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IPPB में निकली 41 आइटी प्रोफेशनल की भर्ती,जल्द करे आवेदन

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इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए काम की खबर। डाक विभाग के इडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने आइटी प्रोफेशनल की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है।आइटी विभाग में असिस्टेंट मैनेजर के 18 पदों, मैनेजर के 13 पदों, सीनियर मैनेजर के 8 और चीफ मैनेजर के 2 पदों समेत कुल 41 पर भर्ती की जानी है। हालांकि, उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि विज्ञापित पदों पर भर्ती प्रतिनियुक्ति/विदेश सेवा नियमों के आधार पर की जानी है और चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति 2 वर्ष के लिए की जाएगी, जिसमें 1 वर्ष का विस्तार किया जा सकता है।

इडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में आइटी प्रोफेशनल की भर्ती के लिए आवेदन के इच्छुक व योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट, ippbonline.com पर कैरियर सेक्शन में एक्टिव किए गए लिंक या ऊपर दिए गए डायरेक्ट लिंक से ऑनलाइन आवेदन पेज पर जा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के अंतर्गत उम्मीदवारों को पहले पंजीकरण करना होगा और फिर पंजीकृत विवरणों से लॉग-इन करके उम्मीदवार अपना अप्लीकेशन सबमिट कर पाएंगे। आवेदन के दौरान 750 रुपये शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यमों से करना होगा, जो कि सभी वर्गों के लिए समान है।आवेदन प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हो चुकी है और आखिरी तारीख 18 नवंबर निर्धारित है।

आवेदन से पहले जानें योग्यता

असिस्टेंट मैनेजर पदों के लिए आवेदन हेतु उम्मीदवारों को आइटी या कंप्यूटर साइंस में बीएससी या बीई या बीटेक होना चाहिए या आइटी में एमएससी या बीसीए या एमसीए उत्तीर्ण होना चाहिए। साथ ही, सम्बन्धित कार्य का कम से कम 5 वर्ष का अनुभव आवश्यक है। मैनेजर पदों के लिए समान शैक्षिक योग्यता के साथ 7 वर्ष,सीनियर मैनेजर के लिए 9 वर्ष और चीफ मैनेजर के लिए 11 वर्ष का अनुभव आवश्यक है। उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 1 अक्टूबर 2022 को असिस्टेंट मैनेजर के लिए 30 वर्ष, मैनेजर व सीनियर मैनेजर के लिए 35 वर्ष और 45 वर्ष चीफ मैनेजर के लिए निर्धारित है।

प्रदेश में पर्याप्त खाद का दावा, फिर भी वितरण केंद्रो पर कतारें

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  • 26 लाख टन की जरूरत पर सिर्फ 1.49 लाख टन खाद ही उपलब्ध
  • रबी सीजन में खाद की किल्लत, अंचल में सहकारी समितियों में लग रही कतारें, किसान परेशान

भोपाल । प्रदेश में खाद की किल्लत बरकरार है। हाल ये है कि डिमांड की तुलना में खाद की उपलब्धता ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। कई केंद्रों में खाद खत्म हो चुकी है। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने किसानों की सुविधा के लिए 200 से ज्यादा केन्द्र खोलने और जिन क्षेत्रों में ज्यादा भीड़ हो रही है वहां 150 अतिरिक्त केन्द्र खोलने की बात कही है लेकिन इससे किसानों की दिक्कतें खत्म नहीं हो रहीं हैं। वर्तमान में प्रदेश की 4500 सहकारी समितियों के पास सिर्फ 1.49 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। 30 हजार टन खाद रविवार तक और आने की उम्मीद है जबकि प्रदेश में रबी फसलों की बोवनी के लिए 26.25 लाख टन खाद की जरूरत है। करीब 1 करोड़ किसान रबी फसल की बोवनी करते हैं। यही वजह है कि खाद लेने के लिए समितियों में किसानों की अल सुबह से लाइनें लग रही हैं। हालांकि मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने किसानों को नकद खाद खरीदी के लिए 240 डबल लाक केन्द्र खोले हैं। साथ ही जिन क्षेत्रों में ज्यादा भीड़ होती है वहां 150 के करीब अतिरिक्त केन्द्र खोले हैं। मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो रबी फसल की बोवनी के लिए अब तक 5 लाख 2 हजार टन यूरियाए डीएपीए एनपीके और पोटाश सहित अन्य खाद किसानों को उपलब्ध कराई गई है। निजी व्यापारियों के जरिए भी किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही हैए लेकिन इनकी दरें समितियों से ज्यादा हैं।

