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‘सपा समेत विपक्ष में खलबली’, मायावती ने चुनावी समीकरणों पर दिया बड़ा बयान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि सूबे में ब्राह्मण समाज और अगड़ी जाति (अपर कास्ट) के लोगों का झुकाव अब तेजी से बसपा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता के इस बदलते मिजाज ने विरोधी खेमों की नींद उड़ा दी है। बसपा प्रमुख के अनुसार, जिस प्रकार साल 2007 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज के ऐतिहासिक और पूर्ण सहयोग से बसपा ने राज्य में पूर्ण बहुमत की मजबूत सरकार बनाई थी, ठीक उसी तरह के स्पष्ट राजनीतिक संकेत अब धरातल पर दोबारा नजर आने लगे हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर साझा किए गए अपने आधिकारिक बयान में मायावती ने बताया कि आगामी चुनावों के मद्देनजर बसपा ने विभिन्न वर्गों के जिताऊ और कर्मठ कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने की जमीनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध जनों के पार्टी से जुड़ने के कारण विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर गहरी बेचैनी और घबराहट देखी जा सकती है।

'सर्वजन हिताय' के सिद्धांत से ही सुरक्षित है हर वर्ग का भविष्य

बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के अपरकास्ट समाज और विशेष रूप से ब्राह्मण वर्ग का वास्तविक हित, सम्मान और सुरक्षा केवल बहुजन समाज पार्टी की नीतियों में ही निहित है। उन्होंने अपने शासनकाल का हवाला देते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी ने हमेशा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के मूल सिद्धांत को न केवल संगठन के स्तर पर लागू किया, बल्कि सरकार में रहते हुए भी शासन-प्रशासन के शीर्ष पदों पर हर वर्ग को यथोचित सम्मान और सत्ता में बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की थी।

विपक्षियों के राज में खुद को ठगा महसूस कर रहा था प्रबुद्ध वर्ग

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने विपक्षी दलों की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि गैर-बसपा सरकारों के कार्यकाल में ब्राह्मण समाज के लोगों को लंबे समय तक उपेक्षा, असुरक्षा और प्रशासनिक पक्षपात का दंश झेलना पड़ा है। अन्य राजनीतिक दलों के राज में यह वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था, यही वजह है कि अब यह चेतनाशील समाज बड़ी संख्या में पुनः बसपा के मंच पर लामबंद हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी चुनाव के बाद राज्य में बसपा की सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज को पूर्ववर्ती बसपा सरकारों की भांति ही पूरा मान-सम्मान, सुरक्षा और सत्ता में महत्वपूर्ण भागीदारी दी जाएगी।

क्षत्रिय, वैश्य सहित सभी समाजों को योग्यता के आधार पर मिलेगा टिकट

बसपा सुप्रीमो ने चुनावी रणनीति को स्पष्ट करते हुए साफ किया कि पार्टी किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव में केवल ब्राह्मण ही नहीं, बल्कि क्षत्रिय (राजपूत), वैश्य और अन्य सभी समाजों के सक्रिय व समर्पित लोगों को उनकी जमीनी तैयारी, निष्ठा और सामाजिक योगदान के पुख्ता आधार पर प्रत्याशी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व लगातार चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है और प्रदेश के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोकर आगे बढ़ने की सर्वसमावेशी रणनीति पर तेजी से काम किया जा रहा है।

राम मंदिर चंदा विवाद का हल बनेगा तिरुपति मॉडल? जानिए कैसे रखा जाता है हर पाई का हिसाब

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अयोध्या। भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी और नकदी के कथित गबन का मामला इन दिनों पूरे देश में गरमाया हुआ है। इस गंभीर प्रकरण में मंदिर की व्यवस्था और चल-अचल संपत्ति की सुरक्षा देखने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं, जबकि चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की हर परत को खंगालने में जुटा है। इस बड़े विवाद के बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति मंदिर के प्रशासनिक स्वरूप को अयोध्या में भी लागू करने का अहम सुझाव दिया है। उनका मानना है कि तिरुपति देवस्थानम की तर्ज पर यहाँ भी एक कमिश्नर रैंक के आईएएस अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया जाना चाहिए, जिसे उत्तर प्रदेश में काम करने का लंबा अनुभव हो।

