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गर्मी से राहत के लिए करना होगा थोड़ा और इंतजार, इस दिन दस्तक दे सकता है मानसून

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भोपाल। मध्य प्रदेश के नागरिकों और विशेषकर किसानों को मानसून की फुहारों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। इस बार मानसूनी हवाएं अपने निर्धारित समय यानी 15 जून से करीब सात दिन पिछड़ चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसूनी सिस्टम फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है, जिसके चलते मध्य प्रदेश तक इसके पहुंचने की गति धीमी हो गई है। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आगामी चार दिनों के भीतर स्थितियां अनुकूल होंगी और राज्य में मानसून की सक्रिय दस्तक हो सकती है।

आखिर क्यों अटक गया मानसून?

सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 15 जून या उसके आस-पास मानसूनी सीजन शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार 22 जून की तारीख बीत जाने के बाद भी बादलों का स्थायी डेरा नजर नहीं आ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून को गति देने और मजबूत बनाने वाले मौसमी सिस्टम इस समय कमजोर पड़ गए हैं।

यही वजह है कि मानसून की आगे बढ़ने की रफ्तार थम गई है और वह बीते 8 जून से एक ही भौगोलिक क्षेत्र में स्थिर बना हुआ है। बीते वर्ष 2025 की स्थिति देखें तो 16 जून को ही मानसून ने प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश कर लिया था। वर्तमान पूर्वानुमानों के अनुसार, मानसूनी हवाएं 23 जून को पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में प्रवेश करेंगी, जिसके दो दिन बाद यानी 25 जून तक मध्य प्रदेश में इसके पहुंचने की प्रबल संभावना है।

देरी से बदला मौसम का गणित, बारिश के ग्राफ में भारी गिरावट

समय पर मानसूनी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण प्रदेश में प्री-मानसून और मौसमी बारिश के आंकड़ों में भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • औसत में गिरावट: इस चालू सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की तुलना में केवल 48 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है।

  • पूर्वी अंचल में सूखा: जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के अंतर्गत आने वाले 24 जिलों में सामान्य से 69 फीसदी कम पानी बरसा है।

  • पश्चिमी और मध्य क्षेत्र की स्थिति: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में वर्षा की कमी का यह आंकड़ा लगभग 24 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है।

इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

भले ही मानसून के आगमन में देरी हो रही है, लेकिन स्थानीय चक्रवातीय सिस्टम के कारण प्रदेश के विभिन्न अंचलों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ खंड वर्षा का दौर जारी है।

बीते रविवार (21 जून) को राजधानी भोपाल, सतना, जबलपुर सहित छतरपुर जिले के खजुराहो, नौगांव और सिवनी में झमाझम बौछारें पड़ीं, जिससे लोगों को भीषण उमस से कुछ राहत मिली। मौसम केंद्र ने आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर झाबुआ, आलीराजपुर, रीवा, सतना, शहडोल, अनूपपुर, कटनी और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी (alert) जारी की है।

खाटूश्यामजी में बदला बाबा श्याम का स्वरूप, तिलक श्रृंगार के बाद श्याम वर्ण में दे रहे दर्शन

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विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में बाबा श्याम ने अपना स्वरूप बदल लिया है. अब वे श्याम वर्ण में भक्तों को दर्शन देंगे. इस रूप में बाबा श्याम का चंदन से मस्तक पर लेप किया जाता है. मंदिर परम्परा के अनुसार बाबा श्याम एक महीने में दो रूपो में दर्शन देते हैं. एक शालिग्राम, जिसमें वे अपने मूल स्वरूप में नजर आते हैं. भक्तों को ये दर्शन महीने में केवल सात दिन ही करने को मिलते हैं. इसके अलावा दूसरा है श्याम वर्ण इसमें बाबा श्याम करीब 22 से 23 दिन तकदर्शन देते हैं.
मंदिर कमेटी के अनुसार, अमावस्या पर बाबा श्याम को स्नान करने के बाद श्याम वर्ण का चंदन लेप उतार दिया जाता है. इसके कुछ दिन बाद संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम का फिर से तिलक श्रृंगार किया जाता है. तिलक श्रृंगार के दौरान मंदिर कमेटी द्वारा आधिकारिक रूप से करीब 19 घंटे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रखे जाते हैं. इस दौरान केवल मंदिर के मुख्य पुजारियों संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार का कार्य किया जाता है.
तिलक श्रृंगार के बाद खुला मंदिर 
हाल ही में बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार किया गया है. करीब 19 घंटे मंदिर बंद रहने के बाद फिर से पट खुलते ही खाटूश्याम जी मंदिर में जयकारों के साथ श्रद्धालुओं की गूंज सुनाई देने लगी है. भक्त बाबा श्याम के मनमोहक तिलक श्रृंगार छवि के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर कमेटी द्वारा 75 फीट मार्ग पर बनी 14 कतारों में श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन करवाए जा रहे हैं. भक्त दिल्ली, मुंबई, कोलकाता हरियाणा सहित देश के कोने कोने से मनोकामनाएं लेके पहुंच रहे हैं. दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी एवं पुलिस प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए. मंदिर परिसर व दर्शन मार्ग पर पुलिस व कमेटी के सुरक्षा गार्ड्स ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध किया.

