नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने अंग्रेजी में सेक्सुअल शब्द बोलने वाले शख्स के खिलाफ चार्ज हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के बाद शख्स की उस दलील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने इस शब्द का अर्थ 'दूर चले जाना' बताया था। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 354ए (यौन टिप्पणी और यौन उत्पीड़न), 506 (शब्द, हावभाव से किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने का इरादा) और 509 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराधों के लिए कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार है।
कोर्ट ने शख्स के खिलाफ आरोपों को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट एक महिला अदालत के फैसले में एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह मामला मई 2019 का है, जब तौसीफ-अल हसन नाम का शख्स अपने अन्य साथियों के साथ एक महिला के घर घुस गया। आरोपी ने महिला और उसके परिवार को धमकी दी। आरोपी ने महिला को 'बाजारू' औरत और कुछ अन्य सेक्स केंद्रित शब्दों का प्रयोग किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ये शब्द आपत्तिजनक हैं, इनका इस्तेमाल किसी को छोड़ने या जाने के लिए कहने के लिए नहीं किया जा सकता।
एडिशनल सेशन जज संजय शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ता का केवल शिकायतकर्ता को छोड़ने या जाने के लिए कहने का इरादा था। कोर्ट ने कहा, 'याचिकाकर्ता ने पीड़िता को चुप रहने और एक कोने में बैठने के लिए कहा और उसने अन्य लोगों के साथ उसे और उसके परिवार को घर से बाहर निकालने की धमकी दी। अदालत ने कहा कि ये शब्द का अपमानजनक, आपत्तिजनक और नीचा दिखाने वाला है। कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने से पहले अदालत को रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री पर अपने न्यायिक दिमाग को लागू करना चाहिए। ये समझना चाहिए कि क्या आरोपी के द्वारा अपराध करना संभव था।
महिला पर सेक्सुअल टिप्पणी करने वाले शख्स को कोर्ट ने नहीं दी राहत, कहा यह घोर आपत्तिजनक
आज शहडोल से आदिवासियों को साधेंगे कमलनाथ
पीसीसी अध्यक्ष चार जिलों के आदिवासी वोटरों की सभा को संबोधित करेंंगे
भोपाल। जिस आदिवासी वोट बैंक के बलबुते 2018 में कांग्रेस सत्ता में आई थी, उस वर्ग को साधने के लिए कांग्रेस शहडोल से अभियान शुरू करने जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ 7 नवंबर को शहडोल दौरे में नगर पालिका अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के साथ ही पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे, रैली में शामिल होंगे और विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। इस जनसभा में शहडोल के साथ ही अनूपपुर, उमरिया व डिंडोरी जिलों के आदिवासी शामिल होंगे। प्रदेश की 22 फीसदी आबादी वाले आदिवासी समाज को साधने के लिए भाजपा और कांग्रेस के नेता कोई कोर-कसर नहीं छोडऩा चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि आदिवासी वर्ग का प्रदेश की 80 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है और 47 विधानसभा सीटें इनके लिए आरक्षित हैं। माना जाता है कि मप्र में जिस पार्टी को आदिवासी वर्ग का साथ मिलता है उसकी सरकार बन जाती है। इसलिए कांग्रेस इस बड़े वोट बैंक को साधने में जुटी हुई है।
जुटेंगे 4 जिलों के आदिवासी
