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फादर्स डे पर दिल दहला देने वाली घटना, 7 साल के बच्चे की डूबने से मौत

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धार। फादर्स डे के विशेष दिन एक अभागे पिता को जीवन का सबसे असहनीय और क्रूर जख्म मिला है। धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खलघाट नर्मदा घाट पर रविवार को एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे कृष्णा की नदी के गहरे पानी में डूबने से असामयिक मौत हो गई। जिस पिता ने बड़े लाड-प्यार से उंगली पकड़कर अपने कलेजे के टुकड़े को चलना सिखाया था, उसी की आंखों के सामने मासूम ने हमेशा के लिए दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

पीथमपुर से नर्मदा दर्शन के लिए पहुंचा था परिवार

मूल रूप से हरदा जिले के ग्राम छोटा देवास के निवासी रामशंकर वर्तमान में पीथमपुर की एक निजी औद्योगिक कंपनी में कार्यरत हैं। रविवार 21 जून को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण, वे अपने ममेरे भाई अश्विन चौहान और अपने दो पितातुल्य मासूम बेटों— 7 वर्षीय कृष्णा उर्फ रमन और 5 वर्षीय नारायण के साथ सुबह लगभग 11 बजे खलघाट स्थित नर्मदा नदी के दर्शन और पवित्र स्नान के लिए पहुंचे थे।

नदी किनारे मछलियों को दाना खिलाते समय हुआ हादसा

शोक संतप्त परिजनों ने रुआंसे स्वर में बताया कि घाट पर स्नान करने के बाद मासूम कृष्णा नदी के किनारे अठखेलियां कर रही मछलियों को दाना खिला रहा था। इसी दौरान अचानक घाट की सीढ़ियों पर काई या नमी के कारण उसका पैर फिसल गया और वह संतुलन खोकर सीधे नदी के गहरे पानी में समा गया। बच्चे को डूबता देख परिजनों ने आनन-फानन में खुद करीब 10-15 मिनट तक पानी में उसकी खोजबीन की, लेकिन गहरे बहाव के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद तुरंत आपातकालीन पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी गई।

20 मिनट तक दिया गया सीपीआर (CPR), अस्पताल में डॉक्टरों ने तोड़ा दम

नर्मदा घाट पर तैनात आपातकालीन सुरक्षा टीम और स्थानीय गोताखोरों ने सूचना मिलते ही तत्परता से रेस्क्यू ऑपरेशन (सर्चिंग) शुरू किया। कुछ ही समय में बच्चे को नदी के किनारे से अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। पानी से बाहर लाते ही ड्यूटी पर तैनात आरक्षक दीपक मंडलोई और बेबस पिता रामशंकर ने बच्चे के फेफड़ों से पानी निकालने और सांसें वापस लाने के लिए करीब 20 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया। इसके बाद उसे तुरंत एम्बुलेंस से धामनोद के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ड्यूटी डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद कृष्णा को मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल में पसरा सन्नाटा, समझाइश के बाद हुआ पोस्टमार्टम

इकलौते मासूम बेटे का शव देखकर पिता रामशंकर बदहवास हो गए। गहरे सदमे के कारण उन्होंने शुरुआत में शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। इसी बीच हादसे की खबर मिलते ही पीथमपुर से रोती-बिलखती मासूम की मां भी धामनोद अस्पताल पहुंच गई। परिजनों के विलाप से पूरा अस्पताल परिसर गमगीन हो उठा। लगभग 5 घंटे तक स्थानीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने पीड़ित माता-पिता को ढांढस बंधाया और विधिक प्रक्रियाओं की अनिवार्यता समझाई। अंततः सबकी समझाइश के बाद परिजन राजी हुए, जिसके बाद डॉक्टर जगदीश देवड़ा ने शव का पोस्टमार्टम कर उसे अंतिम संस्कार के लिए माता-पिता को सौंप दिया।