शनिवार और रविवार को दिन में बंद नहीं होगा मंदिर 
आमतौर, पर दोपहर 2 बजे से लेकर 4 बजे तक खाटूश्याम जी मंदिर बंद रहता है. शनिवार रविवार को वीकेंड होने के कारण भक्तों की संख्या आम दिनों से अधिक रहती है. ऐसे में आज और कल खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट दिन में बंद नहीं होंगे. इसके अलावा एकादशी और द्वादशी को भी दिन और भीड़ अधिक रहने पर रात के समय भी मंदिर खुला रखा जाता है.

कृष्णजी की सबसे भरोसेमंद अष्ट सखियां कौन थीं? इनके बिना अधूरी रहतीं राधा-कृष्ण की लीलाएं, गोवर्धन परिक्रमा में मिलता है क्लू

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भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की चर्चा सदियों से होती रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी दिव्य लीलाओं के पीछे आठ ऐसी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था, जिनके बिना वृंदावन की कई प्रसिद्ध कथाएं कभी पूरी ही नहीं हो पातीं? इन महिलाओं को अष्ट सखी कहा जाता है. ये केवल राधा की सहेलियां नहीं थीं, बल्कि उनकी सबसे विश्वसनीय साथी, सलाहकार, संदेशवाहक और रक्षक भी थीं. इन अष्ट सखियों बिना, राधा और कृष्ण की कई सबसे प्रिय लीलाएं कभी घटित नहीं हो पातीं. भक्ति परंपरा में इनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं कौन हैं राधा-कृष्ण की अष्ट सखियां…
कौन थीं अष्ट सखियां?
अष्ट सखियां राधा रानी की सबसे निकटतम सहेलियां थीं. उन्होंने अपना पूरा जीवन राधा और कृष्ण की सेवा में समर्पित कर दिया था. उनकी बुद्धिमत्ता, निष्ठा और प्रेम ने वृंदावन की दिव्य लीलाओं को संभव बनाया. अष्ट सखियों ने कभी प्रसिद्धि या सम्मान की इच्छा नहीं की. उनका सबसे बड़ा सुख राधा और कृष्ण की सेवा में था. यही निस्वार्थ भाव उन्हें भक्ति परंपरा में अमर बनाता है. अष्ट सखियों की कथा केवल धार्मिक कहानी नहीं है. यह सच्ची मित्रता, समर्पण, निष्ठा और सेवा का संदेश देती है. वे सिखाती हैं कि हर व्यक्ति अपनी विशेष प्रतिभा के माध्यम से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.

ललिता सखी
ललिता को अष्ट सखियों में सबसे प्रमुख माना जाता है. वे साहसी, स्पष्टवादी और राधा की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती थीं. जब भी कोई चुनौती आती, ललिता बिना किसी संकोच के आगे आतीं. राधा-कृष्ण की मुलाकातों का आयोजन करना और हर परिस्थिति में राधा का साथ देना उनकी विशेषता थी. गोवर्धन की परिक्रमा में राधा कुंड की परिक्रमा के समय ललिता को समर्पित एक मंदिर व कुंआ है.

