ट्रम्प का बड़ा ऐलान: “डील साइन हो गई”, अमेरिका-ईरान तनाव पर विराम

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पेरिस: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य टकराव को समाप्त करने के लिए एक अंतरिम समझौते (MoU) पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में मुलाकात के दौरान इस अहम दस्तावेज पर दस्तखत किए। इसके तुरंत बाद, ईरान के राष्ट्रपति पजशकियान ने भी डिजिटल (इलेक्ट्रॉनिक) माध्यम से इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 5 बजे इस फैसले की घोषणा होते ही यह शांति समझौता प्रभावी हो गया है।

इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ईरान और लेबनान में जारी युद्ध को पूरी तरह रोका जाएगा। साथ ही, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा यातायात के लिए खोलने और ईरान पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने पर भी सहमति बनी है। पहले यह हस्ताक्षर 19 जून को जेनेवा के लूसर्न शहर में होने थे, लेकिन इसे तय समय से एक दिन पहले ही फ्रांस में अंजाम दे दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

समझौते की प्रमुख शर्तें और वैश्विक प्रतिक्रियाएं

अंतरिम समझौते के लीक हुए मसौदे के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कुल 14 बिंदुओं पर सहमति बनी है। इनमें युद्ध विराम, तेल निर्यात को फिर से शुरू करना, प्रतिबंधों में ढील और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करना शामिल है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने इस कदम का स्वागत करते हुए सभी पक्षों से युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की अपील की है, साथ ही चीन ने ईरान और लेबनान को मानवीय मदद देने की घोषणा भी की है।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने अपने सभी लक्ष्य पूरे कर लिए हैं, जिसमें ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना और होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाना शामिल था। हालांकि, उन्होंने कड़ी चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने शर्तों का उल्लंघन किया, तो उस पर दोबारा बमबारी की जा सकती है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को कोई सीधी आर्थिक मदद या पैकेज नहीं दे रहा है, बल्कि शर्तें मानने पर अन्य देशों को वहां निवेश की अनुमति दी जाएगी।

ऐतिहासिक वर्साय पैलेस का महत्व

जिस वर्साय पैलेस में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, वह फ्रांस की राजधानी पेरिस के पास स्थित है और दुनिया के सबसे भव्य महलों में गिना जाता है। 1623 में किंग लुई 13वें के एक छोटे से शिकार लॉज के रूप में शुरू हुए इस स्थान को उनके बेटे लुई 14वें ने एक विशाल और आलीशान महल का रूप दे दिया। साल 1682 से लेकर 1789 की फ्रांसीसी क्रांति तक यह महल फ्रांस की सत्ता का मुख्य केंद्र रहा।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस महल में करीब 2,300 कमरे हैं, जिनमें से 357 शीशों से बना 'हॉल ऑफ मिरर्स' सबसे प्रसिद्ध है। इतिहास में भी इस महल का बड़ा महत्व रहा है; 1919 में प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली प्रसिद्ध 'वर्साय की संधि' पर भी यहीं हस्ताक्षर किए गए थे। आज यह महल एक म्यूजियम और बेहद लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट है।

बाजार पर असर और ईरान के भीतर उठते सवाल

शांति समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति बढ़ने की संभावना मजबूत हुई है, जिससे ब्रेंट क्रूड गिरकर 78.66 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी तेल (WTI) 75.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो पिछले महीने 125 डॉलर के पार चल रहा था।

इस बीच, इस समझौते को लेकर ईरान के भीतर से विरोध के सुर भी उठने लगे हैं। ईरानी सांसद मालेक शरियती ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दावों पर अविश्वास जताते हुए कहा कि अमेरिका के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए केवल हस्ताक्षरों को गारंटी नहीं माना जा सकता। उन्होंने सोशल मीडिया पर समझौते तोड़ने वालों से जुड़ी एक धार्मिक आयत भी साझा की, जिससे साफ है कि ईरान का एक राजनीतिक वर्ग इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।