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एसएसपी दफ्तर के पास फायरिंग से हड़कंप, पुलिस ने शुरू की जांच

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जमशेदपुर। औद्योगिक नगरी में बेखौफ अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और कानून व्यवस्था का डर जैसे पूरी तरह काफूर हो चुका है। इसका सबसे ताजा और सनसनीखेज उदाहरण शुक्रवार की रात उस समय देखने को मिला, जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित व्यस्त जुबिली रोड गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। एक दुस्साहसी युवक, जिसने पीली टी-शर्ट और काली टोपी पहन रखी थी, ने अत्यधिक भीड़-भाड़ वाले इस व्यावसायिक क्षेत्र में सरेआम फायरिंग कर पुलिस की चौकसी को खुली चुनौती दे डाली।

भीड़ के बीच अचानक हवाई फायरिंग से मची भगदड़

यह वारदात शुक्रवार रात करीब 9:20 बजे की बताई जा रही है। जुबिली रोड पर स्थित 'अभिषेक जुबिली' नामक प्रतिष्ठान के समीप अचानक हुई इस गोलाबारी से पूरा इलाका दहल उठा। जिस वक्त इस वारदात को अंजाम दिया गया, उस समय दुकान के इर्द-गिर्द करीब 40 से 50 लोगों की मौजूदगी थी, जो रोजमर्रा की तरह वहां चाय-नाश्ते और आपसी गुफ्तगू में मग्न थे। इसी दौरान एक युवक सामान्य रूप से पैदल चलता हुआ दुकान के पास पहुंचा और कमर से कट्टा निकालकर हवा में गोली दाग दी। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद नागरिकों में अपनी जान बचाने के लिए चीख-पुकार और भगदड़ मच गई।

दहशत में सिमटा बाजार और सीसीटीवी में कैद हुआ हमलावर

फायरिंग की आवाज से इलाके के व्यापारियों और राहगीरों में इस कदर खौफ फैल गया कि आसपास के चाय दुकानदारों और अन्य ठेला संचालकों ने आनन-फानन में अपनी दुकानें बंद कर दीं। इधर वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बिना किसी हड़बड़ाहट के बेहद इत्मीनान से पैदल चलते हुए सड़क के पार गया। उसने पहले से ही सड़क के दूसरी ओर एक सुरक्षित दूरी पर अपनी गाड़ी खड़ी कर रखी थी, ताकि भागने में आसानी हो। वह उसी वाहन में सवार होकर रफूचक्कर हो गया। सूचना मिलते ही साकची थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची और घटना स्थल से एक खाली खोखा बरामद कर आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है, जिसमें आरोपी का सुराग मिला है।

एसएसपी दफ्तर के पास वारदात से सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल

जिला पुलिस मुख्यालय यानी एसएसपी कार्यालय और साकची थाने के इतने करीब हुए इस दुस्साहसिक कृत्य ने शहर की रात्रि गश्ती और सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि जब अपराधी पुलिस के सबसे बड़े दफ्तर के नाक के नीचे ऐसी वारदात करने से नहीं हिचक रहे हैं, तो आम गलियों और मोहल्लों की सुरक्षा का भगवान ही मालिक है। पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साकची थाना पुलिस को फुटेज के आधार पर शूटर की पहचान कर उसकी अविलंब गिरफ्तारी के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

ओडिशा को बड़ी सौगात देने पहुंचे पीएम मोदी, हजारों करोड़ की परियोजनाओं का करेंगे लोकार्पण

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रैरंगपुर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को अपने एक दिवसीय आधिकारिक दौरे के तहत ओडिशा राज्य पहुंचे। इस विशेष प्रवास के दौरान वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार के सफलतापूर्वक दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य समारोह का हिस्सा बनेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री राज्य को 47,600 करोड़ रुपये से भी अधिक लागत वाली विभिन्न जनकल्याणकारी और ढांचागत विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे। इससे पूर्व, पश्चिम बंगाल के कलाइकुंडा वायुसेना स्टेशन से रवाना हुआ प्रधानमंत्री का विशेष एमआई-17 हेलीकॉप्टर मयूरभंज जिले के पहाड़पुर हेलीपैड पर उतरा, जहां ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने फूलों के गुलदस्ते भेंट कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया।

