भोपाल । बारिश बंद होने और रेत खनन से रोक हटने के बावजूद रेत के दामों में अनाप-शनाप बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। रेत का व्यापार करने वालों का कहना है कि बारिश के बाद कई निर्माण कार्य शुरू होते हैं, जिसके लिए रेत की आवश्यकता श्ुारू होती है, लेकिन भाव सीधे डबल हो जाने के कारण कई काम रुक गए हैं, वहीं आम आदमी भी अपने घर का सपना पूरा नहीं कर पा रहा है।
एनजीटी बारिश में रेत उत्खनन पर रोक लगाता है और बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद रेत की आवक शुरू हो जाती है। इस बार अच्छी बारिश होने के कारण भी नर्मदा नदी में रेत की अच्छी आवक हुई है, लेकिन रेत निकालने वाले ठेकेदारों ने इसके दाम में बढ़ोत्तरी कर दी है। रेत व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश शर्मा और सचिव मनीष अजमेरा ने बताया कि सीहोर जिले में नर्मदा नदी से आने वाली रेत का 21 हजार रुपए में आने वाला ट्रक 40 हजार रुपए तक आ रहा है। इसमें रायल्टी और रेत भराई तक शामिल है। एक तरह से ठेकेदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं, क्योंकि रेत के दामों पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। वहीं देवास जिले से जो रेत आ रही है वहां 19 हजार रुपए के दाम हैं, लेकिन यहां भी सीधे डबल 41 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं। हरदा जिले से आने वाली रेत के 19 हजार के बदले 37 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। एक तरह से ठेकेदार अधिकारियों की मिलीभगत से मनमानी कर रहे हैं। हालांकि रायल्टी की रसीद कम रुपए की ही दी जा रही है। व्यापारी एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि रेत के भाव डबल होने से कई निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। वहीं छोटे-छोटे मकान बनाने वाले लोग भी महंगी रेत नहीं खरीद पा रहे हैं। इस मामले में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर रेत के दाम निर्धारित करने की मांग व्यापारियों ने की है।
रुक गए कई निर्माण कार्य… 20 हजार रुपए डम्पर तक की बढ़ोतरी
परिवार रहेगा खुशहाल जब खुलेंगे समृद्धि के द्वार
घर का मुख्य द्वार घर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक होता है। यह वह भाग है जहां से बाहरी लोग आपके घर में प्रवेश करते हैं और आप घर से बाहर निकलते हैं। मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को ही लक्ष्मी आगमन का मार्ग बताया जाता है। ऐसे में घर के द्वार से जुड़े वास्तु पर ध्यान दिया जाए तो घर में खुशहाली और समृद्धि के द्वार खुल सकते हैं।
Main gate direction as per vastu: मुख्य द्वार की दिशा की बात करें को वास्तु शास्त्र के अनुसार दरवाजा उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व या पश्चिम दिशा में होना शुभ माना जाता है।
What should be the gate size of main: मुख्य द्वार बनवाते समय इस बात का खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है कि यह दरवाजा घर के बाकी दरवाजों से बड़ा होना चाहिए, साथ ही यह घड़ी की दिशा में खुलना चाहिए।
Vastu for Main entrance: घर में समृद्धि के आगमन के लिए घर के मुख्य द्वार पर गणपति बप्पा की प्रतिमा रखना शुभ मानते हैं। इससे घर में शुभ-लाभ आता है और वह खुशहाली का केंद्र बन जाता है।
Main Door Vastu Shastra: मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के पद चिन्ह भी छापे भी जा सकते हैं या फिर सुंदर कागज पर उकेरे गए पदचिन्ह दरवाजे पर टांगे जा सकते हैं। स्वास्तिक का चिन्ह भी वास्तु दोष दूर करने में सहायक है।
Colour for main gate according to vastu: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार का रंग दिशा के अनुसार होना चाहिए जैसे
पश्चिम के मुख्य द्वार पर नीला और सफेद रंग करवाना चाहिए।
दक्षिण और दक्षिण-पूर्व के मुख्य द्वार पर चांदी, नारंगी और गुलाबी रंग करवाना चाहिए।
दक्षिण-पश्चिम मुख्य द्वार पर पीला रंग करवाना चाहिए।
उत्तर के मुख्य द्वार पर हरा रंग करवाना चाहिए।
उत्तर-पूर्व के मुख्य द्वार पर क्रीम और पीला रंग करवाना चाहिए।
उत्तर-पश्चिम के मुख्य द्वार पर सफेद और क्रीम रंग करवाना चाहिए।
पूर्व के मुख्य द्वार पर सफेद, लकड़ी के रंग या हल्का नीला रंग करवाना चाहिए।
देव दीपावली : चंद्र ग्रहण के कारण बदली तारीख, जानें कब मनाएंगे ये पर्व?