अफसरों का तर्क
कृषि और सहकारिता विभाग के सूत्रों का कहना है कि इन दिनों सहकारी समितियों में खाद के लिए सबसे ज्यादा लाइन डिफाल्टर किसानों की लगती है। सरकार ने डिफाल्टर किसानों के लिए भी समिति से नकद में खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

सरकार का दावा
राज्य सरकार का दावा है कि नवंबर के लिए केंद्र ने 7 लाख टन यूरिया, डीएपी 1.94 लाख टन, एनपीके की 0.72 लाख टन का आवंटन किया है। 5 नवम्बर की स्थिति में यूरिया 1.20 लाख टन, डीएपी 0.83 लाख टन, एनपीके 0.34 लाख टन का आवंटन प्रदेश को मिल गया है।

कई जिलो में बन रही खाद संकट की स्थिति
प्रदेश में रबी सीजन के चलते खाद संकट के हालात बन रहे हैं। ग्वालियर, चंबल, सागर, उज्जैन, भोपाल संभाग के कई जिलों में खाद की भारी किल्लत है। वितरण केंद्र पर किसानों की लंबी कतारे हैं। खाद की वितरण की बिगड़ती व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफसरों से कहा कि खाद वितरण की ऐसी व्यवस्था करें कि कहीं भी खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को लाइन न लगाना पड़े। उपलब्धता के बाद यह सुनिश्चित करें कि वितरण की व्यवस्था भी सही रहे। केन्द्र सरकार से निरंतर आवंटन प्राप्त हो रहा है।  मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि खाद की कोई कमी नहीं है। वितरण का असंतुलन नहीं होना चाहिए। यह जानकारी भी किसान तक पहुँचे। खाद वितरण के सुचारू प्रबंध मैदान में दिखना चाहिए। कंट्रोल रूम से निगाह रखते हुए प्रतिदिन की जानकारी सामने लाई जाए। व्यवस्था में दोषी लोगों को जेल भेजने की कार्यवाही हो। प्रदेश में खाद वितरण के 262 अतिरिक्त काउंटर प्रारंभ किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने निर्देश दिए कि गड़बड़ी करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।

Twitter : कंगना रनोट ने Twitter को बताया बेस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म…

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हाल ही में कंगना रनोट  ने सोशल मीडिया पर ट्विटार की तारीफ है। इतना ही नहीं कंगना ने ट्विटर को बेस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी कह दिया। दरअसल, 6 नवंबर को कंगना रनोट  ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने ट्विटर के बारे में अपने विचार रखे। पोस्ट में कंगना ने ट्विटर की नई पॉलिसी की तारीफ की, हालांकि उन्होंने कुछ पॉलिसी को क्रिटिसाइज भी किया।

Twitter की तारीफ
इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए कंगना ने कहा- ट्विटर सबसे अच्छा सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म है। यह बौद्धिक और वैचारिक रूप से प्रेरित है, बजाए फैशन या लाइफ स्टाइल के बारे में। हालांकि, मैं इसका प्रोसेस कभी नहीं समझ पाई, जिसके जरिए केवल कुछ लोग वेरीफाई होते हैं। जैसे बाकी लोगों का कोई वेरीफाई अस्तित्व ही नहीं है। उदाहरण के लिए मैं वेरीफाइड हूं लेकिन मेरे पिता ब्लू टिक चाहते हैं, तो वो 3- 4 जोकर आपकी पहचान को खारिज कर देंगे, जैसे कि वह कोई अवैध जीवन जी रहे हैं। वेरिफिकेशन का क्राइटेरिया आधार कार्ड पर आधारित होना चाहिए, जिनके पास आधार कार्ड है उन्हें आसानी से वैरिफिकेशन मिलना चाहिए।