विशाखा सखी
विशाखा अपनी बुद्धिमत्ता, कूटनीति और कलात्मक प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध थीं. वे संगीत, कविता और संवाद में निपुण थीं. जब भी कोई मतभेद होता, विशाखा शांति और समझ को बहाल करने का सटीक तरीका जानती थीं. उनकी कोमल बुद्धि ने दिव्य मंडल में सामंजस्य बनाए रखने में मदद की.
चंपकलता सखी
चंपकलता माला बनाने, स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने और रचनात्मक कार्यों में निपुण थीं. वे हर सेवा को भक्ति का रूप मानती थीं.
चित्रा सखी
चित्रा को कविता, संगीत और चित्रकला का गहरा ज्ञान था. उनकी कलात्मक प्रतिभा वृंदावन की लीलाओं को और भी सुंदर बनाती थी.
तुंगविद्या सखी
तुंगविद्या शास्त्रों और आध्यात्मिक ज्ञान में अत्यंत प्रवीण थीं. उन्हें विद्वता और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है.
इंदुलेखा सखी
इंदुलेखा अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और ज्योतिष ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थीं. वे समय और परिस्थितियों का सही आकलन करने में दक्ष थीं.

रंगादेवी सखी
रंगादेवी अपने हास्य, चतुराई और प्रसन्न स्वभाव से सभी को आनंदित रखती थीं. उनकी उपस्थिति से हर लीला में उत्साह भर जाता था.
सुदेवी सखी
सुदेवी सूक्ष्म देखभाल और निस्वार्थ सेवा के लिए जानी जाती थीं. वे राधा-कृष्ण समेत पूरे मंडली की हर छोटी-बड़ी आवश्यकता का ध्यान रखती थीं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अष्ट सखियां कौन हैं?
अष्ट सखियां कृष्ण भक्ति परंपराओं, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव धर्म में राधा की आठ प्रमुख सहेलियां हैं.
2. अष्ट सखियों का महत्व क्यों है?
उन्होंने सेवा, मित्रता और भक्ति के माध्यम से राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं को सुगम बनाने और उनका समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
3. अष्ट सखियों में प्रमुख कौन थीं?
ललिता सखी को परंपरागत रूप से राधा की नेता और सबसे करीबी विश्वासपात्र माना जाता है.
4. विशाखा किस लिए जानी जाती थीं?
विशाखा सखी कूटनीति, संगीत, कविता और सद्भाव बनाए रखने के लिए जानी जाती थीं.
5. क्या अष्ट सखियां कृष्ण की भक्त थीं?
हां. उनकी भक्ति राधा और कृष्ण दोनों की प्रेमपूर्ण सेवा के माध्यम से व्यक्त होती थी.

इंसान या कोई और शक्ति? अघोरी बाबा ने एक रात में कराया था निर्माण, जानें समस्तीपुर के इस मायावी मंदिर का सच

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धार्मिक दृष्टिकोण से समस्तीपुर जिला हमेशा से खास माना जाता रहा है. यहां कई मंदिर, मस्जिद और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मौजूद हैं. पर आज हम आपको एक ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसकी कहानी बाकी सभी धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग और रहस्यमयी है. यह मंदिर बूढ़ी गंडक नदी के तट पर स्थित मां काली का है. स्थानीय लोगों के अनुसार इसका इतिहास अंग्रेजों के शासनकाल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि जब भारत में अंग्रेजी हुकूमत चल रही थी, उसी दौरान यहां एक अघोरी बाबा पहुंचे थे. उन्होंने इस जगह को तपस्थली बनाया और फिर अचानक एक ही रात में मंदिर का निर्माण करा दिया. सुबह जब स्थानीय लोगों ने नदी किनारे मंदिर को देखा तो हर कोई हैरान रह गया. तभी से यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और रहस्य दोनों का केंद्र बना हुआ है.
एक रात में निर्माण की कहानी आज भी बनी हुई है चर्चा का विषय
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण सामान्य तरीके से नहीं हुआ था. मान्यता है कि अघोरी बाबा ने साधना के बल पर एक ही रात में मंदिर खड़ा कर दिया था. मंदिर बनने के बाद वह बाबा अचानक वहां से गायब हो गए. फिर कभी दिखाई नहीं दिए. यही कारण है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के बीच आज भी कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं. बूढ़ी गंडक नदी के किनारे स्थित होने की वजह से यह मंदिर प्राकृतिक रूप से भी बेहद आकर्षक दिखाई देता है. हर दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. खास अवसरों पर आसपास के जिलों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं.
श्रद्धालुओं का दावा, सच्चे मन से मांगी हर मुराद होती है पूरी
समस्तीपुर निवासी एसके झा बताते हैं कि यह मंदिर उनके जन्म से भी पहले का है. बचपन से ही वह सुनते आ रहे हैं कि यह अंग्रेजों के जमाने का मंदिर है. उन्होंने बताया कि अघोरी बाबा ने ही इसका निर्माण करवाया था. वह भी केवल एक रात में. उनका कहना है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा करने आते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. यह स्थान आज भी लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