प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मप्र कांग्रेस ने आदिवासी वोटरों को साधने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ 7 नवंबर को शहडोल दौरे पर जाएंगे। वे वहां नगर पालिका अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के साथ ही पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे रैली में शामिल होंगे और विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। शहडोल में विशाल जनसभा के जरिए कांग्रेस शहडोल के साथ ही अनूपपुर, उमरिया व डिंडोरी जिलों के आदिवासी वोटरों के बीच पार्टी के पक्ष में माहौल बनाएगी। शहडोल की जिला कांग्रेस कमेटी ने कमलनाथ के दौरे को सफल बनाने की तैयारी तेज कर दी है।
निकाय चुनाव की सफलता से उत्साहित कांग्रेसी
देखा जाए तो अभी हाल ही में जो निकाय चुनाव संपन्न हुए, उसमें सब की नजर शहडोल नगर पालिका चुनाव पर थी। जब चुनाव हुए तो शहडोल नगर पालिका के 39 वार्ड में भाजपा के जहां 18 पार्षद जीतने में कामयाब हुए तो कांग्रेस के 12 पार्षद ही जीतने में कामयाब रहे थे। इसके अलावा 9 पार्षद निर्दलीय जीत दर्ज करने में सफल हुए। आखिरी तक कयास लगाए जा रहे थे कि नगर पालिका का अध्यक्ष एक बार फिर से भाजपा बना लेगी, लेकिन कांग्रेस ने 12 पार्षद होने के बाद भी अपना अध्यक्ष बनाने में सफलता हासिल कर ली। ऐसा लगभग दो दशक बाद हुआ, जब शहडोल नगर पालिका में कांग्रेस का अध्यक्ष बना, इसलिए कांग्रेस के लिए यह जीत काफी मायने रखती है। जयसिंह नगर नगर परिषद में भी कांग्रेस अपना अध्यक्ष बनाने में सफल रही, जिससे पार्टी में खासा उत्साह है और वह इस जीत को विधानसभा चुनाव में दोहराने की तैयारी में जुट गई है। यही वजह है कि शहडोल में पीसीसी चीफ कमलनाथ का दौरा तय किया गया है।
शहडोल में भाजपा का दबदबा
शहडोल जिले के राजनीतिक समीकरण की बात करें, तो यह आदिवासी जिला है। यहां पर 3 विधानसभा सीटें हैं और तीनों सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। वर्तमान में तीनों ही विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इन सीटों पर भाजपा का कब्जा कई वर्षों से लगातार बना हुआ है। आगामी चुनाव में कांग्रेस इन सीटों पर कब्जा करना चाहती है। यही वजह है कि शहडोल में पार्टी संगठन को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। शहडोल के जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष गुप्ता का कहना है कि शहडोल निकाय चुनाव में कांग्रेस को ऐतिहासिक सफलता मिली है। हमारी कोशिश है कि अगले विस चुनाव में जिले की तीनों सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज करे। हम पीसीसी चीफ कमलनाथ के दौरे को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटे हैं। उनके दौरे से शहडोल के साथ ही आसपास के जिलों में भी कांग्रेस को मजबूती मिलेगी।
अध्यक्ष बदलने के बाद कांग्रेस में बदलाव
बता दें कि अभी कुछ महीने पहले ही शहडोल कांग्रेस जिलाध्यक्ष को बदला गया और आजाद बहादुर की जगह सुभाष गुप्ता को कांग्रेस के शहडोल जिला अध्यक्ष की कमान सौंपी गई। जिसके बाद से ही कांग्रेस में एक अलग ऊर्जा देखने को मिल रही है। अभी हाल ही में हुए निकाय चुनाव के जो परिणाम आए और जिस तरह से कांग्रेस ने सफलता हासिल की उसे लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुभाष गुप्ता, रविंद्र तिवारी, अजय अवस्थी जैसे नेताओं की अहम भूमिका मानी जा रही है। अब इस जीत के बाद उत्साहित कांग्रेसी अपनी पार्टी को संगठित करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों से लगातार कांग्रेस पार्टी जिले में अपने ही नेताओं के आपसी विवादों और अंतर्कलह की वजह से सुर्खियों में रही है। बहरहाल अब देखना यह होगा कि कमलनाथ के इस दौरे के बाद शहडोल में कांग्रेस का कैसा माहौल बनता है। क्या कमलनाथ अपने इस दौरे के साथ ही शहडोल जिले के इस आदिवासी बहुल इलाके के वोटर्स को भी साधने में कामयाब रहेंगे।