एलन मस्क का समर्थन
कंगना ने ट्विटर पर ब्लू टिक के लिए पैसे चार्ज करने के फैसले का भी समर्थन किया। अपने पोस्ट में एक्ट्रेस ने लिखा- 'ब्लू टिक के लिए कुछ पैसे चार्ज करने का फैसला अच्छा है, इससे प्लैटफॉर्म को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ट्विटर की तुलना करते हुए कंगना ने कहा- ब्लू टिग के लिए पैसे लेने का फैसला बिल्कुल सही है। अब दुनिया में कोई भी फ्री लॉन्च नहीं होते हैं। अगर ये सारे प्लेटफॉर्म आपको फ्री में सुविधाएं देंगें तो भला पैसे कैसे आएंगे। ऐसे में ब्लू टिक के लिए पैसे लेने का फैसला बिल्कुल सही है।'

बता दें कि साल 2021 में लगातार विवादित बयानों और ट्विटर नियमों के उल्लंघन के चलते कंगना के ट्विटर अकाउंट को बैन कर दिया गया था। हालांकि, अब ट्विटर की जिम्मेदारी एलन मस्क ने संभाल ली है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कंगना के ट्विटर पर बैन हट जाएगा।

अगले 24 घंटों में पहाड़ों पर बर्फबारी, दक्षिण में भारी बारिश का अलर्ट 

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नई दिल्ली । उत्तर भारत में सर्दी ने दस्तक दे दी है। दीपावली के बाद से ही मौसम में बदलाव दिखाई दे रहा है। एक तरफ दक्षिण के राज्यों में लगातार बारिश हो रही है, तो पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है। मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के साथ बारिश हो सकती है। वहीं दक्षिण के राज्यों में अगले दो दिन तक लगातार बारिश की संभावना है। 
मौसम विभाग ने अपने ट्वीट में बताया है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, हिमाचल प्रदेश में अगले दो दिन हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। इससे इलाके में ठंड के बढ़ने की उम्मीद है। उत्तराखंड में भी बर्फबारी की संभावना है। वहीं पंजाब के कुछ इलाकों में बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक एक चक्रवाती सर्कुलेशन केरल तट और उससे सटे दक्षिण-पूर्व अरब सागर पर स्थित है। 
इसके असर के कारण अगले 24 घंटे में तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि एक चक्रवाती सर्कुलेशन केरल तट और उससे सटे दक्षिण-पूर्व अरब सागर पर स्थित है। इसके असर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 8 अक्टूबर तक भारी बारिश होने की संभावना है।

भारत समेत 12 टीमों ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप के लिए सीधे किया क्वालिफाई

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ऑस्ट्रेलिया में टी20 वर्ल्ड कप अपने अंजाम तक पहुंचने जा रहा है। नौ नवंबर से सेमीफाइनल राउंड की शुरुआत होगी। वहीं, 13 नवंबर को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। पिछले एक महीने के अंदर कई शानदार मैच देखने को मिले हैं। जहां कई छोटी टीमों ने बड़े-बड़े धुरंधरों को पटखनी दी।आयरलैंड और स्कॉटलैंड ने जहां दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज की टीम को हराया तो जिम्बाब्वे ने पाकिस्तान और नीदरलैंड के दक्षिण अफ्रीका को हराकर टूर्नामेंट में बड़े उलटफेर किए। ऑस्ट्रेलिया में खेले जा रहे इस विश्व कप को अब तक का बेस्ट वर्ल्ड कप माना जा रहा है।

