नई दिल्ली । आगामी 26 सितंबर को मारुति सुजुकी अपनी नई एसयूवी ग्रैंड विटारा को लॉन्च करने जा रही है। कंपनी नई विटारा को माइल्ड हाइब्रिड पावरट्रेन ऑप्शन के साथ पेश करने वाली है। इसे मारुति के नेक्सा आउटलेट्स के माध्यम से बेचा जाएगा। ग्रैंड विटारा 6 ट्रिम्स में सेल के लिए अवेलेबल होगी। नई ग्रैंड विटारा का इंटीरियर कई सारे फीचर्स जैसे- वायरलेस चार्जर, एंबिऐंट लाइटिंग, इंटीग्रेटेड गूगल टेक्नालाजी, ईएसपी, हिल-होल्ड असिस्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑल-व्हील डिस्क ब्रेक और 6 एयरबैग्स मिलने वाले हैं। इसके अलावा एक्सटीरियर में फ्रंट ग्रिल, अलाय। व्हील्स और क्रोम ट्रीटमेंट दिया गया है। नई ग्रैंड विटारा को टोयोटा हाइडर के समान प्लेटफार्म पर डेवलेप किया जाएगा। और इसमें 103एचपी, 1.5-लीटर के15सी पेट्रोल माइल्ड-हाइब्रिड इंजन दिया जाएगा। ट्रांसमिशन के लिए इसके इंजन को 5-स्पीड मैनुअल या 6- स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक से जोड़ा गया है। इसी के साथ इसमें 4 डब्ल्यूडी का ऑप्शन भी दिया जाएगा।
ग्रैंड विटारा को लेकर कंपनी यह दावा कर रही है कि 27.97केएमपीएल की बेहतर माइलेज प्रदान करती है। मारुति नई विटारा को मिड साइज एसयूवी सेगमेंट में पेश करने जा रही है,जो कि मार्केट मे पहले से मौजूद ह्युंडई क्रेटा, किआ सेल्टोस, वोक्सवैगन ताइगुन, स्कोडा कुशाक और टोयोटा हाइडर को टक्कर देगी। इसके अतिरिक्त, ग्रैंड विटारा में 92एचपी, 3-सिलेंडर, 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन भी दिया जा सकता है, जिसे इलेक्ट्रिक मोटर के साथ जोडा जाएगा।
मारुति सुजुकी की नई एसयूवी ग्रैंड विटारा 26 सितंबर को लॉन्च
मुझे दबाव की परिस्थितियों में भी बड़े शॉट खेलने में मदद मिलती : दिनेश कार्तिक
नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में ‘फिनिशर की भूमिका निभा रहे दिनेश कार्तिक ने कहा कि वह बहुत अधिक अभ्यास नहीं करते लेकिन कुछ विशेष चीजों पर ध्यान देते हैं। कार्तिक ने अनुसार ऐसा करने से उन्हें बेहद दबाव की परिस्थितियों में भी बड़े शॉट खेलने में मदद मिलती है।
कार्तिक से जब तैयारियों के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा कि नेट अभ्यास में इस तरह की परिस्थितियां तैयार करने से उन्हें मदद मिलती है। उन्होंने कहा, मैं लंबे समय से इसका अभ्यास कर रहा हूं। मैंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए ऐसा किया और अब भारतीय टीम के लिए कर रहा हूं। कार्तिक ने कहा,‘‘मैं इस तरह की परिस्थितियां तैयार करके अभ्यास करता हूं और राहुल द्रविड़ व विक्रम राठौड़ भाई भी इसमें मेरी मदद करते हैं।
कार्तिक ने कहा, मैं बहुत अधिक अभ्यास नहीं करता लेकिन जहां तक संभव हो सके कुछ खास चीजों पर ध्यान देता हूं। मोहाली में पहले मैच में कार्तिक को अक्षर पटेल के बाद बल्लेबाजी के लिए भेजा गया लेकिन दूसरे मैच में उन्हें बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर से पहले उतारा गया। कार्तिक ने कहा, यह ऐसा है जिसको हम आजमा रहे हैं। कुछ अवसरों पर कुछ ओवर बचे होते हैं, जिसमें अक्षर स्पिनरों पर हावी होकर खेल सकता है। इसके पीछे तर्क है उस चरण में बाएं हाथ के बल्लेबाज और लेग स्पिनर का अच्छा मुकाबला होगा, इसलिए कुछ अवसरों पर हम यह विकल्प आजमाते हैं।
