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Bigg Boss 16: शालीन भनोट ने लिया  ‘Bigg Boss’  का घर छोड़ने का फैसला…

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Bigg Boss 16 सीजन जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे शो में कंटेस्टेंट्स के बीच लड़ाई झगड़ों का लेवल भी हाई हो रहा है। गुरुवार के एपिसोड का अंत शालीन भनोट और एमसी स्टैन की लड़ाई के साथ हुआ और यही हाल शुक्रवार वाले दिन भी देखने को मिला। दरअसल, शो में टीना दत्त के पैर में अचानक चोट लग गई थी। इसी वजह से टीना को संभालने के लिए शालीन और स्टैन दोनों ही आगे आए थे। इस दौरान शालीन, टीना के पैर को ठीक करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन टीना बिल्कुल भी कंफर्टेबल नही थीं, जिस वजह से एमसी स्टैन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन इसी बात पर दोनों की लड़ाई हो गई। इस लड़ाई में 'Bigg Boss' के बाकी कंटेस्टेंट्स भी एक-एक करके जुड़ गए, जिससे घर में बहुत बवाल हुआ।

वहीं, यह बवाल देर रात तक जारी रहा। इस बीच शालीन और शिव ठाकरे के बीच भी हाथापाई हो गई। इसी वजह से शो से कुछ कंटेस्टेंट्स शालीन को बाहर करने की बात कर रहे थे तो कुछ एमसी स्टैन को भी बाहर भेजने की बात करते दिखे। हालात ऐसे हो गए थे कि 'Bigg Boss' को देर रात ही टीना, शालीन और स्टैन को कन्फेशन रूम में बुलाना पड़ा।

बाहर जाने का फैसला
इस पूरे बवाल में जहां एमसी स्टैन कंफेशन रूम में शांत दिखे। तो वहीं, शालीन भनोट और टीना दत्त की यहां भी बहस हो गई। 'बिग बॉस' ने तीनों कंटेस्टेंट्स से बात करने के बाद इस पूरी लड़ाई पर टीना की राय मांगी थी। 'बिग बॉस' ने टीना को यह पावर दी थी कि वह जो भी फैसला लेंगी वही होगा। इस दौरान टीना ने एमसी स्टैन और शालीन दोनों को ही लड़ाई का बराबर का जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन शालीन ने टीना के फैसले को मानने से मना कर दिया था।

हालांकि, इस पूरी बातचीत के बाद शालीन ने 'बिग बॉस'  का घर छोड़ने का फैसला लिया, जिसके बाद 'बिग बॉस' की तरफ से भी यह कहा गया कि सलमान खान के आने के बाद उन्हें अच्छे से घर भेजा जाएगा। अब वीकएंड का वार में पता चलेगा कि शालीन बाहर जाते हैं या नहीं।

सर्दियों में एक्सरसाइज के साथ इस तरह रखें त्वचा का ख्याल…

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Skin Care : सर्दियों के मौसम में त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। ऐसे में जरूरत होती है सही देखभाल की। सर्द हवाएं त्वचा की नमी को लगभग खत्म कर देती हैं। खासतौर पर जब हम एक्सरसाइज करते हैं। अगर त्वचा को ठीक से मॉइश्चर नहीं मिलता है तो त्वचा में खिंचाव की वजह से रूखापन और खुजली होने लगती है। अगर आपने भी एक्सरसाइज के वक्त त्वचा के रूखेपन और खुजली को महसूस किया है। तो जरूरत है सही तरीके से देखभाल की, इसलिए जरूरी है कि जब भी एक्सरसाइज के लिए तैयार हों तो चेहरे और शरीर को अच्छी तरह से मॉइश्चराइज करके रखें। जिससे कि खिंचाव की वजह से त्वचा का रूखापन और खुजली ना बढ़े।

कैसे लगाएं मॉइश्चराइजर
1. सर्दियों में भी अगर आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं। तो नहाने के बाद त्वचा पर किसी अच्छे मॉइश्चराइजर की परत लगाएं। इसे लगाने के लिए मॉइश्चराइजर को हाथों पर लेकर त्वचा पर रखें और दो से तीन मिनट तक सोखने दें। इससे स्किन अच्छी तरह से मॉइश्चराइज हो जाएगी। 