सामाजिक सहयोग से पैतृक गांव हरदा भेजा गया शव

इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने और सहायता के लिए स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि विष्णु पाटीदार और सामाजिक कार्यकर्ता विशाल मंडलोई अस्पताल पहुंचे। उन्होंने संकटग्रस्त परिवार की तत्काल आर्थिक मदद की और निजी स्तर पर एक विशेष एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, ताकि मासूम के पार्थिव देह को उनके पैतृक निवास स्थान हरदा ले जाया जा सके। फिलहाल, धामनोद थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर घटना के सभी पहलुओं की वैधानिक जांच शुरू कर दी है।

डिजिटल हेल्थ मिशन को रफ्तार, भोपाल में शुरू होगी स्मार्ट स्वास्थ्य व्यवस्था

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी को स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश का सबसे आधुनिक और पहला ‘मॉडल डिजिटल हेल्थ डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा और उपचार की पूरी प्रक्रिया को बेहद सुगम, त्वरित और आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए एक वृहद कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इसके अंतर्गत जिले के सभी शासकीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और लगभग 3000 निजी (प्राइवेट) चिकित्सालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इस एकीकृत नेटवर्क के तैयार होने से जहां आम मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, वहीं डॉक्टरों को भी एक क्लिक पर संबंधित मरीज की पुरानी बीमारी और उपचार (मेडिकल हिस्ट्री) की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

चार महीने का विशेष एक्शन प्लान: अब पर्चों और फाइलों से मिलेगी मुक्ति

इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजना के लागू होते ही पूरा हेल्थ केयर सिस्टम डिजिटल और पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगा। इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 4 महीनों का एक कड़ा 'एक्शन प्लान' तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • डिजिटल क्षमता का ऑडिट: जिले के सभी छोटे-बड़े अस्पतालों की तकनीकी और डिजिटल अवसंरचना की जांच की जाएगी, ताकि कमियों को दूर कर उन्हें नए सिस्टम के अनुकूल बनाया जा सके।

  • अस्पतालों और डॉक्टरों का डिजिटल पंजीयन: जिले के हर रजिस्टर्ड डॉक्टर और अस्पताल की एक विशिष्ट डिजिटल आईडी (पहचान) तैयार की जाएगी। इसके साथ ही 'हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम' (HMIS) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

  • विशेष ट्रेनिंग सत्र: डॉक्टरों, कंपाउंडरों और पैरामेडिकल स्टाफ को डिजिटल पर्चे (प्रिस्क्रिप्शन) लिखने और ऑनलाइन जांच रिपोर्ट तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • आभा (ABHA) नंबर से एंट्री: मरीजों को अस्पताल आते समय भारी-भरकम फाइलें लाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे केवल अपने 'आभा नंबर' (Ayushman Bharat Health Account) के जरिए सीधे डॉक्टर से परामर्श ले सकेंगे, जिससे रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी।

क्यूआर कोड और मिस्ड कॉल से मिलेगा टोकन, कम होगी मेडिक्लेम की धोखाधड़ी

इस डिजिटल क्रांतिकारी बदलाव से आम नागरिकों और चिकित्सा प्रणाली को कई प्रत्यक्ष लाभ मिलेंगे:

  • स्मार्ट टोकन सिस्टम: मरीजों को अब ओपीडी पर्ची के लिए घंटों इंतजार नहीं करना होगा। अस्पताल परिसर में लगे क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने या निर्धारित नंबर पर मिस्ड कॉल देते ही मरीज की बुनियादी जानकारी सीधे संबंधित डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर पहुंच जाएगी और मरीज के मोबाइल पर टोकन नंबर आ जाएगा।

  • फर्जीवाड़े पर रोक: पूरी उपचार प्रक्रिया के डिजिटल डेटाबेस में दर्ज होने के कारण स्वास्थ्य बीमा (मेडिक्लेम) के दावों में होने वाली वित्तीय हेराफेरी, फर्जी बिलिंग और गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

  • डिजिटल फार्मेसी: डॉक्टर द्वारा केबिन से जनरेट किया गया डिजिटल पर्चा सीधे अस्पताल के मेडिकल स्टोर या फार्मेसी काउंटर पर ट्रांसफर हो जाएगा, जिससे मरीज को बिना किसी मानवीय चूक के सही दवाएं तुरंत मिल सकेंगी।

