सिद्धार्थनगर | उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में रील बनाने के जुनून ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया, जबकि दो अन्य बच्चे मौत के मुंह से बाल-बाल बच निकले। काशीराम आवास कॉलोनी में स्थित एक जर्जर पानी की टंकी पर फंसे दो बच्चों को रविवार सुबह भारतीय वायुसेना के MI-17 हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया। रेस्क्यू के बाद दोनों को उपचार के लिए गोरखपुर स्थित एयरफोर्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रील के चक्कर में टूटा सीढ़ियों का साथ
हादसा शनिवार दोपहर करीब 3 बजे हुआ, जब 12 वर्षीय बाले अपने चार दोस्तों (गोलू, शनि, कल्लू और पवन) के साथ 60 फीट ऊंची टंकी पर मोबाइल रील बनाने चढ़ा था। नीचे उतरते समय अचानक जर्जर लोहे की सीढ़ियां ढह गईं। इस दौरान तीन बच्चे—बाले, शनि और गोलू—सीधे नीचे गिर पड़े। बाले की मलबे में दबने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शनि और गोलू गंभीर रूप से घायल हो गए। इस बीच, कल्लू और पवन ने सूझबूझ दिखाई और रॉड पकड़कर वापस ऊपर टंकी पर चढ़ गए।
दलदल बना बाधा, सेना ने संभाली कमान
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन टंकी के चारों ओर फैले दलदल ने हाइड्रोलिक क्रेन का रास्ता रोक दिया। बच्चों तक पहुँचने के लिए प्रशासन ने रातों-रात 150 मीटर की कच्ची सड़क बनाने का काम शुरू किया। हालांकि, रात 3 बजे हुई मूसलाधार बारिश ने इस प्रयास पर पानी फेर दिया। बिगड़ते हालात देख प्रशासन ने सेना से संपर्क साधा।
सुबह 5:20 पर शुरू हुआ 'ऑपरेशन लाइफ'
रविवार की पहली किरण के साथ ही वायुसेना का MI-17 हेलीकॉप्टर आसमान में मँडराने लगा। करीब 16 घंटे तक मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे दोनों बच्चों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया गया। मौके पर मौजूद डीएम शिवशरणप्पा जीएन और एसएसपी अभिषेक महाजन सहित सैकड़ों लोगों ने राहत की सांस ली।
घटना का दुखद पहलू
1 की मौत: हादसे में बाले (12 वर्ष) की जान चली गई।
2 गंभीर: शनि और गोलू का अस्पताल में इलाज जारी है।
अटकी रही जान: कल्लू और पवन को सुरक्षित बचाने के लिए रस्सी से उन तक खाना-पानी पहुँचाया गया था।