देव दीपावली (Dev Deepawali 2022): काशी भगवान शिव का नगर, यहां हर त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। कार्तिक मास की पूर्णिमा पर यहां मनाया जाने वाला देव दीपावली उत्सव बहुत ही प्रसिद्ध है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 8 अक्टूर, मंगलवार को है। वैसे तो देव दीपावली पर्व पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन काशी में इसकी रौनक देखते ही बनती है। इस बार देव दीपावली पर्व को लेकर लोगों के मन में काफी संशय है, इसका कारण है तिथियों की घट-बढ़ और कार्तिक पूर्णिमा पर होने वाला चंद्र ग्रहण।
चंद्र ग्रहण के कारण 7 नवंबर को मनाई जाएगी देव दीपावली
श्रीकाशी विद्वत परिषद के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा 7 नवंबर, सोमवार की दोपहर 3:58 से 8 नवंबर, मंगलवार की दोपहर 3:53 बजे तक रहेगी। 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan November 2022) का संयोग भी बन रहा है, जिसके चलते इस दिन कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जा सकेगा। निर्णय सिंधु व अन्य ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, 8 नवंबर को चंद्र ग्रहण के चलते कोई भी पर्व मनाया संभव नहीं है, इसलिए 7 नवंबर की शाम को पूर्णिमा तिथि के संयोग में ये पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत रहेग।
काशी में ही देव दीपावली का महत्व क्यों?
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रिपुरासुर नाम का एक महापराक्रमी राक्षस था। उसने देवताओं पर बहुत अत्याचार किए। अंत में सभी देवता शिवजी के पास गए। शिवजी ने उस राक्षस का वध किया और त्रिपुरारी कहलाए। इस दिन कार्तिक पूर्णिमा थी। त्रिपुरासुर के माने जाने से सभी देवी देवता प्रसन्न होकर काशी आए और दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसीलिए कार्तिक पूर्णिमा पर काशी में देव दीपावली उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है।

चंद्रग्रहण के बाद करें स्नान
8 नवंबर, मंगलवार को चंद्र ग्रहण शाम 6.20 पर समाप्त हो जाएगा। इसके बाद स्नान और दीपदान किया जा सकता है। लेकिन देव दीपावली से संबंधित पूजा 7 नवंबर, सोमवार को ही करें। काशी के विद्ववानों द्वारा लिया गया है ये निर्णय पूरे देश के धार्मिक स्थानों पर भी लागू होगा, जहां देव दीपावली का पर्व मनाया जाता है।
स्वार्थ पर टिके रिश्तों की उम्र बड़ी छोटी होती है, पढ़ें इससे जुड़ी अनमोल सीख
आज कल की भाग दौड़ की जिंदगी में कई लोग मिलते जुलते रहते है। उस भीड़ में से कोई एक – दो ही इंसान होता है जो सच्चा मित्र बनता है। नहीं तो आज कल के समय में आधे से ज्यादा रिश्ते सिर्फ मतलब के रह गए है। आज के समय में लोग ऐसे है की अगर उनका आपसे काम होगा तो वो आपके साथ रहेंगे और जब उनका काम निकल जायेगा तो वो आपको पलट के देखेंगे भी नहीं।
ऐसे स्वार्थी और मतलबी लोग आज के समय में आपको हर मोड़ पर मिलेंगे। अगर कहा जाए तो किसी भी व्यक्ति के पास इंसानियत जिंदा रही नहीं गया है। जिस पल हमारे भीतर लोभ, स्वार्थ खत्म होता है, उसी पल हमारे भीतर ज्ञान की किरण प्रवेश करती है।
यदि आपके रिश्तों की सिलाई भावनाओं के धागे से हुई है तो उसका टूटना मुश्किल है। लेकिन ऐसे भावना किसी के पास रह ही नहीं गया है। स्वार्थ पर रिश्ता टिके होने की वजह से रिश्तों की उम्र बहुत छोटी होने लगी है। आइए जानते है की इन बातों से हमारे रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
लोगों में स्वार्थता की वजह से उनके रिश्ते खराब होते जा रहे है। अगर व्यक्ति के अंदर स्वार्थ की भावना खत्म हो जाए तो समझ ले की वही इंसानियत की शुरुआत हो गई है।
ये आम बात हो गया है की लोग अपने फायदे के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाने में जरा सा देर नहीं करते है। जैसे उनका फायदा होगा वैसे वो अपना काम कर लेंगे। और यही बीज उनके दुःख का कारण बन जाता है।
हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, क्योंकि बगैर स्वार्थ के तो लोग ईश्वर की साधना-आराधना भी नहीं करते है। लेकिन ये भी जरूरी नहीं है की हर मित्रता स्वार्थी ही हो।
जीवन में हमारे लिए कोई निःस्वार्थ की भावना रखता है तो वो हमारे माता – पिता और सच्चे मित्र नहीं तो बाकी सब स्वार्थी रिश्ता हो गया है।
इंसान अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए न जानें क्या-क्या करता है। स्वार्थ के चक्कर में ही कितनो को चोट भी पहुंचा देता है। लेकिन अंत में वो जब मारता है तो उसके साथ कुछ भी नहीं जाता है। तो इंसान को अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए इंसानियत नहीं छोड़नी चाहिए।
