मुंबई। जमानत पर जेल से बाहर आये शिवसेना सांसद संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय अर्थात ईडी की ओर से नोटिस मिला है. नोटिस में पूछताछ के लिए हाजिर होने की बात कही गई है। आपको बता दें कि विशेष पीएमएलए कोर्ट से संजय राउत को जमानत देते समय यह तय किया गया था कि वह जांच और जांच में सहयोग करें. इसलिए पात्रचाल मामले में जांच अभी भी ईडी द्वारा जारी है और एक बार फिर संजय राउत को उसी मामले में पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस भेजा गया है। 18 नवंबर को संजय राउत को पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस भेजा गया है. ज्ञात हो कि 103 दिनों तक मुंबई के आर्थर रोड जेल में रहने के बाद, शिवसेना के तेजतर्रार नेता और सांसद संजय राउत को बुधवार 9 नवंबर को अदालत ने जमानत दे दी। अब ईडी ने संजय राउत को फिर से जांच के लिए नोटिस भेजा है. ईडी ने राउत को 18 नवंबर को पूछताछ के लिए पेश होने का नोटिस भेजा है. इसके अलावा ईडी ने कोर्ट में याचिका दायर कर संजय राउत की जमानत रद्द करने की मांग की है. संजय राउत की जमानत रद्द करने के लिए ईडी की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में एक संशोधित याचिका दायर की गई है। दरअसल हाईकोर्ट ने ईडी को संशोधित याचिका दायर करने की अनुमति दी थी क्योंकि पिछले सप्ताह की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए जल्दबाजी में दायर किया गया था। अब जल्द ही इसका जवाब संजय राउत भी कोर्ट में देंगे. न्यायमूर्ति भारती डांगरे के समक्ष 25 नवंबर से सुनवाई शुरू होगी। बॉम्बे सेशंस कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ ईडी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सड़क दुर्घटना रोकने करें सख्त कार्रवाई
भोपाल । राज्य-स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में कानून प्रवर्तन एजेन्सियों को सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिये दोषियों को चिन्हांकित कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं। गत दिवस बैठक की अध्यक्षता करते हुए परिवहन आयुक्त एस.के. झा ने निर्देशित किया कि मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन किये जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने में कोई कोताही न बरतें। पुलिस प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान में आयोजित समिति की बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीटीआरआई श्री जी. जनार्दन ने सड़क निर्माण एजेन्सियों को अपने दायित्वों का निर्वहन भलीभाँति करने की नसीहत दी।
दुर्घटनाओं को रोकने के लिये विभिन्न सड़क निर्माण एजेन्सी, परिवहन और पुलिस को समन्वयपूर्वक कार्य करने की हिदायत दी गई। परिवहन आयुक्त श्री झा ने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिये जरूरी है कि मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जाना सुनिश्चित किया जाये। इसमें परिवहन विभाग और पुलिस समन्वयपूर्वक कार्य कर जिम्मेदारी से अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करें, जिससे आमजन की जानमाल की सुरक्षा हो सकें। उन्होंने कहा कि ओवर लोडेड और तेज गति से वाहन संचालन पर कड़ी कार्रवाई करें। मादक पदार्थों का सेवन और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के साथ बिल्कुल भी रियायत नहीं बरती जाये। बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट के वाहन संचालन करने वालों को नियमानुसार दण्ड के साथ ही चेतावनी और समझाईश भी दी जाये। सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि राज्य स्तर से मातहत कार्यालयों के अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनने संबंधी निर्देश जारी करें।