‘शिवसेना एक ही है’, ऑपरेशन टाइगर विवाद के बीच जनता की अदालत में पहुंचे उद्धव ठाकरे

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मुंबई। पार्टी सांसदों के लगातार पाला बदलने से नाराज शिवसेना (यूबीटी) के मुखिया उद्धव ठाकरे ने दोटूक कहा है कि शिवसेना का अस्तित्व सिर्फ एक ही रह सकता है, क्योंकि इसका मूल उद्देश्य मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा करना है। रविवार को अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ डटकर चुनाव लड़ा और जनता के आशीर्वाद से जीत दर्ज की। उन्होंने आरोप लगाया कि अब कुछ सांसद सत्ता और पैसे की भूख में आकर न सिर्फ संगठन बल्कि आम जनता के भरोसे का भी खून कर रहे हैं। इस संकट के बीच उन्होंने मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से अपने जनसंपर्क अभियान का शंखनाद कर दिया है, जिसका प्रतिनिधित्व दलबदल करने वाले सांसद संजय दिना पाटिल कर रहे हैं।

बागी सांसदों के झटके से ठाकरे गुट पर गहराया संकट

शिवसेना (यूबीटी) में मची इस अंदरूनी बगावत ने उद्धव ठाकरे के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी के छह असंतुष्ट सांसदों में से दो ने रविवार को आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के धड़े का दामन थाम लिया, जिससे बचे हुए चार अन्य सांसदों के भी पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं। धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर ने अपने पिता पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के ठीक बाद पार्टी को अलविदा कह दिया, जबकि हिंगोली के सांसद नागेश अष्टीकर ने सोशल मीडिया लाइव के जरिए शिंदे गुट में जाने का एलान किया। शनिवार को कोर्ट द्वारा हत्याकांड के सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने ओमराजे को रोकने की आखिरी कोशिश की थी, जो नाकाम रही।

'ऑपरेशन टाइगर' के जरिए संगठन में बड़ी सेंधमारी की तैयारी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना उद्धव गुट को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही थी। संसद में परिसीमन विधेयक पारित न होने के बाद इस योजना को 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम देकर तेजी से लागू किया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे ने इस राजनीतिक हालात का फायदा उठाते हुए भाजपा आलाकमान को आश्वस्त किया कि वे विरोधी खेमे के सांसदों को अपने साथ जोड़कर पार्टी की ताकत में इजाफा कर सकते हैं।

संसद के बाद अब देश की सबसे अमीर महानगरपालिका पर नजर

सांसदों को तोड़ने के बाद अब एकनाथ शिंदे गुट की नजर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर टिक गई है, जहां बड़े पैमाने पर दलबदल कराने की सुगबुगाहट है। शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव खेमे के करीब 45 पूर्व पार्षद उनके संपर्क में हैं और जल्द ही बड़ा फैसला ले सकते हैं। दलबदल विरोधी कानून की जद से बचने के लिए यह संख्या कुल पार्षदों का दो-तिहाई हिस्सा है, जो कि अयोग्यता की कार्रवाई से बचने के लिए बेहद जरूरी है। शिंदे गुट के स्थानीय नेताओं का कहना है कि विपक्षी खेमा पहले सांसदों के जाने की खबरों को भी महज अफवाह बता रहा था, लेकिन आखिरकार जमीनी हकीकत सबके सामने आ चुकी है।

गर्मी से राहत के लिए करना होगा थोड़ा और इंतजार, इस दिन दस्तक दे सकता है मानसून

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भोपाल। मध्य प्रदेश के नागरिकों और विशेषकर किसानों को मानसून की फुहारों के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। इस बार मानसूनी हवाएं अपने निर्धारित समय यानी 15 जून से करीब सात दिन पिछड़ चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसूनी सिस्टम फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में अटका हुआ है, जिसके चलते मध्य प्रदेश तक इसके पहुंचने की गति धीमी हो गई है। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आगामी चार दिनों के भीतर स्थितियां अनुकूल होंगी और राज्य में मानसून की सक्रिय दस्तक हो सकती है।

आखिर क्यों अटक गया मानसून?