प्रदेश की सियासत आदिवासियों के इर्द-गिर्द
मध्य प्रदेश की सियासत आदिवासियों के इर्द-गिर्द चलती हुई नजर आ रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दे रही है कि वो आदिवासियों के बीच जाकर पार्टी की बात रखें। वहीं पीसीसी चीफ कमलनाथ ने आदिवासी नेताओं और विधायकों को ट्राइबल बेल्ट का दौरा करने और आदिवासियों के साथ संवाद स्थापित करने के निर्देश दे दिए हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस ने अगले 6 महीने के लिए प्लान ऑफ एक्शन भी तैयार कर लिया है। इसके तहत पार्टी लगातार इन सीटों पर मेहनत मशक्कत करेगी। कांग्रेस सभी प्रमुख आदिवासी संगठनों को पार्टी के साथ जोडऩे के प्लान पर काम कर रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के सियासी समीकरण आदिवासी वोट बैंक पर टिके हुए हैं। प्रदेश में विधानसभा की 230 सीट में से 47 आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा भी कई सीटों पर आदिवासी वोटरों का खासा दखल है। प्रदेश में आदिवासियों की कुल जनसंख्या 2 करोड़ से भी अधिक है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इस वर्ग को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। एक ओर भाजपा सरकार ने योजनाओं की बौछार कर दी है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने आदिवासियों को साधने के लिए विशेष प्लान तैयार किया है।
47 सीटों का खेल
2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासियों के वोटों के कारण ही कांग्रेस सत्ता हासिल कर पायी थी। कांग्रेस को 47 में से 30 सीटें मिली थीं। प्रदेश में आदिवासियों की बड़ी आबादी होने से 230 विधानसभा में से 84 सीटों पर उनका सीधा प्रभाव है। प्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा ने 31 सीटें जीती थीं। कांग्रेस के खाते में 15 सीट आयी थीं। लेकिन 2018 के चुनाव में सीन एकदम उल्टा हो गया। आरक्षित 47 सीटों में से भाजपा सिर्फ 16 पर ही जीत दर्ज कर सकी। कांग्रेस ने 30 सीटें जीत ली थीं। भाजपा सत्ता से बाहर हो गयी थी। बहरहाल देखना होगा कि 2023 के चुनावों में आदिवासी समाज किस दल को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाता है।
जीवन जीने का सही मार्ग दिखाते हैं गुरु नानक देव के ये अनमोल वचन
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु नानक जी की जयंती मनाई जाती है।इस साल 8 नवंबर को गुरु नानक देव जी की जयंती है। गुरु नानक जी सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक हैं। सिख धर्म को मानने वालों के लिए गुरु नानक जयंती का दिन बेहद खास होता है। गुरु नानक देव बचपन से ही धार्मिक प्रवृति के थे। उन्होंने अपना जीवन मानव समाज के कल्याण में लगा दिया था। आज भी लोग इनकी बताई गई सीख पर चलते हैं। गुरु नानक जयंती के अवसर पर चलिए जानते हैं गुरु नानक देव के अनमोल विचार…
गुरु नानक देव जी के अनमोल विचार-
केवल वही बोलें,
जो आपको मान-सम्मान दिलाए।
यदि तू अपने दिमाग को शांत रख सकता है,
तो तू विश्व पर विजयी होगा।
जो इंसान कड़ी-मेहनत करके कमाता है,
और अपनी मेहनत की कमाई में से थोड़ासा भी दान करता है
वह सत्य मार्ग ढूंढ लेता है।
अपनी कमाई का 10वां हिस्सा परोपकार के लिए
और अपने समय का 10वां हिस्सा प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।
इस दिन लगने जा रहा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, इन बातों का रखें ध्यान
