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युवा शक्ति के सहारे कांग्रेस का नया दांव, कोटा से जिलों तक बढ़ा अभियान

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जयपुर। राजनीतिक आयोजनों में नौजवानों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए कांग्रेस को राजस्थान में भविष्य की नई राह दिखाई दे रही है। कोटा में राहुल गांधी के कार्यक्रम को मिले शानदार जनसमर्थन के बाद सूबे की कांग्रेस इकाई ने इस मुहिम को पूरे प्रदेश में विस्तार देने का फैसला किया है। पार्टी नेतृत्व ने आगामी 28 जून तक सभी जिलों में एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और जिला संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत ये कार्यकर्ता पढ़ाई और नौकरी जैसे बुनियादी सवालों को लेकर ग्रामीण इलाकों में घर-घर दस्तक देंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के मार्गदर्शन में होने वाले इन शिविरों में राहुल गांधी के कोटा वाले भाषण का वीडियो बड़ी स्क्रीन पर दिखाया जाएगा और कार्यकर्ताओं को सिखाया जाएगा कि वे युवाओं से जुड़े मुद्दों को आंकड़ों के साथ जनता के सामने कैसे रखें।

विशेषज्ञों की मदद से तैयार होगी युवाओं को साधने की रणनीति

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि कोटा के मंच से राहुल गांधी ने देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली की खामियों और नौजवानों के सामने खड़ी चुनौतियों को बेहद तार्किक ढंग से पेश किया था। उन्होंने नीट परीक्षा की गड़बड़ियों, पढ़ाई के बजट में कटौती, छात्र-छात्राओं पर बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं का हवाला देकर व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया था। कांग्रेस अब इसी नैरेटिव को आम लोगों के बीच ले जाने की तैयारी में है। इसके लिए जिला स्तर पर लगने वाले ट्रेनिंग कैंपों में विषय विशेषज्ञ बुलाए जा रहे हैं, जो कार्यकर्ताओं को प्रभावी ढंग से प्रेजेंटेशन देने और अपनी बात को दमदार तरीके से जनता के बीच रखने के गुर सिखाएंगे।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जमीन पर उतरेगी कांग्रेस की युवा विंग

सभी जिलों में प्रशिक्षण सत्र संपन्न होने के तुरंत बाद एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और मुख्य संगठन के तैयार किए गए कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो जाएंगे। ये टीमें सीधे तौर पर विद्यार्थियों और आम नागरिकों के बीच जाकर शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर पार्टी का दृष्टिकोण साझा करेंगी। इसके साथ ही हर जिले में स्थानीय स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। जिला अध्यक्षों, विधायकों और सांसदों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय मीडिया के माध्यम से युवाओं और छात्रों से जुड़े सवालों को पुरजोर तरीके से उठाएं।

रोजगार और शिक्षा के सहारे नए वोटबैंक को जोड़ने की कवायद

कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि कोटा के कार्यक्रम में उमड़ी नौजवानों की भारी भीड़ इस बात का सबूत है कि रोजगार और बेहतर शिक्षा जैसे विषय आज की पीढ़ी के लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। पार्टी को पूरा भरोसा है कि इस नए अभियान के माध्यम से युवाओं का झुकाव कांग्रेस की तरफ बढ़ेगा। इसी रणनीति के तहत एनएसयूआई और युवा कांग्रेस को कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों के आसपास अधिक सक्रिय रहने और छात्र राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने का विशेष जिम्मा सौंपा गया है।

क्या है पूरा मामला? संजय नगायच के बयान और जीतू पटवारी के जवाब से मचा सियासी बवाल

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इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष जीतू पटवारी के स्वामित्व वाले चार गोदामों (वेयरहाउस) में फायर सेफ्टी (अग्निशमन सुरक्षा) मानकों की कमी को लेकर वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस दंडात्मक कार्रवाई और आरोपों के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने कॉर्पोरेशन के महाप्रबंधक अनुराग वर्मा को फोन कर दो टूक लहजे में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। पटवारी ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि राज्य सरकार को लगता है कि उनके गोदामों में किसी भी प्रकार के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो वे तत्काल उनका पूरा वेयरहाउस खाली करा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और द्वेषवश की जा रही इस कार्रवाई को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला? औचक निरीक्षण के बाद जारी हुआ नोटिस

इस प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पालिया में स्थित चार बड़े वेयरहाउसों का औचक निरीक्षण किया। जांच के बाद यह बात सामने आई कि ये चारों गोदाम कांग्रेस नेता जीतू पटवारी के हैं।