2. त्वचा की ड्राईनेस पूरी तरह से दूर हो इसके लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी के मॉइश्चराइजर को चुनें। जिनमे जरूरी विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट्स हों। जो त्वचा को नर्म और मुलायम बनाने में मदद करें। अगर आपकी त्वचा ड्राई है तो हाईड्रेटिंग सीरम का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं चेहरे और शरीर की बाकी त्वचा के साथ ही होंठों का भी ख्याल रखें। इसे भी अच्छी तरह से लिप बाम लगाकर मॉइश्चराइज रखें। 

3. सर्दियों में अगर आप आउटडोर वर्कआउट करते हैं तो सनस्क्रीन को लगाना ना भूलें। घर से निकलने के करीब आधे घंटे पहले अच्छी क्वालिटी के सनस्क्रीन को बॉडी और चेहरे पर जरूर लगाएं। क्योंकि भले ही सर्दियों की धूम कम महसूस हो लेकिन लगातार लंबे समय में यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। 

क्लींजर
शरीर और चेहरे को मॉइश्चराइज करने के साथ ही जरूरी है कि अच्छे क्लींजर की मदद से पोर्स और त्वचा पर जमा गंदगी अच्छे साफ हो जाए। जिससे कि डेड स्किन और एक्ने ना हों। वैसे भी सर्दियों में एक्ने वाली स्किन को काफी देखभाल चाहिए होती है।  

लियोनल मेसी अपने आखिरी फीफा विश्वकप को बनाएंगे यादगार,गोल्डन बूट पहनकर खेलते नजर आएंगे

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मेसी की टीम अर्जेंटीना लगातार 36 मैचों से हारी नहीं है। अब यह बूट मेसी के गोल करने में मदद करेंगे। एक कंपनी ने मेसी के लिए यह बूट तैयार करवाए हैं। मेसी यह बूट 22 नवंबर को सऊदी अरब के खिलाफ पहनकर खेलेंगे। अर्जेंटीना के झंडे में सफेद और नीला रंग शामिल है और मेसी के बूट में भी इसे जोड़ा गया है।

मेसी ने अक्टूबर में एलान किया था कि विश्वकप की ट्रॉफी जीतने का उनके पास यह आखिरी मौका है। विश्वकप की ट्रॉफी को छोड़कर मेसी अपने करियर में सब कुछ हासिल कर चुके हैं। मेसी को यह ट्रॉफी जीतने का मौका 2014 में मिला था, लेकिन उनकी टीम फाइनल में जर्मनी से 0-1 से हार गई थी। अर्जेंटीना ने पिछले साल कोपा अमेरिका का खिताब जीता था और वह इस बार विश्वकप ट्राॅफी जीतने की दावेदारों में शामिल है।अभ्यास मैच में भी अर्जेंटीना की टीम 5-0 से जीता थी।

2016 में ले लिया था संन्यास

मेसी ने 2016 में कोपा अमेरिका के फाइनल में चिली के हाथों शिकस्त खाने के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबाल से संन्यास ले लिया था, लेकिन उन्होंने बाद में अपना फैसला बदल लिया और वह अभी तक टीम के कप्तान बने हुए हैं।मेसी पर इस साल सबकी निगाहें होंगी। ऐसे में वह अपने देश के लिए ट्ऱॉफी जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। मेसी पहली बार 2006 फीफा वर्ल्ड कप में खेले थे और यह उनका पांचवां विश्व कप है। उनके नाम फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा 19 मैच खेलने का भी रिकॉर्ड है। साथ ही अपने देश के लिए भी वह सबसे ज्यादा मैच खेल चुके हैं। मेसी ने अर्जेंटीना के लिए 165 मैच खेले हैं और 91 गोल दागे हैं। दोहा से वह ट्रॉफी लेकर अपने घर लौटना चाहेंगे