तिरुपति मंदिर का समृद्ध इतिहास और उसका मजबूत प्रशासनिक ढांचा

आंध्र प्रदेश की शेषाचलम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसे तिरुमला तिरुपति मंदिर का प्रबंधन कोई निजी संस्था नहीं बल्कि राज्य सरकार का एक वैधानिक निकाय (टीटीडी) करता है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर हिंदू राजाओं, मुस्लिम शासकों और फिर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन रहा। अंग्रेजी हुकूमत ने 1843 में इसका जिम्मा हाथीरामजी मठ को सौंप दिया था। करीब एक सदी बाद 1933 में मद्रास विधानमंडल ने एक विशेष कानून बनाकर टीटीडी समिति का गठन किया। इसके बाद साल 1979 और 1987 में इसे और मजबूत कानूनी अधिकार दिए गए। वर्तमान में इस व्यवस्था के दो मुख्य हिस्से हैं; पहला 'ट्रस्ट बोर्ड' जो मंदिर से जुड़ी बड़ी नीतियां तय करता है और इसके वर्तमान अध्यक्ष बीआर नायडू हैं। दूसरा हिस्सा 'दैनिक प्रशासन' का है जिसे एक सेवारत आईएएस अधिकारी संभालता है, जिन्हें एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) कहा जाता है। फरवरी 2026 से इस पद पर आईएएस मुड्डादा रविचंद्र कार्यरत हैं, जो अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी सीएच वेंकैया चौधरी के साथ मिलकर करीब 14,000 कर्मचारियों की मदद से प्रतिदिन आने वाले 80 हजार से एक लाख तीर्थयात्रियों की व्यवस्था देखते हैं।

चढ़ावे का हिसाब और डिजिटल दान में पारदर्शिता का अनोखा रिकॉर्ड

दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में शुमार तिरुपति में दान की निगरानी के लिए एक अचूक और आधुनिक व्यवस्था लागू है। यहाँ की दानपेटियों (हुंडी) में रोजाना करीब 3.6 करोड़ से 4.1 करोड़ रुपये की नकदी आती है, जो सालाना 1,600 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा प्रतिवर्ष लगभग 1,400 किलोग्राम सोना भी चढ़ावे में आता है। अक्टूबर 2025 तक के वित्तीय विवरण के अनुसार, इस देवस्थानम के पास बैंकों में 14,000 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट और करीब 20 टन सोना जमा है। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ आने वाले गुप्त दान की गिनती अगले ही दिन करके उसे जनता के सामने सार्वजनिक कर दिया जाता है। इसके अलावा, पूरे परिसर में डिजिटल कियोस्क लगाने का यह परिणाम रहा कि वर्ष 2025 में मंदिर के इतिहास में पहली बार ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाला दान नकद चढ़ावे से आगे निकल गया। अकेले 11 महीनों में भक्तों ने विभिन्न सामाजिक कार्यों जैसे मुफ्त भोजन (अन्नप्रसादम ट्रस्ट), चिकित्सा, गो-रक्षा और शिक्षा से जुड़े ट्रस्टों में 918.6 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड दान दिया।

तिरुपति मॉडल की सीमाएं और राम मंदिर के लिए इसकी उपयोगिता

यूं तो तिरुपति की यह व्यवस्था बेहद पेशेवर मानी जाती है, लेकिन यह पूरी तरह से दोषमुक्त भी नहीं है। नियमानुसार यहाँ के प्रशासनिक अधिकारी का कार्यकाल पांच से सात साल का होना चाहिए, मगर अक्सर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण अधिकारियों का समय से पहले तबादला कर दिया जाता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में टीटीडी में एक साल के भीतर तीन कार्यकारी अधिकारी बदले गए। इसके अतिरिक्त, पिछले दिनों हुए 'लड्डू प्रसादम विवाद' (घी मिलावट प्रकरण) के दौरान भी राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारियों को बीच भंवर में ही हटा दिया गया था। इन तमाम व्यावहारिक कमियों के बावजूद नृपेंद्र मिश्र और अन्य विशेषज्ञ इस मॉडल की वकालत इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि यह नीतियां बनाने वाले बोर्ड और उसे जमीन पर उतारने वाले पेशेवर प्रशासनिक अधिकारी के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन करता है। अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के वर्तमान स्वरूप में इसी जवाबदेही और कार्यविभाजन की कमी खल रही है, जिसे दूर करना अब अनिवार्य हो चुका है।

शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स ने लगाई 400 अंकों की छलांग; निफ्टी 24,100 के ऊपर

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मुंबई। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन आई गिरावट के बाद, सोमवार का सवेरा शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने जबरदस्त वापसी करते हुए हरे निशान के साथ कारोबारी हफ्ते की शुरुआत की है। हालांकि, बाजार की इस रफ्तार के बीच एक बड़ी चिंता भी गहरा रही है, जिसने निवेशकों के साथ-साथ आर्थिक नीति-निर्माताओं को भी असमंजस में डाल दिया है—और वह है इस बार मॉनसून की सुस्त रफ्तार।