एडीजी श्री जर्नादन ने सड़क निर्माण एजेन्सियों को मार्ग संकेतक लगाने, यदि खराब हैं तो उन्हें दुरूस्त करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सड़कों पर आवश्यकतानुसार रम्बल स्ट्रीप बनाया जाना सुनिश्चित करें। जिन स्थानों पर मार्किंग खराब हो गई उसे तत्काल दुरूस्त किया जाये। श्री जनार्दन ने कहा कि मार्ग संकेतकों की सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बैठक में स्कूली पाठयक्रम में सड़क सुरक्षा संबंधी पाठय सामग्री को शामिल करने के साथ ही उच्च शिक्षा में वाहन संचालन के लिये प्रशिक्षण के प्रबंध करने के निर्देश भी दिये गये।
सभी नोडल अधिकारियों को पाबंद किया गया कि बैठक में दिये गये निर्देशों का पालन कठोरता से सुनिश्चित करायें। अनुपालन में आने वाली दिक्कतों से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करायें ताकि उनका समाधान किया जाकर सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिये पुख्ता प्रबंध किये जा सके।
उद्धव ठाकरे और परिवार की बेहिसाबी संपत्ति के खिलाफ याचिका पर सुनवाई 22 नवंबर तक स्थगित
मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ बेहिसाब संपत्ति जमा करने को लेकर बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. दादर निवासी गौरी भिड़े और उनके पिता अभय भिड़े ने यह याचिका दायर की है. इस पर न्यायमूर्ति एस. गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति डिगे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। हालांकि, ठाकरे के वकीलों ने फिर हाईकोर्ट में शिकायत की कि गौरी भिड़े द्वारा उनकी याचिका पर उठाई गई आपत्तियों को अभी तक दूर नहीं किया गया है। भिड़े ने दावा किया कि चूंकि कोई वकील उनकी याचिका को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, वे अदालत के समक्ष तर्क के लिए खड़े हुए हैं। लेकिन उनके लिए हलफनामे पर यह पेश करना जरूरी है कि वे खुद बहस करने में सक्षम हैं, याचिका के पीछे उनका कोई स्वार्थ नहीं है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामले नहीं है और हलफनामे पर मामलों को प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, उन्होंने इन चीजों को पूरा किया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अगली सुनवाई से पहले हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार से मिलने का निर्देश देते हुए सुनवाई 22 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। चूंकि ठाकरे की आय और उनकी संपत्ति मेल नहीं खाती, इसलिए इस याचिका की मुख्य मांग सीबीआई और ईडी के माध्यम से मामले की जांच करना है।
क्या है याचिका ?
बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि उद्धव ठाकरे की संपत्ति भ्रष्टाचार और हेराफेरी से जमा हुई एक बेहिसाब संपत्ति है। इसके खिलाफ उन्होंने 11 जुलाई 2022 को मुंबई पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह आरोप लगाते हुए कि ठाकरे के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय वित्त मंत्रालय, सीबीआई, मुंबई पुलिस आयुक्त, उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, रश्मि ठाकरे और तेजस ठाकरे को इस याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है। इन सभी ने भारतीय संविधान, आईपीसी, सीआरपीसी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन किया है। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, आदित्य ठाकरे उनके मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण मंत्री थे। इसलिए, लोगों के प्रतिनिधि के रूप में, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धारा 21 उन पर लागू होती है। इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व कानून भी लागू होता है। इसके अलावा प्रतिवादी संख्या 7 और 8 रश्मि ठाकरे, तेजस ठाकरे उद्धव ठाकरे के बहुत करीबी रिश्तेदार हैं, उनकी भी इस कानून के अनुसार जांच होनी चाहिए।
घर के कोनों पर निर्माण से होता है वास्तुदोष
कई बार देखा जाता है कि नये घर में जाने के बाद व्यक्ति की परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसके पीछे सही वास्तु के अनुसार घर का निर्माण नहीं होना भी जिम्मेदार हो सकता है। कई घरों में लोग किसी एक कोने में भी निर्माण करा लेते हैं। कोई कमरा या गैराज बनाकर उसका उपयोग करते हैं। वास्तु के अनुसार, इस तरह के निर्माण का घर और उसमें रहनेवाले व्यक्तियों पर विपरीत प्रभाव पढ़ता है।
ईशान कोण पर ढक्कन का प्रभाव
प्लॉट की पूर्व और उत्तर दिशा के मिलने पर बने कोने को ईशान कोण कहते हैं। अगर इस कोण पर ढक्कन लगा दिया जाए तो इस घर में रहनेवाले लोगों का जीवन कष्टों से भर सकता है। उन्हें कई प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं। वास्तु के अनुसार, यह निर्माण खासतौर पर घर के बड़े पुत्र के लिए कष्टदायी हो सकता है।
आग्नेय कोण पर निर्माण
यदि कंपाउंड वॉल के आग्नेय कोण यानी पूर्व और दक्षिण दिशा के मिलने की जगह पर निर्माण करा दिया जाता है तो इससे परिवार में अनहोनी और अकाल मृत्यु की स्थितियां निर्मित हो सकती हैं।
वायव्य कोण में ढक्कन होना
प्लॉट की कंपाउंड वॉल के वायव्य कोण यानी उत्तर और पश्चिम दिशा के कोने पर यदि निर्माण कराया जाता है तो इस घर में रहनेवाले लोगों को आर्थिक और पारिवारिक जीवन में बहुत ही अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जब तक भाग्य घर के लोगों का साथ देता है, तब तक इन प्रभावों का अहसास नहीं होता लेकिन जैसे ही ग्रह-स्थिति बदलती है तो परिवार की हालत बहुत खराब हो जाती है।
नैऋत्य कोण में निर्माण
कंपाउंड वॉल के नैऋत्य कोण (दक्षिण और पश्चिम का कोना) को कवर करने पर यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो बुरे प्रभावों से बचा जा सकता है। जैसे, केवल कंपाउंड वॉल पर ही कमरे का निर्माण करें। इस कमरे की छत या दीवार मुख्य भवन की छत या दीवार से न मिलती हो और इन दोनों के बीच कम से कम 4 फीट की दूरी जरूर हो। अगर इस नियम का ध्यान नहीं रखा जाता और छत आपस में मिल जाती है तो इसे नैऋत्य कोण का बढ़ाव माना जाता है, जो कि घर के लिए अशुभ होता है।
नहीं बनना चाहिए ऐसा गड्ढा