400 साल पुरानी परंपरा! जानिए मोहर्रम में हाथी पर क्यों निकाला जाता है बीबी का अलम

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चारमीनार के साये में हर साल मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौम-ए-आशूरा को निकलने वाला बीबी का अलम जुलूस सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हैदराबाद की गंगा-जामुनी तहज़ीब और 400 साल पुराने शाही इतिहास का जीवंत प्रतीक है. कुतुब शाही दौर से शुरू हुई यह ऐतिहासिक रिवायत आज भी अपने उसी पुराने रस्म-ओ-रिवाज़ और अकीदत यानी आस्था के साथ जारी है. इस बेहद पाक और ऐतिहासिक जुलूस की शुरुआत गोलकुंडा के कुतुब शाही राजवंश के दौरान हुई थी.
माना जाता है कि राजा अब्दुल्ला कुतुब शाह की वालिदा, हयात बख्शी बेगम ने इस जुलूस की नींव रखी थी. इस अलम में पैगंबर मोहम्मद की साहबजादी हजरत फातिमा-ए-ज़ेहरा के पवित्र तबर्रुक यानी लकड़ी के तख्त का एक हिस्सा को शामिल किया गया है. कुतुब शाही राजाओं के बाद, हैदराबाद के आसफ जाही शासकों यानी निजामों ने भी इस परंपरा को पूरे राजकीय सम्मान के साथ आगे बढ़ाया और इसे दबीरपुरा के बीबी का अलावा में स्थापित किया.
दक्कन के दरबारों में सम्मान और गरिमा का प्रतीक माना जाता था
इस ऐतिहासिक जुलूस की सबसे बड़ी खासियत इसके लिए इस्तेमाल होने वाले शाही हाथी रहे हैं. दक्कन के दरबारों में हाथियों को सर्वोच्च राजकीय सम्मान और गरिमा का प्रतीक माना जाता था. इसी वजह से इस मुकद्दस यानी पवित्र अलम को हमेशा एक सजे-धजे शाही हाथी पर ही ले जाया जाता रहा है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो दशकों पहले इस जिम्मेदारी को हैदरी नाम का एक प्रसिद्ध हाथी निभाता था. हैदरी के बाद, यह गौरवशाली परंपरा उसकी संतान रजनी नाम की हथिनी ने संभाली, जिसने सालों तक पुराने शहर की गलियों में इस पवित्र अलम को अपने कांधे पर उठाया. बीच के कुछ वर्षों में हाशमी नाम के हाथी ने भी इस सेवा को पूरा किया.

रजनी हथिनी  मोहर्रम के पाक जुलूस का हिस्सा बनती रही
दिलचस्प बात यह है कि रजनी हथिनी न सिर्फ मोहर्रम के इस पाक जुलूस का हिस्सा बनती रही, बल्कि हैदराबाद के पारंपरिक बोनालु उत्सव में भी बढ़-चढ़कर शामिल होती रही जो शहर के सांप्रदायिक सौहार्द को दर्शाता है. वक्त के साथ भले ही हाथियों की बढ़ती उम्र और फिटनेस के कारण अब दूसरे राज्यों जैसे महाराष्ट्र से प्रशिक्षित हाथियों को इस सेवा के लिए लाया जाने लगा हो, लेकिन अकीदत का यह कारवां आज भी वैसा ही है. आज भी जब यह जुलूस निकलता है, तो जात-पात और मजहब से परे, हजारों-लाखों लोग इस शाही और रूहानी परंपरा के दीदार के लिए उमड़ पड़ते हैं.