इस वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को लगने जा रहा है। इससे पहले 25 अक्टूबर को वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण लगा था। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सूर्य-चंद्र के किसी भी ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है।
वही बात यदि चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2022) की करें तो सभी जीव-जंतुओं पर उसका सीधा प्रभाव होता है। यही कारण है कि चंद्र ग्रहण के चलते कई कार्य करने की मनाही की गई है।
वही धार्मिक विद्वानों के अनुसार, चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2022) से पहले सूतक काल आरम्भ हो जाता है। इस सूतक काल का लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को कपड़ों की सिलाई तथा कटाई से परहेज करना चाहिए। साथ ही उन्हें सब्जी भी नहीं काटनी चाहिए। साथ ही चंद्र ग्रहण से पहले जब सूतक काल लगा हो तो लोगों को सोने की गलती नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से उन्हें ग्रहण का दुष्प्रभाव झेलना पड़ता है तथा उनके परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ जाती है। इस काल में ग्रहण का कुप्रभाव कम करने के लिए मंत्रों का जाप करना चाहिए।
वही जब सूतक काल लगा हो तो लोगों को अन्न के सेवन से परहेज करना चाहिए। उन्हें न तो भोजन पकाना चाहिए तथा न ही उसका सेवन करना चाहिए। यह नियम बीमार, बुजुर्ग और बच्चों पर लागू नहीं होता। वही ग्रहण का प्रभाव आपके घर में बने भोजन तथा पीने के पानी पर भी पड़ता है। इसलिए ग्रहण काल आरम्भ होने से पहले अपने भोजन एवं पीने के पानी में तुलसी और कुश का पत्ता डाल देना चाहिए। जब ग्रहण काल ख़त्म हो जाए, तभी भोजन-पानी से इन दोनों के पत्तों को निकालकर उनका सेवन करना चाहिए।
सहन करना सीखें
व्यक्ति स्वयं ही बेचैनी का जीवन जीता है और अकारण ही जीवन में अनेक कष्टों को आमंत्रित कर लेता है। एक आदमी था। वह सदा प्रसन्न रहता था। एक दिन उसको उदास देखकर मित्र ने पूछा, मित्र! तुम सदा प्रसन्न रहते थे। तुम्हारी सारी अनुकूलताएं थीं। पर आज तुम बहुत उदास दिख रहे हो, यह क्यों? उसने कहा, मेरी प्रसन्नता गायब हो गई। आज से नहीं, बारह महीनों से वह गायब है। इसका भी कारण है। पहले इस गांव में मेरा मकान सबसे ऊंचा था। न जाने एक व्यक्ति कहां से आ टपका कि उसने मेरे मकान से भी ऊंचा मकान बना डाला। उसी दिन से मेरी प्रसन्नता समाप्त हो गई।
इसकी कोई दवा नहीं है। आयुर्वेद विज्ञान में, मेडिकल साइन्स में, साइकोलॉजी में इसकी कोई दवा नहीं है। यह साइकोसोमेटिक बीमारी भी नहीं है। इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बना। दूसरे की विशेषता को, दूसरे की सम्पन्नता को सहन न करना ही इसका कारण है। ऍसी बीमारी का उपाय यह है कि व्यक्ति अपनी शक्ति को बढ़ाए, तीन मंजिले मकान के स्थान पर पांच मंजिला मकान बनाने पांच मंजिले के स्थान पर सात मंजिला मकान बनाने की क्षमता को विकसित करे और अघिक कमाए, और अघिक श्रम करे। यह उसका सकारात्मक पक्ष है। मनुष्य का दृष्टिकोण सकारात्मक कम होता है, नकारात्मक अघिक। एप्रोच नेगेटिव होने के कारण वह दुखी होता है। इससे असहिष्णुता का भाव जागता है और असहिष्णुता राहू की भांति चांद को निरंतर ग्रसित करती रहती है।
चंद्रग्रहण पर बन रहे बन रहे खास योग