यदि आप नैऋत्य कोण में कंपाउंड वॉल पर कमरा बना रहे हैं तो इसका फर्श घर के फर्श के बराबर या घर के फर्श से ऊंचा रख सकते हैं लेकिन इसका फर्श घर के फर्श से नीचा नहीं रखना चाहिए। इसका फर्श नीचा होने पर यह नैऋत्य कोण का गड्ढा बन जाता है, जो घर के लिए हानिकारक होता है।
भगवान की ऐसी प्रतिमाएं देती हैं अशुभ फल
हिंदू धर्म के ज्यादातर घरों में भगवान का मंदिर या फिर मूर्तियां होती हैं, जिनके हर रोज दर्शन और पूजा करते हैं। हम पूजा इस आस्था से करते हैं कि इनका शुभ प्रभाव घर पर पड़े, क्योंकि भगवान के दर्शन मात्र से ही मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है पर वास्तु के अनुसार, कई मूर्तियां ऐसी भी होती हैं कि जिनके दर्शन करने से मनुष्य पर अशुभ प्रभाव पड़ सकता है। आज हम आपको कुछ ऐसी मूर्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दर्शन करना वास्तु के अनुसार गलत बताया गया है।
होता है नकारात्मक ऊर्जा का संचार
वास्तु के अनुसार, भगवान की ऐसी किसी तस्वीर या मूर्ति के दर्शन करने से बचना चाहिए। जिसमें वह किसी से युद्ध करते या फिर विनाश करते नजर आ रहे हों। ऐसी मूर्तियां घर में भी नहीं रखनी चाहिए क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
दर्शन करना होता है अशुभ
घर में कभी भी ऐसी मूर्ति या तस्वीर न रखें, जो टूटी हुई या फिर खंडित हो। उनके दर्शन करना अशुभ माना गया है। ऐसी मूर्ति के दर्शन करना दुख का कारण बन सकता है। इस तरह की मूर्तियों को नदी में सर्वा कर देना चाहिए या फिर पीपल के पेड़ के नीचे रख देनी चाहिए।
नहीं लाएं ऐसी मूर्ति
घर में हमेशा भगवान की खड़ी प्रतिमा के बजाय आसन पर विराजमान मूर्तियों को लाना चाहिए। ऐसी प्रतिमा या तस्वीर अधिक शुभ व लाभ प्रदान करती है। साथ ही उनका मुंह सौम्य और हाथ आशीर्वाद देते हुए हों। वास्तु के अनुसार कभी भी घर में रौद्र मूर्ति नहीं लानी चाहिए।
दरिद्रता का होता है वास
भगवान की मूर्ति या तस्वीर घर में इस तरह नहीं रखनी चाहिए, जहां उनका पीछे का भाग यानी पीठ दिखाई दे रही हो। भगवान की पीठ के दर्शन करने से पुण्य कर्म का प्रभाव कम होता है। माना जाता है कि भगवान की पीठ के दर्शन करने से दरिद्रता का वास होता है।
दुर्भाग्य को मिलता है निमंत्रण
घर के मंदिर में कभी भी एक ही भगवान की दो प्रतिमाएं या फिर तस्वीर नहीं रखनी चाहिए। ऐसा करने से दुर्भाग्य को निमंत्रण मिलता है। साथ ही आप जहां भी पूजा कर रहे हों वहां अग्नि से संबंधित जैसे- विघुत मोटर्स आदि चीजें नहीं रखनी चाहिए।
घर में फैलती है अशांति
वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर में कभी भी भगवान शिव के अवतार भैरव देव, नटराज, शनि देव और राहु-केतु की मूर्ति या तस्वीर को घर में नहीं लाना चाहिए। इनके दर्शन मंदिर में ही करने चाहिए घर में इनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी मूर्ति लाने से घर में अशांति फैलती है।
एकाग्रता की सीख अर्जुन से लें
हमें शुरुआत से ही बार-बार ध्यान लगाकर काम करने की सीख दी जाती है पर वर्तमान में इस पर गौर किया जाए, तो ध्यान की कमी नजर आती है। एकाग्रता के संबंध में धनुर्धर अर्जुन से सीख लें। अर्जुन को अपने लक्ष्य के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं देता था।