राशिफल 22 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- नेत्र पीड़ा, यात्रा, विवाद, मातृ कष्ट, व्यर्थ का विरोध, पड़ोसियों से विरोध बनेगा। 
  • वृष राशि :- धन व्यय होगा, व्यापार में प्रगति, शुभ कार्य होगा, परिस्थितियां आपके अनुकूल बनी रहेंगी। 
  • मिथुन राशि :- पितृ कष्ट, यात्रा योग, व्यय, लाभ, अस्थिरता, अशांति का वातावरण रहेगा। 
  • कर्क राशि :- यात्रा सुख, भूमि लाभ, हर्ष, सिद्धी, खेती व गृह कार्य की व्यवस्था उत्तम बनेगी। 
  • सिंह राशि :- शरीर कष्ट, अपव्यय, कार्य में सफलता मिलेगी, आर्थिक सुधार के कार्य बनेंगे। 
  • कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री कष्ट, विद्या लाभ, धीरे-धीरे स्थिति में सुधार के साथ लाभ होगा। 
  • तुला राशि :– यात्रा से हानि, राज लाभ, शरीर कष्ट, खर्च अधिक होगा, समय स्थिति को देखकर आगे बढ़ें। 
  • वृश्चिक राशि :- वृत्ति में लाभ, यात्रा, सम्पत्ति लाभ, व्यापार में सुधार होगा, खर्च होती ही रहेंगे। 
  • धनु राशि :- अल्प लाभ, चोर-अग्नि शरीर भय, मानसिक परेशानी, अपवाद तथा उलझनें रहेंगी। 
  • मकर राशि :- शत्रु से हानि, अपव्यय होगा, शरीरादि सुख होगा, व्यवस्था में कमी का अनुभव होगा। 
  • कुंभ राशि :- शुभ कार्यों में व्यय होगा, संतान सुख, सफलता, उत्साह की वृद्धि होगी, रुके कार्य बनेंगे। 
  • मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय लाभ, हानि तथा अधिकारियों से मन-मुटाव होगा। 
     

कोंडागांव में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

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रायपुर :  12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज रविवार सुबह शासकीय आदर्श आवासीय कन्या महाविद्यालय परिसर में जिला स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशानुसार, जिला प्रशासन, आयुष विभाग और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’ (स्वस्थ आयु के लिए योग) थीम पर सैकड़ों नागरिकों ने एक साथ योगाभ्यास किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग शामिल हुए।
         
स्वस्थ और नशामुक्त समाज से बनेगा विकसित भारत: सांसद भोजराज नाग

          मुख्य अतिथि सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को वैश्विक पहचान मिली है, जो पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही हमारी वास्तविक संपत्ति है। जब हमारा समाज पूरी तरह स्वस्थ और नशामुक्त होगा, तभी हम प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा कर पाएंगे। सांसद श्री नाग ने जीवन में योग के महत्व को रेखांकित करते हुए नागरिकों से स्वस्थ जीवनशैली के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने की भी अपील की।

योग हमारे ऋषि-मुनियों की अमूल्य धरोहर: विधायक लता उसेंडी

          विशिष्ट अतिथि सुश्री लता उसेंडी ने जिलेवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह हमारे ऋषि-मुनियों की वह अमूल्य धरोहर है जो मन, शरीर और बुद्धि के बीच संतुलन स्थापित करती है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने भी भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति को प्रतिदिन योग के लिए समय निकालने का आग्रह किया।

एक पेड़ मां के नाम और नशामुक्त भारत की शपथ

         कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि सांसद श्री भोजराज नाग ने उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, समाजसेवियों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की शपथ दिलाई। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी अतिथियों ने महाविद्यालय परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण भी किया।

       इस जिला स्तरीय आयोजन में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनप्रतिनिधिगण, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चंद्रा, जिला पंचायत सीईओ सहित आयुष विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और भारी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
 

अवैध खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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रायपुर : प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 6 वाहनों को जब्त किया है। यह कार्रवाई कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशानुसार ग्राम मितगई एवं पिपरौल स्थित सेंदूर नदी क्षेत्र में की गई।

खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार निरीक्षण अभियान के दौरान ग्राम मितगई से 4 तथा ग्राम पिपरौल से 2 वाहन अवैध रूप से रेत का परिवहन करते पाए गए। खनिज अमले ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी 6 वाहनों को जब्त कर लिया। जब्त वाहनों को पुलिस चौकी विजयनगर एवं तातापानी की अभिरक्षा में सुरक्षित रखा गया है।

खनिज अधिकारी श्री राहुल गुलाटी ने बताया कि जब्त किए गए वाहनों के स्वामियों के विरुद्ध खनिज नियमों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिले में अवैध खनिज उत्खनन, भंडारण एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार निरीक्षण, जांच और प्रवर्तन अभियान संचालित किए जा रहे हैं।