बच्चे की तुलना न करें
अभिभावक होना जितना सुखद होता है, उतना ही मुश्किल भी। अपने बच्चों को कौन सी बात किस तरह समझाना है, इसको लेकर अकसर आप उलझन में पड़ जाते होंगे। कई बार आप अपने बच्चों को प्यार से समझाते हैं, तो कई बार उन्हें डांट देते हैं। कई बार आप उन्हें अपना ही उदाहरण दोते हैं, लेकिन आपकी बातों का बच्चे पर क्या असर पड़ता है, इसका अंदाजा आप नहीं लगा पाते हैं। इसलिए आपको इन बातों को बच्चों से कहने से बचना चाहिए।
आप बच्चे की तुलना अपने आप से न करें। आप भी जब छोटे थे तो आपमें कई कमियां रही होंगी। उसे अपने बचपन का मजा लेने दें, उसे 'परफेक्ट चाइल्ड' बनाने की जरूरत नहीं है।
अपने फैसले खुद लेने से ही बच्चा आगे बढ़ेगा। अगर उसके फैसले गलत साबित होते हैं, तो उससे वह सीखेगा और आगे सही निर्णय लेगा। गलत फैसला लेने के लिए आपकी डांट उसे डराने और आत्मविश्वास कम करने के अलावा कुछ नहीं कर सकती है।
इस तुलना की कोई जरूरत नहीं है। हर बच्चे का विकास अलग-अगल तरीके से होता है। वे अपने अलग-अलग अनुभवों से सीखते हैं। कहीं ऐसा न हो कि हर बात पर बेवजह की तुलना बच्चों में आपस में मतभेद पैदा कर दें।
बेशक आपके पास कई जिम्मेदारियां हैं, जिनसे कभी-कभी आप परेशान हो जाते होंगे और अकेला रहना चाहते होंगे लेकिन आपका बच्चा आपकी परेशानियों से बिल्कुल अनजान है। ऐसे में उससे ऐसा कहना उसके मन पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।ऐसा कहना बच्चे तो क्या किसी बड़े को भी काफी आहत कर सकता है। ऐसे में बच्चों से ऐसा कहना बिल्कुल ठीक नहीं है।
बच्चों को इस प्रकार सिखाएं काम-काज
घर में छोटे बच्चे हो तो घर व्यवस्थित रहेगा, इसकी कल्पना करना भी बेकार है क्योंकि बच्चे घर के सामान को खेल-खेल में बिखेर देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि वीकेंड पर बच्चों से ही घर को व्यवस्थित करा लिया जाए, जिससे वे घर का रख-रखाव सीख जाएंगे और घर को व्यवस्थित रखने में आपकी मदद भी कर देंगे।
बच्चों को टास्क दें
कोई भी बच्चा एक दिन में पूरे घर की सफाई करना नहीं सीख सकता। वीकेंड पर बच्चों को छोटी-छोटी चीजें व्यवस्थित करना सिखाएं। इसके लिए उन्हें घर के किसी एक कोने को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दे सकती हैं। आप उन्हें उनके वॉर्डरोब के सामान को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दें परन्तु उन्हें यह जरूर बताएं कि पहले सारे कपड़े वॉर्डरोब से बाहर निकालें और फिर उन्हें दोबारा तह कर के वॉर्डरोब में लगाएं। उसके बाद कपड़े वॉर्डरोब में इस तरह रखें कि उन्हें इस्तेमाल करने के लिए निकालना आसान रहेगा।
उनकी काम में मदद करें
यदि आपको लगे कि बच्चा अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा है तो बीच-बीच में उसकी मदद करें तथा काम को सही ढंग से करने का तरीका बताएं। उसे बचाएं कि शर्ट कैसे तह की जाती, मोजों को हमेशा जोड़ा बनाकर रखते हैं ताकि वे खोएं नहीं। यहीं नहीं कपड़े शैल्फ में कैसे रखे जाते हैं यह भी उन्हें करके बताएं। यदि आप उन्हें बुक शैल्फ अरेंज करने का काम दे रही है तो उन्हें बताएं कि बुक शैल्फ में सबसे पहले बड़ी किताबें सैट की जाती हैं, फिर उससे छोटी और सबसे आगे छोटे आकार की किताबें रखी जाती हैं।
म्यूजिक लगाएं