राष्ट्रपति के पैतृक गांव में आगमन और वर्षगांठ समारोह का उल्लास

हेलीपैड पर औपचारिक स्वागत के पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ससुराल के पैतृक गांव पहाड़पुर के लिए प्रस्थान कर गए। पहाड़पुर में आयोजित स्थानीय कार्यक्रमों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एक साथ सम्मिलित हुए, जिसके उपरांत दोनों शीर्ष नेता राज्य सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में आयोजित मुख्य समारोह के लिए निकटवर्ती क्षेत्र रायरांगपुर पहुंचे। सरकार की इस गौरवशाली यात्रा के उत्सव को "विकास रा धारा, ओडिशा सारा" (अर्थात संपूर्ण ओडिशा में विकास की अविरल धारा) की विशेष थीम के अंतर्गत अत्यंत उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। विशेष बात यह भी रही कि राष्ट्रपति मुर्मू अपने 68वें जन्मदिन के अवसर पर अपने इस पैतृक क्षेत्र में पहुंची थीं, जहां स्थानीय समाज द्वारा पारंपरिक और रंगारंग तरीके से उनका भव्य स्वागत किया गया।

हजारों करोड़ की महापरियोजनाओं की सौगात और औद्योगिक अवसंरचना

इस विकास उत्सव के मंच से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री संयुक्त रूप से ऊर्जा, औद्योगिक अवसंरचना, परिवहन, पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, पर्यटन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी 47,600 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में मुख्य रूप से 600 मेगावाट क्षमता वाली 'अपर इंद्रावती पंप स्टोरेज परियोजना' और 'आईबी थर्मल पावर स्टेशन' का द्वितीय चरण विस्तार शामिल है, जिसके तहत 660-660 मेगावाट की दो नई बिजली इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर क्षेत्र में 'भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड' (बीसीजीसीएल) परियोजना की नींव भी रखी जाएगी, जो राज्य के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

शहरी विकास, कनेक्टिविटी विस्तार और डबल इंजन सरकार का संकल्प

इन वृहद ढांचागत सुधारों के अंतर्गत भुवनेश्वर में दैनिक 300 टन कचरे की क्षमता वाला सॉलिड वेस्ट-टू-कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट, कटक और भुवनेश्वर को जोड़ने के लिए काठाजोड़ी नदी पर एक नए पुल का निर्माण तथा नुआपड़ा-घाटीपाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-353) का फोर-लेन चौड़ीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही बौध जिले की आंतरिक सड़कों का सुदृढ़ीकरण, कुसुमदिही मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना, इग्नू का क्षेत्रीय केंद्र और रायरांगपुर में एक आधुनिक इनडोर बैडमिंटन परिसर की स्थापना की जाएगी। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उड़ीसा के इतिहास में एक नया मील का पत्थर बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की यह 'डबल इंजन सरकार' रिकॉर्ड निवेश और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलावों के जरिए ओडिशा को 'विकसित भारत' का एक अग्रणी और समृद्ध विकास इंजन बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कनाडा में घर पर हुई फायरिंग को याद कर भावुक हुए गिप्पी ग्रेवाल, बोले- समझ नहीं आया क्यों हुआ हमला

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साल 2023 में कनाडा के मशहूर शहर वैंकूवर में पंजाबी सिनेमा के दिग्गज गायक और अभिनेता गिप्पी ग्रेवाल के आवास के बाहर हुई अंधाधुंध गोलीबारी ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया था। इस सनसनीखेज वारदात के लंबे समय बाद अब खुद सिंगर ने इस खौफनाक हादसे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। गिप्पी ग्रेवाल ने स्वीकार किया कि इस जानलेवा हमले ने उन्हें पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था, क्योंकि इस वारदात के होने से पहले उन्हें किसी भी अज्ञात नंबर या आपराधिक संगठन से कोई धमकी भरा फोन नहीं आया था। उन्होंने बताया कि उन्हें दूर-दूर तक इस बात का अंदेशा नहीं था कि कोई उन्हें या उनके परिवार को इस तरह निशाना बना सकता है।

चैट शो में बयां किया उस खौफनाक रात का सच

एक विशेष टॉक शो के दौरान दर्शकों से रूबरू होते हुए गिप्पी ग्रेवाल ने उस डरावनी घटना की परतें खोलीं। उन्होंने कहा, "जब मेरे वैंकूवर वाले घर के बाहर अचानक गोलियां चलने की आवाज आई, तो सच कहूं तो मैं और मेरा पूरा परिवार गहरे सदमे में थे। हमें बिल्कुल समझ नहीं आ रहा था कि कोई हमारे साथ ऐसा क्यों करेगा। न तो मेरे पास रंगदारी (फिरौती) के लिए कोई कॉल आई थी और न ही किसी ने मुझे पहले आगाह किया था।"

फेसबुक पोस्ट के जरिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी जिम्मेदारी