इसी के साथ 2024 में यूएसए-वेस्टइंडीज में खेले जाने वाले अगले टी20 विश्व कप की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। यूएसए में खेला जाने वाला यह पहला आईसीसी वर्ल्ड कप होगा। इसके लिए अब तक 12 टीमों ने सीधे क्वालिफाई कर लिया है। वेस्टइंडीज और यूएसए मेजबान होने की वजह से पहले ही क्वालिफाई कर चुका है। इसके अलावा टेस्ट खेलने वाले सभी अहम देशों ने क्वालिफाई कर लिया है।रविवार को नीदरलैंड ने दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीम को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इसका उन्हें काफी फायदा हुआ है और टीम 2024 के मेन स्टेज राउंड के लिए सीधे क्वालिफाई कर गई। हालांकि, इसके लिए पाकिस्तान को बांग्लादेश को हराना जरूरी था और वैसा ही हुआ। पाकिस्तान के जीतते ही नीदरलैंड ने अगले टी20 विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर लिया।

2024 टी20 विश्व कप के लिए अब तक डायरेक्ट क्वालिफाई करने वाली टीमें- वेस्टइंडीज, यूएसए, भारत, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान, श्रीलंका, नीदरलैंड, बांग्लादेश।इनके अलावा आठ और टीमों को क्वालिफाई करना है। अगला टी20 विश्व कप 20 टीमों के बीच खेला जाएगा। इस विश्व कप से टी20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 राउंड की वापसी होगी। पहले 20 टीमों को पांच-पांच के चार ग्रुप में बांटा जाएगा। हर ग्रुप की टॉप दो टीमें सुपर-8 राउंड के लिए क्वालिफाई करेंगी। सुपर-8 राउंड में आठ टीमों को चार-चार के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुचेंगी। इसके बाद फाइनल खेला जाएगा।

डिजिटल भुगतान में तेजी…

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नोटबंदी के छह साल और डिजिटल भुगतान में तेजी के बावजूद देश में आम लोगों के पास कुल नकदी 13.18 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई है। भ्रष्टाचार व कालाधन पर रोक लगाने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर,2016 को नोटबंदी की थी।आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 4 नवंबर, 2016 के पखवाड़े में अर्थव्यवस्था में 17.7 लाख करोड़ रुपये की नकदी थी। 21 अक्टूबर, 2022 को यह बढ़कर 30.88 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। यानी छह साल में नकदी 71.84 फीसदी बढ़ गई।आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार,कोरोनाकाल से ही भुगतान के नए व सुविधाजनक डिजिटल विकल्पों की लोकप्रियता बढ़ी है। हाल के वर्षों में मूल्य व संख्या के लिहाज से भले ही डिजिटल भुगतान बढ़ा, लेकिन आर्थिक सुधार के साथ प्रणाली में जीडीपी के अनुपात में नकदी में भी तेजी आई है।रिपोर्ट के अनुसार, जीडीपी के अनुपात में डिजिटल भुगतान का बढ़ना इस बात का संकेत नहीं है कि नकदी घटी है। नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। हालांकि, जीडीपी के अनुपात में डिजिटल भुगतान पारंपरिक रूप से कम है।

इस वर्ष दिवाली वाले सप्ताह में नकदी के चलन में 7,600 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। बीस साल में ऐसा पहली बार हुआ। 2009 में इस दौरान 950 करोड़ की गिरावट हुई थी। तब प्रमुख वजह आर्थिक मंदी थी। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों का दावा है, डिजिटल भुगतान बढ़नेे से ऐसा हुआ।भारतीय अर्थव्यवस्था संरचनात्मक बदलाव से गुजर रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है, तकनीकी नवाचारों ने भारतीय भुगतान प्रणाली को बदल दिया है। अर्थव्यवस्था अब नकदी आधारित नहीं, बल्कि स्मार्टफोन आधारित है।

6 महीने के लिए टली फिल्म ‘Adipurush’ की रिलीज डेट …

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प्रभास की आगामी फिल्म 'आदिपुरुष' की रिलीज 6 महीने के लिए टाल दी गई है। निर्देशक ओम राउत ने बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी है। मेकर्स द्वारा जारी किए गए स्टेटमेंट में लिखा है कि "आदिपुरुष के निर्माण से जुड़े लोगों को थोड़ा अधिक समय देने की आवश्यकता है।" बता दें कि पहले यह फिल्म जनवरी में रिलीज होने वाली था। हालांकि, आधिकारिक बयान के अनुसार अब यह फिल्म 16 जून, 2023 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। 

