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काशी के आसमान में रोमांच का संगम, एयर शो में दिखेगा भारतीय विमानन का दम

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में आगामी अक्तूबर महीने के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाले भारतीय वायुसेना (IAF) के मेगा एयर शो को लेकर जिला प्रशासन और वायुसेना के आला अधिकारियों ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। वायुसेना मुख्यालय से मिले इनपुट्स के मुताबिक, इस हैरतअंगेज और ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए करीब 20 लाख लोगों के जुटने की संभावना है। इतनी बड़ी तादाद में आने वाले जनसैलाब को संभालने और बेहतर क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ नियंत्रण) के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। मुख्य आयोजन स्थल नमो घाट पर अतिविशिष्ट मेहमानों के लिए करीब 2500 लोगों की दर्शक दीर्घा तैयार की जाएगी।

90 घाटों और गंगा पार रेती पर उमड़ेगी भीड़, अस्सी घाट पर ही जुटेंगे 30 हजार दर्शक

प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, वायुसेना के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के इस शौर्य प्रदर्शन के दौरान नमो घाट से लेकर अस्सी घाट के बीच पड़ने वाले सभी 90 घाटों और गंगा नदी के उस पार मौजूद रेतीले मैदान (डोमरी क्षेत्र) का नजारा बिल्कुल देव दीपावली जैसा अलौकिक रहेगा। सुरक्षा अनुमानों के मुताबिक, अकेले अस्सी घाट पर करीब 30 हजार दर्शक मौजूद रहेंगे, जबकि अन्य प्रत्येक घाट पर 10 से 20 हजार लोगों के खड़े होने की संभावना है। इसके अलावा गंगा पार डोमरी के रेतीले इलाकों में भी दर्शकों के बैठने के लिए विशेष सेक्टर बनाए जा रहे हैं।

पीएम मोदी, रक्षा मंत्री सहित कई वीवीआईपी (VVIP) होंगे शामिल, पड़ोसी जिलों से भी आएंगे लोग

वायुसेना ने स्थानीय प्रशासन को सचेत किया है कि इस रोमांचक शो को देखने के लिए न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के पड़ोसी जिलों जैसे चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर से भी लाखों की संख्या में खेल और रक्षा प्रेमी काशी पहुंचेंगे। इस राष्ट्रीय आयोजन में देश के प्रधानमंत्री, केंद्रीय रक्षा मंत्री, तीनों थल-जल-नभ सेनाओं के प्रमुखों (चीफ ऑफ स्टाफ) सहित देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। नमो घाट पर इन विशिष्ट अतिथियों के लिए एक भव्य और अभेद्य सुरक्षा वाला मुख्य मंच तैयार किया जा रहा है, जहां 500 वीवीआईपी मेहमान बैठ सकेंगे।

इसके ठीक बगल में दो हजार की क्षमता वाला एक अन्य बड़ा मंच तैयार होगा। आम जनता के लिए घाटों की तरफ विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, जिससे मुख्य घाटों के किनारे ही एक साथ छह लाख से अधिक लोग बैठकर हवाई करतबों का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा, गंगा पार रेती पर कड़े घेराव (बैरिकेडिंग) के जरिए दर्शकों को नियंत्रित किया जाएगा। घाटों के सामने स्थित ऊंची इमारतों और होटलों की छतों को भी सुरक्षा मानकों के तहत चिन्हित किया जा रहा है।

सुरक्षा के कड़े पहरे: एयर शो के दौरान गंगा में लागू रहेगा 'नो बोट जोन'

हवाई प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा होगी। इसके लिए पुलिस कमिश्नरेट और जिला प्रशासन अभी से संयुक्त मॉक ड्रिल और रणनीति बनाने में जुटा है। वायुसेना के नियमों के तहत, एयर शो शुरू होने से एक घंटे पहले और शो खत्म होने के एक घंटे बाद तक पूरी गंगा नदी में 'नो-बोट जोन' (नावों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध) लागू रहेगा। मानसून और बारिश के बाद घाटों व रेती पर जमा होने वाली सिल्ट (मिट्टी और कीचड़) को समय से पहले हटाने के लिए नगर निगम और जलकल विभाग को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