जब मन एक कार्य पर एकाग्र होता है, उस समय ध्यान की तीव्रता अत्यधिक बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप आप कार्यों को भली-भांति संपन्न करते हैं। आज के समय में जब प्रतियोगिता इतनी अधिक बढ़ गई है तो गहन कार्य या पूर्ण एकाग्रता के साथ काम करना न सिर्फ समय का सदुपयोग है, बल्कि समय नियोजन भी है। अस्त-व्यस्त दिनचर्या की अगर कोई काट है तो वह मानसिक एकाग्रता के साथ संपन्न किया गया कर्म ही है। अगर आप इसे जीवन का धर्म बना लें तो इसके बाद आपकी क्षमता पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है।
उपनिषदों में दो शब्द अत्यंत महत्वपूर्ण हैं- कर्म और धर्म। धर्म का अर्थ है हमारा स्वभाव और कर्म जो हम करते हैं। कर्म में हमारी दृष्टि बाहर की ओर होती है और धर्म हमें अपने अंदर की ओर मोड़ देता है, अपने अंतर्मन की ओर। मन को लेकर हमें ज्ञात है कि इसे नियंत्रण में करना अति कठिन है, क्योंकि मन में भांति-भांति के उद्वेग उठते रहते हैं। इसे मन का विकार कहते हैं और जब यह मन विचलन से रहित हो जाता है उस शांत निर्विकार दशा को आत्मा कहते हैं।
एकाग्रता वह बिंदु है जहां पर धर्म और कर्म आपस में मिल जाते हैं और व्यक्ति स्वयं को लक्ष्य के प्रति समर्पित कर देता है। इसके बाद आप को अर्जुन की तरह चिड़िया की आंख के अतिरिक्त और कुछ दिखाई नहीं देता है। फिर कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती है।
आध्यात्मिक जीवन से होता है दैवीय गुणों का विकास
दैवीय गुणों का विकास करने के लिए आध्यात्मिक जीवन के अभ्यासी बनें क्योंकि इस जीवनशैली में स्वाभाविक रूप से जीवन की सिद्धि, सफलताएं, समाधान और कल्याण के सूत्र मौजूद हैं। इसमें क्षमाशीलताएं, विनय और परमार्थ जैसे अनेक सद्गुणों का स्थायी वास रहता है। जन्म, जरा और मृत्यु भौतिक शरीर को सताते हैं आध्यात्मिक शरीर को नहीं। आध्यात्मिक व्यक्ति ईश्वरीय शक्ति संपन्न बन जाता है। अध्यात्म जीवन का ऐसा सत्य है, एक ऐसी अनिवार्यता है जो देर-सबेर जीवन का सचेतन हिस्सा बनती है और लौकिक अस्तित्व को पूर्णता देती है। इस तरह यह विश्लेषण विवेचन व चर्चा से अधिक जीने का अंदाज है जिसे जी कर ही जाना व पाया जा सकता है। प्राण वायु की तरह हर पल अध्यात्म तत्व को जीवन में धारण कर हम अपने जीवन की खोई हुई जीवंतता और लय को पुन: प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार हमारे व्यक्तित्व में दैवीय गुणों का विकास होता है और एक विश्वसनीयता एवं प्रमाणिकता जन्म लेती है।
जीवन में भक्ति और दिव्य कर्मों के विषय में सब कुछ जानने का प्रयत्न ही अध्यात्म है। जिस समय हम शांति, अकारण सुख व आनंद की अवस्था में होते हैं, हम अपने वास्तविक स्व में, गहन अंतरात्मा में जी रहे होते हैं। सही मायने में अध्यात्म एक दर्शन है चिंतन धारा है, विद्या है, हमारी संस्कृति की परंपरागत विरासत है। यह आत्मा, परमात्मा, जीव, माया, जन्म, मृत्यु, पुनर्जन्म, सृजन, प्रलय की अबूझ पहेलियों को सुलझाने का प्रयत्न है। देखा जाए तो स्वयं को स्वयं से जोड़ने का नाम आध्यात्मिकता है।
इस संसार में मानव जीवन से अधिक श्रेष्ठ अन्य कोई उपलब्धि नहीं है। एकमात्र मानव जीवन ही वह अवसर है जिसमें मनुष्य जो भी चाहे प्राप्त कर सकता है। इसका सदुपयोग मनुष्य को कल्पवृक्ष की भांति फलीभूत होता है। जो मनुष्य इस सुरदुर्लभ मानव जीवन को पाकर उसे सुचारू रूप से संचालित करने की कला नहीं जानता यह उसका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा।
