही इन ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए कोई पक्का पुल या सुरक्षित नाव उपलब्ध कराई जाएगी?