निरीक्षण के बाद कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष नगायच ने आरोप लगाया कि इतने बड़े कद के राजनीतिक नेता होने के बावजूद पटवारी के गोदामों में आगजनी जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद नहीं हैं। यहाँ तक कि बुनियादी सुरक्षा के तौर पर रखी जाने वाली रेत और बाल्टियों तक का इंतजाम सही तरीके से नहीं मिला। उन्होंने अपने रुख को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि वे प्रदेश भर के करीब 100 वेयरहाउसों का दौरा कर चुके हैं, और यह कार्रवाई केवल एक नेता को लक्षित करके नहीं की गई है। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉर्पोरेशन ने पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

'नियमों का उल्लंघन नहीं करेंगे, अनाज का पूरा ख्याल रखेंगे' — पटवारी

कॉर्पोरेशन की ओर से नोटिस थमाए जाने के बाद जीतू पटवारी ने महाप्रबंधक अनुराग वर्मा से फोन पर सीधा संवाद किया। सोशल मीडिया पर आए बयानों के अनुसार पटवारी ने कहा, "बीजेपी के कुछ नए नेता जो कॉर्पोरेशन में पदों पर बैठे हैं, वे मेरे वेयरहाउस पर गए थे और औचक निरीक्षण के नाम पर कह रहे हैं कि वहां जाले लगे हैं।"

पटवारी ने अधिकारी से आगे कहा, "मैंने पूर्व में भी लिखित रूप से अवगत कराया था और आज पुनः आपको पत्र लिख रहा हूं। यदि हमारी व्यवस्थाओं से आपत्ति है, तो आप सहर्ष हमारे गोदामों को खाली करा सकते हैं। हम सत्ता पक्ष के अनुचित दबाव में आकर स्थापित नियमों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करेंगे। गोदामों में रखे अनाज की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा और रख-रखाव में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।"

कॉर्पोरेशन अध्यक्ष का पलटवार: 'अधिकारियों को धमका रहे हैं नेता'

दूसरी तरफ, कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने जीतू पटवारी के इस रुख पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता नियमों का पालन करने के बजाय शासकीय अधिकारियों को डराने और धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। नगायच ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा इंदौर और उज्जैन संभाग के विभिन्न वेयरहाउसों का व्यापक निरीक्षण किया गया था, और जहां-जहां तकनीकी या सुरक्षात्मक कमियां पाई गईं, उन सभी को समान रूप से नोटिस जारी किए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि जब वे पालिया गांव के गोदामों की जांच कर रहे थे, तब उन्हें इस बात की पूर्व जानकारी नहीं थी कि यह संपत्ति जीतू पटवारी की है। कॉर्पोरेशन अध्यक्ष के अनुसार, कानून और सुरक्षा के नियम समाज के हर वर्ग के लिए एक समान हैं; चाहे कोई बड़ा राजनेता हो, प्रशासनिक अधिकारी हो या आम नागरिक, जनसुरक्षा से जुड़ी लापरवाही मिलने पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

वायरल वीडियो से बढ़ीं मुश्किलें, पुणे पोर्शे केस में आरोपी के पिता की जमानत पर संकट

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पुणे। पोर्शे कार दुर्घटना मामले के नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पुणे पुलिस ने उनकी जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख किया है। पुलिस का दावा है कि विशाल अग्रवाल ने देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दी गई राहत की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन किया है। सरकारी वकील के माध्यम से शिवाजीनगर सत्र न्यायालय में यह याचिका दायर की गई है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होने के आसार हैं। यह पूरी कानूनी कवायद सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो के बाद शुरू हुई है, जिसमें विशाल अग्रवाल अपने परिजनों के साथ जश्न के माहौल में नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद आम जनता में भारी आक्रोश देखा गया और जांच व्यवस्था पर भी उंगलियां उठीं।

वीडियो पर पुलिसिया कार्रवाई और अभियोजन पक्ष के तर्क

इंटरनेट पर वीडियो के प्रसारित होने के बाद पुणे पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए। राज्य के विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि गंभीर आरोपों में जमानत मिलने के बाद इस प्रकार सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाना मामले से जुड़े गवाहों को डराने या प्रभावित करने जैसा है। पुलिस का तर्क है कि इस व्यवहार से गवाहों पर मानसिक दबाव बन सकता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों का सीधा उल्लंघन है।