मानव जीवन वह पवित्र क्षेत्र है जिसमें परमात्मा ने सारी विभूतियां बीज रूप में रख दी हैं जिनका विकास नर को नारायण बना देता है। किंतु इन विभूतियों का विकास तभी होता है जब जीवन का व्यवस्थित रूप से संचालन किया जाए। अध्यात्म हमें जीवन के द्वंद्वों के बीच सम रहने और विषमताओं को पार करने की शक्ति देता है। आध्यात्मिक दृष्टि में जीवन का लक्ष्य आत्म-जागरण, आत्म-साक्षात्कार, ईश्वर प्राप्ति है। यह प्रक्रिया स्वयं को जानने के साथ प्रारंभ होती है, अपनी अंतरात्मा से संपर्क साधने और उस सर्वव्यापी सत्ता के साथ जुड़ने के साथ आगे बढ़ती है।
अध्यात्म विवेक को जागृत करता है जो सहज स्फूर्त नैतिकता को संभव बनाता है और हम जीवन मूल्यों के स्रोत से जुड़ते चले जाते हैं। अध्यात्म अंतर्निहित दिव्य क्षमताओं एवं शक्तियों के जागरण, विकास के साथ व्यक्तित्व की चरम संभावनाओं को साकार करता है। आज हम जिन महामानवों अथवा देव मानवों को आदर्श के रूप में देखते हैं वे किसी न किसी रूप में इसी विकास का परिणाम होते हैं।
इस मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को रखना पड़ता है स्त्री वेश
सनातन धर्म में तीर्थ-स्थानों में पूजा-पाठ को लेकर कई तरह के नियम और परंपराएं हैं जिनका पालन सदियों से हो रहा है। इसी के तहत देश के कुछ मंदिरों में जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, वहीं केरल में एक ऐसा मंदिर है जिसमें पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। अगर इस मंदिर में दर्शन करना ही है तो प्रवेश करने के लिए पुरुषों को भी महिलाओं की तरह ही 16 श्रृंगार कर जाना होता है।
केरल के कोल्लम जिले में स्थित यह मंदिर श्री कोत्तानकुलांगरा देवी का है। इस मंदिर के नियम के अनुसार यहां सिर्फ महिलाएं और किन्नर ही प्रवेश पा सकते हैं। वहीं पुरुषों को प्रवेश के लिए स्त्री का वेश धारण करना पड़ता है।
इस मंदिर में न सिर्फ महिलाएं और किन्नर बड़ी संख्या में देवी पूजन के लिए आते हैं बल्कि पुरुष भी नियम के अनुसार महिलाओं के कपड़े पहन कर देवी की पूजा करते हैं।
श्री कोत्तानकुलांगरा देवी मंदिर में हर साल चाम्याविलक्कू का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में पुरुष श्रद्धालु आते हैं। जिन्हें मंदिर में प्रवेश के लिए न सिर्फ स्त्रियों के कपड़े पहनने पड़ते हैं बल्कि उनकी तरह 16 श्रृंगार करते हुए गहने, गजरा आदि भी लगाना पड़ता है।
चाम्याविलक्कू त्योहार में शामिल होने वाले पुरुष श्रद्धालुओं को सजने-संवरने के लिए एक अलग से मेकअप रूम बनाया जाता है। जहां पर वे महिलाओं की तरह 16 श्रृंगार करते हैं। इस मंदिर में प्रवेश के लिए भले ही कपड़ों आदि को लेकर नियम और शर्तें हों लेकिन उम्र का कोई बंधन नहीं है। यहां हर उम्र का पुरुष महिलाओं की तरह श्रृंगार करके प्रवेश पा सकता है।
श्री कोत्तानकुलांगरा देवी के मंदिर की खास बात यह भी है कि इसके गर्भगृह के ऊपर छत और कलश नहीं है। मान्यता यह भी है कि यहां देवी स्वयं प्रकट हुई थीं। देवी के पूजन के लिए यहां पर बड़ी संख्या में किन्नर आते हैं।
मान्यता है कि श्री कोत्तानकुलांगरा देवी की शिला को जब पहली बार कुछ चरवाहों ने देखा तो उन्होंने वस्त्र, फूल आदि अर्पित करके देवी का पूजा किया। जिसके बाद देवी की इस शिला से दिव्य शक्ति निकलने लगी। इसके पश्चात् इस मंदिर का निर्माण हुआ हालांकि इस मंदिर के बारे में यह भी कथा मिलती है कि जब कुछ लोगों द्वारा यहां इस शिला पर नारियल फोड़ा गया तो इस शिला से खून निकलने लगा था। उस चमत्कार को देखने के बाद लोगों ने इस शक्तिपीठ पर पूजन प्रारंभ कर दिया।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (17 नवंबर 2022)