मेकर्स ने क्या कहा?
आदिपुरुष के मेकर्स द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है, 'आदिपुरुष केवल एक फिल्म नहीं, प्रभु श्री राम के प्रति भक्ति व हमारे गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। दर्शकों के एक अद्भुत अनुभव देने के लिए, आदिपुरुष के निर्माण से जुड़े लोगों को थोड़ा अधिक समय देने की आवश्यकता है। आदिपुरुष अब जून 16, 2023 को प्रदर्शित होगी। हम एक ऐसी फिल्म बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिस पर संपूर्ण भारत को गर्व होगा। इस रामराज में आपका सहयोग, प्रेम और आशीर्वाद हमें सदैव प्रेरित करता रहा है और करता रहेगा।'

गौरतलब है कि 'आदिपुरुष' को बॉलीवुड की अब तक की सबसे महंगी फिल्म बताया जा रहा है। फिल्म का बजट 500 करोड़ है। इसमें प्रभास के साथ कृति सेनन और सनी सिंह भी अहम किरदार में हैं। फिल्म का निर्देशन ओम राउत ने किया है। 

चीन से नहीं आ रहे चिप लगे कार्ड, 25 हजार वाहनों के कार्ड अटके, सरकार अपने अनुबंध में ही उलझी

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  • वाहनों के ट्रांसफर, डुप्लीकेट, रिन्यूअल, फाइनेंस कटवाने या चढ़वाने पर नहीं मिल रहे रजिस्ट्रेशन कार्ड, स्मार्ट चिप कंपनी ने कहा- चीन से नहीं आ रहे कार्ड
  • सरकार ने चिप लगे कार्ड के लिए ही दिया था ठेका, अब चाहकर भी नहीं बदल पा रहे अनुबंध, कार्ड के अभाव में विभाग दे रहा प्रिंट सर्टिफिकेट

भोपाल । राजधानी सहित प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों में पिछले ढाई माह से पुराने वाहनों को ट्रांसफर, डुप्लीकेट, रिन्यूअल, फाइनेंस कटवाने या चढ़वाने पर नया रजिस्ट्रेशन कार्ड नहीं मिल पा रहा है। इससे अकेले इंदौर में 25 हजार से ज्यादा वाहनों के कार्ड  अटके हुए हैं। कार्ड जारी करने वाली स्मार्ट चिप कंपनी का कहना है कि चिप वाले कार्ड चीन से आते हैं, जो लंबे समय से नहीं आ रहे हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि कंपनी से चिप लगे कार्ड जारी करने का ही अनुबंध हुआ था, इसलिए अब इसे बदला नहीं जा सकता। इस खींचतान में पूरे प्रदेश में हजारों वाहन मालिक परेशान हो रहे हैं और रोजाना आरटीओ ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि नया या पुराना वाहन खरीदने, कार्ड  खोने पर डुप्लीकेट, वैधता खत्म होने पर रिन्यूअल करवाने, वाहन से फाइनेंस कटवाने या चढ़वाने पर परिवहन विभाग द्वारा नया रजिस्ट्रेशन कार्ड जारी किया जाता है, लेकिन करीब ढाई महीनों से नए वाहनों को छोड़कर पुराने वाहनों से जुड़े किसी भी काम पर रजिस्ट्रेशन कार्ड नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि कार्ड जारी करने वाली स्मार्ट चिप कंपनी का कहना है कि कार्ड चीन से नहीं आ रहे हैं। वहीं कार्ड कब तक आ पाएंगे इसे लेकर भी कंपनी के अधिकारी कोई ठोस जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, जिसे देखते हुए अधिकारियों को आने वाले समय में भी कार्ड न मिल पाने की आशंका है।