कोरोना के बाद देश के कुछ राज्यों में लोगों पर  चिकनगुनिया की पड़ी मार 

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नई दिल्‍ली । कोरोना के बाद भारत में डेंगू और चिकनगुनिया ने पैर पसार लिए हैं। इस साल न केवल डेंगू के मामले तेजी से बढ़े हैं, बल्कि चिकनगुनिया के संदिग्‍ध मामले भी पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को तोड़कर बढ़ रहे हैं। इसकारण इस बार अस्‍पताल दोनों ही बीमारियों के मरीजों से भरे हुए हैं। हालांकि चिकनगुनिया के मरीजों की तादाद का बढ़ना काफी परेशान करने वाला है क्‍योंकि नेशनल सेंटर फॉर वेक्‍टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल के आंकड़े बताते हैं कि साल 2006 में देश में चिकनगुनिया के सबसे ज्‍यादा मामले दर्ज किए गए थे, उसके बाद अब 2022 में यह बीमारी ज्‍यादा परेशान कर रही है। 
नेशनल सेंटर फॉर वेक्‍टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल (एनवीबीडीसीपी) के विशेषज्ञों की मानें, तब पिछले कुछ सालों में हर साल डेंगू के मरीजों की संख्‍या काफी बढ़ी है, वहीं साल 2017 से ही चिकनगुनिया के मरीजों का आंकड़ा काफी कम रहता है। इतना ही नहीं चिकनगुनिया के संदिग्‍ध मरीजों की संख्‍या भी काफी कम रही है, लेकिन साल 2022 के आंकड़े बताते हैं कि इस बार देश में चिकनगुनिया के संदिग्‍ध मामले डेंगू मामलों के लगभग बराबर हो गए हैं। 
एनवीबीडीसीपी के अनुसार इस बार 31 अक्‍टूबर 2022 तक चिकनगुनिया के कुल दर्ज केस 5320 हैं, जबकि संदिग्‍ध मामलों की संख्‍या 108957 पहुंच चुकी है। वहीं पिछले साल यानि 2021 में चिकनगुनिया के संदिग्‍ध मरीजों की संख्‍या 119070 थी। वहीं कुल दर्ज केस 11890 थे। वहीं 2020 में चिकुनगुनिया का प्रकोप काफी कम था, लेकिन एक चीज जो आंकड़ों में देखी जा सकती है, वह यह है कि इस बार संदिग्‍ध केस 2017 के बाद दूसरे सबसे ज्‍यादा हैं और सिर्फ अक्‍टूबर तक के आंकड़ों में ही पिछले साल से सिर्फ कुछ हजार ही कम हैं। 
इस साल दर्ज केस गुजरात में 852, कर्नाटक में सबसे ज्‍यादा 1789, महाराष्‍ट्र में 865 सामने आए हैं। वहीं राजस्‍थान, पंजाब, तेलंगाना, बंगाल, हरियाणा, मध्‍यप्रदेश आदि राज्‍यों में भी चिकुनगुनिया फैल रहा है। स्वास्थ्य जानकार बताते हैं कि चिकनगुनिया मारक बीमारी नहीं है, लेकिन इस वजह से दुखदायी है कि इसका पोस्‍ट चिकनगुनिया इफैक्‍ट लोगों को काफी दिनों तक परेशान करता है। इसके मरीजों को जोड़ों के दर्द की समस्‍या रहती है जो कई बार अर्थराइटिस या गठिया का रूप भी ले लेती है।