- मेष राशि :- स्वजनों व मित्रों से वाद-विवाद कार्यकारी क्षेत्र में अड़चने अवश्य ही बनेंगी, ध्यान रखें।
- वृष राशि – उच्च पद की प्राप्ति अनेक सुखों का योग तथा उच्च वर्ग का सानिध्य प्राप्त होगा।
- मिथुन राशि – अनेक तरह की बाधाएं मानसिक एवं व्यावसायिक रुकावटें पैदा करेंगी।
- कर्क राशि – न्यायालयीन कार्यो में सफलता व शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिलेगा।
- सिंह राशि – सत्संग एवं स्वास्थ्य में लाभ होगा तथा संतान के स्वास्थ्य पर ध्यान देना हितकर होगा।
- कन्या राशि – कार्य व्यवसाय में अर्थलाभ होगा, विभागीय कार्य एवं स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
- तुला राशि – धन प्राप्ति का योग है। भाग्य साथ देगा, किसी कीमती वस्तु की खरीदी का योग है।
- वृश्चिक राशि – दुष्टों की संगति से बचने का प्रयत्न करें, शत्रु पक्ष कार्य में बाधा पहुंचायेंगे।
- धनु राशि – सांसारिक सहयोग मिलेगा, बच्चों से परिवार में सुख शांति का वातावरण बनेगा।
- मकर राशि – कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, पारिवारिक सुख की प्राप्ति का योग बन रहा है।
- कुंभ राशि – न्यायालयीन कार्यो में सफलता अवश्य ही मिलेगी, समय और स्थिति से साथ चलें।
- मीन राशि – कार्य व्यवसाय अर्थलाभ विभागीय कार्यो पर ध्यान देना होगा, रुके कार्य बन जाएंगे।
दिन दहाड़े डकैती का प्रयास, महिला की बहादुरी देख भागे 3 नकाबपोश
राजगढ़ । नगर में बुधवार दोपहर को पटवारी मोहल्ले में स्तिथ नरेंद्र शर्मा शिक्षक के घर मे उनकी अनुपस्थिति में पत्नी ललिता देवी शर्मा को तीन बदमाशों ने पकड़कर घर में डकैती का प्रयास किया । ललिता देवी ने बताया कि में रोज की तरह गृहकार्य में लगी हुई थी। करीब दोपहर 02ः30 बजे कपड़े धुलाई के लिए रोड़ी बाई आती है वो घर में कपड़े धोने में व्यस्त थी। तभी अचानक 3 युवक मोटरसाइकिल से आये और पूछा कि दवाई लेना है। मैंने उन्हें बताया कि दवाई यहां नहीं हमारे पुराने मकान पर मिलती है। इतने में उनमे से 2 युवकों ने मुझे जोर से पकड़ लिया और अंदर से फाटक लगाने का प्रयास करने लगे। तभी घर में मौजूद रोड़ी बाई ने आवाज सुनते ही वो आई। तब उनके द्वारा चिल्ला चोट की तब वो बाहर भाग खड़े हुए। बाहर खड़ा बाइक सवार भाग गया और दो युवक अलग अलग रास्ते से भाग गए। चिल्लाने पर आसपास के रहवासियों को कुछ समझ आता तब तक वह तीनों युवक फरार हो गए। तीनों युवकों ने मुंह पर कपड़ा बांध रखा था। इसलिए उनकी पहचान करना कठिन है। वहीं एक युवक भागते हुए 6-7 वर्ष की बच्ची को भी उठाने का प्रयास किया। तभी पास खड़े कन्हैयालाल वर्मा ने बच्ची को छुड़वाया। वहीं कुछ स्थानीय किशोरों ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया परंतु वो सफल नही हो सके। थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुझालदे, निरीक्षक जीएस कुशवाह, महिला पुलिसकर्मी चारु शर्मा एवं अन्य पुलिसकर्मियों ने घटना स्थल पर पंहुचकर पीड़ित ललित शर्मा से पूरा घटनाक्रम की जानकारी ली। आसपास के सीसीटीवी कैमरे खांंले जा रहे हैं।