शुरुआती कारोबार में उछाल और निवेशकों की चांदी

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने पुराने घावों पर मरहम लगाते हुए एक बार फिर दमदार तेजी का रुख अख्तियार किया। बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 423.30 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की बड़ी बढ़त के साथ 77,226.20 के स्तर पर जा पहुंचा। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और वह 119.11 अंक यानी 0.50 फीसदी की तेजी दर्ज करते हुए 24,132.20 के आंकड़े पर पहुंच गया। बीते शुक्रवार को लगातार पांच दिनों से जारी बाजार की तेजी थम गई थी, लेकिन सोमवार के इस दमदार कमबैक ने दलाल स्ट्रीट में फिर से जान फूंक दी है। शुरुआती ट्रेडिंग सेशन के दौरान एचसीएल टेक और मारुति सुजुकी के शेयरों ने सबसे ज्यादा मुनाफा कमाया और टॉप गेनर्स में शुमार रहे।

कम बारिश और अल नीनो के कारण बाजार पर संकट के बादल

भले ही आज बाजार में चारों तरफ हरियाली दिख रही हो, लेकिन आने वाले समय में बाजार का भविष्य काफी हद तक इस बात पर तय होगा कि इंद्रदेव कितने मेहरबान होते हैं। अल नीनो के प्रभाव की वजह से चालू महीने में अब तक सामान्य के मुकाबले करीब 38 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि अगर मॉनसून ने अपनी रफ्तार नहीं पकड़ी तो खरीफ की फसलों की बुवाई बुरी तरह प्रभावित होगी। कृषि उत्पादन में कमी आने की वजह से देश में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे खाद्य महंगाई दर में उछाल आएगा। इसके साथ ही ग्रामीण भारत की क्रय शक्ति कमजोर होगी, जिससे मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है। यह पूरा चक्र सीधे तौर पर देश की जीडीपी और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बुरा असर डाल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख और घरेलू निवेशकों के लिए आगे की राह

एक तरफ जहां भारतीय बाजारों में लिवाली का माहौल बना हुआ है, वहीं विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेत बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है, जहां जापान के टॉपिक्स इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में 0.1 प्रतिशत का सुधार देखा गया। इसके उलट अमेरिकी बाजारों में मंदी का असर दिखा और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.4 प्रतिशत टूट गए। एशियाई बाजारों में भी मंदी हावी रही, जिसके चलते हांगकांग का हैंगसेंग 1.3 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.2 फीसदी की कमजोरी के साथ ट्रेड करते दिखे। यूरोपियन मार्केट के यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में भी 0.3 फीसदी की गिरावट रही। बहरहाल, घरेलू बाजार के लिए यह हफ्ता नई उम्मीदों वाला साबित हुआ है, लेकिन निवेशकों को आगे कोई भी बड़ा दांव लगाने से पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मॉनसून के आंकड़ों को ध्यान में रखना होगा।

1.25 लाख के इनामी अपराधी को STF ने किया ढेर, कई संगीन मामलों में था वांछित

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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने रविवार देर रात एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले सवा लाख रुपये के इनामी कुख्यात अपराधी ललन सिंह उर्फ लल्लन को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया। यह मुठभेड़ सहारनपुर जिले के सरसावा-नकुर मार्ग पर हुई। इस क्रॉस-फायरिंग के दौरान लल्लन का एक मुख्य मददगार अंधेरे और घने पेड़ों का लाभ उठाकर घटना स्थल से भागने में सफल रहा, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

वाराणसी और चंदौली पुलिस ने घोषित किया था इनाम

एसटीएफ मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मारे गए अपराधी ललन सिंह (पुत्र शिव शंकर सिंह) का लंबा और खौफनाक आपराधिक इतिहास रहा है। वह पिछले काफी समय से उत्तर प्रदेश और बिहार के कई संगीन और जघन्य मामलों में वांछित (वांटेड) चल रहा था। उसकी लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की ओर से एक लाख रुपये और चंदौली जिला पुलिस की तरफ से 25 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया था। लल्लन मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिला अंतर्गत मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र के आनंदगोलवा गांव का निवासी था, जिसने पूर्वांचल और पश्चिम यूपी में अपना नेटवर्क फैला रखा था।