यूरोलॉजिस्ट की टीम ने किया सफल ऑपरेशन, किडनी से फुटबॉल आकर का टयूमर निकाला 

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हैदराबाद । एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामना आया है। यहां डॉक्टरों ने 53 साल के शख्स की जान बचा ली। शख्स की किडनी में ट्यूमर था, वहां भी भारी-भरकम 10 किलो का। डॉक्टरों के मुताबिक इस ट्यूमर का साइज एक फुटबॉल जितना था। राहत की बात ये हैं कि डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और ये ऑपरेशन सफल रहा। 
इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को यूरोलॉजिस्ट की एक टीम ने अंजाम दिया। टीम का नेतृत्व यूरोलॉजिस्ट के जाने-माने कंसल्टेंट डॉक्टर मल्लिकार्जुन सी कर रहे थे। इसके अलावा इस दौरान मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ.तैफ बेन्दीगेरी और डॉ. राजेश मौजूद थे। अस्पताल ने कहा कि राज्य में इस तरह की पहली और देश में ये दूसरी उपलब्धि है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज कडप्पा के रहने वाले हैं।  मरीज को पेट में सूजन होने पर एआईएनयू रेफर किया गया था। जांच के बाद पता चला कि बाएं गुर्दे से ट्यूमर पैदा हो रहा था। बाद में ट्यूमर ने पेट के दो-तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसकारण आंत पेट के निचले हिस्से में पहुंच गई थी। 
डॉ. मल्लिकार्जुन ने मामले की जटिलता पर टिप्पणी कर कहा, ट्यूमर के आकार को देखते हुए, हमने रोबोटिक प्रक्रिया को खारिज कर दिया और इसके बजाय ओपन सर्जरी का विकल्प चुना। उन्होंने ये बताया कि तमाम कोशिशों और मुश्किलों के बावजूद वे सफलतापूर्वक ट्यूमर को निकालने में सफल रहे। डॉक्टर ने कहा, सर्जरी के बाद, हमने पाया कि ट्यूमर बहुत बड़ा था, एक फुटबॉल के आकार जितना। माइक्रोस्कोपिक टेस्ट ने पुष्टि की कि ट्यूमर एक कैंसरयुक्त वृद्धि (रीनल सेल कार्सिनोमा) था। 

 निजी स्पेस कंपनी का रॉकेट विक्रम-एस सफलतापूर्वक लांच, इसरो के रचा इतिहास 

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श्रीहरिकोटा । पहली बार देश में निजी स्पेस कंपनी द्वारा तैयार रॉकेट विक्रम-एस सफलतापूर्वक लांच हो गया। इस लांच ने इंडियन स्पेस प्रोग्राम को एक अलग ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। सतीश धवन स्पेस सेंटर से 18 नवंबर 2022 की सुबह 11.30 बजे अंतरिक्ष की दुनिया में नया इतिहास बना दिया हैं। हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के रॉकेट विक्रम-एस ने उड़ान भरी। रॉकेट आवाज की गति से पांच गुना ज्यादा स्पीड से अंतरिक्ष की ओर गया।
स्काईरूट चार साल पुरानी कंपनी है। इसी कंपनी विक्रम-एस रॉकेट को तैयार किया है। इस लांच करने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मदद की। इस मिशन को प्रारंभ नाम दिया है। कंपनी के  अधिकारी ने बताया कि यह एक टेस्ट फ्लाइट है। इसरो ने इसकी उड़ान के लिए लांच विंडो तय किया था।  