उन्होंने आमजन से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि कहीं भी अवैध खनिज उत्खनन, भंडारण अथवा परिवहन की जानकारी मिलने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा राजस्व क्षति रोकने के उद्देश्य से अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी निरंतर और सख्ती के साथ जारी रहेगा।
 

भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी : राष्ट्रपति मुर्मु

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भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री देने के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक सोच के विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना भी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलन से ही देश का समग्र विकास संभव है। राष्ट्र्पति मुर्मु रविवार को जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहीं थी।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने विभिन्न संकायों में एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करने वाले 20 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये और उपाधियों का वितरण किया। कार्यक्रम में विश्व्विद्यालय के 141 विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। साथ ही 182 शोधार्थियों को पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की। महामहिम राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्विविद्यालय परिसर स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जबलपुर विश्वविद्यालय का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होना गर्व का विषय है। रानी दुर्गावती वीरता, साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं और नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगी। उन्होंने महान वीरांगना की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को जनजातीय समाज, वंचित वर्गों तथा विशेषकर बेटियों के सशक्तिकरण के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जिस क्षेत्र में स्थित है, वहां जनजातीय और वनवासी संस्कृति की समृद्ध उपस्थिति है। ऐसे में यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व केवल अपने करियर तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने समाज और गांवों तक पहुंचकर वहां के लोगों का मार्गदर्शन भी करना चाहिए।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरकार जनजातीय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। कई बार लोगों को इन योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने की प्रक्रिया का पता नहीं होता। ऐसे में शिक्षित युवाओं, विशेषकर जनजातीय समाज से आगे बढ़े युवक-युवतियों का कर्तव्य है कि वे अपने समाज के बीच जाकर लोगों को मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति और पिछड़े समुदायों को भी विकास की मुख्यधारा में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा और अस्मिता को बनाए रखना उतना ही आवश्यक है, जितना आधुनिक विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना। जनजातीय समाज के कौशल, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प को आधुनिक शिक्षा, नवाचार और शोध से जोड़ने की आवश्यकता है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों को विशेष प्रयास करने चाहिए, जिससे जनजातीय ज्ञान परंपरा का व्यवस्थित अध्ययन हो सके और उसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचे।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रमों में समाहित करने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा डिजाइन इनोवेशन सेंटर के माध्यम से पेटेंट प्राप्त करने जैसे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है, जो महिला सशक्तिकरण और बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज का भारत युवाओं का भारत है और देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे शिक्षा, शोध, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण के लिए सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि आज विश्व तेजी से बदल रहा है और जीवनशैली में भी तीव्र परिवर्तन आ रहा है, लेकिन इस बदलते दौर में भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। देश के युवाओं को भारत के सांस्कृतिक मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं। इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर युवा न केवल कठिन परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, बल्कि आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी जिम्मेदारियां केवल परिवार या विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं हैं। वे राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका है और उनके ज्ञान, ऊर्जा तथा संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज के व्यापक कल्याण के लिए भी करें।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि शिक्षित युवा अपने आसपास के वंचित, ग्रामीण और जनजातीय समुदायों की समस्याओं को समझें, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय से निकल रहे हैं, वे भविष्य में अधिकारी, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ऐसे में उनका दायित्व और भी बढ़ जाता है कि वे समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।

रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र

राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में संपन्न होना हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने अमर वीरांगना महारानी रानी दुर्गावती को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन जनजातीय अस्मिता, प्रजा कल्याण, नारी शक्ति, त्याग, पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और आत्मगौरव का अमर संदेश है। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती आज भी जनजातीय समुदाय सहित देश की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का केंद्र हैं।

राज्यपाल पटेल ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्र-छात्राओं से कहा कि उनकी डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण, नवाचार और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को आकार देने वाली शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे रानी दुर्गावती सहित देश के महान जननायकों के शौर्य, लोककल्याण और संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें। उन्होंने प्रत्येक विश्वविद्यालय से 5-5 पिछड़े ग्रामों को गोद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थी स्वयं इन ग्रामों में जाकर वहाँ की परिस्थितियों को समझें और अनुभव करें कि जनजातीय समाज और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए किन-किन क्षेत्रों में कार्य करने की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों में समाज सेवा की भावना, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व का विकास होगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से पीएम जनमन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अत्यंत पिछड़े जनजातीय समुदायों, विशेषकर बैगा, भारिया और सहरिया समाज के उत्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसे लाखों लोग निवास करते हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके लिए हजारों करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र और तहसीलों का ऐसा विकास मानचित्र तैयार करने में सहयोग करें, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि जनजातीय विकास एवं बुनियादी सुविधाओं से संबंधित कौन-कौन से कार्य अभी शेष हैं। इससे प्रत्येक गरीब और जरूरतमंद जनजातीय परिवार तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकेगा।

