भारी बारिश से यूपी में हालात बिगड़े, एक हजार से ज्यादा घर ढहे; 56 की मौत

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नई दिल्ली। मॉनसून की विदाई से पहले देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और झमाझम बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में बारिश, मकान ढहने और पेड़ गिरने की घटनाओं में 56 लोगों की जान चली गई है और एक हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालांकि, पिछले तीन दिनों की भारी मानसूनी बौछारों के बाद रविवार से यूपी के लोगों को कुछ राहत मिली है और मौसम विभाग के मुताबिक अब वहां अधिक बारिश की संभावना नहीं है।

विभिन्न राज्यों में मौसम का हाल और नए सिस्टम

मौसम विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ के ऊपर बना डिप्रेशन अब कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है, जबकि बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम सक्रिय है:

  • पूर्वी और मध्य भारत: पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश में मौसम का मिजाज फिर बदल सकता है। इसके अलावा मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ऊपर भी कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है, जिससे इन राज्यों में बारिश की संभावना बनी हुई है।

  • पहाड़ी राज्य: उत्तराखंड में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ और जलभराव जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने टिहरी गढ़वाल, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और देहरादून में भारी बारिश के साथ भूस्खलन (Landslide) का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में भी मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, जम्मू, पहलगाम और बारामूला में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

दिल्ली और बिहार का मौसम

  • दिल्ली-एनसीआर: 28 सितंबर को दिल्ली और आसपास के इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। शाम के समय कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 29 सितंबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है, लेकिन 30 सितंबर से एक बार फिर बारिश की गतिविधियां जोर पकड़ सकती हैं।

  • बिहार: राज्य में 28 सितंबर को हल्की बारिश की संभावना है, जबकि 1 अक्टूबर तक तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि अभी कोई भारी बारिश का रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण किसानों को पहले ही भारी नुकसान उठाना पड़ा है।