इस रॉकेट का नाम मशहूर भारतीय वैज्ञानिक और इसरो के संस्थापक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर दिया गया है। हाल ही में इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ ने स्काईरूट कंपनी के मिशन प्रारंभ के मिशन पैच का अनावरण भी किया। इस रॉकेट पर दो देशी और एक विदेशी पेलोड्स भी जा रहे हैं। छह मीटर ऊंचा यह रॉकेट दुनिया का पहला ऑल कंपोजिट रॉकेट है। इसमें थ्रीडी-प्रिटेंड सॉलिड थ्रस्टर्स लगे हैं। ताकि उसकी स्पिन कैपिबिलिटी को संभाला जा सके। 
इस उड़ान के समय यह रॉकेट एवियोनिक्स, टेलिमेट्री, ट्रैकिंग, इनर्शियल मेजरमेंट, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, ऑनबोर्ड कैमरा, डेटा एक्वीजिशन और पावर सिस्टम की जांच होगी। यह एक सब-ऑर्बिटल उड़ान है। जिसमें चेन्नई स्थित स्पेस स्टार्टअप स्पेसकिडज , आंध्र प्रदेश स्थिति ए-स्पेस टच और आर्मेनिया के बूमोजो क्यू स्पेस रिसर्च लैंब के सैटेलाइट्स जा रहे हैं।  
विक्रम-एस एक सब-ऑर्बिटल उड़ान भरेगा। स्काईरूट देश की पहली निजी स्पेस कंपनी है जिसने सफलता हासिल की है। इसकी सफलता के साथ ही भारत निजी स्पेस कंपनी के रॉकेट लांच के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होगा। यह रॉकेट पूरी तरह से कार्बन फाइबर से बना है। 
स्पेसकिडज का सैटेलाइट 2.5 किलोग्राम का है। इस बनाने के लिए अमेरिका, इंडोनेशिया, सिंगापुर, सेशेल्स और भारत के बच्चों की मदद ली गई है। इस सैटेलाइट को बच्चों ने वैज्ञानिकों के गाइडेंस में बनाया है। इस सैटेलाइट का नाम फैनसेट है। इस सैटेलाइट में 80 से ज्यादा पार्ट्स हैं। 
विक्रम-एस रॉकेट में थ्रीडी-प्रिंटेड क्रायोजेनिक इंजन लगे हैं। जिनका परीक्षण पिछले साल 25 नवंबर को नागपुर स्थित सोलर इंडस्ट्री लिमिटेड की टेस्ट फैसिलिटी में हुआ था। इस रॉकेट से छोटे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इस रॉकेट का वजन 545 किलोग्राम है। व्यास 0.375 मीटर है। यह उड़ान भरकर 83 से 100 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया। थ्रीडी क्रायोजेनिक इंजन आम क्रायोजेनिक इंजन की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद है। यह 30 से 40 फीसदी सस्ता भी है। विक्रम-2 और 3 में भी इस क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल होगा। फिलहाल स्काईरूट के पास तीन तरह के रॉकेट बनाने की योजना है। विक्रम-1, 2 और 3, सस्ती लॉन्चिंग की वजह इसके ईंधन में बदलाव भी है। आम ईंधन के बजाय एलएनजी यानी लिक्विड नेचुरल गैस और लिक्विड ऑक्सीजन की मदद ली गई है। यह किफायती और प्रदूषण मुक्त होता है। 