साल का आखिरी चंद्रग्रहण मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा। इस दिन देव दिवाली रहेगी, लेकिन पूरे दिन ग्रहण और सूतक के चलते देवालयों के पट बंद रहेंगे। ग्रहण की समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद ही पट खुलेंगे। ज्योतिषाचार्य सौरभ दुबे ने बताया कार्तिक पूर्णिमा सोमवार को दोपहर 3.40 बजे से शुरू होकर दूसरे दिन दोपहर 3.35 बजे तक रहेगी। उदय कालिक स्थिति के आधार पर कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार को मान्य होगी। इसी दिन ग्रस्तोदित खग्रास चंद्रग्रहण होगा, जो पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 14 मार्च 2025 को होगा। ग्रहण कई राशियों के जातकों के जीवन में उथल-पुथल कर सकता है। सौरभ दुबे ने बताया कि मंगलवार को चंद्रोदय के साथ ही ग्रहण दिखाई देने लगेगा। ग्रहण शाम 5.12 बजे से शुरू होगा, इसका मोक्ष शाम 6.23 बजे होगा। सूतक काल सुबह 8.10 बजे से लग जाएगा। साल का आखिरी चंद्रग्रहण मेष राशि में लगेगा। इस दिन राशि स्वामी मंगल तीसरे भाव में वक्री स्थिति में होंगे। चंद्रमा के साथ राहु की स्थिति होगी, लेकिन सूर्य भी केतु, शुक्र और बुध के साथ रहेगा और शनि इन सभी ग्रहों पर पूर्ण दृष्टि रखेगा। पूर्ण चंद्रग्रहण के समय प्रत्येक ग्रह की स्थिति का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। शनि और मंगल के आमने-सामने होने के कारण षडाष्टक योग, नीचराज भंग और प्रीति योग भी बन रहे हैं। ऐसे में लोगों को चंद्रग्रहण के दौरान मंत्रोच्चारण, ध्यान, भजन आदि करना श्रेयस्कर होगा। भारत की पूर्व दिशा के शहरों में पूर्ण चंद्र ग्रहण और बाकी शहरों में आंशिक चंद्र ग्रहण दिखेगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 2.38 बजे होगी और शाम को 4.23 से ईटानगर में चंद्रोदय के साथ ही ग्रहण दिखने लगेगा। ग्रहण 6.19 बजे खत्म हो जाएगा। ग्रहण की वजह से देव दिवाली और कार्तिक पूर्णिमा से संबंधित शुभ कामों के लिए कुछ खास बातें ध्यान रखनी होंगी। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र गुप्त के मुताबिक चंद्र ग्रहण भारत में दोपहर 2.38 बजे शुरू होगा। देश के पूर्वी भाग कोलकाता, कोहिमा, पटना, पुरी, रांची, ईटानगर के आसपास के शहरों में पूर्ण चंद्र ग्रहण और शेष भारत में आंशिक चंद्र ग्रहण दिखेगा। जहां पूर्ण ग्रहण रहेगा, वहां चंद्रमा लाल दिखाई देगा।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (07 नवंबर 2022)
- मेष राशि :- नवीन जनसंपर्क कठिनाइयों का निवारण स्त्री संतान की अनुकूलता बनी ही रहेगी।
- वृष राशि – आर्थिक व्यापार की स्थिति सामान्य रहेगी, मानसिक हर्ष की संभावना अवश्य बनेगी।
- मिथुन राशि – व्यापार में सफलता, धन यश की प्राप्ति, धन संचय मामलों में सफलता मिलेगी।
- कर्क राशि – रोजी रोजगार में वृद्धि, धन की प्राप्ति, राजकीय कार्यो में सफलता अवश्य ही मिलेगी।
- सिंह राशि – सांसारिक सुखों की प्राप्ति मित्र मिलाप आमोद प्रमोद व्यापार में सफलता मिलेगी।
- कन्या राशि – संघर्ष कार्य, व्यापार में अशान्ति हो, संतान से सुखद समाचार प्राप्त हो, धन लाभ।
- तुला राशि :- व्यस्त जीवन रहेगा, रोग ऋण शत्रु बाधा पर विजय अवश्य मिले, सुख लाभ होवेगा।
- वृश्चिक राशि – कार्य व्यस्त जीवन रहेगा, उच्च स्तरीय व्यक्तियों से संपर्क परिवार का सुख मिलेगा।
- धनु राशि – धन आगमन से अवरोध, स्त्री संतान आदि में प्रतिकूलता तथा पड़ोसी से विवाद होवे।
- मकर राशि – उत्तम व्यापार में सुधार हो, शत्रु पक्ष से सावधान रहे, आपका स्वास्थ्य ठीक होगा।
- कुंभ राशि – आर्थिक कमी के कारण मानसिक क्लेश होगा, संतान कष्ट तथा राजभय कष्ट बनेगा।
- मीन राशि – सामाजिक व्यवस्था पर कष्ट होगा, पत्नी स्नेह, व्यापार व्यवसाय वृद्धि अवश्य होगी।
Murder : मां ने दोनों हाथ पकड़े और पिता ने काटा गला, अंधे कत्ल का खुलासा