इस खौफनाक वारदात के कुछ समय बाद इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिससे इस हमले के पीछे की वजह साफ हो सकी। घटना के तुरंत बाद सामने आए एक फेसबुक पोस्ट के जरिए कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने इस गोलीबारी की पूरी जिम्मेदारी ली थी। सोशल मीडिया पर प्रसारित उस संदेश में दावा किया गया था कि यह हमला गिप्पी ग्रेवाल के बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान के साथ कथित दोस्ताना संबंधों और नजदीकियों के विरोध में एक सीधी चेतावनी था। इसके साथ ही उस पोस्ट में मनोरंजन उद्योग से जुड़े अन्य लोगों को भी सलमान खान से दूर रहने की खुली धमकी दी गई थी।

सलमान खान के साथ करीबी रिश्तों के दावों को किया खारिज

इंटरव्यू के दौरान गिप्पी ने सलमान खान के साथ अपने समीकरणों पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि उनके बीच कोई पारिवारिक या बेहद गहरी दोस्ती नहीं है। गिप्पी ने स्पष्ट करते हुए कहा, "वास्तविकता यह है कि मैं सलमान सर से अपनी पूरी जिंदगी में सिर्फ दो या तीन बार ही मिला हूँ। हमारी मुलाकातें केवल पेशेवर थीं, जैसे जब मैं अपनी फिल्मों के प्रचार के सिलसिले में रियलिटी शो 'बिग बॉस' के सेट पर गया था या फिर एक फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान हम साथ दिखे थे। हमारे बीच कोई निजी करीबी रिश्ता या लगातार बातचीत नहीं होती थी। लेकिन हमलावरों ने हमारी इस औपचारिक मुलाकात को कुछ और ही समझ लिया और इसी गलतफहमी के चलते मेरे घर को निशाना बनाया गया।"

गिप्पी की इन बातों से साफ है कि वे इस पूरी घटना को एक बड़ी गलतफहमी का नतीजा मानते हैं, जिसने उनके और उनके परिवार के मन में सुरक्षा को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए थे। फिलहाल, इस खुलासे के बाद फैंस और उनके शुभचिंतक कलाकार की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

तेज रफ्तार ट्रक बना काल, स्कूटी सवार भाई-बहनों में दो की गई जान

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लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा-गुमला मुख्य मार्ग पर स्थित मिशन चौक के समीप शुक्रवार की देर रात एक अत्यंत दर्दनाक और हृदयविदारक सड़क दुर्घटना घटित हुई। इस भीषण हादसे में स्कूटी पर सवार होकर जा रही दो सगी बहनों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद सगा भाई गंभीर रूप से जख्मी हो गया। दुर्घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही घायल भाई ने भी दम तोड़ दिया। इस हादसे ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को पल भर में मातम में बदल दिया।

शादी समारोह की खुशियां मातम में बदलीं

प्राप्त विवरण के अनुसार, लोहरदगा शहरी क्षेत्र के बरवाटोली के रहने वाले स्वर्गीय मुकेश साहू के तीन बच्चे- रोहित कुमार साहू अपनी दोनों बहनों सपना कुमारी और सृष्टि कुमारी के साथ स्कूटी पर सवार होकर सेन्हा रोड स्थित तेली धर्मशाला में आयोजित एक विवाह उत्सव में सम्मिलित होने के लिए निकले थे। जैसे ही उनकी स्कूटी मिशन चौक के पास पहुंची, तभी सेन्हा की दिशा से बेहद लापरवाही और तेज गति से आ रहे एक बॉक्साइट लदे भारी ट्रक ने स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी और उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

स्थानीय निवासियों द्वारा रेस्क्यू और अस्पताल में दम तोड़ना

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों भाई-बहन वाहन सहित ट्रक के नीचे फंस गए, जबकि दुर्घटना को अंजाम देने के बाद चालक मौके पर ही ट्रक छोड़कर फरार हो गया। घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत राहत कार्य शुरू किया और तीनों को ट्रक के नीचे से निकालकर आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचाया। वहां परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने दोनों बहनों सपना और सृष्टि को मृत घोषित कर दिया, वहीं तड़प रहे रोहित को गंभीर हालत में रिम्स (रांची) रेफर किया गया, परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था और रास्ते में ही उसकी भी सांसें थम गईं।

पुलिसिया कार्रवाई और समूचे क्षेत्र में पसरा सन्नाटा

आकस्मिक हादसे की भनक लगते ही स्थानीय थाना पुलिस तुरंत घटना स्थल पर पहुंची और दुर्घटनाकारित ट्रक को अपने कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। एक ही घर के तीन चिरागों के इस तरह असमय बुझ जाने से बरवाटोली मोहल्ले सहित पूरे लोहरदगा शहर में गहरा शोक व्याप्त है। शादी वाले घर में जहां कुछ समय पहले तक शहनाइयां गूंज रही थीं, वहां इस मनहूस खबर के पहुंचते ही कोहराम मच गया और पुलिस आरोपी चालक की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