20 अक्तूबर से काशी के आसमान में गूंजेगी 'सूर्य किरण' विमानों की गर्जना

एयरपोर्ट अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आगामी 20 अक्तूबर से भारतीय वायुसेना की विश्व प्रसिद्ध 'सूर्य किरण एरोबेटिक टीम' के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और सूर्यकिरण टोली वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे पर लैंड करना शुरू कर देगी। इन विमानों की सुरक्षित पार्किंग, तकनीकी जांच और एटीएफ (ईंधन) की विशेष व्यवस्था स्थानीय हवाई अड्डा प्रशासन द्वारा की जाएगी। मुख्य शो से पहले ये विमान लगातार पांच दिनों तक काशी के आसमान में कड़ा अभ्यास (रिहर्सल) करेंगे, जिसके बाद पूरी दुनिया भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों के हैरतअंगेज और रोंगटे खड़े कर देने वाले आसमानी करतबों की गवाह बनेगी।

सूरजगढ़ की बेटी अरशाया का बड़ा मुकाम, इटली फुटबॉल टीम की बनीं कप्तान

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झुंझुनूं। राजस्थान के शेखावाटी अंचल की एक और होनहार बेटी ने खेल की दुनिया में वैश्विक पटल पर अपना और अपने क्षेत्र का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया है। झुंझुनूं जिले के अंतर्गत आने वाले सूरजगढ़ की मूल निवासी और मंड्रेला की भांजी अरशाया शर्मा को प्रतिष्ठित 'यूनाइटेड वर्ल्ड गेम्स फुटबॉल प्रतियोगिता' के लिए इटली की अंडर-13 राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की कमान सौंपी गई है। अरशाया को टीम का कप्तान बनाए जाने की इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद से ही उनके पैतृक गांव और ननिहाल सहित पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास का माहौल है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कप्तानी और ऑस्ट्रिया के खिलाफ पहला मुकाबला

इटली की धरती पर आयोजित हो रहे इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट में अरशाया शर्मा शनिवार को बतौर कप्तान अपनी टीम की अगुवाई करते हुए ऑस्ट्रिया के विरुद्ध होने वाले कड़े मुकाबले में मैदान पर उतरेंगी। इतनी छोटी उम्र में एक विदेशी और मजबूत फुटबॉल टीम का नेतृत्व मिलना अरशाया की असाधारण खेल प्रतिभा, अद्वितीय मैदान सूझबूझ, कड़े अनुशासन और उनकी बरसों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल माना जा रहा है, जिससे भारत की बेटी का मान सात समंदर पार बढ़ा है।

ननिहाल व पैतृक क्षेत्र में जश्न और परिजनों में गर्व की अनुभूति

जैसे ही अरशाया को कप्तान चुने जाने की सूचना उनके ननिहाल मंड्रेला और पैतृक कस्बे सूरजगढ़ पहुंची, वैसे ही ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटकर इस कामयाबी का जश्न मनाया। इस स्वर्णिम अवसर पर उनके नाना डॉ. बी.के. शर्मा, मामा दीपक भारद्वाज और आकाश भारद्वाज सहित पूरे परिवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह न केवल उनके कुल के लिए बल्कि समूचे राजस्थान के लिए एक गौरवमयी क्षण है। सभी शुभचिंतकों ने दूरभाष के माध्यम से अरशाया को आगामी मैचों में शानदार प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

बचपन का अटूट लगाव और ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए नई प्रेरणा

इस बड़ी उपलब्धि पर स्वयं अरशाया शर्मा ने सुदूर इटली से संवाद करते हुए बताया कि अंडर-13 टीम का नेतृत्व करना उनके जीवन का अब तक का सबसे सुखद और अविस्मरणीय अनुभव है। फुटबॉल के प्रति उनका जुनून बचपन से ही था, जिसे उन्होंने नियमित अभ्यास के दम पर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। स्थानीय खेल समीक्षकों का मानना है कि अरशाया की यह अंतरराष्ट्रीय सफलता ग्रामीण अंचल की उन हजारों बेटियों के लिए एक महान प्रेरणा का स्रोत बनेगी जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में अपना भविष्य तलाश रही हैं, जिससे लड़कियों के भीतर एक नया आत्मविश्वास जागृत होगा।

री-नीट 2026 से पहले जयपुर में बड़ा एक्शन, 30 से अधिक संदिग्धों पर एजेंसियों की नजर

