मुकुंदगढ़: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मुकुंदगढ़ कस्बे में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो ई-मित्र और कस्टमर सर्विस पॉइंट की आड़ में चलाया जा रहा था। पुलिस ने आम नागरिकों के दस्तावेजों और बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों की मदद करने वाले मुख्य आरोपी को धर दबोचा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी के 16 अलग-अलग बैंक खातों के जरिए 40 करोड़ रुपये से अधिक का संदेहास्पद लेनदेन किया गया है।
अंकित कुमार नामक आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में नकदी और उपकरण बरामद
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए कसेरू गांव निवासी 31 वर्षीय अंकित कुमार को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान उसके पास से 2.68 लाख रुपये नकद, दो लैपटॉप, एक मोबाइल, 17 एटीएम कार्ड, 92 बैंक पासबुक, सात चेकबुक, बड़ी संख्या में पहचान पत्र और एक माइक्रो एटीएम मशीन जब्त की गई है। यह पूरी कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देशन में गठित विशेष संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दी गई है।
शिकायत के आधार पर हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा, बिना जानकारी के खोले गए बैंक खाते
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मुकुंदगढ़ निवासी अक्षय ने 4 अगस्त 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, वह अप्रैल 2025 में अपनी एसएसओ आईडी बनवाने के लिए आरोपी के ई-मित्र केंद्र गया था, जहां उससे कई बार बायोमेट्रिक अंगूठा लगवाया गया और मोबाइल पर आए बैंक ट्रांजैक्शन के मैसेज खुद ही डिलीट कर दिए गए। बाद में जांच में पता चला कि उसकी जानकारी के बिना ही उसके नाम से बैंक खाता खोलकर उसका इस्तेमाल ठगी में किया गया।
देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें, गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश जारी
पुलिस की विस्तृत जांच में यह बात सामने आई है कि बरामद की गई 92 पासबुकों से जुड़े खातों के खिलाफ देश के कई राज्यों में लगभग 16 साइबर शिकायतें पहले से दर्ज हैं। आरोपी अपने सेंटर के जरिए ठगी की अवैध रकम मंगवाता था और कमीशन काटकर नकद पैसे उपलब्ध कराता था। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क का दायरा खंगालने में जुटी हुई है।