राम मंदिर चंदा मामले में बड़ा दावा, डॉ. अनिल मिश्र पर 40% कमीशन लेने का आरोप

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर समय-समय पर होने वाले विवादों के बीच अब एक नया प्रशासनिक गतिरोध खुलकर सामने आ गया है। राम मंदिर निर्माण कार्यों की तकनीकी देखरेख से जुड़े रहे सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए एक साक्षात्कार में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्र पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप मढ़े हैं। गौरतलब है कि इससे पहले टिन्नू यादव नामक व्यक्ति भी ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा चुके हैं।

पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने सनसनीखेज दावा किया है कि मंदिर परिसर के भीतर बन रहे आधिकारिक कार्यालय (ऑफिस) में एल्युमिनियम से जुड़े कार्यों को कराने के एवज में एक संबंधित वेंडर से कथित तौर पर 40 फीसदी कमीशन की मांग की गई थी। उनका आरोप है कि इस अवैध हिस्सेदारी को एडजस्ट करने के उद्देश्य से ही वास्तविक कार्य के सरकारी बिल को भी करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ाकर कागजों पर तैयार करवाया गया था।

कॉल रिकॉर्डिंग होने का दावा, शिकायत के बाद काम से हटाने का आरोप

इंजीनियर वर्मा के अनुसार, उन्होंने इस पूरी वित्तीय गड़बड़ी और बढ़े हुए बिल पर कड़ी तकनीकी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने इस मामले की पूरी शिकायत साक्ष्यों के साथ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के समक्ष भी उठाई थी। उनका दावा है कि उन्होंने इस कथित सौदेबाजी से जुड़ी एक गोपनीय कॉल रिकॉर्डिंग भी आला अधिकारियों को सुनवायी थी, लेकिन इस पर सुधारात्मक कदम उठाने के बजाय उल्टे उन्हें ही मंदिर निर्माण के इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बेदखल कर दिया गया। अपने वक्तव्य में दीनानाथ वर्मा ने उस दौरान जमीनी स्तर पर काम देख रहे एक कर्मी रवि गुप्ता का भी विशेष रूप से नाम लिया।

कथित कर्मी ने सामने आकर आरोपों को नकारा, बताया निराधार

हालांकि, भ्रष्टाचार के ये आरोप सार्वजनिक मंच पर आने के कुछ ही घंटों के भीतर इस मामले में नया मोड़ आ गया। मामले में नामजद कर्मी रवि गुप्ता ने स्वयं इंटरनेट मीडिया पर लाइव आकर इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। रवि गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्र पर लगाए जा रहे ये लांछन पूरी तरह से मनगढ़ंत, तथ्यहीन और वास्तविकता से परे हैं। उन्होंने वास्तविक घटनाक्रम बताते हुए कहा कि राम कचहरी मंदिर परिसर में बन रहे ट्रस्ट कार्यालय के निर्माण कार्य को लेकर प्रशासनिक तौर पर उनसे एक कोटेशन (मूल्य सूची) मांगी गई थी।

नए टेंडर के तहत पारदर्शी तरीके से पूरा हुआ निर्माण कार्य

रवि गुप्ता ने बताया कि शुरुआती कोटेशन जमा करने के बाद कई दिनों तक उन्हें विभाग से कोई जवाब नहीं मिला। बाद में उन्हें पता चला कि तत्कालीन इंजीनियर दीनानाथ वर्मा किसी अन्य एजेंसी के जरिए वह काम करवा रहे हैं। हालांकि, वह कार्य तकनीकी या वित्तीय कारणों से बीच में ही लटक गया, जिसके बाद ट्रस्ट ने उन्हें दोबारा साइट पर बुलाया। वहां नए सिरे से पूरी माप-जोख की गई और पारदर्शी तरीके से नया कोटेशन स्वीकृत होने के बाद ही निर्माण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कराया गया।

ठेकेदार रवि गुप्ता ने दो टूक लहजे में कहा, "यह पूरा काम मेरी देखरेख में हुआ है और इसके भुगतान सीधे खाते में आए हैं। पूरे कार्यकाल के दौरान किसी भी अधिकारी या सदस्य द्वारा कभी भी किसी प्रकार की रिश्वत या कमीशन की कोई बात नहीं की गई। यदि पूर्व इंजीनियर के पास अपने दावों को सच साबित करने वाले कोई पुख्ता दस्तावेज या सबूत हैं, तो वे उन्हें छिपाने के बजाय सार्वजनिक करें। मैं उनके इन आरोपों को पूरी तरह झूठ करार देता हूँ।"