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जयपुर। री-नीट 2026 परीक्षा के आयोजन से ठीक पहले किसी भी प्रकार की संभावित धांधली, नकल या पेपर लीक की आशंकाओं को समूल नष्ट करने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर की खुफिया एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने विगत पांच दिनों के भीतर जयपुर में स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ एक संयुक्त अभियान चलाकर करीब 30 संदिग्धों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की है। गौरतलब है कि देश भर में रविवार को इस महत्वपूर्ण पुनः परीक्षा का आयोजन होने जा रहा है, जिसे लेकर सुरक्षा चक्र बेहद कड़ा कर दिया गया है।

हजारों अभ्यर्थियों के लिए केंद्रों का गठन और प्रशासनिक चौकसी

इस परीक्षा को निष्पक्षता से संपन्न कराने के लिए जयपुर जिले में प्रशासन ने विशेष और अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत जिले के कुल 103 परीक्षा केंद्रों पर 37,108 परीक्षार्थी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, जिनमें से 84 परीक्षा केंद्र सरकारी शिक्षण संस्थानों में और 19 केंद्र निजी विद्यालयों में स्थापित किए गए हैं। संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया पर पैनी नजर रखने के लिए 24 आरएएस (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) अधिकारियों को फ्लाइंग ऑफिसर और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों और महाराजा कॉलेज के उपाचार्य सहित 6 सिटी को-ऑर्डिनेटर भी व्यवस्था संभाल रहे हैं। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी सर्विलांस, जैमर, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

संदिग्धों से पूछताछ और खुफिया इनपुट के आधार पर निगरानी सूची तैयार

सुरक्षा एजेंसियों की इस एहतियाती कार्रवाई के सिलसिले में शुक्रवार को भी जयपुर पूर्व जिला क्षेत्र से पांच संदिग्धों को बुलाकर पूछताछ की गई। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद इन सभी को छोड़ दिया गया और अब तक इस मामले में किसी की औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज नहीं हुई है। इसके बावजूद, पूछताछ के दौरान मिले महत्वपूर्ण इनपुट्स के आधार पर एजेंसियों ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में एक दर्जन से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों को विशेष सर्विलांस लिस्ट (निगरानी सूची) में शामिल किया गया है। इन सभी के मोबाइल संपर्कों, दैनिक गतिविधियों और सोशल मीडिया नेटवर्क्स की चौबीसों घंटे सघन मॉनिटरिंग की जा रही है।

नकल गिरोहों पर नकेल कसने की कवायद और लीक की खबरों का खंडन

खुफिया और तकनीकी शाखाएं परीक्षा से ठीक पहले किसी भी संगठित नकल माफिया, सॉल्वर गैंग या अवैध गतिविधियों को पूरी तरह निष्क्रिय करने के लिए लगातार धरातल से सूचनाएं एकत्र कर रही हैं। डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी डेटा के विश्लेषण के जरिए इस पूरे तंत्र पर नजर रखी जा रही है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी आधिकारिक सुरक्षा एजेंसी या बोर्ड ने पेपर लीक जैसी किसी घटना की पुष्टि नहीं की है। उच्चाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह पूरी कवायद केवल एहतियात के तौर पर की जा रही है, ताकि योग्य छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके और पूरी चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

आरपीएससी में दो नए मेंबर नियुक्त, संघ पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा तेज

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जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में दो नए सदस्यों के आगमन के साथ ही इसके शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार ने प्रो. संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा को आयोग के नए सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही, जब तक किसी स्थायी चेयरमैन का चयन नहीं हो जाता, तब तक के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किए गए वरिष्ठतम सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) केसरी सिंह राठौड़ को आयोग का कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।

राज्यपाल ने जारी किए आदेश और छह वर्ष का रहेगा कार्यकाल

राजभवन से शुक्रवार की देर रात राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े द्वारा इन नियुक्तियों से जुड़े आधिकारिक आदेश जारी किए गए। स्थापित नियमों के अनुसार, दोनों नवनियुक्त सदस्यों का सेवाकाल अपना पदभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी छह वर्ष तक अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी होने (जो भी पहले हो) तक मान्य रहेगा। यह प्रशासनिक पुनर्गठन ठीक उस समय हुआ है जब आरपीएससी के निवर्तमान अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का कार्यकाल 19 जून को समाप्त हो गया। साहू को मौजूदा सरकार ने जून 2025 में इस पद पर नियुक्त किया था और अब उनके हटने के बाद वरिष्ठता के क्रम में कमान केसरी सिंह राठौड़ को सौंपी गई है।