कार्ड के बजाय दे रहे प्रिंट सर्टिफिकेट
इधर वाहन के नए कार्ड के लिए सभी जरूरी औपचारिकता पूरी होने के बाद भी कार्ड न मिल पाने के कारण वाहन मालिक रोजाना चेकिंग के दौरान चालानी कार्रवाई से भी परेशान हैं, जिसके बाद रोजाना सैकड़ों वाहन चालक आरटीओ ऑफिस के चक्कर भी लगा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि लोगों की परेशानी को देखते हुए विभाग द्वारा कार्ड के अभाव में मांग करने पर वाहन मालिकों को एक प्रिंट सर्टिफिकेट दिया जा रहा है, जिसे दिखाकर वे पुलिस कार्रवाई से बच सकते हैं। कार्ड आने पर इन्हें वह भी जारी किए जाएंगे।

नए वाहनों को क्यूआर कोड लगे कार्ड
परिवहन विभाग द्वारा पहले सभी वाहनों को चिप लगे कार्ड ही दिए जाते थे, लेकिन कार्ड की कमी के बीच नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन की पूरी व्यवस्था केंद्र सरकार के वाहन पोर्टल पर शिफ्ट होने पर इनके कार्ड जारी करने का काम नए सिरे से स्मार्ट चिप कंपनी को दिया गया। कार्ड की कमी को देखते हुए शासन ने इस अनुबंध में क्यूआर कोड वाले कार्ड जारी करने की छूट दी। इसके कारण अब नए वाहनों को आसानी से क्यूआर कोड के कार्ड मिल रहे हैं। चिप में जो डेटा सेव होता था वही डेटा अब कोड में सेव किया जा रहा है।

अनुबंध बदलना नहीं है आसान
अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट चिप कंपनी को वाहनों को रजिस्ट्रेशन कार्ड जारी करने का ठेका कई साल पहले दिया गया था। इसमें ही चिप लगे कार्ड की व्यवस्था थी। अब शासन के लिए चिप लगे कार्ड के स्थान पर क्यूआर कार्ड जारी किए जाने का फैसला लेना इस अनुबंध के खिलाफ होगा। अगर ऐसा करना है तो अनुबंध में बदलाव के लिए परिवहन विभाग से लेकर वित्त विभाग और अन्य सभी संबंधित विभागों से मंजूरी लेना होगी, जो जटिल बहुत जटिल प्रक्रिया है। इसलिए कंपनी पर चिप वाले कार्ड ही उपलब्ध करवाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।

EWS आरक्षण : 10% आरक्षण देने पर फैसला आज..

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EWS आरक्षण : सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत करने वाले संविधान में 103वें संशोधन की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा. CJI यूयू ललित की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। जनवरी 2019 में 103वें संविधान संशोधन के तहत EWS कोटा लागू किया गया था। वहीं, चीफ जस्टिस ललित 8 नवंबर को पद से रिटायर होने वाले हैं सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में शुरू की गई ईडब्ल्यूएस आरक्षण नीति के विभिन्न पहलुओं से संबंधित 40 याचिकाओं को सुनवाई के लिए मंजूर किया है

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना शुरू हो गया है। चीफ जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि इस मामले में 4 आदेश पढ़े जाएंगे। सबसे पहले जस्टिस दिनेश महेश्वरी ने फैसला सुनाया है। जस्टिस महेश्वरी ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण सही है। वहीं, जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने भी आरक्षण को मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना है।

याचिकाओं में EWS आरक्षण को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताते हुए रद्द करने की मांग की गई। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा, क्या EWS आरक्षण देने के लिए संविधान में किया गया संशोधन संविधान की मूल भावना के खिलाफ है? एससी/एसटी वर्ग के लोगों को इससे बाहर रखना क्या संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है क्या? राज्य सरकारों को निजी संस्थानों में एडमिशन के लिए EWS कोटा तय करना संविधान के खिलाफ है क्या?