अग्रवाल परिवार की सफाई और वीडियो की हकीकत

दूसरी तरफ, आरोपी के परिवार और उनके वकीलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वीडियो को पुराना करार दिया है। विशाल अग्रवाल की कानूनी टीम द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह वीडियो वर्तमान का नहीं बल्कि साल 2023 का है, जब वे गोवा के एक होटल में अपनी शादी की 25वीं वर्षगांठ मना रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस पारिवारिक आयोजन का मई 2024 में पुणे के यरवदा थाने में दर्ज हुए सड़क हादसे से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस ने इस संबंध में विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी के बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्हें डिजिटल साक्ष्यों के साथ कोर्ट में रखा जाएगा। अदालत ने फिलहाल आरोपी पक्ष को इस याचिका पर अपना आधिकारिक जवाब सौंपने को कहा है।

क्या है पूरा पोर्शे कार हादसा मामला

यह विवाद 19 मई 2024 की रात से जुड़ा है, जब पुणे के कल्याणी नगर क्षेत्र में एक तेज रफ्तार पोर्शे कार ने मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि उस वक्त कार विशाल अग्रवाल का नाबालिग बेटा चला रहा था। विशाल अग्रवाल को इस मामले में खून के नमूनों की हेराफेरी करने और सबूत मिटाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि बेटे को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए ससून अस्पताल में उसके ब्लड सैंपल को उसकी मां के सैंपल से बदल दिया गया था ताकि शराब पीने की पुष्टि न हो सके। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च के महीने में विशाल अग्रवाल को जमानत की मंजूरी दी थी।

हिजबुल्ला चीफ का बड़ा दावा: इस्राइल और अमेरिका हार चुके, ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप

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बेरूत। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच हिजबुल्ला के शीर्ष नेता शेख नईम कासिम ने अमेरिका और इस्राइल की रणनीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उनका दावा है कि ईरान और क्षेत्र के अन्य विद्रोही संगठनों को मिटाने का अमेरिकी-इस्राइली मंसूबा पूरी तरह पस्त हो चुका है। कासिम ने जोर देकर कहा कि लेबनान में इस्राइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई को अमेरिका का पूरा शह प्राप्त है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस टकराव के बाद पश्चिम एशिया अब एक ऐसे नए युग की तरफ बढ़ रहा है, जहाँ अमेरिकी-इस्राइली योजनाओं को शिकस्त झेलनी पड़ी है। मध्य अशूरा परिषद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि तमाम पाबंदियों और नुकसान के बाद भी ईरान पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बनकर उभरा है और वह अपने क्षेत्रीय वजूद से कभी पीछे नहीं हटेगा।

सैन्य कार्रवाई की छूट वाले युद्धविराम प्रस्तावों पर हिजबुल्ला का रुख

हिजबुल्ला प्रमुख ने उन सभी शांति प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें इस्राइल को अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखने की परोक्ष अनुमति दी गई हो। कासिम का मानना है कि ऐसे समझौते असल में युद्धविराम नहीं, बल्कि हमले जारी रखने का एक नया बहाना हैं। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि हिजबुल्ला द्वारा नियमों का पालन किए जाने के बावजूद इस्राइल ने हमेशा समझौतों को तोड़ा है। संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल उसी प्रस्ताव पर सहमत होगा जो पूरी तरह से सैन्य अभियानों पर रोक लगाने की पक्की गारंटी देता हो।

हिजबुल्ला की शर्तें और भविष्य की रणनीतिक मांगें

संगठन की मांग है कि एक वास्तविक युद्धविराम के तहत जल, थल और नभ तीनों मोर्चों से होने वाले सभी हमलों पर तुरंत पूर्ण विराम लगना चाहिए। इसके साथ ही लेबनान के भीतर रिहाइशी और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना बंद किया जाए और इस्राइली सैनिक लेबनानी सीमाओं से पूरी तरह वापस लौटें। कासिम ने ईरान से मिल रहे मजबूत सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि तेहरान के लिए लेबनान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करना एक बड़ा और असरदार रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।

अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका और पश्चिम एशिया के बदलते समीकरण

कासिम ने अमेरिकी प्रशासन को इस जंग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वाशिंगटन की मदद के बिना इस्राइल इस स्तर पर तबाही नहीं मचा सकता था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में इस युद्ध को तुरंत रुकवाने की क्षमता है, क्योंकि अगर अमेरिका कड़ा रुख अपनाए तो बेंजामिन नेतन्याहू उसकी बात को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे। हिजबुल्ला का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत चल रही है और तनाव घटाने के लिए 14 सूत्रीय समझौते पर काम हो रहा है। लेबनान में इस्राइली कार्रवाई को रोकना इस कूटनीति का मुख्य हिस्सा है, लेकिन हिजबुल्ला के तेवरों से साफ है कि शांति की राह अभी भी बेहद पेचीदा है।