घेराबंदी करने पर एसटीएफ टीम पर झोंक दी थी गोलियां

घटनाक्रम के मुताबिक, 21 जून की रात एसटीएफ की विशेष टीम सहारनपुर के सरसावा-नकुर मार्ग पर संदिग्ध वाहनों और अंतरराज्यीय अपराधियों की धरपकड़ के लिए सघन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान गुप्तचरों से टीम को इलाके में कुछ हथियारों से लैस बदमाशों की मौजूदगी का सटीक इनपुट मिला।

सूचना के आधार पर जब एसटीएफ ने घेराबंदी शुरू की, तो खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई जवाबी कार्रवाई में ललन सिंह उर्फ लल्लन गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसका दूसरा साथी गोलियां चलाते हुए मौके से भाग निकला।

सुरक्षा बल घायल बदमाश को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सरसावा लेकर गए, जहां उसकी नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने सघन परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

7 हत्याओं और बैंक डकैती सहित कई बड़ी वारदातों को दे चुका था अंजाम

पुलिसिया रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला है कि ललन सिंह अपने सगे भाइयों और गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों के साथ मिलकर एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चला रहा था। उसके ऊपर सात निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या, कई बैंक डकैती, एटीएम कैश-वैन लूट और पुलिसकर्मियों से सरकारी हथियार लूटने जैसे दर्जनों संगीन मुकदमे दर्ज थे। लल्लन के हाथों मारे गए लोगों में दो जांबाज सब-इंस्पेक्टर (उपनिरीक्षक), एक बैंक कैशियर और एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे।

विशिष्ट मामलों की बात करें तो लल्लन पर 8 नवंबर 2022 को वाराणसी में तैनाती के दौरान एक सब-इंस्पेक्टर को सरेआम गोली मारकर उनकी सरकारी सर्विस पिस्तौल लूटने का मुख्य आरोप था। इसके अतिरिक्त, 1 नवंबर 2022 को चंदौली जिले में हुई एक भीषण गोलीबारी और रंगदारी-लूट की घटना में भी पुलिस को उसकी सरगर्मी से तलाश थी। पुलिस प्रशासन ने बताया कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और फरार आरोपी को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है।

स्कूल बस में बड़ा फर्जीवाड़ा! बाइक का नंबर लगाकर चल रही थी गाड़ी, दो दबोचे गए

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कोटपूतली-बहरोड़। जिले के मांढण थाना इलाके में स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने जाली नंबर प्लेट और संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए चलाई जा रही एक स्कूल बस को पकड़ा है। इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने स्कूल के डायरेक्टर समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। यह बस मासूम बच्चों को घर से स्कूल लाने और ले जाने के काम में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रही थी, जिससे नौनिहालों की जान जोखिम में पड़ी हुई थी। जिला पुलिस कप्तान के निर्देश पर जारी धरपकड़ अभियान के तहत स्थानीय पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए वांछित स्कूल संचालक पवन कुमार और प्रदीप कुमार को धर दबोचा।

परिवहन विभाग के औचक निरीक्षण में खुली धांधली की पोल

इस पूरे गोरखधंधे का भंडाफोड़ परिवहन विभाग की मुस्तैदी से हुआ। दरअसल, उप परिवहन कार्यालय के उड़नदस्ते ने नगली बलाहीर स्थित संस्कार भारती (मेक विजन उच्च माध्यमिक विद्यालय) में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की औचक चेकिंग की थी। इस दौरान वहां मौजूद एक स्कूल बस पर दर्ज नंबर को देखकर अधिकारियों को शक हुआ। जब उस नंबर की ऑनलाइन जांच की गई तो वह किसी बस का नहीं, बल्कि एक मोटरसाइकिल का निकला। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने बस का चेसिस नंबर चेक किया, लेकिन परिवहन विभाग के सरकारी डेटाबेस में उसका कोई भी वैध ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

दस्तावेज न मिलने पर बस सीज और जालसाजी का मुकदमा दर्ज

जांच टीम ने धोखाधड़ी पकड़े जाने के तुरंत बाद अवैध रूप से चल रही इस बस को अपनी कस्टडी में लेकर शाहजहांपुर स्थित सरकारी यार्ड में बंद करवा दिया। इसके बाद विभाग की तरफ से स्कूल प्रबंधन से बस के असली कागजात और फिटनेस सर्टिफिकेट पेश करने को कहा गया। कई बार मौका दिए जाने के बावजूद स्कूल संचालक वाहन से जुड़े कोई भी संतोषजनक दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद विभाग की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी करने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर पुलिस की सख्त पड़ताल शुरू

पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण इसकी बेहद बारीकी से तहकीकात की जा रही है। रिमांड के दौरान आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है कि वे इस फर्जी नंबर वाली बस को कितने समय से सड़क पर दौड़ा रहे थे और इसके पीछे परिवहन विभाग या किसी अन्य स्तर पर कौन से लोग शामिल थे। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि कहीं इस तरह के और भी संदिग्ध वाहन क्षेत्र के अन्य स्कूलों में बच्चों की जिंदगी को खतरे में तो नहीं डाल रहे हैं।

सब्जी मंडी में आग से हड़कंप, तीन दमकलों ने समय रहते टाला बड़ा हादसा

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बालोतरा। स्थानीय मुख्य सब्जी मंडी में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब परिसर के भीतर जमा कूड़े के एक विशाल ढेर में एकाएक आग भड़क उठी। कुछ ही पलों में लपटों ने विकराल रूप ले लिया और पूरे बाजार क्षेत्र में काले धुएं का साम्राज्य फैल गया। इस अप्रत्याशित घटना से मंडी में खरीद-फरोख्त कर रहे दुकानदारों और खरीदारों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसे की भनक लगते ही नगर परिषद और दमकल विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। आपातकालीन सेवा के तहत दमकल की तीन गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया। अग्निशमन कर्मियों के कड़े प्रयासों के बाद आखिरकार आग को पूरी तरह बुझा दिया गया, जिससे लपटें आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक नहीं पहुंच सकीं और एक भयंकर तबाही होने से बच गई।

लापरवाही के चलते फैली आग और प्लास्टिक की कैरेट जलकर खाक

चश्मदीदों के मुताबिक, मंडी परिसर के एक हिस्से में काफी वक्त से भारी मात्रा में कचरा सड़ रहा था। सोमवार को अचानक इस कचरे से आग की लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते चारों ओर धुआं ही धुआं हो गया। शुरुआती तौर पर वहां मौजूद कारोबारियों ने पानी और अन्य संसाधनों से आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश की, मगर स्थिति हाथ से निकलते देख उन्होंने फौरन प्रशासनिक अधिकारियों को इत्तला दी। देखते ही देखते आग की तपन पास में ही रखी सब्जियों की सैकड़ों प्लास्टिक कैरेट तक पहुंच गई, जिससे वे जलकर राख हो गईं। गनीमत रही कि दमकल विभाग ने बेहद मुस्तैदी दिखाई, जिसके चलते दुकानों और कीमती सामान को सुरक्षित बचा लिया गया।

व्यापारिक गतिविधियां ठप और पहले हुए हादसे की यादें ताजा

दमघोंटू धुएं के कारण कुछ घंटों के लिए सब्जी मंडी में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर कई दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए और दुकानों के भीतर रखे कीमती माल को सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित करने में जुट गए। इस अफरा-तफरी को देख मौके पर भारी भीड़ भी जमा हो गई। स्थानीय दुकानदारों ने रोष जताते हुए बताया कि तकरीबन एक साल पहले भी इसी मंडी में ऐसी ही भयानक आगजनी की घटना हुई थी, जिसमें कई लोगों को भारी आर्थिक आघात लगा था। उस दर्दनाक हादसे के बाद भी स्थानीय प्रशासन और मंडी प्रबंधन ने कचरे के निस्तारण तथा साफ-सफाई को लेकर कोई कड़े कदम नहीं उठाए।

नियमित सफाई की मांग और हादसे के कारणों की जांच शुरू

इस घटना से आक्रोशित व्यापारियों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि मंडी परिसर से रोजाना निकलने वाले जैविक और सूखे कचरे की नियमित सफाई कराई जाए। उनका कहना है कि इस कचरे का समय पर उठान न होना ही बार-बार ऐसी घटनाओं को दावत देता है। फिलहाल दमकल और पुलिस प्रशासन आग लगने की मुख्य वजहों का पता लगाने में जुटे हैं। शुरुआती तौर पर माना जा रहा है कि कचरे में किसी सुलगती हुई चीज या चिंगारी की वजह से यह हादसा हुआ होगा। सबसे तसल्लीबख्श बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ और न ही किसी के झुलसने की खबर है।