शिक्षा जगत और वैचारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं दोनों नए चेहरे

आयोग के इन नए चेहरों को लेकर प्रदेश के राजनैतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में काफी चर्चाएं हो रही हैं, क्योंकि दोनों ही नवनियुक्त सदस्य लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। नए सदस्य डॉ. दीपक कुमार शर्मा हाल ही में कॉलेज शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राणीशास्त्र (जूलॉजी) के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और उच्च शिक्षा में कई प्रशासनिक पदों के साथ-साथ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ में सक्रिय रहे हैं। वहीं, दूसरी नई सदस्य प्रो. संतोष आनंद वर्तमान में भीलवाड़ा के एमएलवी राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्य (प्रिंसिपल) के रूप में कार्यरत हैं और वे पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) तथा विद्या भारती जैसे संगठनों में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुकी हैं।

स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति पर टिकी नजरें और आगामी परीक्षाओं की चुनौती

आयोग के खाली पदों को भरे जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भजनलाल सरकार द्वारा आरपीएससी के नए स्थायी अध्यक्ष के रूप में किसके नाम पर मुहर लगाई जाती है। माना जा रहा है कि सरकार बहुत जल्द ही इस शीर्ष पद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर सकती है। इसका मुख्य कारण यह है कि आयोग के पास आने वाले समय में प्रदेश की कई महत्वपूर्ण सरकारी भर्ती परीक्षाओं के आयोजन, उनके परिणाम जारी करने और साक्षात्कार सहित चयन प्रक्रियाओं से जुड़े कई बड़े व संवेदनशील कार्य लंबित पड़े हैं, जिन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना नए विनियामक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

लिव-इन रिश्ते का खौफनाक अंत, नर्मदापुरम में महिला की चाकू मारकर हत्या

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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से आपसी रिश्तों के कत्ल की एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। यहां एक किराये के मकान में लिव-इन रिलेशनशिप (बिना शादी के साथ रहना) में रह रहे एक युगल के बीच मामूली बात को लेकर शुरू हुआ झगड़ा इस कदर बढ़ गया कि पुरुष पार्टनर ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए महिला की चाकू मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी वारदात स्थल से फरार है, जिसकी तलाश में स्थानीय पुलिस सरगर्मी से जुटी हुई है।

विवाद के बाद जानलेवा हमला और इलाज के दौरान दम तोड़ना

पुलिस प्रशासन से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बुधवार (17 जून) की दोपहर नंदविहार इलाके में घटित हुई। मालाखेड़ी रोड पर स्थित लाइफस्टाइल कॉलोनी के समीप किराये के मकान में रहने वाली 38 वर्षीय आशा यादव का अपने लिव-इन पार्टनर गणपत चौरे के साथ किसी बात को लेकर तीखा विवाद हो गया था। यह बहस इतनी उग्र हो गई कि गणपत ने तैश में आकर आशा पर चाकू से ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। चाकू महिला के पेट और सीने में गहरे धंस गए, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी। गंभीर हालत में उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां सघन चिकित्सा के बावजूद गुरुवार की रात उसने दम तोड़ दिया।

मृतिका के आखिरी बयानों के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज

अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान गंभीर रूप से घायल महिला ने दम तोड़ने से पहले पुलिस को अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराया था। महिला के उन्हीं आखिरी बयानों को मुख्य आधार बनाते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने शुरुआत में आरोपी गणपत चौरे के खिलाफ जानलेवा हमला करने का आपराधिक केस दर्ज किया था। हालांकि, अब महिला की मृत्यु हो जाने के बाद पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की हत्या से जुड़ी संगीन धाराएं जोड़ दी हैं। पुलिस की कई विशेष टीमें अब इस मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही हैं।