Murder : हर मां-बाप अपने बच्चों से बेइंतहा प्यार करते हैं. उसको जरा सी तकलीफ हो जाए तो उससे ज्यादा पीड़ा मां-बाप को होती हैं, मगर आमला की ये घटना आपको सोचने पर मजबूर कर देगी. एक माता-पिता अपने बेटे से इतना तंग आ गए कि उसकी हत्या कर दी और शव को सड़क किनारे फेंक दिया । पुलिस ने माता-पिता से कड़ाई के साथ पूछताछ की तो हत्या का खुलासा हो गया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
मुलताई एसडीओपी नम्रता सोंधिया और आमला थाना प्रभारी संतोष पन्द्रे ने अंधे कत्ल का खुलासा करते हुए बताया कि 13 अक्टूबर 2022 को संतोष बिंझवे उम्र 28 साल का शव उसके घर के पीछे सड़क किनारे पड़ा मिला था। गले पर धारदार हथियार से चोट के निशान पाए गए। पुलिस ने पोस्टमार्टम सीएचसी आमला में कराया जिसकी रिपोर्ट में मृतक संतोष बिंझवे को गले मे तेज धारदार हथियार से मारकर हत्या करना बताया गया। इस पर पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ धारा 302, 201 का कायम कर विवेचना प्रारंभ की।

बेटे की हरकतों से परेशान माता-पिता के विरोधाभाषी बयान से खुला रहस्य
तकनीकी साक्ष्य एकत्र कर मृतक के माता-पिता से पूछताछ की गई तो वे आपस में विरोधाभाषी बयान दे रहे थे। मृतक के पिता अभिराम के शरीर पर कुछ चोट के निशान भी पाए गए जिससे संदेह बढ़ गया। पुलिस ने जब बारीकी से पूछताछ की तो मृतक के पिता अभिराम बिंझवे ने जुर्म स्वीकार कर बताया कि बेटा संतोष बिंझवे का व्यवहार अच्छा नहीं था। वह कई सालों से उनके साथ शराब पीकर मारपीट करता आ रहा था। 25 सितंबर 2022 को भी मृतक ने अपने पिता अभिराम को शराब पीकर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था जिससे उसका दाहिना कान कट गया था। इसके बाद वह अहमदाबाद काम करने भाग गया था। पूर्व में एक बार हाथ भी तोड़ दिया था।
10 अक्टूबर 2022 को संतोष बिंझवे अहमदाबाद से वापस ससाबड़ आया और घर में बैग रखकर आमला में अपने चचेरे भाई राजेश के घर रहने चला गया। 12 अक्टूबर 2022 की शाम सात बजे करीब घर आया और शराब पीने के लिये पैसे मांगने लगा। मना करने पर लकड़ी से माता-पिता दोनों के साथ मारपीट किया। जिससे पिता अभीराम के चेहरे एवं पसली मे चोट लग गई थी। पिटाई के कारण मां कुसुम बाई के द्वारा 100 रुपये दे दिए ताे वह दोस्तों के साथ शराब पीने चला गया। रात करीबन 10.30 बजे संतोष बिंझवे नशे की हालत में घर वापस आया और गाली गलौज कर माता-पिता के साथ मारपीट करने लगा।

मृतक के पिता अभिराम ने पुलिस को बताया कि उसको यह संदेह हो गया था कि बेटा संतोष कभी भी माता-पिता को जान से मार सकता है तथा घर बेच कर भाग सकता है। इसलिए घर में रखी कटार से उसका गला काट दिया और खून न बहे इसलिए उसके जींस के पेंट को गले में मजबूती से कस दिया। रात करीब एक बजे पिता अभिराम ने मृतक संतोष के दोनों पांव पकड़े और मां कुसुम बाई ने उसके दोनों हाथ पकड़कर पीछे के दरवाजे से लाश को धीरे-धीरे खींचते हुए घर के पीछे की तरफ ढलान में कच्ची रोड़ के किनारे तक ले जाकर शव को झाड़ियों में फेंक दिया। अभिराम ने मृतक के गले में बांधा हुआ जींस का पेंट खोलकर झाड़ियों के अंदर फेंक दिया और वापस अपने घर चले गए। पुलिस ने हत्या के लिए प्रयुक्त तेज धारदार लोहे की कटारनुमा चाकू बरामद कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
ऐसी ही एक घटना है अभी हाल ही में तेलंगाना के हैदराबाद में एक माता-पिता अपने 26 साल के बेटे से इतना तंग आ गए कि उसकी हत्या करवा दी. उन्होंने अपने बेटे की ही सुपारी दी. वो उनका एकलौता बेटा था. दरअसल….. पूरी खबर पढ़ें….