बच्चा काम को एन्जॉय करते हुए सीख पाए, इसलिए उसकी पसंद का म्यूजिक लगा दें। बीच-बीच में छोटा-सा ब्रेक लेकर उसके साथ डांस करें। म्यूजिक के साथ काम करने में उसे मजा भी आएगा और आसानी से काम भी सीख जाएगा।
खेल और ईनाम
नया काम सीखते समय बच्चा बोर न हो, इसलिए उसे खेल-खेल में काम सिखाने की कोशिश करें। आप पांच मिनट का अलार्म लगा दें और कहें कि यदि वह पांच मिनट में पांच जोड़े जूते अल्मारी में रख देगा तो उसे चॉकलेट मिलेगी। यदि बच्चा समय पर अपना टास्क पूरा कर ले तो उसके प्रयास की तारीफ करें और अपना प्रॉमिस भी निभाएं।
सबके सामने तारीफ करें
जब बच्चा अपना काम पूरा कर ले तो उसकी मनपसंद चीज उसे ईनाम में दें या उसकी पसंदीदा डिश बना कर उसे खिलाएं। यही नहीं परिवार के अन्य सदस्यों के सामने भी उसकी तारीफ करें। इससे उसे न केवल अपना टास्क पूरा करने की खुशी मिलेगी, बल्कि आपका प्यार और आपका साथ उसमें नई ऊर्जा का संचार करेगा।
इस कारण बच्चों को नहीं लगती भूख
बच्चों को खाना-खिलाना कोई आसान काम नहीं है। हर चीज को लेकर उनकी आना-कानी माता-पिता के लिए परेशानी बन जाती है क्योंकि वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि उनके लिए पोषण कितना ज्यादा जरूरी है। वहीं, बच्चे भूख न लगने की बात कहकर खाना टाल लेते हैं पर अगर बच्चा खाना नहीं खा रहा तो इसके पीछे कुछ कारण भी हो सकते हैं।
पेट के कीड़े
जब बच्चे के पेट में कीड़े होते हैं तो उन्हें भूख नहीं लगती। कई बार तो इससे दस्त, सूजन, कमजोरी और पोषण की कमी होने लगती है। इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
एनीमिया
शरीर में एनीमिया की कमी होने पर चिड़चिड़ापन,कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। जिससे बच्चे का खाना खाने का मन नहीं करता। बच्चे के डांटने की बजाए उसके पोषण पर ध्यान दें।
कब्ज
पेट से जुड़ी परेशानियां भी भूख न लगने का कारण बनती हैं। कब्ज भी इसका संकेत है। पाचन क्रिया की गड़बड़ी के कारण पेट साफ नहीं हो सकता, जिससे बच्चा खाना नहीं खा पाता। जब आंत साफ होती है तो धीरे-धीरे बच्चे की भूख में भी सुधार आने लगता है।
अवसाद
अवसाद यानि तनाव का शिकार सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी हो जाते हैं। भूख न लगने का यह भी एक हिस्सा है। तनावग्रस्त बच्चों को भूख नहीं लगती।
दवाओं का सेवन
बच्चा ज्यादादेर तक किसी प्रकार की दवाइयों का सेवन कर रहा हो तब भी उसे भूख नहीं लगती। एंटीबायोटिक से बच्चों में भूख की कमी हो सकती है। अगर दवाइयां बंद करने के बाद भी बच्चा भूख महसूस नहीं कर रहा हो डॉक्टरी जांच बहुत जरूरी है।
पितृपक्ष में संन्यासियों के लिए कब होता है श्राद्ध , विधि और धार्मिक महत्व
भाद्रपद मास की पूर्णिमा से पितृ पक्ष प्रारंभ हुआ। पितृपक्ष में आज के दिन द्वादशी तिथि का श्राद्ध किया जाता है। द्वादशी तिथि के दिन पितरों के साथ साधुओं संतों के श्राद्ध की भी परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपने (मरे) पूर्वज का द्वादशी तिथि के दिन पूरे विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण, पिण्डदान आदि करता है,तो उनके पूर्वज की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है और हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पितरों की मुक्ति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है। पितृ पक्ष में पितरों के लिए विधि- विधान से श्राद्ध करने की परंपरा जो है, वो लंबे समय से चली आ रही है। पितृपक्ष में पड़ने वाली द्वादशी तिथि को द्वादशी श्राद्ध, सन्यासी श्राद्ध और बारस श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि पर पितरों और साधु-संतों के लिए किस समय श्राद्ध करना सही है।