आर्थिक लेन-देन का मुख्य विवाद और फरार आरोपी की घेराबंदी

कोतवाली थाना प्रभारी गौरव बुंदेला के मुताबिक, अब तक की शुरुआती कड़ियों को जोड़ने पर इस खूनी संघर्ष के पीछे मुख्य रूप से आपसी पैसों के लेन-देन का विवाद प्रकाश में आया है। पुलिस आरोपी गणपत चौरे, जो कि नंदविहार कॉलोनी क्षेत्र में मजदूरी या अन्य काम करता था, की गिरफ्तारी के लिए उसके संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों पर लगातार दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि फरार हत्यारे को जल्द ही सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा और उसकी गिरफ्तारी के बाद ही इस जघन्य हत्याकांड से जुड़े अन्य सभी वास्तविक तथ्य और कारण पूरी तरह से साफ हो सकेंगे।

बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस का आरोप, कहा- आम आदमी की कमर टूट रही है

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नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने शनिवार को देश में लगातार बढ़ती जा रही बेकाबू महंगाई और आम जनता की घटती घरेलू बचत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेतृत्व ने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पूरा ध्यान अन्य राजनीतिक दलों के विधायकों और नेताओं की खरीद-फरोख्त पर केंद्रित है। वहीं दूसरी ओर, देश का साधारण नागरिक अपनी रोजाना की बुनियादी आवश्यकताओं और रसोई का जरूरी सामान खरीदने में भी खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा है।

मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों से परिवार तबाह और युवा आक्रोशित

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की वर्तमान सरकार पर देश की अर्थव्यवस्था का कबाड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मौजूदा हुकूमत के बदतर आर्थिक कुप्रबंधन के भारी बोझ तले देश के लाखों मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। खरगे के अनुसार, इस कमरतोड़ महंगाई ने लोगों की जीवन भर की जमापूंजी को खत्म कर दिया है, जिसके चलते आम नागरिकों की उम्मीदें और आकांक्षाएं दम तोड़ रही हैं, समाज में आर्थिक असमानता की खाई गहरी हो रही है और रोजगार के अभाव में देश के युवाओं के भीतर सरकार के प्रति भारी गुस्सा और गहरा आक्रोश पनप रहा है।

खुदरा महंगाई 16 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर और थाली से सब्जियां गायब

आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने देश की वित्तीय स्थिति की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि देश में खुदरा महंगाई दर पिछले 16 महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है, जबकि खाद्य मुद्रास्फीति 4.78 प्रतिशत के आंकड़े को छू रही है, जिसके कारण आम आदमी की थाली से टमाटर और अन्य जरूरी सब्जियां पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, देश में इलाज और दवाओं से जुड़ी चिकित्सा मुद्रास्फीति भी 15 फीसदी की खतरनाक दर से ऊपर जा चुकी है, जिसने मरीजों और उनके परिवारों की कमर तोड़ दी है।

रुपये की ऐतिहासिक गिरावट, बेरोजगारी का संकट और भाजपा की प्राथमिकताएं

केंद्र सरकार की चौतरफा विफलता को रेखांकित करते हुए मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपया लगातार गर्त में गिरता जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की साख प्रभावित हो रही है और विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से अपना मुंह मोड़ रहे हैं। उन्होंने युवाओं की बेरोजगारी दर में हो रही अप्रत्याशित बढ़ोतरी को देश के लिए एक बड़ा संकट बताया। खरगे ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा को देश के विकास और युवाओं के रोजगार की कोई परवाह नहीं है; वे केवल अन्य पार्टियों से लोकतांत्रिक सामान (नेताओं) को खरीदने में व्यस्त हैं, जबकि देश का असली वोटर अपनी न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।

अस्पतालों में खत्म हो रहीं दवाएं, कैंसर मरीजों की जान पर संकट; फलस्तीन की भारत से अपील

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नई दिल्ली। भारत में स्थित फिलिस्तीनी दूतावास ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में उपजे भयंकर स्वास्थ्य संकट को देखते हुए आपातकालीन स्तर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से भारत सरकार से तत्काल दखल देने की गुहार लगाई है। दूतावास द्वारा शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि फिलिस्तीनी क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है और चिकित्सा व्यवस्था ठप होने की कगार पर पहुंच चुकी है। बयान के अनुसार, यह विकट स्थिति इजरायल द्वारा जारी सैन्य अभियानों, अस्पतालों की व्यापक तबाही, जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति पर लगी कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक नाकेबंदी का सीधा परिणाम है।