भगवान श्री महावीर स्वामी का तप कल्याणक

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भगवान महावीर जैन धर्म के चौंबीसवें तीर्थंकर थे। भगवान महावीर का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष पहले (ईसा से ५४० वर्ष पूर्व), वैशाली गणराज्य के कुण्डग्राम में अयोध्या इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार हुआ था। तीस वर्ष की आयु में महावीर ने संसार से विरक्त होकर राज वैभव त्याग दिया और संन्यास धारण कर आत्मकल्याण के पथ पर निकल गये। १२ वर्षो की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया। ७२ वर्ष की आयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामी के कई अनुयायी बने जिसमें उस समय के प्रमुख राजा बिम्बिसार, कुणिक और चेटक भी शामिल थे। जैन समाज द्वारा महावीर स्वामी के जन्मदिवस को महावीर-जयंती तथा उनके मोक्ष दिवस को दीपावली के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है।
जैन ग्रन्थों के अनुसार समय समय पर धर्म तीर्थ के प्रवर्तन के लिए तीर्थंकरों का जन्म होता है, जो सभी जीवों को आत्मिक सुख प्राप्ति का उपाय बताते है। तीर्थंकरों की संख्या चौबीस ही कही गयी है। भगवान महावीर वर्तमान अवसर्पिणी काल की चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर थे और ऋषभदेव पहले।[1] हिंसा, पशुबलि, जात-पात का भेद-भाव जिस युग में बढ़ गया, उसी युग में भगवान महावीर का जन्म हुआ। उन्होंने दुनिया को सत्य, अहिंसा का पाठ पढ़ाया। तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा को सबसे उच्चतम नैतिक गुण बताया। उन्होंने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए, जो है– अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) ,ब्रह्मचर्य। उन्होंने अनेकांतवाद, स्यादवाद और अपरिग्रह जैसे अद्भुत सिद्धान्त दिए। महावीर के सर्वोदयी तीर्थों में क्षेत्र, काल, समय या जाति की सीमाएँ नहीं थीं। भगवान महावीर का आत्म धर्म जगत की प्रत्येक आत्मा के लिए समान था। दुनिया की सभी आत्मा एक-सी हैं इसलिए हम दूसरों के प्रति वही विचार एवं व्यवहार रखें जो हमें स्वयं को पसन्द हो। यही महावीर का 'जियो और जीने दो' का सिद्धान्त है।
तपस्या
भगवान महावीर का साधना काल १२ वर्ष का था।दीक्षा लेने के उपरान्त भगवान महावीर ने दिगम्बर साधु की कठिन चर्या को अंगीकार किया और निर्वस्त्र रहे। श्वेतांबर सम्प्रदाय जिसमें साधु श्वेत वस्त्र धारण करते है के अनुसार भी महावीर दीक्षा उपरान्त कुछ समय छोड़कर निर्वस्त्र रहे और उन्होंने केवल ज्ञान की प्राप्ति भी दिगम्बर अवस्था में ही की। अपने पूरे साधना काल के दौरान महावीर ने कठिन तपस्या की और मौन रहे। इन वर्षों में उन पर कई ऊपसर्ग भी हुए जिनका उल्लेख कई प्राचीन जैन ग्रंथों में मिलता है।
केवल ज्ञान और उपदेश
जैन ग्रन्थों के अनुसार केवल ज्ञान प्राप्ति के बाद, भगवान महावीर ने उपदेश दिया। उनके ११ गणधर (मुख्य शिष्य) थे जिनमें प्रथम इंद्रभूति थे।
जैन ग्रन्थ, उत्तरपुराण के अनुसार महावीर स्वामी ने समवसरण में जीव आदि सात तत्त्व, छह द्रव्य, संसार और मोक्ष के कारण तथा उनके फल का नय आदि उपायों से वर्णन किया था।
जैन मुनि, आर्यिका इन्हें पूर्ण रूप से पालन करते है, इसलिए उनके महाव्रत होते है और श्रावक, श्राविका इनका एक देश पालन करते है, इसलिए उनके अणुव्रत कहे जाते है।
गृहस्थ जीवन वंश इक्ष्वाकु,पिता राजा सिद्धार्थ,माता त्रिशला
पंचकल्याणक
जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी,जन्म स्थान कुण्डग्राम, वैशाली के निकट,मोक्ष कार्तिक कृष्ण अमावस्या,मोक्ष स्थान पावापुरी, जिला नालंदा, बिहार
लक्षण–रंग स्वर्ण,चिन्ह सिंह,आयु 72 वर्ष,शासक देव,यक्ष मातंग,यक्षिणी -सिद्धायिका
गणधर प्रथम गणधर गौतम गणधर,गणधरों की संख्या ११
दस धर्म
जैन ग्रंथों में दस धर्म का वर्णन है। पर्युषण पर्व, जिन्हें दस लक्षण भी कहते है के दौरान दस दिन इन दस धर्मों का चिंतन किया जाता है।
क्षमा
क्षमा के बारे में भगवान महावीर कहते हैं- 'मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ। जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है। मेरा किसी से वैर नहीं है। मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ। सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ। सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ।'
वे यह भी कहते हैं 'मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी पापवृत्तियाँ विफल हों। मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों।'
धर्म
धर्म सबसे उत्तम मंगल है। अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। महावीरजी कहते हैं जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।
भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था।
मोक्ष
तीर्थंकर महावीर का केवलीकाल ३० वर्ष का था। उनके के संघ में १४००० साधु, ३६००० साध्वी, १००००० श्रावक और ३००००० श्रविकाएँ थी। भगवान महावीर ने ईसापूर्व ५२७ , ७२ वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी (राजगीर) में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया। उनके साथ अन्य कोई मुनि मोक्ष को प्राप्त नहीं हुए | पावापुरी में एक जल मंदिर स्थित है जिसके बारे में कहा जाता है कि यही वह स्थान है जहाँ से महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
मंगसिर असित मनोहर दशमी, ता दिन तप आचरना |
नृपति कूल घर पारन कीनों, मैं पूजौं तुम चरना |मोहि0
ॐ ह्रीं मार्गशीर्षकृष्णादशम्यां तपोमंगलमंडिताय श्रीमहा0अर्घ्यं नि0स्वाहा 