फादर्स डे पर दिल दहला देने वाली घटना, 7 साल के बच्चे की डूबने से मौत

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धार। फादर्स डे के विशेष दिन एक अभागे पिता को जीवन का सबसे असहनीय और क्रूर जख्म मिला है। धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खलघाट नर्मदा घाट पर रविवार को एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे कृष्णा की नदी के गहरे पानी में डूबने से असामयिक मौत हो गई। जिस पिता ने बड़े लाड-प्यार से उंगली पकड़कर अपने कलेजे के टुकड़े को चलना सिखाया था, उसी की आंखों के सामने मासूम ने हमेशा के लिए दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

पीथमपुर से नर्मदा दर्शन के लिए पहुंचा था परिवार

मूल रूप से हरदा जिले के ग्राम छोटा देवास के निवासी रामशंकर वर्तमान में पीथमपुर की एक निजी औद्योगिक कंपनी में कार्यरत हैं। रविवार 21 जून को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण, वे अपने ममेरे भाई अश्विन चौहान और अपने दो पितातुल्य मासूम बेटों— 7 वर्षीय कृष्णा उर्फ रमन और 5 वर्षीय नारायण के साथ सुबह लगभग 11 बजे खलघाट स्थित नर्मदा नदी के दर्शन और पवित्र स्नान के लिए पहुंचे थे।

नदी किनारे मछलियों को दाना खिलाते समय हुआ हादसा

शोक संतप्त परिजनों ने रुआंसे स्वर में बताया कि घाट पर स्नान करने के बाद मासूम कृष्णा नदी के किनारे अठखेलियां कर रही मछलियों को दाना खिला रहा था। इसी दौरान अचानक घाट की सीढ़ियों पर काई या नमी के कारण उसका पैर फिसल गया और वह संतुलन खोकर सीधे नदी के गहरे पानी में समा गया। बच्चे को डूबता देख परिजनों ने आनन-फानन में खुद करीब 10-15 मिनट तक पानी में उसकी खोजबीन की, लेकिन गहरे बहाव के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद तुरंत आपातकालीन पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी गई।

20 मिनट तक दिया गया सीपीआर (CPR), अस्पताल में डॉक्टरों ने तोड़ा दम

नर्मदा घाट पर तैनात आपातकालीन सुरक्षा टीम और स्थानीय गोताखोरों ने सूचना मिलते ही तत्परता से रेस्क्यू ऑपरेशन (सर्चिंग) शुरू किया। कुछ ही समय में बच्चे को नदी के किनारे से अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। पानी से बाहर लाते ही ड्यूटी पर तैनात आरक्षक दीपक मंडलोई और बेबस पिता रामशंकर ने बच्चे के फेफड़ों से पानी निकालने और सांसें वापस लाने के लिए करीब 20 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया। इसके बाद उसे तुरंत एम्बुलेंस से धामनोद के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ड्यूटी डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद कृष्णा को मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में पसरा सन्नाटा, समझाइश के बाद हुआ पोस्टमार्टम

इकलौते मासूम बेटे का शव देखकर पिता रामशंकर बदहवास हो गए। गहरे सदमे के कारण उन्होंने शुरुआत में शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। इसी बीच हादसे की खबर मिलते ही पीथमपुर से रोती-बिलखती मासूम की मां भी धामनोद अस्पताल पहुंच गई। परिजनों के विलाप से पूरा अस्पताल परिसर गमगीन हो उठा। लगभग 5 घंटे तक स्थानीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने पीड़ित माता-पिता को ढांढस बंधाया और विधिक प्रक्रियाओं की अनिवार्यता समझाई। अंततः सबकी समझाइश के बाद परिजन राजी हुए, जिसके बाद डॉक्टर जगदीश देवड़ा ने शव का पोस्टमार्टम कर उसे अंतिम संस्कार के लिए माता-पिता को सौंप दिया।

सामाजिक सहयोग से पैतृक गांव हरदा भेजा गया शव

इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने और सहायता के लिए स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि विष्णु पाटीदार और सामाजिक कार्यकर्ता विशाल मंडलोई अस्पताल पहुंचे। उन्होंने संकटग्रस्त परिवार की तत्काल आर्थिक मदद की और निजी स्तर पर एक विशेष एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, ताकि मासूम के पार्थिव देह को उनके पैतृक निवास स्थान हरदा ले जाया जा सके। फिलहाल, धामनोद थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर घटना के सभी पहलुओं की वैधानिक जांच शुरू कर दी है।