राज्यपाल पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें संस्कार दिए, उनका पालन-पोषण किया और विश्वविद्यालय ने उन्हें शिक्षा एवं आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपनी जड़ों और समाज को कभी न भूलें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों के जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है, तब समय की मांग है कि वे महारानी रानी दुर्गावती से मिली प्रेरणा को अपने जीवन में आत्मसात करें और लोकतांत्रिक मूल्यों, नारी सशक्तिकरण तथा विकसित भारत के संकल्प को अपना जीवन ध्येय बनाकर राष्ट्र की उन्नति में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त करेगा नई ऊंचाइयां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को और अधिक गौरवशाली बना दिया है। यह अवसर न केवल विश्वविद्यालय बल्कि सम्पूर्ण मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का संस्थान नहीं है। यह वीरता, स्वाभिमान और बलिदान की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसे अमर वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने साहस और अदम्य पराक्रम से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना के विरुद्ध अनेक युद्ध लड़कर अपनी असाधारण वीरता का परिचय दिया और मातृभूमि की स्वतंत्रता तथा सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमर प्रेरणा का उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। यहां से निकलने वाली प्रतिभाएं देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अनेक विद्यार्थियों द्वारा एक से अधिक स्वर्ण पदक अर्जित करना प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है। विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है और मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की सकल नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होकर 28.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्कूल शिक्षा में ड्रॉपआउट दर को शून्य के करीब लाने के प्रयास सफल रहे हैं। प्रदेश सरकार ने तीन नए शासकीय विश्वविद्यालयों की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण, तकनीकी एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने से प्रदेश में किसान कल्यारण वर्ष अंतर्गत कृषि एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ ही नवाचार आधारित अध्ययन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे युवा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकें और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने स्मृति चिन्ह भेंट कर राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। स्वागत भाषण में कुलगुरु डॉ. वर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने पहली बार एनएएसी से A+ ग्रेड प्राप्त किया है, जो संस्थान के लिए गौरव का विषय है। स्वर्ण पदक धारकों एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं का राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री के साथ संयुक्त छायाचित्र समारोह का विशेष आकर्षण रहा। विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन की अविस्मरणीय उपलब्धि बताया।

कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार, राज्य सभा सांसद सुमित्रा वाल्मीक, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह, विधायक सर्वअशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, लखन घनघोरिया, अखिलेश जैन, संभागायुक्त धनंजय सिंह, कलेक्टार राघवेन्द्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर 15 हजार से अधिक श्रमिकों ने किया सामूहिक योगाभ्यास

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भोपाल : श्रम और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रदेश के श्रमिकों के कल्याण और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए उन्हें योग से जुड़ने का विशेष आह्वान किया था। मंत्री पटेल के इस प्रेरक आह्वान का असर पूरे प्रदेश में देखने को मिला! अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राज्य के औद्योगिक और विभिन्न कार्यक्षेत्रों में श्रमिकों ने बढ़-चढ़कर योगाभ्यास किया। प्रदेश के कुल 337 संस्थानों में 15 हजार से अधिक श्रमिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

सचिव श्रम रघुराज राजेंद्रन ने कहा कि योग किसी एक दिवस तक सीमित न होकर, श्रमिकों के दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि श्रमिक प्रतिदिन योग से जुड़ें, जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रह सकें। एक स्वस्थ और ऊर्जावान श्रमिक ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण और प्रदेश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

श्रम विभाग और मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल के प्रयासों से आयोजित इस प्रदेश स्तरीय योग कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। श्रम मंत्री पटेल ने स्वयं जबलपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उपस्थित होकर श्रमिकों के साथ योग किया। इसी क्रम में, श्रम आयुक्त संदीप जी आर ने इंदौर के एमराल्ड हाइट्स स्कूल में आयोजित मंडल के विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से प्राप्त तस्वीरों और जानकारियों के अनुसार, सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होकर श्रमिकों का उत्साहवर्धन किया।
 

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