सामान्य तौर पर मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 15 जून या उसके आस-पास मानसूनी सीजन शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार 22 जून की तारीख बीत जाने के बाद भी बादलों का स्थायी डेरा नजर नहीं आ रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून को गति देने और मजबूत बनाने वाले मौसमी सिस्टम इस समय कमजोर पड़ गए हैं।

यही वजह है कि मानसून की आगे बढ़ने की रफ्तार थम गई है और वह बीते 8 जून से एक ही भौगोलिक क्षेत्र में स्थिर बना हुआ है। बीते वर्ष 2025 की स्थिति देखें तो 16 जून को ही मानसून ने प्रदेश की सीमाओं में प्रवेश कर लिया था। वर्तमान पूर्वानुमानों के अनुसार, मानसूनी हवाएं 23 जून को पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में प्रवेश करेंगी, जिसके दो दिन बाद यानी 25 जून तक मध्य प्रदेश में इसके पहुंचने की प्रबल संभावना है।

देरी से बदला मौसम का गणित, बारिश के ग्राफ में भारी गिरावट

समय पर मानसूनी सिस्टम सक्रिय न होने के कारण प्रदेश में प्री-मानसून और मौसमी बारिश के आंकड़ों में भारी कमी दर्ज की गई है। मौसम केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • औसत में गिरावट: इस चालू सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की तुलना में केवल 48 प्रतिशत ही वर्षा दर्ज की गई है।

  • पूर्वी अंचल में सूखा: जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के अंतर्गत आने वाले 24 जिलों में सामान्य से 69 फीसदी कम पानी बरसा है।

  • पश्चिमी और मध्य क्षेत्र की स्थिति: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में वर्षा की कमी का यह आंकड़ा लगभग 24 प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है।

इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

भले ही मानसून के आगमन में देरी हो रही है, लेकिन स्थानीय चक्रवातीय सिस्टम के कारण प्रदेश के विभिन्न अंचलों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ खंड वर्षा का दौर जारी है।

बीते रविवार (21 जून) को राजधानी भोपाल, सतना, जबलपुर सहित छतरपुर जिले के खजुराहो, नौगांव और सिवनी में झमाझम बौछारें पड़ीं, जिससे लोगों को भीषण उमस से कुछ राहत मिली। मौसम केंद्र ने आगामी 24 से 48 घंटों के भीतर झाबुआ, आलीराजपुर, रीवा, सतना, शहडोल, अनूपपुर, कटनी और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की चेतावनी (alert) जारी की है।

खाटूश्यामजी में बदला बाबा श्याम का स्वरूप, तिलक श्रृंगार के बाद श्याम वर्ण में दे रहे दर्शन

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विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में बाबा श्याम ने अपना स्वरूप बदल लिया है. अब वे श्याम वर्ण में भक्तों को दर्शन देंगे. इस रूप में बाबा श्याम का चंदन से मस्तक पर लेप किया जाता है. मंदिर परम्परा के अनुसार बाबा श्याम एक महीने में दो रूपो में दर्शन देते हैं. एक शालिग्राम, जिसमें वे अपने मूल स्वरूप में नजर आते हैं. भक्तों को ये दर्शन महीने में केवल सात दिन ही करने को मिलते हैं. इसके अलावा दूसरा है श्याम वर्ण इसमें बाबा श्याम करीब 22 से 23 दिन तकदर्शन देते हैं.
मंदिर कमेटी के अनुसार, अमावस्या पर बाबा श्याम को स्नान करने के बाद श्याम वर्ण का चंदन लेप उतार दिया जाता है. इसके कुछ दिन बाद संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम का फिर से तिलक श्रृंगार किया जाता है. तिलक श्रृंगार के दौरान मंदिर कमेटी द्वारा आधिकारिक रूप से करीब 19 घंटे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद रखे जाते हैं. इस दौरान केवल मंदिर के मुख्य पुजारियों संपूर्ण विधि विधान के साथ बाबा श्याम के तिलक श्रृंगार का कार्य किया जाता है.
तिलक श्रृंगार के बाद खुला मंदिर 
हाल ही में बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार किया गया है. करीब 19 घंटे मंदिर बंद रहने के बाद फिर से पट खुलते ही खाटूश्याम जी मंदिर में जयकारों के साथ श्रद्धालुओं की गूंज सुनाई देने लगी है. भक्त बाबा श्याम के मनमोहक तिलक श्रृंगार छवि के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर कमेटी द्वारा 75 फीट मार्ग पर बनी 14 कतारों में श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन करवाए जा रहे हैं. भक्त दिल्ली, मुंबई, कोलकाता हरियाणा सहित देश के कोने कोने से मनोकामनाएं लेके पहुंच रहे हैं. दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी एवं पुलिस प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए. मंदिर परिसर व दर्शन मार्ग पर पुलिस व कमेटी के सुरक्षा गार्ड्स ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध किया.