डिजिटल हेल्थ मिशन को रफ्तार, भोपाल में शुरू होगी स्मार्ट स्वास्थ्य व्यवस्था

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी को स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश का सबसे आधुनिक और पहला ‘मॉडल डिजिटल हेल्थ डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा और उपचार की पूरी प्रक्रिया को बेहद सुगम, त्वरित और आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत जिले के सभी शासकीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और लगभग 3000 निजी (प्राइवेट) चिकित्सालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इस एकीकृत नेटवर्क के तैयार होने से जहां आम मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, वहीं डॉक्टरों को भी एक क्लिक पर संबंधित मरीज की पुरानी बीमारी और उपचार (मेडिकल हिस्ट्री) की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

चार महीने का विशेष एक्शन प्लान: अब पर्चों और फाइलों से मिलेगी मुक्ति

इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजना के लागू होते ही पूरा हेल्थ केयर सिस्टम डिजिटल और पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगा। इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 4 महीनों का एक कड़ा 'एक्शन प्लान' तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • डिजिटल क्षमता का ऑडिट: जिले के सभी छोटे-बड़े अस्पतालों की तकनीकी और डिजिटल अवसंरचना की जांच की जाएगी, ताकि कमियों को दूर कर उन्हें नए सिस्टम के अनुकूल बनाया जा सके।

  • अस्पतालों और डॉक्टरों का डिजिटल पंजीयन: जिले के हर रजिस्टर्ड डॉक्टर और अस्पताल की एक विशिष्ट डिजिटल आईडी (पहचान) तैयार की जाएगी। इसके साथ ही 'हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' (HMIS) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

  • विशेष ट्रेनिंग सत्र: डॉक्टरों, कंपाउंडरों और पैरामेडिकल स्टाफ को डिजिटल पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) लिखने और ऑनलाइन जांच रिपोर्ट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • आभा (ABHA) नंबर से एंट्री: मरीजों को अस्पताल आते समय भारी-भरकम फाइलें लाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे केवल अपने 'आभा नंबर' (Ayushman Bharat Health Account) के जरिए सीधे डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे, जिससे रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

क्यूआर कोड और मिस्ड कॉल से मिलेगा टोकन, कम होगी मेडिक्लेम की धोखाधड़ी

इस डिजिटल क्रांतिकारी बदलाव से आम नागरिकों और चिकित्सा प्रणाली को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे:

  • स्मार्ट टोकन सिस्टम: मरीजों को अब ओपीडी पर्ची के लिए घंटों इंतजार नहीं करना होगा। अस्पताल परिसर में लगे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने या निर्धारित नंबर पर मिस्ड कॉल देते ही मरीज की बुनियादी जानकारी सीधे संबंधित डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंच जाएगी और मरीज के मोबाइल पर टोकन नंबर आ जाएगा।

  • फर्जीवाड़े पर रोक: पूरी उपचार प्रक्रिया के डिजिटल डेटाबेस में दर्ज होने के कारण स्वास्थ्य बीमा (मेडिक्लेम) के दावों में होने वाली वित्तीय हेराफेरी, फर्जी बिलिंग और गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

  • डिजिटल फार्मेसी: डॉक्टर द्वारा केबिन से जनरेट किया गया डिजिटल पर्चा सीधे अस्पताल के मेडिकल स्टोर या फार्मेसी काउंटर पर ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे मरीज को बिना किसी मानवीय चूक के सही दवाएं तुरंत मिल सकेंगी।

‘शिवसेना एक ही है’, ऑपरेशन टाइगर विवाद के बीच जनता की अदालत में पहुंचे उद्धव ठाकरे

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मुंबई। पार्टी सांसदों के लगातार पाला बदलने से नाराज शिवसेना (यूबीटी) के मुखिया उद्धव ठाकरे ने दोटूक कहा है कि शिवसेना का अस्तित्व सिर्फ एक ही रह सकता है, क्योंकि इसका मूल उद्देश्य मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा करना है। रविवार को अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ डटकर चुनाव लड़ा और जनता के आशीर्वाद से जीत दर्ज की। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ सांसद सत्ता और पैसे की भूख में आकर न सिर्फ संगठन बल्कि आम जनता के भरोसे का भी खून कर रहे हैं। इस संकट के बीच उन्होंने मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से अपने जनसंपर्क अभियान का शंखनाद कर दिया है, जिसका प्रतिनिधित्व दलबदल करने वाले सांसद संजय दिना पाटिल कर रहे हैं।