मूल्य भावना का 

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भगवान बुद्ध जेतवन में ठहरे हुए थे। हर सुबह वह भिक्षावृत्ति को निकलते तो उन्हें मार्ग में एक किसान अपने खेत में काम करता मिलता। अपने कार्य के प्रति उसकी निष्ठा देख बुद्ध के मन में उसके लिए करुणा उमड़ी। वह प्रतिदिन वहां रुककर उस किसान को कुछ उपदेश देने लगे। जब उस किसान की फसल तैयार हुई तो उसने संकल्प किया कि वह अपनी फसल का एक हिस्सा भगवान बुद्ध को और भिक्षु संघ को भेंट करेगा। दुर्योगवश उसी रात मूसलाधार वर्षा हुई और उसकी सारी फसल चौपट हो गई। अगले दिन जब भगवान बुद्ध वहां से गुजरे तो उन्होंने किसान को वहां रोता हुआ पाया। पूछने पर किसान उनको सारी घटना सुना कर बोला, ‘‘प्रभु! मुझे दुख अपने नुक्सान का नहीं, वरन इस बात का है कि मैं आपकी सेवा का यह अवसर चूक गया’’  
बुद्ध मुस्कराए और बोले, ‘भंते! मूल्य वस्तुओं का नहीं, भावनाओं का होता है। तुम्हारे हृदय में उमड़ी भावनाएं तो मुझ तक कल ही पहुंच गई थीं। इनके कारण तुम उससे ज्यादा पुण्य के भागी बन गए हो, जितना तुम उस फसल को समर्पित करके बनते। मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है’’ किसान की आंखें यह सुनकर नम हो उठीं।   

कुछ ऐसा होता है एकादशी के दिन जन्मे लोगों का स्वभाव,जानें कैसा होता है इनका नेचर

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20 नवंबर को उतपन्न एकादशी है. एकादशी तिथि महीने में दो होती है, पहला शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष में. इस दिन का काफी धार्मिक महत्व है. एकादशी के दिन विष्णु भगवान की पूजा की जाती है.

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ये व्यक्ति के स्वभाव पर असर करते हैं. जिस तिथि में जन्म होता है हमारा स्वभाव और व्यवहार वैसा ही होता है. आइए जानें एकादशी के दिन जन्मे लोगों का स्वभाव कैसा होता है

कुछ ऐसा होता है एकादशी के दिन जन्मे बच्चों का स्वभाव

एकादशी में जन्में जातक भी बहुत सौभाग्यशाली माने जाते हैं

इस दौरान जन्म लेने वाले जातक बेहद ही धनी होते हैं और कानून को मानने और मनवाने वाले भी होते हैं

सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आपको यह भी बता दें कि ये लोग अपने पूर्वजों की संपत्ति और मर्यादा को कायम रखना चाहते हैं

इस तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के विचार शुद्ध होते हैं और धर्म कार्य में इनका विशेष लगाव होता है

निर्जला एकादशी, मोहनी एकादशी, देवशयनी एकादशी आदि कई ऐसी महत्वपूर्ण तिथियां हैं, जिनका काफी ज्यादा महत्त्व होता है और ऐसे में बताना चाहेंगे कि एकादशी तिथि में जन्मा जातक बेहद ही शुद्ध विचार वाला होता है

इन लोगों के विचार शुद्ध होते हैं. इनका धार्मिक कार्यों में विशेष लगाव होता है. साथ ही, दान-पुण्य करने में भी पीछे नहीं हटते.

ये लोग वाणी से भले ही कठोर होते हैं, लेकिन हृदय से विनम्र होते हैं. किसी को भी देखकर जल्दी पिघल जाते हैं.

एकादशी में जन्में जातक को अत्यधिक प्राप्ति की लालसा नहीं होती. ये थोड़े में संतुष्ट रहते हैं.

एकादशी में जन्में जातक को मन से चंचल होने के कारण इनका ध्यान एक विषय पर केंद्रित होना मुश्किल होता है.

एकादशी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है.

एकादशी के दिन बुरी/गलत बातें करना भी मना है.इसके अलावा एकादशी के दिन क्रोध ना करने की सलाह दी जाती है.साथ ही किसी से भी मानसिक या शारीरिक रूप से लड़ाई भी करने से इस दिन बचना चाहिए.

एकादशी के दिन मदिरापान या मांस खाना वर्जित है.

इस दिन झूठ बोलने से भी बचना चाहिए.

एकादशी के दिन किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए.

एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान बताया गया है.

इसके अलावा इस दिन रात्रि में जागरण करना बेहद ही शुभ फलदाई होता है.

एकादशी के दिन पान सुपारी नहीं खानी चाहिए.

इसके अलावा एकादशी का व्रत कोई भी हो लेकिन उसके अगले दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर के भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना बेहद शुभ रहता है.