शनिवार और रविवार को दिन में बंद नहीं होगा मंदिर 
आमतौर, पर दोपहर 2 बजे से लेकर 4 बजे तक खाटूश्याम जी मंदिर बंद रहता है. शनिवार रविवार को वीकेंड होने के कारण भक्तों की संख्या आम दिनों से अधिक रहती है. ऐसे में आज और कल खाटूश्याम जी मंदिर के कपाट दिन में बंद नहीं होंगे. इसके अलावा एकादशी और द्वादशी को भी दिन और भीड़ अधिक रहने पर रात के समय भी मंदिर खुला रखा जाता है.

कृष्णजी की सबसे भरोसेमंद अष्ट सखियां कौन थीं? इनके बिना अधूरी रहतीं राधा-कृष्ण की लीलाएं, गोवर्धन परिक्रमा में मिलता है क्लू

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भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम की चर्चा सदियों से होती रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी दिव्य लीलाओं के पीछे आठ ऐसी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान था, जिनके बिना वृंदावन की कई प्रसिद्ध कथाएं कभी पूरी ही नहीं हो पातीं? इन महिलाओं को अष्ट सखी कहा जाता है. ये केवल राधा की सहेलियां नहीं थीं, बल्कि उनकी सबसे विश्वसनीय साथी, सलाहकार, संदेशवाहक और रक्षक भी थीं. इन अष्ट सखियों बिना, राधा और कृष्ण की कई सबसे प्रिय लीलाएं कभी घटित नहीं हो पातीं. भक्ति परंपरा में इनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं कौन हैं राधा-कृष्ण की अष्ट सखियां…
कौन थीं अष्ट सखियां?
अष्ट सखियां राधा रानी की सबसे निकटतम सहेलियां थीं. उन्होंने अपना पूरा जीवन राधा और कृष्ण की सेवा में समर्पित कर दिया था. उनकी बुद्धिमत्ता, निष्ठा और प्रेम ने वृंदावन की दिव्य लीलाओं को संभव बनाया. अष्ट सखियों ने कभी प्रसिद्धि या सम्मान की इच्छा नहीं की. उनका सबसे बड़ा सुख राधा और कृष्ण की सेवा में था. यही निस्वार्थ भाव उन्हें भक्ति परंपरा में अमर बनाता है. अष्ट सखियों की कथा केवल धार्मिक कहानी नहीं है. यह सच्ची मित्रता, समर्पण, निष्ठा और सेवा का संदेश देती है. वे सिखाती हैं कि हर व्यक्ति अपनी विशेष प्रतिभा के माध्यम से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.

ललिता सखी
ललिता को अष्ट सखियों में सबसे प्रमुख माना जाता है. वे साहसी, स्पष्टवादी और राधा की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहती थीं. जब भी कोई चुनौती आती, ललिता बिना किसी संकोच के आगे आतीं. राधा-कृष्ण की मुलाकातों का आयोजन करना और हर परिस्थिति में राधा का साथ देना उनकी विशेषता थी. गोवर्धन की परिक्रमा में राधा कुंड की परिक्रमा के समय ललिता को समर्पित एक मंदिर व कुंआ है.