युवा शक्ति के सहारे कांग्रेस का नया दांव, कोटा से जिलों तक बढ़ा अभियान

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जयपुर। राजनीतिक आयोजनों में नौजवानों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए कांग्रेस को राजस्थान में भविष्य की नई राह दिखाई दे रही है। कोटा में राहुल गांधी के कार्यक्रम को मिले शानदार जनसमर्थन के बाद सूबे की कांग्रेस इकाई ने इस मुहिम को पूरे प्रदेश में विस्तार देने का फैसला किया है। पार्टी नेतृत्व ने आगामी 28 जून तक सभी जिलों में एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और जिला संगठन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत ये कार्यकर्ता पढ़ाई और नौकरी जैसे बुनियादी सवालों को लेकर ग्रामीण इलाकों में घर-घर दस्तक देंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के मार्गदर्शन में होने वाले इन शिविरों में राहुल गांधी के कोटा वाले भाषण का वीडियो बड़ी स्क्रीन पर दिखाया जाएगा और कार्यकर्ताओं को सिखाया जाएगा कि वे युवाओं से जुड़े मुद्दों को आंकड़ों के साथ जनता के सामने कैसे रखें।

विशेषज्ञों की मदद से तैयार होगी युवाओं को साधने की रणनीति

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि कोटा के मंच से राहुल गांधी ने देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली की खामियों और नौजवानों के सामने खड़ी चुनौतियों को बेहद तार्किक ढंग से पेश किया था। उन्होंने नीट परीक्षा की गड़बड़ियों, पढ़ाई के बजट में कटौती, छात्र-छात्राओं पर बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं का हवाला देकर व्यवस्था को कठघरे में खड़ा किया था। कांग्रेस अब इसी नैरेटिव को आम लोगों के बीच ले जाने की तैयारी में है। इसके लिए जिला स्तर पर लगने वाले ट्रेनिंग कैंपों में विषय विशेषज्ञ बुलाए जा रहे हैं, जो कार्यकर्ताओं को प्रभावी ढंग से प्रेजेंटेशन देने और अपनी बात को दमदार तरीके से जनता के बीच रखने के गुर सिखाएंगे।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जमीन पर उतरेगी कांग्रेस की युवा विंग

सभी जिलों में प्रशिक्षण सत्र संपन्न होने के तुरंत बाद एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और मुख्य संगठन के तैयार किए गए कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो जाएंगे। ये टीमें सीधे तौर पर विद्यार्थियों और आम नागरिकों के बीच जाकर शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर पार्टी का दृष्टिकोण साझा करेंगी। इसके साथ ही हर जिले में स्थानीय स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। जिला अध्यक्षों, विधायकों और सांसदों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय मीडिया के माध्यम से युवाओं और छात्रों से जुड़े सवालों को पुरजोर तरीके से उठाएं।

रोजगार और शिक्षा के सहारे नए वोटबैंक को जोड़ने की कवायद

कांग्रेस रणनीतिकारों का मानना है कि कोटा के कार्यक्रम में उमड़ी नौजवानों की भारी भीड़ इस बात का सबूत है कि रोजगार और बेहतर शिक्षा जैसे विषय आज की पीढ़ी के लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। पार्टी को पूरा भरोसा है कि इस नए अभियान के माध्यम से युवाओं का झुकाव कांग्रेस की तरफ बढ़ेगा। इसी रणनीति के तहत एनएसयूआई और युवा कांग्रेस को कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों के आसपास अधिक सक्रिय रहने और छात्र राजनीति में अपनी पैठ मजबूत करने का विशेष जिम्मा सौंपा गया है।

क्या है पूरा मामला? संजय नगायच के बयान और जीतू पटवारी के जवाब से मचा सियासी बवाल

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इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष जीतू पटवारी के स्वामित्व वाले चार गोदामों (वेयरहाउस) में फायर सेफ्टी (अग्निशमन सुरक्षा) मानकों की कमी को लेकर वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस दंडात्मक कार्रवाई और आरोपों के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने कॉर्पोरेशन के महाप्रबंधक अनुराग वर्मा को फोन कर दो टूक लहजे में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। पटवारी ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि राज्य सरकार को लगता है कि उनके गोदामों में किसी भी प्रकार के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो वे तत्काल उनका पूरा वेयरहाउस खाली करा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं और द्वेषवश की जा रही इस कार्रवाई को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

क्या है पूरा मामला? औचक निरीक्षण के बाद जारी हुआ नोटिस

इस प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पालिया में स्थित चार बड़े वेयरहाउसों का औचक निरीक्षण किया। जांच के बाद यह बात सामने आई कि ये चारों गोदाम कांग्रेस नेता जीतू पटवारी के हैं।