बागी सांसदों के झटके से ठाकरे गुट पर गहराया संकट

शिवसेना (यूबीटी) में मची इस अंदरूनी बगावत ने उद्धव ठाकरे के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी के छह असंतुष्ट सांसदों में से दो ने रविवार को आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के धड़े का दामन थाम लिया, जिससे बचे हुए चार अन्य सांसदों के भी पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के ठीक बाद पार्टी को अलविदा कह दिया, जबकि हिंगोली के सांसद नागेश अष्टीकर ने सोशल मीडिया लाइव के जरिए शिंदे गुट में जाने का एलान किया। शनिवार को कोर्ट द्वारा हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने ओमराजे को रोकने की आखिरी कोशिश की थी, जो नाकाम रही।

'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए संगठन में बड़ी सेंधमारी की तैयारी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना उद्धव गुट को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही थी। संसद में परिसीमन विधेयक पारित न होने के बाद इस योजना को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम देकर तेजी से लागू किया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे ने इस राजनीतिक हालात का फायदा उठाते हुए भाजपा आलाकमान को आश्वस्त किया कि वे विरोधी खेमे के सांसदों को अपने साथ जोड़कर पार्टी की ताकत में इजाफा कर सकते हैं।

संसद के बाद अब देश की सबसे अमीर महानगरपालिका पर नजर

सांसदों को तोड़ने के बाद अब एकनाथ शिंदे गुट की नजर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर टिक गई है, जहां बड़े पैमाने पर दलबदल कराने की सुगबुगाहट है। शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव खेमे के करीब 45 पूर्व पार्षद उनके संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा फैसला ले सकते हैं। दलबदल विरोधी कानून की जद से बचने के लिए यह संख्या कुल पार्षदों का दो-तिहाई हिस्सा है, जो कि अयोग्यता की कार्रवाई से बचने के लिए बेहद जरूरी है। शिंदे गुट के स्थानीय नेताओं का कहना है कि विपक्षी खेमा पहले सांसदों के जाने की खबरों को भी महज अफवाह बता रहा था, लेकिन आखिरकार जमीनी हकीकत सबके सामने आ चुकी है।

गर्मी से राहत के लिए करना होगा थोड़ा और इंतजार, इस दिन दस्तक दे सकता है मानसून

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भोपाल। मध्य प्रदेश के नागरिकों और विशेषकर किसानों को मानसून की फुहारों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। इस बार मानसूनी हवाएं अपने निर्धारित समय यानी 15 जून से करीब सात दिन पिछड़ चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसूनी सिस्टम फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है, जिसके चलते मध्य प्रदेश तक इसके पहुंचने की गति धीमी हो गई है। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आगामी चार दिनों के भीतर स्थितियां अनुकूल होंगी और राज्य में मानसून की सक्रिय दस्तक हो सकती है।

आखिर क्यों अटक गया मानसून?

सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 15 जून या उसके आस-पास मानसूनी सीजन शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार 22 जून की तारीख बीत जाने के बाद भी बादलों का स्थायी डेरा नजर नहीं आ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून को गति देने और मजबूत बनाने वाले मौसमी सिस्टम इस समय कमजोर पड़ गए हैं।

यही वजह है कि मानसून की आगे बढ़ने की रफ्तार थम गई है और वह बीते 8 जून से एक ही भौगोलिक क्षेत्र में स्थिर बना हुआ है। बीते वर्ष 2025 की स्थिति देखें तो 16 जून को ही मानसून ने प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश कर लिया था। वर्तमान पूर्वानुमानों के अनुसार, मानसूनी हवाएं 23 जून को पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में प्रवेश करेंगी, जिसके दो दिन बाद यानी 25 जून तक मध्य प्रदेश में इसके पहुंचने की प्रबल संभावना है।

देरी से बदला मौसम का गणित, बारिश के ग्राफ में भारी गिरावट

समय पर मानसूनी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण प्रदेश में प्री-मानसून और मौसमी बारिश के आंकड़ों में भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • औसत में गिरावट: इस चालू सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की तुलना में केवल 48 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है।

  • पूर्वी अंचल में सूखा: जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के अंतर्गत आने वाले 24 जिलों में सामान्य से 69 फीसदी कम पानी बरसा है।