किसका किया जाता है श्राद्ध
पितृपक्ष की द्वादशी तिथि पर सााधु-संतों का श्राद्ध करने की परंपरा है। यदि किसी भी व्यक्ति के परिवार से जुड़े किसी भी व्यक्ति ने गृहस्थ आश्रम को छोड़कर संन्यास जीवन बिताने की ओर चला है और उनके दिवंगत होने की तिथि आपको ज्ञात नहीं है, तो पितृ पक्ष के द्वादशी तिथि के दिन उनका विशेष रूप से श्राद्ध किया जा सकता है। इसके साथ ही साथ इस तिथि के दिन दिवंगत हुए परिजनों का भी श्रद्धा से श्राद्ध करने की परंपरा है।
कब करें द्वादशी श्राद्ध
पितृपक्ष में कुतुप बेला में पितरों के लिए श्राद्ध के लिए सबसे उत्तम बताया गया है।पंचांग के अनुसार आज कुतुप मुहूर्त में पूज्य संतों या अपने दिवंगत परिजन का श्राद्ध इसी मुहूर्त में करें
द्वादशी श्राद्ध की विधि
आज के दिन द्वादशी तिथि के कुतुप मुहूर्त में किसी भी योग्य ब्राह्मण को बुलाकर अपने पितरों और साधु-संतों का विधि-विधान श्राद्ध, तर्पण , दान आदि करना चाहिए। इसमें एक बात का ध्यान रखें की जब श्राद्ध कर्म करें तब उसमें जल, कुश और काला तिल का विशेष रूप से प्रयोग करें। आज के दिन दिवंगत साधु-संतों की आत्मा की तृप्ति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार भंडारा करवा कर दान देना चाहिए।
भोजन करने से पहले एक बात का ध्यान दे की सबसे पहले साधु-संतों को भोजन कराने से पहले कुत्ते, कौए, गाय आदि के लिए भोजन का अंश जरूर निकालें। इनको भोजन और दान दक्षिणा में अपनी क्षमता के अनुसार कोई कमी ना रखें। साधु-संतों और ब्राह्मण को श्रद्धा और आदर के साथ भोजन करने के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार दान देकर उनका आशीर्वाद अवश्य लें कर साधु-संतों और ब्राह्मणों को विदा करें।
मोरपंख का प्रभाव दुश्मन को घुटने पर ले आए, बस कर लें ये गुप्त उपाय
श्री कृष्ण को मोरपंख अति प्रिय है. इसके बिना श्रीकृष्ण जी का पूजन अधूरा माना जाता है. मोरपंख जितना ज्यादा देखने में खूबसूरत है उससे कई ज्यादा यह प्रभावशाली भी है.
ज्योतिष के अनुसार, मोरपंख घर में रखने से बुरी शक्तियों का नाश होता है. इतना ही नहीं, मोरपंख के उपाय करने से बड़ी से बड़ी मुश्किल से निजात पाई जा सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं मोरपंख से जुड़े कुछ जबरदस्त टोटकों अचूक लाभों के बारे में.
– किसी विशेष व्यक्ति से परेशान हैं तो मंगलवार या शनिवार को मोर पंख पर हनुमान जी के मस्तक पर लगे सिंदूर से उसका नाम लिखें. रातभर इसे पूजा स्थान पर रखें फिर अगली सुबह बहते पानी में प्रवाहित कर दें. ध्यान रखें ये प्रक्रिया गुप्त तरीके से करें. इस उपाय से दुश्मन भी दोस्त बन जाता है.
– धन लाभ के लिए मोरपंख का टोटका बहुत असरदार है. इसके लिए एक मोरपंख को राधाकृष्ण के मंदिर में स्थापित करें. प्रतिदिन उसकी पूजा करें फिर 40 दिन बाद इसे अपनी तिजोरी या धन के स्थान पर रख दें. ऐसा करने से धन में वृद्धि के साथ लंबे समय से रुक हुए काम पूर्ण हो जाएंगे.
– पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण ने कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए मोरपंख मुकुट में धारण किया था. मोर की सर्प से शत्रुता होती है इसलिए कालसर्प दोष से ग्रसित लोगों को 7 मोर पंख तकिए के नीचे रखकर या तकिये के कवर में डालकर अवश्य सोना चाहिए. ये टोटका कालसर्प दोष दूर करने में कारगर है.
– ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए जिस ग्रह की पीड़ा मिल रही है उसका 21 बार मंत्र बोलकर मोरपंख पर पानी के छींटे दें. इसके बाद पूजा स्थान पर रख दें. थोड़े दिन में चमत्कारी परिणाम नजर आने लगेंगे.
– नवजात बच्चों को नजर बहुत लगती है ऐसे में बुरी नजर से बच्चों को बचाने के लिए मोरपंख को चांदी के ताबीज में डालकर उसके सिरहाने रख दें. इससे डर भी दूर होगा.
मैकल पर्वत से घिरा हजार साल पुराना मंदिर, लड़ रहा अपने अस्तित्व की लड़ाई
CG में है खजुराहो जैसा भोरमदेव मंदिर
करीब 1 हजार साल पुराना है ये मंदिर
अव्यवस्था की मार झेल रहा भोरमदेव मंदिर
न शासन मंदिर पर ध्यान दे रहा न प्रशासन
छत्तीसगढ़ के कवर्धा में है ये मंदिर
आप में से लगभग लोगों ने खजुराहो का नाम सुना होगा जो न केवल भारत देश में बल्कि पूरी दुनिया में फेमस है। ये एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहां एक मंदिर के अंदर कितने और मंदिर स्थापित है। परंतु क्या आप जानते हैं ऐसा ही एक मंदिर छत्तीसगढ़ के कवर्धा से करीब 10 किमी दूर मैकल पर्वत समूह के बीचों बीच भी स्थित है। जिसे मिनी खजराहो (Mini Khajuraho) के नाम से जाना जाता है। बता दें इस मंदिर का वास्तविक नाम है भोरमदेव मंदिर। जो करीबन 1 हजार वर्ष प्राचीन माना जाता है। बताया जाता है इस मंदिर का निर्माण खजुराहो और कोणार्क के मंदिर की तरह किया गया है। मंदिर की सुंदरता बनावट ऐसी है कि जो भी इसे देखता है वह बिना इसकी तारीफ किए नहीं रह पाता। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि उसी भोरमदेव मंदिर को पुरातत्व की नजर लग गई है। विभाग की अनेदखी के कारण मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड़ चुका है। दअरसल मंदिर में जगह-जगह बारिश के पानी का रिसाव हो रहा है। जो कि मंदिर के लिए खतरा बना हुआ है। बारिश होने पर स्थिति और ज्यादा खराब होती जा रही है।
मंदिर में घुसने से लेकर गर्भगृह तक जगह जगह पानी टपकता रहता है। तीन साल पहले पुरातत्व विभाग द्वारा बढ़ती समस्या को देखते हुए मंदिर की उचित रखरखाव के लिए केमिकल पॉलिश करने आदि जैसी कई गाइडलाइन्स को जारी किया गया। मंदिर के पास बड़े पेड़ को काटने व मंदिर के चारों ओर 5 फीट तक गहरा करके सीमेंट से मजबूती देने का दावा किया गया था। साथ ही मंदिर में चावल को विशेष रूप से प्रतिबंधित किया गया था। लेकिन आज तीन साल बाद भी कोई काम नहीं किया गया। वहीं मंदिर परिसर में जगह जगह चावल न डालने की अपील चस्पा करने के बाद भी लोगों मे भी जागरूकता का अभाव देखा जा रहा है। बता दें भोरमदेव मंदिर की ख्याति आज देश ही नही विदेशों तक फैली हुई है। मंदिर की धार्मिक मान्यता भी लोगों मे खूब है। इसके बाद भी पुरातत्व विभाग द्वारा अनदेखी करना बड़ी लापरवाही साबित हो सकती है।