निरीक्षण के बाद कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष नगायच ने आरोप लगाया कि इतने बड़े कद के राजनीतिक नेता होने के बावजूद पटवारी के गोदामों में आगजनी जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद नहीं हैं। यहाँ तक कि बुनियादी सुरक्षा के तौर पर रखी जाने वाली रेत और बाल्टियों तक का इंतजाम सही तरीके से नहीं मिला। उन्होंने अपने रुख को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि वे प्रदेश भर के करीब 100 वेयरहाउसों का दौरा कर चुके हैं, और यह कार्रवाई केवल एक नेता को लक्षित करके नहीं की गई है। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉर्पोरेशन ने पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

'नियमों का उल्लंघन नहीं करेंगे, अनाज का पूरा ख्याल रखेंगे' — पटवारी

कॉर्पोरेशन की ओर से नोटिस थमाए जाने के बाद जीतू पटवारी ने महाप्रबंधक अनुराग वर्मा से फोन पर सीधा संवाद किया। सोशल मीडिया पर आए बयानों के अनुसार पटवारी ने कहा, "बीजेपी के कुछ नए नेता जो कॉर्पोरेशन में पदों पर बैठे हैं, वे मेरे वेयरहाउस पर गए थे और औचक निरीक्षण के नाम पर कह रहे हैं कि वहां जाले लगे हैं।"

पटवारी ने अधिकारी से आगे कहा, "मैंने पूर्व में भी लिखित रूप से अवगत कराया था और आज पुनः आपको पत्र लिख रहा हूं। यदि हमारी व्यवस्थाओं से आपत्ति है, तो आप सहर्ष हमारे गोदामों को खाली करा सकते हैं। हम सत्ता पक्ष के अनुचित दबाव में आकर स्थापित नियमों के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करेंगे। गोदामों में रखे अनाज की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाएगा और रख-रखाव में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।"

कॉर्पोरेशन अध्यक्ष का पलटवार: 'अधिकारियों को धमका रहे हैं नेता'

दूसरी तरफ, कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगायच ने जीतू पटवारी के इस रुख पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता नियमों का पालन करने के बजाय शासकीय अधिकारियों को डराने और धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। नगायच ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा इंदौर और उज्जैन संभाग के विभिन्न वेयरहाउसों का व्यापक निरीक्षण किया गया था, और जहां-जहां तकनीकी या सुरक्षात्मक कमियां पाई गईं, उन सभी को समान रूप से नोटिस जारी किए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि जब वे पालिया गांव के गोदामों की जांच कर रहे थे, तब उन्हें इस बात की पूर्व जानकारी नहीं थी कि यह संपत्ति जीतू पटवारी की है। कॉर्पोरेशन अध्यक्ष के अनुसार, कानून और सुरक्षा के नियम समाज के हर वर्ग के लिए एक समान हैं; चाहे कोई बड़ा राजनेता हो, प्रशासनिक अधिकारी हो या आम नागरिक, जनसुरक्षा से जुड़ी लापरवाही मिलने पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

वायरल वीडियो से बढ़ीं मुश्किलें, पुणे पोर्शे केस में आरोपी के पिता की जमानत पर संकट

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पुणे। पोर्शे कार दुर्घटना मामले के नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। पुणे पुलिस ने उनकी जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख किया है। पुलिस का दावा है कि विशाल अग्रवाल ने देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दी गई राहत की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन किया है। सरकारी वकील के माध्यम से शिवाजीनगर सत्र न्यायालय में यह याचिका दायर की गई है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होने के आसार हैं। यह पूरी कानूनी कवायद सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो के बाद शुरू हुई है, जिसमें विशाल अग्रवाल अपने परिजनों के साथ जश्न के माहौल में नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद आम जनता में भारी आक्रोश देखा गया और जांच व्यवस्था पर भी उंगलियां उठीं।

वीडियो पर पुलिसिया कार्रवाई और अभियोजन पक्ष के तर्क

इंटरनेट पर वीडियो के प्रसारित होने के बाद पुणे पुलिस के आला अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए। राज्य के विधि विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद पुलिस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि गंभीर आरोपों में जमानत मिलने के बाद इस प्रकार सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाना मामले से जुड़े गवाहों को डराने या प्रभावित करने जैसा है। पुलिस का तर्क है कि इस व्यवहार से गवाहों पर मानसिक दबाव बन सकता है, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों का सीधा उल्लंघन है।

