अनंत सिंह पर प्रशांत किशोर का बयान, अनुज-नीरज की लड़ाई पर भी रखी राय

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बाढ़ (पटना)। बिहार में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर जनसुराज पार्टी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार देर शाम पटना जिले के बाढ़ शहर स्थित एएनएस मोड़ के पास जनसुराज की एक विशाल चुनावी सभा का आयोजन किया गया। यह क्षेत्र स्थानीय विधायक अनंत सिंह का गढ़ माना जाता है। इस सभा में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर के साथ-साथ पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के दोनों आधिकारिक प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह और डॉ. दिव्या ज्योति भी विशेष रूप से मौजूद रहे, जिन्हें सुनने के लिए कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।

पोस्टर से दूरी और प्रशांत किशोर का बयान

इस सभा के दौरान एक बात सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी रही कि मंच पर लगे पोस्टरों से विधायक अनंत सिंह की तस्वीरें नदारद थीं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर को छोड़कर मंच पर मौजूद दोनों प्रत्याशियों समेत किसी भी अन्य वक्ता ने अपने संबोधन में अनंत सिंह का सीधा नाम नहीं लिया। हालांकि, प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में खुले तौर पर अनंत सिंह का जिक्र करते हुए चुनाव में उम्मीदवारों के समर्थन को लेकर अपनी बेबाक बात रखी।

प्रशांत किशोर ने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के इस चुनाव में मुख्य मुकाबला डॉ. अनुज सिंह और नीरज कुमार के बीच है। उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि यदि जनता को यह लगता है कि नीरज कुमार के मुकाबले 'अनंत भाई' बेहतर हैं और सम्राट चौधरी के मुकाबले प्रशांत किशोर अच्छे हैं, तो उन्हें पूरी समझदारी के साथ उसी आधार पर अपना मतदान करना चाहिए।

जनता की कार्यशैली और राजनीति पर तीखा प्रहार

सभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने चुनाव के वक्त जनता के रुख पर करारा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले और चुनाव के बाद लोग पुस्तकालयों, वित्त रहित शिक्षण संस्थानों और जनता से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर बड़ी समझदारी से चर्चा करते हैं, लेकिन जैसे ही वोट डालने का दिन आता है, लोगों का विवेक काम करना बंद कर देता है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी लोगों को 'हिंदू खतरे में हैं' कहकर डराती है, जबकि लालू यादव के नाम पर 'जंगलराज' लौटने का डर दिखाया जाता है, जिसके चलते मुस्लिम मतदाता विवश होकर लालू यादव को वोट देते हैं। उन्होंने अपने व्यापक जनसंपर्क अभियान का हवाला देते हुए कहा कि वे करीब पांच हजार गांवों में गए और रात्रि प्रवास किया, जहां लोगों ने समर्थन का वादा तो किया लेकिन मतदान के दिन चंद रुपयों में बिक जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी जाति का नेता सिर्फ वोट की राजनीति करता है और अपनी ही जाति के उत्थान के लिए कोई ठोस कार्य नहीं करता।

डॉ. अनुज सिंह का नीरज कुमार पर हमला

जनसुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह ने अपने संबोधन में प्रतिद्वंद्वी नेता नीरज कुमार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने पिछले 18 वर्षों के कार्यकाल में क्षेत्र के लिए कोई धरातलीय काम नहीं किया है, बल्कि वे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और राजद प्रमुख लालू यादव सहित पक्ष-विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं को सिर्फ गाली देने का काम करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर स्नातक मतदाता एक ऐसे व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि क्यों चुनेंगे जिसकी पहचान सिर्फ बयानबाजी और अभद्र भाषा तक सीमित है।

अनंत सिंह के समर्थन के सवाल पर डॉ. अनुज ने कहा कि वे जनसुराज के अधिकृत प्रत्याशी हैं, लेकिन यदि किसी अन्य दल के वरिष्ठ नेता या लोकप्रिय विधायक उन्हें अपना आशीर्वाद देते हैं, तो यह स्वागत योग्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशांत किशोर और अनंत सिंह अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं में हैं, इसलिए उनके एक साथ मंच साझा करने की कोई पूर्व योजना या बातचीत नहीं थी, लेकिन जो भी नेता या समर्थक उनके साथ हैं, वे उन सबका आभार व्यक्त करते हैं।

डॉ. दिव्या ज्योति ने उठाए शिक्षकों और विश्वविद्यालयों के अधिकार के मुद्दे

चुनावी सभा को संबोधित करते हुए जनसुराज की दूसरी प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति ने शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वे सभी शिक्षकों को एक मंच पर एकजुट करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और इसी उद्देश्य से उन्होंने संघर्ष समिति का गठन किया है।

डॉ. दिव्या ने अपनी प्राथमिकताओं को गिनाते हुए कहा कि शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का पूरा लाभ दिलाना, शिक्षण संस्थानों को नियमित करवाना और उनके लंबित अनुदान का समय पर भुगतान कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह नया अधिनियम महाविद्यालयों की स्वायत्तता को समाप्त करने वाला काला कानून है, जिसका जनसुराज पार्टी पुरजोर विरोध करती है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों और तमाम महाविद्यालयों की खोई हुई स्वायत्तता को वापस दिलाने के लिए पार्टी सड़कों से लेकर सदन तक निर्णायक लड़ाई लड़ेगी।