फिलहाल, अयोध्या की इस पावन धरा पर बना यह संवेदनशील मामला केवल जुबानी दावों और पलटवार तक सीमित है। यदि भविष्य में किसी अधिकृत जांच एजेंसी द्वारा इन तकनीकी और वित्तीय फाइलों की गहराई से समीक्षा की जाती है, तभी इस पूरे विवाद का सच सामने आ सकेगा।

केरल में बच्चों के शोषण का मामला, CWC जांच में सामने आईं हैरान करने वाली जानकारियां

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पथानामथिट्टा। केरल के पथानामथिट्टा जिले में संचालित एक ईसाई प्रार्थना केंद्र में रह रहे 17 वर्षीय किशोर द्वारा संस्थान के स्टाफ पर बेरहमी से मारपीट करने का सनसनीखेज आरोप लगाने के बाद हड़कंप मच गया है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने जब अपनी शुरुआती जांच आगे बढ़ाई, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि न केवल वह शिकायतकर्ता लड़का, बल्कि वहां रहने वाले कई अन्य नाबालिग बच्चे भी लंबे समय से कर्मचारियों के दुर्व्यवहार, अमानवीय व्यवहार और शारीरिक शोषण का सामना कर रहे थे। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने शनिवार को इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की सघन कानूनी जांच जारी है।

शिक्षा और नौकरी के झांसे में बंधक बनाकर शोषण का खेल

यह पूरा मामला सबसे पहले 17 जून को इडुक्की जनपद के कट्टप्पना पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था, जहां अनाक्कारा के रहने वाले एक किशोर पर जानलेवा हमला करने के आरोप में 'एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर' के तीन कर्मचारियों के खिलाफ नामजद मुकदमा कायम किया गया। जांच में पता चला है कि बेहद गरीब और आर्थिक रूप से लाचार परिवारों के बच्चों को पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने और बाद में अच्छी नौकरी दिलवाने का बड़ा प्रलोभन देकर इस केंद्र में लाया जाता था। पीड़ित किशोर भी पिछले कुछ महीनों से इसी सुनहरे भविष्य की चाह में यहां आया था, लेकिन केंद्र संचालकों ने उसे स्कूल भेजने के बजाय बंधक बनाकर जबरन मजदूरी करानी शुरू कर दी और विरोध करने पर उसके साथ क्रूरता से मारपीट की जाती थी।

प्रार्थना केंद्र पर जड़ा ताला और अवैध रूप से रखे गए बच्चे का रेस्क्यू

मामले की गंभीरता और न्यायिक क्षेत्र को देखते हुए केस को तत्काल पथानामथिट्टा के एलावुमथिट्टा पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया है। सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष लीना के सुभाष ने आधिकारिक तौर पर बताया कि इन गंभीर आरोपों और अनियमिताओं के उजागर होने के तुरंत बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त प्रार्थना केंद्र को पूरी तरह से बंद करवा दिया है। सीडब्ल्यूसी की टीम ने वहां अवैध रूप से रखे गए एक अन्य बच्चे को भी सकुशल रेस्क्यू (बचाव) किया है, जिसकी चिकित्सीय जांच (मेडिकल टेस्ट) कराने पर उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वहां बिना किसी प्रशासनिक अनुमति और पंजीकरण के रह रहे कई बुजुर्गों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

बिना वेतन के मजदूरी और किशोर न्याय अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज

बाल कल्याण समिति के अनुसार, केंद्र में रहने वाले बच्चों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि उन्हें सुबह से रात तक बिना कोई वेतन या पारिश्रमिक दिए जबरन कमरतोड़ काम करने के लिए विवश किया जाता था। समिति को यह भी इनपुट मिला है कि एक मां और उसका बच्चा भी वहां रह रहे थे जो फिलहाल लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। पुलिस प्रशासन ने बाल उत्पीड़न और बंधुआ मजदूरी के इस गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ 'किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम' (जेजे एक्ट) के साथ-साथ 'भारतीय न्याय संहिता' की विभिन्न संगीन और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

काशी के आसमान में रोमांच का संगम, एयर शो में दिखेगा भारतीय विमानन का दम

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में आगामी अक्तूबर महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाले भारतीय वायुसेना (IAF) के मेगा एयर शो को लेकर जिला प्रशासन और वायुसेना के आला अधिकारियों ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। वायुसेना मुख्यालय से मिले इनपुट्स के मुताबिक, इस हैरतअंगेज और ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए करीब 20 लाख लोगों के जुटने की संभावना है। इतनी बड़ी तादाद में आने वाले जनसैलाब को संभालने और बेहतर क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ नियंत्रण) के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। मुख्य आयोजन स्थल नमो घाट पर अतिविशिष्ट मेहमानों के लिए करीब 2500 लोगों की दर्शक दीर्घा तैयार की जाएगी।