विशाखा सखी
विशाखा अपनी बुद्धिमत्ता, कूटनीति और कलात्मक प्रतिभा के लिए प्रसिद्ध थीं. वे संगीत, कविता और संवाद में निपुण थीं. जब भी कोई मतभेद होता, विशाखा शांति और समझ को बहाल करने का सटीक तरीका जानती थीं. उनकी कोमल बुद्धि ने दिव्य मंडल में सामंजस्य बनाए रखने में मदद की.
चंपकलता सखी
चंपकलता माला बनाने, स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने और रचनात्मक कार्यों में निपुण थीं. वे हर सेवा को भक्ति का रूप मानती थीं.
चित्रा सखी
चित्रा को कविता, संगीत और चित्रकला का गहरा ज्ञान था. उनकी कलात्मक प्रतिभा वृंदावन की लीलाओं को और भी सुंदर बनाती थी.
तुंगविद्या सखी
तुंगविद्या शास्त्रों और आध्यात्मिक ज्ञान में अत्यंत प्रवीण थीं. उन्हें विद्वता और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है.
इंदुलेखा सखी
इंदुलेखा अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और ज्योतिष ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थीं. वे समय और परिस्थितियों का सही आकलन करने में दक्ष थीं.

रंगादेवी सखी
रंगादेवी अपने हास्य, चतुराई और प्रसन्न स्वभाव से सभी को आनंदित रखती थीं. उनकी उपस्थिति से हर लीला में उत्साह भर जाता था.
सुदेवी सखी
सुदेवी सूक्ष्म देखभाल और निस्वार्थ सेवा के लिए जानी जाती थीं. वे राधा-कृष्ण समेत पूरे मंडली की हर छोटी-बड़ी आवश्यकता का ध्यान रखती थीं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अष्ट सखियां कौन हैं?
अष्ट सखियां कृष्ण भक्ति परंपराओं, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव धर्म में राधा की आठ प्रमुख सहेलियां हैं.
2. अष्ट सखियों का महत्व क्यों है?
उन्होंने सेवा, मित्रता और भक्ति के माध्यम से राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं को सुगम बनाने और उनका समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
3. अष्ट सखियों में प्रमुख कौन थीं?
ललिता सखी को परंपरागत रूप से राधा की नेता और सबसे करीबी विश्वासपात्र माना जाता है.
4. विशाखा किस लिए जानी जाती थीं?
विशाखा सखी कूटनीति, संगीत, कविता और सद्भाव बनाए रखने के लिए जानी जाती थीं.
5. क्या अष्ट सखियां कृष्ण की भक्त थीं?
हां. उनकी भक्ति राधा और कृष्ण दोनों की प्रेमपूर्ण सेवा के माध्यम से व्यक्त होती थी.

इंसान या कोई और शक्ति? अघोरी बाबा ने एक रात में कराया था निर्माण, जानें समस्तीपुर के इस मायावी मंदिर का सच

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धार्मिक दृष्टिकोण से समस्तीपुर जिला हमेशा से खास माना जाता रहा है. यहां कई मंदिर, मस्जिद और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मौजूद हैं. पर आज हम आपको एक ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसकी कहानी बाकी सभी धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग और रहस्यमयी है. यह मंदिर बूढ़ी गंडक नदी के तट पर स्थित मां काली का है. स्थानीय लोगों के अनुसार इसका इतिहास अंग्रेजों के शासनकाल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि जब भारत में अंग्रेजी हुकूमत चल रही थी, उसी दौरान यहां एक अघोरी बाबा पहुंचे थे. उन्होंने इस जगह को तपस्थली बनाया और फिर अचानक एक ही रात में मंदिर का निर्माण करा दिया. सुबह जब स्थानीय लोगों ने नदी किनारे मंदिर को देखा तो हर कोई हैरान रह गया. तभी से यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और रहस्य दोनों का केंद्र बना हुआ है.
एक रात में निर्माण की कहानी आज भी बनी हुई है चर्चा का विषय
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण सामान्य तरीके से नहीं हुआ था. मान्यता है कि अघोरी बाबा ने साधना के बल पर एक ही रात में मंदिर खड़ा कर दिया था. मंदिर बनने के बाद वह बाबा अचानक वहां से गायब हो गए. फिर कभी दिखाई नहीं दिए. यही कारण है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के बीच आज भी कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं. बूढ़ी गंडक नदी के किनारे स्थित होने की वजह से यह मंदिर प्राकृतिक रूप से भी बेहद आकर्षक दिखाई देता है. हर दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. खास अवसरों पर आसपास के जिलों से भी लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं.
श्रद्धालुओं का दावा, सच्चे मन से मांगी हर मुराद होती है पूरी
समस्तीपुर निवासी एसके झा बताते हैं कि यह मंदिर उनके जन्म से भी पहले का है. बचपन से ही वह सुनते आ रहे हैं कि यह अंग्रेजों के जमाने का मंदिर है. उन्होंने बताया कि अघोरी बाबा ने ही इसका निर्माण करवाया था. वह भी केवल एक रात में. उनका कहना है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा करने आते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. यह स्थान आज भी लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