राहुल से मिलने वालों की सूची पीसीसी से होगी तैयार
भोपाल । जैसे-जैसे राहुल गांधी की यात्रा की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे कांग्रेस ने अपनी तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी हैं। बाकी जवाबदारी तो बांट दी गई है, लेकिन राहुल गांधी से कौन मिलेगा और कौन नहीं इसको लेकर कांग्रेस में अंदर ही अंदर नाम जुड़वाने की जद्दोजहद चल रही है। कांग्रेस के नेता भोपाल और दिल्ली में उनसे मुलाकात करने वालों की सूची में अपना नाम जुड़वाने में लगे हुए हैं। हालांकि यह सूची भोपाल से ही फाइनल होगी।
राहुल गांधी इंदौर में 28 नवंबर के आसपास आएंगे। उनकी यात्रा 12 जिलों से होकर गुजरेगी। 12 जिलों में यात्रा के प्रभारी बना दिए गए हैं तो दूसरी व्यवस्थाओं के लिए भी प्रभारियों की नियुक्ति प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा कर दी गई है। इंदौर सेंटर प्वाइंट रहेगा। यहां राहुल गांधी तीन रात गुजारेंगे। हालांकि अभी रूट फाइनल नहीं किया गया है। 8 नवंबर को कमलनाथ इंदौर जा रहे हैं, उसके बाद रूट फाइनल हो जाएगा। इस बीच राहुल गांधी से मिलने के लिए कांग्रेस नेताओं में होड़ मच गई है, लेकिन दिल्ली से स्पष्ट कर दिया गया है कि नेताओं को भीड़ के रूप में नहीं मिलाया जाएगा। उन्हें चलती यात्रा में एक-एक कर मिलाया जाएगा। इसके साथ ही खालसा स्टेडियम में भी एक मीटिंग रखी जा सकती है। सूची में नाम जुड़वाने के लिए 12 जिलों के ही नेता भोपाल और दिल्ली में अपने आकाओं से संपर्क में लगे हैं और कैसे भी हो राहुल गांधी की चलती यात्रा में अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं। यह सूची प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल फाइनल करेंगे। अग्रवाल भी प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं और सभी जिलों में जाकर यात्रा की तैयारियां देख रहे हैं। इंदौर में चूंकि बड़े नेता रहेंगे, इसलिए छोटे नेताओं की दाल गलना मुश्किल है। इसलिए तय किया जा रहा है कि अलग से बूथ, सेक्टर और मंडलम स्तर के कार्यकर्ताओं का सम्मेलन रख दिया जाए, जिसे राहुल गांधी संबोधित करें।
दीर्घकालिक उपलब्धता के लिये जल-संरक्षण जरूरी : राज्य मंत्री यादव
भोपाल : मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की श्रृंखला में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव के मुख्य आतिथ्य में डॉ. विश्वैश्वरैया सभागार, जल भवन, भोपाल में सेमीनार हुआ। सेमीनार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के 39 जिलों के करीब 10 हजार से अधिक जल-स्रोत विहीन ग्रामों के लिये शुद्ध पेयजल की कार्य-योजना तैयार करना और आम लोगों में जल-संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिये जागरूकता लाना है।
राज्य मंत्री यादव ने कहा है कि प्रदेश में निरंतर गिर रहे जल-स्तर से आमजन प्रभावित न हो और सभी को उनकी जरूरत के अनुसार पानी मिल सके, इसके लिये जल-संरक्षण बहुत जरूरी है। उन्होंने अपने गाँव की तालाबी खेती का उदाहरण देकर जल-संरक्षण की उपयोगिता को समझाया। राज्य मंत्री यादव ने कहा कि जल-संरक्षण एवं संवर्द्धन को एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में चलाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जल की दीर्घकालिक उपलब्धता के लिये जल-संरक्षण जरूरी है, तभी हम लम्बे समय तक पेयजल योजनाओं का बेहतर लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
अपर मुख्य सचिव पीएचई मलय ने कहा कि जल-जीवन मिशन से ग्रामीण परिवारों को जल देने की व्यवस्था की जा रही है। यह बहुत जरूरी है कि ग्रामीण क्षेत्र में जल-संरक्षण एवं संवर्द्धन के समुचित उपाय किये जायें। उन्होंने कहा कि ग्रामवासियों को जल-संरक्षण के लिये जागरूक करना हम सबकी जिम्मेदारी है। ने कहा कि जल-स्रोत विहीन ग्रामों की जल-प्रदाय व्यवस्था के लिये स्थानीय स्रोतों के अनुरूप और ग्रामीणजनों की सहभागिता को शामिल करते हुए बेहतर कार्य-योजनाएँ बनाई जाना चाहिये।
निदेशक केन्द्रीय भू-जल बोर्ड राकेश सिंह ने जल-स्रोत विहीन ग्रामों की पेयजल व्यवस्था के संबंध में विशेष कार्य-योजना तैयार किये जाने पर बल दिया। उन्होंने कहाकि विभाग इस कार्य-योजना में ग्रामीण आबादी से पूरी तरह समन्वय बना कर जल-संरचनाओं का निर्माण करे। सेमीनार में भू-जल विषय-विशेषज्ञ एस.एम. शर्मा, मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री सहित मैदानी अमला उपस्थित रहा।