90 घाटों और गंगा पार रेती पर उमड़ेगी भीड़, अस्सी घाट पर ही जुटेंगे 30 हजार दर्शक

प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, वायुसेना के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के इस शौर्य प्रदर्शन के दौरान नमो घाट से लेकर अस्सी घाट के बीच पड़ने वाले सभी 90 घाटों और गंगा नदी के उस पार मौजूद रेतीले मैदान (डोमरी क्षेत्र) का नजारा बिल्कुल देव दीपावली जैसा अलौकिक रहेगा। सुरक्षा अनुमानों के मुताबिक, अकेले अस्सी घाट पर करीब 30 हजार दर्शक मौजूद रहेंगे, जबकि अन्य प्रत्येक घाट पर 10 से 20 हजार लोगों के खड़े होने की संभावना है। इसके अलावा गंगा पार डोमरी के रेतीले इलाकों में भी दर्शकों के बैठने के लिए विशेष सेक्टर बनाए जा रहे हैं।

पीएम मोदी, रक्षा मंत्री सहित कई वीवीआईपी (VVIP) होंगे शामिल, पड़ोसी जिलों से भी आएंगे लोग

वायुसेना ने स्थानीय प्रशासन को सचेत किया है कि इस रोमांचक शो को देखने के लिए न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के पड़ोसी जिलों जैसे चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर से भी लाखों की संख्या में खेल और रक्षा प्रेमी काशी पहुंचेंगे। इस राष्ट्रीय आयोजन में देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय रक्षा मंत्री, तीनों थल-जल-नभ सेनाओं के प्रमुखों (चीफ ऑफ स्टाफ) सहित देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। नमो घाट पर इन विशिष्ट अतिथियों के लिए एक भव्य और अभेद्य सुरक्षा वाला मुख्य मंच तैयार किया जा रहा है, जहां 500 वीवीआईपी मेहमान बैठ सकेंगे।

इसके ठीक बगल में दो हजार की क्षमता वाला एक अन्य बड़ा मंच तैयार होगा। आम जनता के लिए घाटों की तरफ विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, जिससे मुख्य घाटों के किनारे ही एक साथ छह लाख से अधिक लोग बैठकर हवाई करतबों का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा, गंगा पार रेती पर कड़े घेराव (बैरिकेडिंग) के जरिए दर्शकों को नियंत्रित किया जाएगा। घाटों के सामने स्थित ऊंची इमारतों और होटलों की छतों को भी सुरक्षा मानकों के तहत चिन्हित किया जा रहा है।

सुरक्षा के कड़े पहरे: एयर शो के दौरान गंगा में लागू रहेगा 'नो बोट जोन'

हवाई प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा होगी। इसके लिए पुलिस कमिश्नरेट और जिला प्रशासन अभी से संयुक्त मॉक ड्रिल और रणनीति बनाने में जुटा है। वायुसेना के नियमों के तहत, एयर शो शुरू होने से एक घंटे पहले और शो खत्म होने के एक घंटे बाद तक पूरी गंगा नदी में 'नो-बोट जोन' (नावों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध) लागू रहेगा। मानसून और बारिश के बाद घाटों व रेती पर जमा होने वाली सिल्ट (मिट्टी और कीचड़) को समय से पहले हटाने के लिए नगर निगम और जलकल विभाग को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

20 अक्तूबर से काशी के आसमान में गूंजेगी 'सूर्य किरण' विमानों की गर्जना

एयरपोर्ट अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आगामी 20 अक्तूबर से भारतीय वायुसेना की विश्व प्रसिद्ध 'सूर्य किरण एरोबेटिक टीम' के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और सूर्यकिरण टोली वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर लैंड करना शुरू कर देगी। इन विमानों की सुरक्षित पार्किंग, तकनीकी जांच और एटीएफ (ईंधन) की विशेष व्यवस्था स्थानीय हवाई अड्डा प्रशासन द्वारा की जाएगी। मुख्य शो से पहले ये विमान लगातार पांच दिनों तक काशी के आसमान में कड़ा अभ्यास (रिहर्सल) करेंगे, जिसके बाद पूरी दुनिया भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों के हैरतअंगेज और रोंगटे खड़े कर देने वाले आसमानी करतबों की गवाह बनेगी।