EWS Reservation 1

EWS में संविधान का नहीं हुआ है उल्लंघन: केंद्र
केंद्र सरकार ने कोर्ट में कानून का समर्थन किया। सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि यह कानून गरीबों के लिए आरक्षण का प्रविधान करता है। इस कानून से संविधान के मूल ढांचे को मजबूती मिलेगी। इसे संविधान का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।

संविधान का उल्लंघन बताकर सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी चुनौती
तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK सहित कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे चुनौती दी। याचिकाओं में EWS आरक्षण को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताते हुए रद्द करने की मांग की गई। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के विरोधियों ने कहा है कि आरक्षण का उद्देश्य लोगों को गरीबी से ऊपर उठाना नहीं है, बल्कि उन लोगों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है जिन्हें संरचनात्मक असमानताओं के कारण इससे वंचित किया गया था

27 सितंबर को कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
बेंच ने मामले की साढ़े छह दिन आरक्षण के पक्ष और विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद 27 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि CJI ललित 8 नवंबर यानी मंगलवार को रिटायर हो रहे हैं। रिटायर होने से एक दिन पहले CJI की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले में फैसला सुना सकते हैं। इस पीठ में CJI के अलावा जस्टिस दिनेश माहेश्वरी, एस रवींद्र भट, बेला एम त्रिवेदी और जेबी पार्डीवाला शामिल हैं।

Meta : अब मेटा में बड़े पैमाने पर छंटनी,इस हफ्ते जा सकती है हजारों कर्मियों की नौकरी

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ट्विटर के बाद अब सोशल मीडिया साइट फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा में बड़े पैमाने पर छंटनी की खबर है। एक रिपोर्ट के अनुसार मार्क जुकरबर्ग की कंपनी से इस हफ्ते बड़े पैमाने पर छंटनी होने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मेटा में आगामी बुधवार यानी नौ नवंबर को बड़े पैमाने पर छंटनी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि छंटनी की इस प्रक्रिया के दायरे में कंपनी के हजारों कर्मचारी आएंगे।कहा जा रहा है कि यह छंटनी मेटा (फेसबुक) के इतिहास में पहली बार होगा। बता दें कि सितंबर के आखिर में कंपनी ने कहा था कि मेटा में कुल 87 हजार कर्मचारी काम करते हैं।

फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा के शेयरो में इस वर्ष अब तक 73 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। कंपनी के शेयर वर्ष 2016 के अपने न्यूनतम स्तर से भी नीचे पहुंचकर एसएंडपी 500 इंडेक्स के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले शेयरों की सूची में शामिल हो गए हैं। मेटा के शेयरों की वैल्यू में इस वर्ष करीब 67 अरब डॉलर की कमी आ चुकी है,यह कंपनी के लिए किसी झटके से कम नहीं है।

बता दें कि जुकरबर्ग की कंपनी मेटा इन दिनों कई चुनौतियों से जूझ रही है। इनमें ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ चिंता, टिकटॉक से बढ़ती प्रतियोगिता, एपल की प्राइवेसी नीति में बदलाव, मेटावर्स पर हो रहा विशाल खर्च और रेग्युलेशन से जुड़ी बातें शामिल हैं। कंपनी के तिमाही नतीजों पर भी इन चुनौतियों का असर पड़ा है। अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में भी कमजोर नतीजे आने की आशंका है।

मेटा के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मार्क जुकरबर्ग पहले ही बता चुके हैं कि कंपनी में किए गए निवेश का रिटर्न आने में एक दशक का समय लग सकता है। तब उन्हें हायरिंग रोकने, नए प्रोजेक्ट्स रोकने और लागत कम करने की कोशिशों पर काम करना पड़ेगा।

छंटनी का नया दौर मेटा के लिए कुछ वित्तीय संकटों को कम कर सकता है। मेटा के पास वर्तमान में फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम सहित दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्लेटफॉर्म्स का स्वामित्व है। कंपनी मेटावर्स पर खर्च बढ़ा रही है और घाटे के बावजूद उभरती हुई प्रौद्योगिकी की संभावनाओं के बारे में आशावादी बनी हुई है।

 

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