केंद्रीय कर्मचारी के लिए बड़ा झटका: सरकार ने बदला नियम, क्या खत्म होगी पेंशन और ग्रेच्‍युटी !

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केंद्रीय कर्मचारी के लिए बड़ा झटका: देशभर के सभी केंद्रीय कर्मचारियों को डीए और बोनस की राशि मिलने के बाद केंद्र सरकार ने एक सख्‍त चेतावनी जारी किया है. कर्मचारियों को काम को लेकर सतर्क रहने और लापरवाही नहीं बरतने के आदेश दिए गए है. अगर ऐसा होता है तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन व ग्रेच्‍युटी रोकने का निर्देश दिए है. यह आदेश सभी केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू होगा, जिस पर राज्‍य सरकार भी अपना फैसला ले सकती हैं. केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद केंद्रीय कर्मचारी आक्रोशित हैं. सरकार के नए फैसले पर उनका क्या रियेक्शन होगा यह तो बाद में पता चलेगा.

केंद्र सरकार ने बदला नियम

केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल 2021 के तहत एक नोटिफिकेशन किया है.इसके तहत सीसीएस (पेंशन) नियम 2021 के रूल 8 में बदलाव करते हुए इसमें नए प्रावधान को जोड़ा गया है. आपको बता दें कि बीते 7 अक्‍तूबर 2022 को इन नियमों में बदलाव किया गया है. सक्षम अधिकारियों को दोषी पाए जाने पर कर्मचारियों की पेंशन अथवा ग्रेच्‍युटी या फिर दोनों आंशिक या फिर पूर्ण रूप से रोकने का अधिकार होगा. नौकरी के दौरान अगर इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई विभागीय या न्‍यायिक कार्रवाई हुई तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देना जरूरी है. अगर कोई कर्मचारी रिटायर होने के बाद फिर से नियुक्‍त हुआ है तो उस पर यही नियम लागू होगा.

कैसे होगी कार्रवाई

  • नौकरी के दौरान अगर कर्मचारियों के खिलाफ कोई विभागीय या न्‍यायिक कार्रवाई हुई तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को देना आवश्यक होगा.
  • अथॉरिटी चाहे तो पेंशन या ग्रेच्‍युटी को स्‍थायी अथवा कुछ समय के लिए भी रोक सकता है.
  • कोई कर्मचारी रिटायर होने के बाद फिर से नियुक्‍त हुआ हो तो उस पर भी यही नियम लागू होंगे.
  • अगर कोई कर्मचारी अपने रिटायरमेंट के बाद पेंशन और ग्रेच्‍युटी का भुगतान ले चुका है. इसके बाद वो फिर से दोषी पाया जाता है तो उससे पेंशन या ग्रेच्‍युटी की पूरी अथवा आंशिक राशि वसूली जा सकती है.
  • किससे कितना राशि वसूलना है इसका आकलन विभाग को हुए नुकसान के आधार पर किया जाएगा.

कौन करेगा कार्रवाई

  • ऐसे प्रेसिडेंट जो रिटायर्ड कर्मचारी के अप्‍वाइंटिंग अथॉरिटी में शामिल रहे हैं, उन्‍हें ग्रेच्‍युटी या पेंशन रोकने का अधिकार दिया गया है. अगर कोई कर्मचारी ऑडिट और अकाउंट विभाग से रिटायर हुआ है तो सीएजी को दोषी कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद पेंशन और ग्रेच्‍युटी रोकने का अधिकार दिया गया है. ऐसे सचिव जो सम्बंधित मंत्रालय या विभाग से जुड़े हों जिसके तहत रिटायर होने वाले कर्मचारी की नियुक्ति की गई हो, उन्हें भी पेंशन और ग्रेच्‍युटी रोकने का अधिकार दिया गया है.

अंतिम आदेश से पहले करना होगा यह काम

नए नियम के अनुसार, किसी भी अथॉरिटी को अंतिम आदेश लेने से पहले यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन से सुझाव लेना अनिवार्य होगा. इसमें यह भी प्रावधान है कि किसी भी मामले में जहां पेंशन को रोका या निकाला जाता है, उसमें न्‍यूनतम राशि 9000 रुपये प्रति माह से कम नहीं होनी चाहिए, यह रूल 44 के तहत पहले से निर्धारित है.

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