सूरजगढ़ की बेटी अरशाया का बड़ा मुकाम, इटली फुटबॉल टीम की बनीं कप्तान

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झुंझुनूं। राजस्थान के शेखावाटी अंचल की एक और होनहार बेटी ने खेल की दुनिया में वैश्विक पटल पर अपना और अपने क्षेत्र का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया है। झुंझुनूं जिले के अंतर्गत आने वाले सूरजगढ़ की मूल निवासी और मंड्रेला की भांजी अरशाया शर्मा को प्रतिष्ठित 'यूनाइटेड वर्ल्ड गेम्स फुटबॉल प्रतियोगिता' के लिए इटली की अंडर-13 राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की कमान सौंपी गई है। अरशाया को टीम का कप्तान बनाए जाने की इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद से ही उनके पैतृक गांव और ननिहाल सहित पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास का माहौल है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कप्तानी और ऑस्ट्रिया के खिलाफ पहला मुकाबला

इटली की धरती पर आयोजित हो रहे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट में अरशाया शर्मा शनिवार को बतौर कप्तान अपनी टीम की अगुवाई करते हुए ऑस्ट्रिया के विरुद्ध होने वाले कड़े मुकाबले में मैदान पर उतरेंगी। इतनी छोटी उम्र में एक विदेशी और मजबूत फुटबॉल टीम का नेतृत्व मिलना अरशाया की असाधारण खेल प्रतिभा, अद्वितीय मैदान सूझबूझ, कड़े अनुशासन और उनकी बरसों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल माना जा रहा है, जिससे भारत की बेटी का मान सात समंदर पार बढ़ा है।

ननिहाल व पैतृक क्षेत्र में जश्न और परिजनों में गर्व की अनुभूति

जैसे ही अरशाया को कप्तान चुने जाने की सूचना उनके ननिहाल मंड्रेला और पैतृक कस्बे सूरजगढ़ पहुंची, वैसे ही ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटकर इस कामयाबी का जश्न मनाया। इस स्वर्णिम अवसर पर उनके नाना डॉ. बी.के. शर्मा, मामा दीपक भारद्वाज और आकाश भारद्वाज सहित पूरे परिवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह न केवल उनके कुल के लिए बल्कि समूचे राजस्थान के लिए एक गौरवमयी क्षण है। सभी शुभचिंतकों ने दूरभाष के माध्यम से अरशाया को आगामी मैचों में शानदार प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

बचपन का अटूट लगाव और ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए नई प्रेरणा

इस बड़ी उपलब्धि पर स्वयं अरशाया शर्मा ने सुदूर इटली से संवाद करते हुए बताया कि अंडर-13 टीम का नेतृत्व करना उनके जीवन का अब तक का सबसे सुखद और अविस्मरणीय अनुभव है। फुटबॉल के प्रति उनका जुनून बचपन से ही था, जिसे उन्होंने नियमित अभ्यास के दम पर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। स्थानीय खेल समीक्षकों का मानना है कि अरशाया की यह अंतरराष्ट्रीय सफलता ग्रामीण अंचल की उन हजारों बेटियों के लिए एक महान प्रेरणा का स्रोत बनेगी जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में अपना भविष्य तलाश रही हैं, जिससे लड़कियों के भीतर एक नया आत्मविश्वास जागृत होगा।

री-नीट 2026 से पहले जयपुर में बड़ा एक्शन, 30 से अधिक संदिग्धों पर एजेंसियों की नजर

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जयपुर। री-नीट 2026 परीक्षा के आयोजन से ठीक पहले किसी भी प्रकार की संभावित धांधली, नकल या पेपर लीक की आशंकाओं को समूल नष्ट करने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर की खुफिया एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने विगत पांच दिनों के भीतर जयपुर में स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ एक संयुक्त अभियान चलाकर करीब 30 संदिग्धों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की है। गौरतलब है कि देश भर में रविवार को इस महत्वपूर्ण पुनः परीक्षा का आयोजन होने जा रहा है, जिसे लेकर सुरक्षा चक्र बेहद कड़ा कर दिया गया है।

हजारों अभ्यर्थियों के लिए केंद्रों का गठन और प्रशासनिक चौकसी

इस परीक्षा को निष्पक्षता से संपन्न कराने के लिए जयपुर जिले में प्रशासन ने विशेष और अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत जिले के कुल 103 परीक्षा केंद्रों पर 37,108 परीक्षार्थी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, जिनमें से 84 परीक्षा केंद्र सरकारी शिक्षण संस्थानों में और 19 केंद्र निजी विद्यालयों में स्थापित किए गए हैं। संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया पर पैनी नजर रखने के लिए 24 आरएएस (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) अधिकारियों को फ्लाइंग ऑफिसर और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों और महाराजा कॉलेज के उपाचार्य सहित 6 सिटी को-ऑर्डिनेटर भी व्यवस्था संभाल रहे हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी सर्विलांस, जैमर, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