'आरोग्य मैत्री' के तहत मानवीय सहायता और भारत से उम्मीद

फिलिस्तीनी राजनयिक मिशन ने अपने वक्तव्य में भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि हजारों बेकसूर नागरिकों के प्राणों की रक्षा करने का यह अत्यंत निर्णायक समय है। फिलिस्तीन के लोग न्याय और मानवीय संवेदनाओं के लिए भारत की ओर बड़ी उम्मीदों से देख रहे हैं। दूतावास ने भारत सरकार से उसकी प्रसिद्ध 'आरोग्य मैत्री' योजना के अंतर्गत विशेष सहायता भेजने का अनुरोध किया है। उल्लेखनीय है कि इस मानवीय परियोजना की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी, जिसके तहत प्राकृतिक आपदाओं अथवा मानवीय त्रासदियों का सामना कर रहे विकासशील राष्ट्रों को आवश्यक चिकित्सीय सामग्रियां और दवाएं उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डरावने आंकड़े और मलबे की त्रासदी

दूतावास ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न विनियामक संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए स्थिति को 'अभूतपूर्व मानवीय संहार' की संज्ञा दी है। संघर्ष के 986वें दिन गाजा पट्टी के 36 प्रमुख अस्पतालों में से केवल 19 चिकित्सालय ही किसी तरह आंशिक रूप से काम कर पा रहे हैं। अस्पतालों के पास जनरेटर चलाने के लिए ईंधन, डायलिसिस किट और रक्त की भारी किल्लत है। इस विभीषिका के बीच, मलबे के नीचे लगभग 12,000 शवों के दबे होने की आशंका है, जिससे गंभीर संक्रामक और चर्म रोग फैल रहे हैं। यह संकट अब वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलेम तक फैल चुका है, जहां कर राजस्व रोके जाने से वित्तीय व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।

दवाइयों का अकाल, टलीं सर्जरियां और 100 मिलियन डॉलर की गुहार

क्षेत्र में दवाओं की अनुपलब्धता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय की अनिवार्य सूची में शामिल 520 आवश्यक दवाओं में से लगभग 180 औषधियां बाजार से पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। कैंसर और ट्यूमर के इलाज के लिए जरूरी 97 दवाओं में से 50 का स्टॉक शून्य हो चुका है, जिससे 4,000 से अधिक कैंसर पीड़ित मरीजों के जीवन पर सीधे मौत का संकट मंडरा रहा है। संसाधनों के अभाव में इस वर्ष 11,000 से ज्यादा निर्धारित ऑपरेशन स्थगित करने पड़े हैं। इस विकराल संकट से निपटने के लिए फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत सरकार, भारतीय चिकित्सा संस्थानों और नागरिक समाज से सामूहिक रूप से 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग सौ मिलियन डॉलर) मूल्य की जीवन रक्षक दवाएं तथा सर्जिकल उपकरण आपातकालीन आधार पर उपलब्ध कराने की पुरजोर याचना की है।

अमेरिकी नाकाबंदी हटते ही ईरान का बड़ा फैसला, समुद्री जहाजों के लिए बदले नियम

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तेहरान। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने एक बहुत बड़ा नीतिगत परिवर्तन किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के मध्य संपन्न हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के आलोक में अब किसी भी वाणिज्यिक पोत या जहाज को इस जलमार्ग से सीधे गुजरने की स्वतंत्रता नहीं होगी। ईरान सरकार द्वारा लागू की गई नई विनियामक व्यवस्था के अंतर्गत अब केवल उन्हीं जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवागमन की अनुमति मिलेगी जो पूर्व में इसके लिए औपचारिक आवेदन करेंगे और निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करेंगे। चूंकि वैश्विक स्तर पर कुल कच्चे तेल और एलएनजी के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन इसी संकीर्ण मार्ग से होता है, इसलिए ईरान के इस रणनीतिक कदम को अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