अग्रवाल परिवार की सफाई और वीडियो की हकीकत

दूसरी तरफ, आरोपी के परिवार और उनके वकीलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वीडियो को पुराना करार दिया है। विशाल अग्रवाल की कानूनी टीम द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह वीडियो वर्तमान का नहीं बल्कि साल 2023 का है, जब वे गोवा के एक होटल में अपनी शादी की 25वीं वर्षगांठ मना रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस पारिवारिक आयोजन का मई 2024 में पुणे के यरवदा थाने में दर्ज हुए सड़क हादसे से कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस ने इस संबंध में विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी के बयान भी दर्ज किए हैं, जिन्हें डिजिटल साक्ष्यों के साथ कोर्ट में रखा जाएगा। अदालत ने फिलहाल आरोपी पक्ष को इस याचिका पर अपना आधिकारिक जवाब सौंपने को कहा है।

क्या है पूरा पोर्शे कार हादसा मामला

यह विवाद 19 मई 2024 की रात से जुड़ा है, जब पुणे के कल्याणी नगर क्षेत्र में एक तेज रफ्तार पोर्शे कार ने मोटरसाइकिल सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि उस वक्त कार विशाल अग्रवाल का नाबालिग बेटा चला रहा था। विशाल अग्रवाल को इस मामले में खून के नमूनों की हेराफेरी करने और सबूत मिटाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि बेटे को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए ससून अस्पताल में उसके ब्लड सैंपल को उसकी मां के सैंपल से बदल दिया गया था ताकि शराब पीने की पुष्टि न हो सके। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च के महीने में विशाल अग्रवाल को जमानत की मंजूरी दी थी।

हिजबुल्ला चीफ का बड़ा दावा: इस्राइल और अमेरिका हार चुके, ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप

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बेरूत। पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों के बीच हिजबुल्ला के शीर्ष नेता शेख नईम कासिम ने अमेरिका और इस्राइल की रणनीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उनका दावा है कि ईरान और क्षेत्र के अन्य विद्रोही संगठनों को मिटाने का अमेरिकी-इस्राइली मंसूबा पूरी तरह पस्त हो चुका है। कासिम ने जोर देकर कहा कि लेबनान में इस्राइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई को अमेरिका का पूरा शह प्राप्त है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस टकराव के बाद पश्चिम एशिया अब एक ऐसे नए युग की तरफ बढ़ रहा है, जहाँ अमेरिकी-इस्राइली योजनाओं को शिकस्त झेलनी पड़ी है। मध्य अशूरा परिषद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि तमाम पाबंदियों और नुकसान के बाद भी ईरान पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बनकर उभरा है और वह अपने क्षेत्रीय वजूद से कभी पीछे नहीं हटेगा।

सैन्य कार्रवाई की छूट वाले युद्धविराम प्रस्तावों पर हिजबुल्ला का रुख

हिजबुल्ला प्रमुख ने उन सभी शांति प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें इस्राइल को अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखने की परोक्ष अनुमति दी गई हो। कासिम का मानना है कि ऐसे समझौते असल में युद्धविराम नहीं, बल्कि हमले जारी रखने का एक नया बहाना हैं। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि हिजबुल्ला द्वारा नियमों का पालन किए जाने के बावजूद इस्राइल ने हमेशा समझौतों को तोड़ा है। संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल उसी प्रस्ताव पर सहमत होगा जो पूरी तरह से सैन्य अभियानों पर रोक लगाने की पक्की गारंटी देता हो।

हिजबुल्ला की शर्तें और भविष्य की रणनीतिक मांगें

संगठन की मांग है कि एक वास्तविक युद्धविराम के तहत जल, थल और नभ तीनों मोर्चों से होने वाले सभी हमलों पर तुरंत पूर्ण विराम लगना चाहिए। इसके साथ ही लेबनान के भीतर रिहाइशी और अन्य बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना बंद किया जाए और इस्राइली सैनिक लेबनानी सीमाओं से पूरी तरह वापस लौटें। कासिम ने ईरान से मिल रहे मजबूत सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि तेहरान के लिए लेबनान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी करना एक बड़ा और असरदार रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।

अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका और पश्चिम एशिया के बदलते समीकरण

कासिम ने अमेरिकी प्रशासन को इस जंग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वाशिंगटन की मदद के बिना इस्राइल इस स्तर पर तबाही नहीं मचा सकता था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में इस युद्ध को तुरंत रुकवाने की क्षमता है, क्योंकि अगर अमेरिका कड़ा रुख अपनाए तो बेंजामिन नेतन्याहू उसकी बात को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे। हिजबुल्ला का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत चल रही है और तनाव घटाने के लिए 14 सूत्रीय समझौते पर काम हो रहा है। लेबनान में इस्राइली कार्रवाई को रोकना इस कूटनीति का मुख्य हिस्सा है, लेकिन हिजबुल्ला के तेवरों से साफ है कि शांति की राह अभी भी बेहद पेचीदा है।

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