संदिग्धों से पूछताछ और खुफिया इनपुट के आधार पर निगरानी सूची तैयार

सुरक्षा एजेंसियों की इस एहतियाती कार्रवाई के सिलसिले में शुक्रवार को भी जयपुर पूर्व जिला क्षेत्र से पांच संदिग्धों को बुलाकर पूछताछ की गई। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद इन सभी को छोड़ दिया गया और अब तक इस मामले में किसी की औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज नहीं हुई है। इसके बावजूद, पूछताछ के दौरान मिले महत्वपूर्ण इनपुट्स के आधार पर एजेंसियों ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में एक दर्जन से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों को विशेष सर्विलांस लिस्ट (निगरानी सूची) में शामिल किया गया है। इन सभी के मोबाइल संपर्कों, दैनिक गतिविधियों और सोशल मीडिया नेटवर्क्स की चौबीसों घंटे सघन मॉनिटरिंग की जा रही है।

नकल गिरोहों पर नकेल कसने की कवायद और लीक की खबरों का खंडन

खुफिया और तकनीकी शाखाएं परीक्षा से ठीक पहले किसी भी संगठित नकल माफिया, सॉल्वर गैंग या अवैध गतिविधियों को पूरी तरह निष्क्रिय करने के लिए लगातार धरातल से सूचनाएं एकत्र कर रही हैं। डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी डेटा के विश्लेषण के जरिए इस पूरे तंत्र पर नजर रखी जा रही है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी आधिकारिक सुरक्षा एजेंसी या बोर्ड ने पेपर लीक जैसी किसी घटना की पुष्टि नहीं की है। उच्चाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी कवायद केवल एहतियात के तौर पर की जा रही है, ताकि योग्य छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके और पूरी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

आरपीएससी में दो नए मेंबर नियुक्त, संघ पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा तेज

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जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में दो नए सदस्यों के आगमन के साथ ही इसके शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार ने प्रो. संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा को आयोग के नए सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही, जब तक किसी स्थायी चेयरमैन का चयन नहीं हो जाता, तब तक के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किए गए वरिष्ठतम सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) केसरी सिंह राठौड़ को आयोग का कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।

राज्यपाल ने जारी किए आदेश और छह वर्ष का रहेगा कार्यकाल

राजभवन से शुक्रवार की देर रात राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा इन नियुक्तियों से जुड़े आधिकारिक आदेश जारी किए गए। स्थापित नियमों के अनुसार, दोनों नवनियुक्त सदस्यों का सेवाकाल अपना पदभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी छह वर्ष तक अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी होने (जो भी पहले हो) तक मान्य रहेगा। यह प्रशासनिक पुनर्गठन ठीक उस समय हुआ है जब आरपीएससी के निवर्तमान अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का कार्यकाल 19 जून को समाप्त हो गया। साहू को मौजूदा सरकार ने जून 2025 में इस पद पर नियुक्त किया था और अब उनके हटने के बाद वरिष्ठता के क्रम में कमान केसरी सिंह राठौड़ को सौंपी गई है।

शिक्षा जगत और वैचारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं दोनों नए चेहरे

आयोग के इन नए चेहरों को लेकर प्रदेश के राजनैतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में काफी चर्चाएं हो रही हैं, क्योंकि दोनों ही नवनियुक्त सदस्य लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। नए सदस्य डॉ. दीपक कुमार शर्मा हाल ही में कॉलेज शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राणीशास्त्र (जूलॉजी) के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और उच्च शिक्षा में कई प्रशासनिक पदों के साथ-साथ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ में सक्रिय रहे हैं। वहीं, दूसरी नई सदस्य प्रो. संतोष आनंद वर्तमान में भीलवाड़ा के एमएलवी राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्य (प्रिंसिपल) के रूप में कार्यरत हैं और वे पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) तथा विद्या भारती जैसे संगठनों में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुकी हैं।

स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति पर टिकी नजरें और आगामी परीक्षाओं की चुनौती

आयोग के खाली पदों को भरे जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भजनलाल सरकार द्वारा आरपीएससी के नए स्थायी अध्यक्ष के रूप में किसके नाम पर मुहर लगाई जाती है। माना जा रहा है कि सरकार बहुत जल्द ही इस शीर्ष पद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि आयोग के पास आने वाले समय में प्रदेश की कई महत्वपूर्ण सरकारी भर्ती परीक्षाओं के आयोजन, उनके परिणाम जारी करने और साक्षात्कार सहित चयन प्रक्रियाओं से जुड़े कई बड़े व संवेदनशील कार्य लंबित पड़े हैं, जिन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना नए विनियामक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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