400 साल पुरानी परंपरा! जानिए मोहर्रम में हाथी पर क्यों निकाला जाता है बीबी का अलम

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चारमीनार के साये में हर साल मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौम-ए-आशूरा को निकलने वाला बीबी का अलम जुलूस सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हैदराबाद की गंगा-जामुनी तहज़ीब और 400 साल पुराने शाही इतिहास का जीवंत प्रतीक है. कुतुब शाही दौर से शुरू हुई यह ऐतिहासिक रिवायत आज भी अपने उसी पुराने रस्म-ओ-रिवाज़ और अकीदत यानी आस्था के साथ जारी है. इस बेहद पाक और ऐतिहासिक जुलूस की शुरुआत गोलकुंडा के कुतुब शाही राजवंश के दौरान हुई थी.
माना जाता है कि राजा अब्दुल्ला कुतुब शाह की वालिदा, हयात बख्शी बेगम ने इस जुलूस की नींव रखी थी. इस अलम में पैगंबर मोहम्मद की साहबजादी हजरत फातिमा-ए-ज़ेहरा के पवित्र तबर्रुक यानी लकड़ी के तख्त का एक हिस्सा को शामिल किया गया है. कुतुब शाही राजाओं के बाद, हैदराबाद के आसफ जाही शासकों यानी निजामों ने भी इस परंपरा को पूरे राजकीय सम्मान के साथ आगे बढ़ाया और इसे दबीरपुरा के बीबी का अलावा में स्थापित किया.
दक्कन के दरबारों में सम्मान और गरिमा का प्रतीक माना जाता था
इस ऐतिहासिक जुलूस की सबसे बड़ी खासियत इसके लिए इस्तेमाल होने वाले शाही हाथी रहे हैं. दक्कन के दरबारों में हाथियों को सर्वोच्च राजकीय सम्मान और गरिमा का प्रतीक माना जाता था. इसी वजह से इस मुकद्दस यानी पवित्र अलम को हमेशा एक सजे-धजे शाही हाथी पर ही ले जाया जाता रहा है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो दशकों पहले इस जिम्मेदारी को हैदरी नाम का एक प्रसिद्ध हाथी निभाता था. हैदरी के बाद, यह गौरवशाली परंपरा उसकी संतान रजनी नाम की हथिनी ने संभाली, जिसने सालों तक पुराने शहर की गलियों में इस पवित्र अलम को अपने कांधे पर उठाया. बीच के कुछ वर्षों में हाशमी नाम के हाथी ने भी इस सेवा को पूरा किया.

रजनी हथिनी  मोहर्रम के पाक जुलूस का हिस्सा बनती रही
दिलचस्प बात यह है कि रजनी हथिनी न सिर्फ मोहर्रम के इस पाक जुलूस का हिस्सा बनती रही, बल्कि हैदराबाद के पारंपरिक बोनालु उत्सव में भी बढ़-चढ़कर शामिल होती रही जो शहर के सांप्रदायिक सौहार्द को दर्शाता है. वक्त के साथ भले ही हाथियों की बढ़ती उम्र और फिटनेस के कारण अब दूसरे राज्यों जैसे महाराष्ट्र से प्रशिक्षित हाथियों को इस सेवा के लिए लाया जाने लगा हो, लेकिन अकीदत का यह कारवां आज भी वैसा ही है. आज भी जब यह जुलूस निकलता है, तो जात-पात और मजहब से परे, हजारों-लाखों लोग इस शाही और रूहानी परंपरा के दीदार के लिए उमड़ पड़ते हैं.

