बाइक से SUV टकराते ही चली थी गोली? चश्मदीद ने बयां की घटना की सच्चाई

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लखनऊ। चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद विवाद और असंतोष गहरा गया है। सत्र न्यायालय ने मुख्य आरोपी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है, जबकि घटना के समय मौके पर मौजूद दूसरे सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इस फैसले पर मृतक की पत्नी कल्पना तिवारी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया है और न्याय की लड़ाई को ऊपरी अदालत में ले जाने का ऐलान किया है।

न्यायालय के फैसले से असंतुष्ट परिवार जाएगा ऊपरी अदालत

अदालत के फैसले के बाद अपने भाई के साथ कोर्ट परिसर से बाहर निकलीं कल्पना तिवारी ने बेहद मायूसी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद भी उन्हें उचित न्याय नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रशांत गोली चला रहा था, तब संदीप ने उसे रोकने का कोई प्रयास क्यों नहीं किया। कल्पना ने स्पष्ट किया कि जब तक आरोपियों को कठोरतम सजा नहीं मिल जाती, तब तक वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी।

चश्मदीद की जुबानी: जान बचाने के प्रयास में हुई थी घटना

मामले की मुख्य चश्मदीद सना ने अपने बयानों में पूरी घटना का विवरण दिया था। उनके अनुसार, विवेक तिवारी उन्हें घर छोड़ने जा रहे थे, तभी दो सिपाहियों ने जबरन गाड़ी रोकने का प्रयास किया और वाहन पर डंडा मारा। जब विवेक ने किनारे से गाड़ी निकालने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों की बाइक उससे टकरा गई। इसके तुरंत बाद बेहद करीब से विवेक पर गोली चला दी गई। गोली लगने के बावजूद विवेक जान बचाने के लिए वाहन चलाते रहे, जो आगे जाकर खंभे से टकरा गया।

बिना शस्त्र प्रशिक्षण सिपाही को पिस्तौल देने पर उठे सवाल

मामले की मजिस्ट्रीयल जांच रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ था कि मुख्य आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को बिना किसी शस्त्र प्रशिक्षण (आर्म्स ट्रेनिंग) के ही पिस्तौल जारी कर दी गई थी। तत्कालीन अपर नगर मजिस्ट्रेट की 15 पन्नों की जांच रिपोर्ट में तत्कालीन परिस्थितियों, चश्मदीद के बयानों और पुलिसकर्मियों की घोर लापरवाही का विस्तृत उल्लेख किया गया था।

एसआईटी जांच और लंबी सुनवाई के बाद आया फैसला

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने निष्पक्ष पड़ताल के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने अब प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराया है तथा संदीप को बरी करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद से ही पुलिस प्रशासन और पीड़ित पक्ष के बीच कानूनी खींचतान का नया अध्याय शुरू हो गया है।