  • पश्चिमी और मध्य क्षेत्र की स्थिति: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में वर्षा की कमी का यह आंकड़ा लगभग 24 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है।

इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

भले ही मानसून के आगमन में देरी हो रही है, लेकिन स्थानीय चक्रवातीय सिस्टम के कारण प्रदेश के विभिन्न अंचलों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ खंड वर्षा का दौर जारी है।

बीते रविवार (21 जून) को राजधानी भोपाल, सतना, जबलपुर सहित छतरपुर जिले के खजुराहो, नौगांव और सिवनी में झमाझम बौछारें पड़ीं, जिससे लोगों को भीषण उमस से कुछ राहत मिली। मौसम केंद्र ने आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर झाबुआ, आलीराजपुर, रीवा, सतना, शहडोल, अनूपपुर, कटनी और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी (alert) जारी की है।

खाटूश्यामजी में बदला बाबा श्याम का स्वरूप, तिलक श्रृंगार के बाद श्याम वर्ण में दे रहे दर्शन

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विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में बाबा श्याम ने अपना स्वरूप बदल लिया है. अब वे श्याम वर्ण में भक्तों को दर्शन देंगे. इस रूप में बाबा श्याम का चंदन से मस्तक पर लेप किया जाता है. मंदिर परम्परा के अनुसार बाबा श्याम एक महीने में दो रूपो में दर्शन देते हैं. एक शालिग्राम, जिसमें वे अपने मूल स्वरूप में नजर आते हैं. भक्तों को ये दर्शन महीने में केवल सात दिन ही करने को मिलते हैं. इसके अलावा दूसरा है श्याम वर्ण इसमें बाबा श्याम करीब 22 से 23 दिन तकदर्शन देते हैं.
मंदिर कमेटी के अनुसार, अमावस्या पर बाबा श्याम को स्नान करने के बाद श्याम वर्ण का चंदन लेप उतार दिया जाता है. इसके कुछ दिन बाद संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम का फिर से तिलक श्रृंगार किया जाता है. तिलक श्रृंगार के दौरान मंदिर कमेटी द्वारा आधिकारिक रूप से करीब 19 घंटे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रखे जाते हैं. इस दौरान केवल मंदिर के मुख्य पुजारियों संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार का कार्य किया जाता है.
तिलक श्रृंगार के बाद खुला मंदिर 
हाल ही में बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार किया गया है. करीब 19 घंटे मंदिर बंद रहने के बाद फिर से पट खुलते ही खाटूश्याम जी मंदिर में जयकारों के साथ श्रद्धालुओं की गूंज सुनाई देने लगी है. भक्त बाबा श्याम के मनमोहक तिलक श्रृंगार छवि के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर कमेटी द्वारा 75 फीट मार्ग पर बनी 14 कतारों में श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन करवाए जा रहे हैं. भक्त दिल्ली, मुंबई, कोलकाता हरियाणा सहित देश के कोने कोने से मनोकामनाएं लेके पहुंच रहे हैं. दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी एवं पुलिस प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए. मंदिर परिसर व दर्शन मार्ग पर पुलिस व कमेटी के सुरक्षा गार्ड्स ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध किया.

शनिवार और रविवार को दिन में बंद नहीं होगा मंदिर 
आमतौर, पर दोपहर 2 बजे से लेकर 4 बजे तक खाटूश्याम जी मंदिर बंद रहता है. शनिवार रविवार को वीकेंड होने के कारण भक्तों की संख्या आम दिनों से अधिक रहती है. ऐसे में आज और कल खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट दिन में बंद नहीं होंगे. इसके अलावा एकादशी और द्वादशी को भी दिन और भीड़ अधिक रहने पर रात के समय भी मंदिर खुला रखा जाता है.

कृष्णजी की सबसे भरोसेमंद अष्ट सखियां कौन थीं? इनके बिना अधूरी रहतीं राधा-कृष्ण की लीलाएं, गोवर्धन परिक्रमा में मिलता है क्लू