बता दें कि स्थानीय प्रशासन द्वारा कई बार पुरातत्व विभाग को इस इस बारे में जानकारी दे चुका है। लेकिन मंदिर के अस्तित्व बचाने कोई पहल नही किया जा रहा है। अब जिले के नए कलेक्टर फिर से मामले में काम शुरू करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन क्या वाकई में इस मंदिर का कायाकल्प होगा, इस बात का यहां के लोगों को बेसब्री से इंतजार है।
वाणी का शरीर पर प्रभाव
प्रसन्नता से होता है शरीर पुष्ट एवं प्रोध से होती है हानी मानव शरीर में अनेक ग्रंथियां होती हैं,पियूष ग्रंथि मस्तिष्क में होती है, उससे 12 प्रकार के रस निकलते है, जो भावनाओं से विशेष प्रभावित होती हैं। जब व्यक्ति प्रसन्नचित होता है, तो इन ग्रनथियों से विशेष प्रकार के रस बहने लगते है, जिससे शरीर पुष्ट होने लगता है, बुद्धि विकसित होती है, रक्त गति सामान्य रहती है। जब मनुष्य अधिक बोलता है, तो रक्त की गति अनावश्यक प्रभावित होती है। जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है,खून के थक्के बनने लगते है । इसी प्रकार प्रोध अधिक करने से खून का बहाव कम हो जाता है, खून जमने की शक्ति बढ़ जाने से मृत्यू भी संभव है। अपने जीवन में ज्यादा बोलना अभिशाप हो सकता है। अधिक बोलने से पाचन क्रिया पर गलत प्रभाव पड़ता है, शरीर की अधिक शक्ति खर्च होती है, पेट की माँसपेशियां खिचने लगती है, पाचन रस ग्रंथियों से नही निकलता, शरीर में विटामिन, खनिज तत्व एवं हार्मोन्स की कमी हो जाती हैं। शरीर रोगी हो जाता है, मानसिक दुर्बलता आ जाती है, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, याददाश्त कमजोर हो जाती है, अत:वाणी का प्रभाव शरीर पर पड़ता है। हर प्राणी को अपना जीवन झूठा, बनावटी, जोर जोर से बोलने बाला ना बना कर शांत चित बनाना चाहिए ।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (25 सितम्बर 2022)
- मेष राशि – कौटुम्बिक सुख मिलेगा, सामाजिक जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, समय पर कार्य करने से लाभ की प्राप्ति होगी।
- वृष राशि – शत्रु बाधा पर विजय मिलेगी, स्त्री-संतानादि सुख मिलेगा, दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा, समय का लाभ लें।
- मिथुन राशि – पारिवारिक सुख व आनंद की प्राप्ति होगी, धार्मिक कार्य का पुण्य लाभ मिलेगा, बुजुर्गों का ध्यान रखें।
- कर्क राशि – उच्च वर्ग का सानिध्य मिलेगा, राजनेता का सहयोग मिलेगा, रुके कार्य बनेंगे, परिश्रम से लाभ होगा।
- सिंह राशि – बिना कारण दु:ख व झंझट के योग बनेंगे, घर के कार्यों में हानि की संभावना, श्रम शक्ति से लाभ होगा।
- कन्या राशि – अध्ययन कार्य में सफलता मिलेगी, शारीरिक कष्ट, दुर्घटना का शिकार होने से बचें, सावधानी से कार्य करें।
- तुला राशि – सामाजिक कार्यों में रुचि रहेगी, वायु विकार-नेत्र पीड़ा से कष्ट होगा, प्रतिष्ठा में कुछ हानि की संभावना है।
- वृश्चिक राशि – नवीन पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी, बेरोजगारी से छुटकारा मिलेगा, पति-पत्नी में प्रीति बढ़ेगी।
- धनु राशि – शत्रु वृद्धि होगी, स्त्री-संतान से सुखी रहेंगे, शानोसौकत में व्यय अवश्य होगा, भोग-विलास की प्राप्ति होगी।
- मकर राशि – मानसिक उद्विघ्नता रहेगी, शारीरिक पीड़ा व अशांति का अनुभव होगा, आपका विरोध होगा, धैर्य रखें।
- कुंभ राशि – विभिन्न रोगों से शारीरिक पीड़ा बनी रहेगी, पत्नी से अनबन होगी, धैर्य रखकर कार्य पूर्ण अवश्य करें।
- मीन राशि – सामान्य धन लाभ होगा, खर्च की अधिकता रहेगी, पारिवारिक प्रगति के कार्य अवश्य ही हेंगे, समय पर कार्य करें।