राशिफल 22 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

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  • मेष राशि :- नेत्र पीड़ा, यात्रा, विवाद, मातृ कष्ट, व्यर्थ का विरोध, पड़ोसियों से विरोध बनेगा। 
  • वृष राशि :- धन व्यय होगा, व्यापार में प्रगति, शुभ कार्य होगा, परिस्थितियां आपके अनुकूल बनी रहेंगी। 
  • मिथुन राशि :- पितृ कष्ट, यात्रा योग, व्यय, लाभ, अस्थिरता, अशांति का वातावरण रहेगा। 
  • कर्क राशि :- यात्रा सुख, भूमि लाभ, हर्ष, सिद्धी, खेती व गृह कार्य की व्यवस्था उत्तम बनेगी। 
  • सिंह राशि :- शरीर कष्ट, अपव्यय, कार्य में सफलता मिलेगी, आर्थिक सुधार के कार्य बनेंगे। 
  • कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री कष्ट, विद्या लाभ, धीरे-धीरे स्थिति में सुधार के साथ लाभ होगा। 
  • तुला राशि :– यात्रा से हानि, राज लाभ, शरीर कष्ट, खर्च अधिक होगा, समय स्थिति को देखकर आगे बढ़ें। 
  • वृश्चिक राशि :- वृत्ति में लाभ, यात्रा, सम्पत्ति लाभ, व्यापार में सुधार होगा, खर्च होती ही रहेंगे। 
  • धनु राशि :- अल्प लाभ, चोर-अग्नि शरीर भय, मानसिक परेशानी, अपवाद तथा उलझनें रहेंगी। 
  • मकर राशि :- शत्रु से हानि, अपव्यय होगा, शरीरादि सुख होगा, व्यवस्था में कमी का अनुभव होगा। 
  • कुंभ राशि :- शुभ कार्यों में व्यय होगा, संतान सुख, सफलता, उत्साह की वृद्धि होगी, रुके कार्य बनेंगे। 
  • मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय लाभ, हानि तथा अधिकारियों से मन-मुटाव होगा। 
     

कोंडागांव में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

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रायपुर :  12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज रविवार सुबह शासकीय आदर्श आवासीय कन्या महाविद्यालय परिसर में जिला स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशानुसार, जिला प्रशासन, आयुष विभाग और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में ‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’ (स्वस्थ आयु के लिए योग) थीम पर सैकड़ों नागरिकों ने एक साथ योगाभ्यास किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग शामिल हुए।
         
स्वस्थ और नशामुक्त समाज से बनेगा विकसित भारत: सांसद भोजराज नाग

          मुख्य अतिथि सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को वैश्विक पहचान मिली है, जो पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर ही हमारी वास्तविक संपत्ति है। जब हमारा समाज पूरी तरह स्वस्थ और नशामुक्त होगा, तभी हम प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा कर पाएंगे। सांसद श्री नाग ने जीवन में योग के महत्व को रेखांकित करते हुए नागरिकों से स्वस्थ जीवनशैली के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने की भी अपील की।

योग हमारे ऋषि-मुनियों की अमूल्य धरोहर: विधायक लता उसेंडी

          विशिष्ट अतिथि सुश्री लता उसेंडी ने जिलेवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह हमारे ऋषि-मुनियों की वह अमूल्य धरोहर है जो मन, शरीर और बुद्धि के बीच संतुलन स्थापित करती है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने भी भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति को प्रतिदिन योग के लिए समय निकालने का आग्रह किया।

एक पेड़ मां के नाम और नशामुक्त भारत की शपथ

         कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि सांसद श्री भोजराज नाग ने उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, समाजसेवियों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की शपथ दिलाई। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी अतिथियों ने महाविद्यालय परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण भी किया।

       इस जिला स्तरीय आयोजन में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनप्रतिनिधिगण, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चंद्रा, जिला पंचायत सीईओ सहित आयुष विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और भारी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
 

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