परमिट आधारित नई व्यवस्था और कड़े सुरक्षा नियम

इस ऐतिहासिक बदलाव से पूर्व होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन के लिए किसी विशेष प्रशासनिक परमिशन की आवश्यकता नहीं होती थी और जहाज अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप यहां से गुजरते थे। हालांकि, अब ईरान ने 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (पीजीएसए) नामक एक नई नोडल एजेंसी का गठन कर संपूर्ण प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है। नए नियमों के तहत प्रत्येक जहाज को होर्मुज क्षेत्र में प्रवेश करने से कम से कम 48 घंटे पहले ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस डिजिटल आवेदन में जहाज का नाम, पंजीकृत ध्वज, आईएमओ नंबर, कार्गो (सामान) की विस्तृत प्रकृति, स्वामित्व का विवरण, बीमा प्रपत्र और चालक दल के सदस्यों की राष्ट्रीयता जैसी अत्यंत गोपनीय जानकारियां साझा करनी होंगी। यदि कोई भी दस्तावेज या सूचना अपूर्ण पाई जाती है, तो पीजीएसए को आवेदन लंबित रखने या उसे पूरी तरह से निरस्त करने का सर्वाधिकार होगा।

सीमित वैधता, निर्धारित समुद्री मार्ग और बीमा के नए प्रावधान

ईरान की नई एजेंसी द्वारा आवेदन स्वीकृत किए जाने के उपरांत जहाजों को एक विशिष्ट पारगमन परमिट जारी किया जाएगा, जो केवल एक बार की यात्रा के लिए और अधिकतम पांच दिनों तक ही वैध रहेगा। समय सीमा समाप्त होने पर नया आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, जहाजों को अपनी मर्जी से मार्ग बदलने की अनुमति नहीं होगी; उन्हें लारक द्वीप के समीप से गुजरने वाले ईरान द्वारा निर्धारित आधिकारिक रूट का ही अनुसरण करना होगा। तय मार्ग से हटने पर होने वाले किसी भी नुकसान या दंडात्मक कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी जहाज के कप्तान और मालिक की होगी। इस व्यवस्था के अंतर्गत जहाजों के लिए पीजीएसए से मान्यता प्राप्त बीमा होना भी आवश्यक कर दिया गया है। सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान जहाज मालिकों को एक घोषणा पत्र पर सहमति देनी होगी, जिसके तहत वे भविष्य में इस नियामक एजेंसी के किसी भी निर्णय को विधिक चुनौती नहीं दे सकेंगे।

शुरुआती रियायतें और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

द्विपक्षीय समझौते की शर्तों के अनुसार, पहले 60 दिनों की प्रारंभिक अवधि के दौरान जहाजों से नौवहन सहायता, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इसका संपूर्ण वित्तीय भार ईरानी सरकार स्वयं वहन करेगी। हालांकि, यह कर-मुक्त सुविधा केवल अस्थायी है और ईरान ने भविष्य में इन सेवाओं पर भारी शुल्क लगाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। भारत, जो अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है, सहित चीन, जापान और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख वैश्विक उपभोक्ता इस नई व्यवस्था पर पैनी नजर रख रहे हैं। वर्तमान में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से समुद्री यातायात सुचारू होने की उम्मीद तो जगी है, परंतु दूरगामी रूप से सख्त नियमों और भावी शुल्कों के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

सयोनी के बाद अब महुआ मोइत्रा भी नाराज? बगावत की अटकलों से गरमाई बंगाल की राजनीति

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सियासी समर में जारी भारी उठापटक के मध्य तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। राज्य में पार्टी के भीतर उपजे असंतोष और कई वरिष्ठ चेहरों द्वारा अलग राह पकड़े जाने के दौर में महुआ द्वारा केंद्र सरकार के एक हालिया निर्णय की सराहना किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में कयासबाजियों का बाजार गर्म हो गया है।

नीतिगत सराहना और राजनीतिक वफादारी में अंतर

इन तमाम चर्चाओं पर विराम लगाते हुए महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की किसी जनहितैषी नीति की प्रशंसा करने का अर्थ यह कतई नहीं है कि उनकी राजनैतिक विचारधारा बदल गई है। उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि उनकी अटूट निष्ठा तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति समर्पित है। अपने हालिया बयानों में उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि टीएमसी की वास्तविक पहचान, उसका वजूद और स्वीकार्यता पूरी तरह से ममता बनर्जी के करिश्माई नेतृत्व पर ही टिकी हुई है।

