बीजिंग। एशियाई महाद्वीप के दो सबसे बड़े पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को लेकर चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने बेहद सकारात्मक रुख व्यक्त किया है। चीनी विदेश मंत्रालय का मानना है कि बीजिंग और नई दिल्ली को इस बुनियादी रणनीतिक सोच पर मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए कि दोनों देश एक-दूसरे के धुर विरोधी या प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगात्मक साझेदार हैं। इसके साथ ही, दोनों महाशक्तियों का तीव्र विकास एक-दूसरे के लिए नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलता है, न कि किसी प्रकार की सुरक्षा चुनौती या खतरा पैदा करता है। चीनी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता लिन जियान ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया ब्रीफिंग के दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर यह महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी। यह रणनीतिक बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की उस हालिया टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने वैश्विक मंच पर रूस के भारत और चीन दोनों के साथ बेहद घनिष्ठ और मजबूत संबंधों का विशेष उल्लेख किया था। चीनी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जमीनी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में और स्थिर बनी हुई है तथा दोनों देशों के सैन्य व कूटनीतिक अधिकारियों के बीच बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं।
रणनीतिक परिप्रेक्ष्य से आपसी मतभेदों को सुलझाने और सहयोग बढ़ाने पर जोर
अंतरराष्ट्रीय प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए चीनी प्रवक्ता लिन जियान ने दोनों विकासशील देशों के नीति-निर्माताओं को पुरानी कड़वाहट भुलाकर आगे बढ़ने की वसीहत दी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे आपसी द्विपक्षीय संबंधों को तात्कालिक विवादों के बजाय रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य (लॉन्ग टर्म विजन) से देखें और उनका बेहतर प्रबंधन करें। बीजिंग का मानना है कि सीमा गतिरोध को पीछे छोड़कर दोनों देशों को व्यापारिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर आपसी विश्वास का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक मतभेदों को उचित और शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से संभाला जाना चाहिए ताकि दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादियों वाले देशों के मध्य संबंधों के सुचारू, सुदृढ़ और निरंतर विकास को एक नई गति प्रदान की जा सके।
भारत-पाकिस्तान विवाद पर चीन का नजरिया और त्रिपक्षीय वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्व
इस्लामाबाद और बीजिंग की सदाबहार दोस्ती को लेकर नई दिल्ली द्वारा समय-समय पर जताई जाने वाली गंभीर चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी प्रवक्ता ने एक संतुलित रुख अपनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से यह चाहता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों पड़ोसी देश किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के बिना आपसी संवाद, कूटनीतिक विमर्श और द्विपक्षीय परामर्श के माध्यम से अपने सभी जलते विवादों को ठीक से सुलझाएं, ताकि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति, सुरक्षा और स्थिरता का माहौल कायम रह सके। वहीं, भारत, चीन और रूस के त्रिपक्षीय गठजोड़ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने तीनों देशों को दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इन तीनों राजधानियों के बीच मैत्रीपूर्ण और मजबूत संबंध बने रहना न केवल उनके अपने राष्ट्रीय हितों के अनुकूल है, बल्कि वैश्विक शांति के संतुलन के लिए भी एक अनिवार्य आवश्यकता है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन द्वारा भारतीय और चीनी नेतृत्व की सराहना और हस्तक्षेप न करने की सलाह
इससे पूर्व, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में दुनिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ एक अनौपचारिक और विस्तृत संवाद के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्यशैली और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जमकर तारीफ की थी। पुतिन ने स्पष्ट किया था कि मॉस्को की नई दिल्ली और बीजिंग के साथ चली आ रही दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी पूरी तरह से स्वाभाविक और एक-दूसरे से स्वतंत्र है। भारतीय मीडिया नेतृत्व द्वारा पूछे गए एक सीधे सवाल का जवाब देते हुए पुतिन ने दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत और चीन के बीच संबंध अत्यंत संवेदनशील, नाजुक और बहुआयामी हैं, इसलिए किसी भी बाहरी या तीसरे देश को इनके आपसी मामलों में टांग अड़ाने या हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग इतने सक्षम नेता हैं कि वे सीमा विवाद सहित अपने सभी लंबित द्विपक्षीय मुद्दों का सम्मानजनक समाधान स्वयं तलाश लेंगे। मॉस्को के इस संतुलनकारी रुख से यह साफ हो गया है कि रूस की भारत से बढ़ती नजदीकियां चीन की कीमत पर नहीं हैं और न ही चीन के साथ उसका मजबूत गठबंधन भारत के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों को प्रभावित करता है।