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भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की चर्चा सदियों से होती रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी दिव्य लीलाओं के पीछे आठ ऐसी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था, जिनके बिना वृंदावन की कई प्रसिद्ध कथाएं कभी पूरी ही नहीं हो पातीं? इन महिलाओं को अष्ट सखी कहा जाता है. ये केवल राधा की सहेलियां नहीं थीं, बल्कि उनकी सबसे विश्वसनीय साथी, सलाहकार, संदेशवाहक और रक्षक भी थीं. इन अष्ट सखियों बिना, राधा और कृष्ण की कई सबसे प्रिय लीलाएं कभी घटित नहीं हो पातीं. भक्ति परंपरा में इनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं कौन हैं राधा-कृष्ण की अष्ट सखियां…
कौन थीं अष्ट सखियां?
अष्ट सखियां राधा रानी की सबसे निकटतम सहेलियां थीं. उन्होंने अपना पूरा जीवन राधा और कृष्ण की सेवा में समर्पित कर दिया था. उनकी बुद्धिमत्ता, निष्ठा और प्रेम ने वृंदावन की दिव्य लीलाओं को संभव बनाया. अष्ट सखियों ने कभी प्रसिद्धि या सम्मान की इच्छा नहीं की. उनका सबसे बड़ा सुख राधा और कृष्ण की सेवा में था. यही निस्वार्थ भाव उन्हें भक्ति परंपरा में अमर बनाता है. अष्ट सखियों की कथा केवल धार्मिक कहानी नहीं है. यह सच्ची मित्रता, समर्पण, निष्ठा और सेवा का संदेश देती है. वे सिखाती हैं कि हर व्यक्ति अपनी विशेष प्रतिभा के माध्यम से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.

ललिता सखी
ललिता को अष्ट सखियों में सबसे प्रमुख माना जाता है. वे साहसी, स्पष्टवादी और राधा की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती थीं. जब भी कोई चुनौती आती, ललिता बिना किसी संकोच के आगे आतीं. राधा-कृष्ण की मुलाकातों का आयोजन करना और हर परिस्थिति में राधा का साथ देना उनकी विशेषता थी. गोवर्धन की परिक्रमा में राधा कुंड की परिक्रमा के समय ललिता को समर्पित एक मंदिर व कुंआ है.

विशाखा सखी
विशाखा अपनी बुद्धिमत्ता, कूटनीति और कलात्मक प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध थीं. वे संगीत, कविता और संवाद में निपुण थीं. जब भी कोई मतभेद होता, विशाखा शांति और समझ को बहाल करने का सटीक तरीका जानती थीं. उनकी कोमल बुद्धि ने दिव्य मंडल में सामंजस्य बनाए रखने में मदद की.
चंपकलता सखी
चंपकलता माला बनाने, स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने और रचनात्मक कार्यों में निपुण थीं. वे हर सेवा को भक्ति का रूप मानती थीं.
चित्रा सखी
चित्रा को कविता, संगीत और चित्रकला का गहरा ज्ञान था. उनकी कलात्मक प्रतिभा वृंदावन की लीलाओं को और भी सुंदर बनाती थी.
तुंगविद्या सखी
तुंगविद्या शास्त्रों और आध्यात्मिक ज्ञान में अत्यंत प्रवीण थीं. उन्हें विद्वता और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है.
इंदुलेखा सखी
इंदुलेखा अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और ज्योतिष ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थीं. वे समय और परिस्थितियों का सही आकलन करने में दक्ष थीं.

रंगादेवी सखी
रंगादेवी अपने हास्य, चतुराई और प्रसन्न स्वभाव से सभी को आनंदित रखती थीं. उनकी उपस्थिति से हर लीला में उत्साह भर जाता था.
सुदेवी सखी
सुदेवी सूक्ष्म देखभाल और निस्वार्थ सेवा के लिए जानी जाती थीं. वे राधा-कृष्ण समेत पूरे मंडली की हर छोटी-बड़ी आवश्यकता का ध्यान रखती थीं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अष्ट सखियां कौन हैं?
अष्ट सखियां कृष्ण भक्ति परंपराओं, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव धर्म में राधा की आठ प्रमुख सहेलियां हैं.
2. अष्ट सखियों का महत्व क्यों है?
उन्होंने सेवा, मित्रता और भक्ति के माध्यम से राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं को सुगम बनाने और उनका समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
3. अष्ट सखियों में प्रमुख कौन थीं?
ललिता सखी को परंपरागत रूप से राधा की नेता और सबसे करीबी विश्वासपात्र माना जाता है.
4. विशाखा किस लिए जानी जाती थीं?
विशाखा सखी कूटनीति, संगीत, कविता और सद्भाव बनाए रखने के लिए जानी जाती थीं.
5. क्या अष्ट सखियां कृष्ण की भक्त थीं?
हां. उनकी भक्ति राधा और कृष्ण दोनों की प्रेमपूर्ण सेवा के माध्यम से व्यक्त होती थी.

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