आंतरिक कलह से जूझ रही पार्टी और बागियों पर प्रहार

गौरतलब है कि हालिया चुनावी झटकों और आंतरिक मतभेदों के कारण तृणमूल कांग्रेस इस समय एक बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील दौर का सामना कर रही है। ऐसे समय में कई सांसदों और रसूखदार नेताओं के विद्रोही रुख अपनाने पर महुआ मोइत्रा ने लगातार आक्रामक रुख अख्तियार किया हुआ है। उन्होंने पाला बदलने वाले नेताओं पर जनता के जनादेश के साथ छल करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला और चुनौती दी कि यदि वे दल की मूल नीतियों से असहमत हैं, तो उन्हें तुरंत अपने पदों से त्यागपत्र देकर दोबारा जनता की अदालत में जाना चाहिए।

विपक्षी साजिश के दावों को किया सिरे से खारिज

सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी धड़े के उन तमाम दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें पार्टी के भविष्य पर संकट बताया जा रहा था। उन्होंने विश्वास जताया कि टीएमसी इस मौजूदा संकट से उबरकर पहले से कहीं अधिक मजबूती के साथ वापसी करेगी। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने और उसमें फूट डालने के इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। बहरहाल, केंद्र की पहल की तारीफ भले ही चर्चा में हो, लेकिन महुआ के तेवर साफ करते हैं कि वे ममता बनर्जी के साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं।

200 करोड़ के घोटाले की आशंका, क्लोन ऐप के जरिए मनरेगा में बड़ा खेल

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भोपाल। ग्रामीण अंचलों में आजीविका और रोजगार की गारंटी देने वाली महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में एक बेहद गंभीर और बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस योजना के अंतर्गत काम करने वाले मजदूरों की हाजिरी लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले आधिकारिक 'नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम' (एनएमएमएस) का एक जाली यानी क्लोन एप्लीकेशन विकसित कर लिया गया है। इस फर्जी मोबाइल ऐप के माध्यम से बड़े पैमाने पर मजदूरों की नकली उपस्थिति दर्ज कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का अवैध भुगतान करा लिया गया, जिसे लेकर अब दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

क्लोन ऐप से 200 करोड़ के गबन का आरोप और सीबीआई जांच की मांग

इस सुनियोजित डिजिटल घोटाले की गूंज मुरैना सहित मध्य प्रदेश के कई अन्य जनपदों में सुनाई दे रही है। लांजी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इस महाफर्जीवाड़े को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल को एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच देश की शीर्ष एजेंसी सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) से कराने की पुरजोर वकालत की है। शिकायत में यह संगीन आरोप लगाया गया है कि एनएमएमएस ऐप के साथ छेड़छाड़ कर या उसका टेंपर्ड वर्जन बनाकर पिछले दो वर्षों से बिना कार्यस्थल पर जाए, बिना किसी वास्तविक जियो-टैगिंग और प्रशासनिक सत्यापन के ही जॉब कार्ड धारकों की हाजिरी दर्ज की जा रही थी, जिससे लगभग 200 करोड़ रुपये के सरकारी धन का गबन किया गया है।

मनरेगा योजना की समाप्ति और नई व्यवस्था की ओर कदम

तकनीकी प्रणाली में सेंधमारी कर किए जा रहे इस निरंतर घोटाले के बीच एक और महत्वपूर्ण प्रशासनिक जानकारी सामने आई है कि वर्तमान मनरेगा व्यवस्था आगामी 30 जून से पूरी तरह से समाप्त होने जा रही है। इस पुरानी व्यवस्था के स्थान पर सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार के सुचारू संचालन के लिए एक नई योजना 'वीबीजीरामजी' (VBGRAMJI) को धरातल पर लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा और पारदर्शिता के ऐसे कड़े मानक तय किए जाएंगे जिससे भविष्य में डिजिटल माध्यमों या मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए होने वाली किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।

मुरैना में आपराधिक मुकदमा दर्ज और डिजिटल सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न

इस व्यापक वित्तीय धांधली के उजागर होते ही प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है और मुरैना के जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 1 जून को ही दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के कड़े आदेश जारी किए थे। कलेक्टर के निर्देशानुसार खड़कपुर ग्राम पंचायत के संबंधित सहायक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। इस चौंकाने वाले मामले ने सरकारी योजनाओं को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की मौजूदा व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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