देवउठनी एकादशी पर राशि अनुसार करें यह उपाय, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि
04 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। हिंदू धर्म में सभी एकादशी में इसका विशेष महत्व होता है। इस एकादशी पर भगवान चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि का संचालन दोबारा से करते हैं।
देवउठनी एकादशी के बाद पिछले चार महीने से बंद शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार इस हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव उठनी,देवउठनी ग्यारस या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। भगवान विष्णु और भगवान कृष्ण को तुलसी अतिप्रिय होती है। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह तुलसी के साथ कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि निद्रा से जागने के बाद भगवान विष्णु सबसे पहले तुलसी की पुकार सुनते हैं इस कारण लोग इस दिन तुलसी का भी पूजन करते हैं। इस विशेष एकादशी पर अगर राशि अनुसार कुछ विशेष उपाय किए जाए तो भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
देवउठनी एकादशी पर राशि अनुसार करें यह उपाय
मेष राशि- इस राशि के लोगों को अगर जीवन में सुख-समृद्धि और शांति चाहिए तो देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को गुड़ का भोग लगाएं। इसी के साथ धन प्राप्ति और कर्ज से मुक्ति पाने के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें
वृषभ राशि- देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा करें और भगवान विष्णु को पंचामृत और पंचीरी का भोग लगाएं। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।
मिथुन राशि- इस राशि के जातक देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा और उपासना करते हुए उन्हें तुलसी दल अर्पित करें। इस उपाय से आपके जीवन में वैवाहिक सुख की प्राप्ति होगी।
कर्क राशि – कर्क राशि के जातक तुलसी जी का पूजन करते हुए उनके सामने घी का दिया जलाएं और प्रसाद अर्पित करें। इसी के साथ कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
सिंह राशि- इस राशि के जातकों को अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए दक्षिणावर्ती शंख में दूध और गंगाजल डालकर भगवान विष्णु की अभिषेक करें।
कन्या राशि- अगर आपके जीवन में नौकरी या व्यापार से जुड़ी हुई कोई समस्या चल रही है तो देवउठनी एकादशी पर गाय को हरा चारा और गुड़ खिलाएं।
तुला राशि- इस राशि के लोग देव प्रबोधिनी एकादशी पर पूजा के दौरान भगवान विष्णु का पीले रंग की मिठाई, पीले रंग का वस्त्र और पीले फूल अर्पित करें। इससे उपाय से तनाव से मुक्ति मिलेगी।
वृश्चिक राशि- आपको जीवन में उन्नति और सफलता पाने के लिए देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान विष्णु चालीसा और लक्ष्मी आरती करें।
धनु राशि- इस राशि के जातकों इस तिथि पर ब्राह्राणों को भोजन और दान करना चाहिए। इससे आर्थिक नुकसान कम होते हैं और धन लाभ मिलता है।
मकर राशि- मकर राशि के लोग देवउठनी एकादशी पर व्रत रखते हुए भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें केला और हल्दी अर्पित करें।
कुंभ राशि- इस राशि के लोग देवउठनी का व्रत रखें और शाम के समय तुलसी की पूजा करके लाल चुनरी चढ़ाएं। इस उपाय से व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
मीन राशि- इस राशि के लोग देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु को गंगाजल से जलाभिषेक करें।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (03 नवंबर 2022)
- मेष राशि :- राजकीय सम्मान तथा उच्च पद की प्राप्ति संभव है। स्त्री संतान सुख बना ही रहेगा।
- वृष राशि – धन, स्वास्थ्य, मित्र सहयोगियों से प्रेम तथा सहयोग अवश्य ही बढ़ेगा, समय का ध्यान दें।
- मिथुन राशि – आप पर विचार भाग्योन्नति होगी, मानसिक तथा आशानुकूल सुख साधनों की वृद्धि होगी।
- कर्क राशि – जमीन जायजाद का लाभ मिलेगा, स्वास्थ्य कष्ट संभव है, दुव्यसनों से अवश्य बचें।
- सिंह राशि – दाम्पत्य जीवन में उल्लास, पुत्र भाग्योदय होगा तथा मौसमी प्रकोप का कष्ट होगा।
- कन्या राशि आकस्मिक अड़चनें आयेंगी, पड़ोसियों से कष्ट विवाद होगा तथा आप में कमी आएगी।
- तुला राशि – भाग्योन्नति, व्यावसायिक जीवन में उन्नति के लिए समय अवसर अच्छा है।
- वृश्चिक राशि – कार्य सिद्ध, स्त्री पुरुष आदि में कमी, मन अशांत रहेगा, जीवन सुखी रहेगा, कार्य बनेंगे।
- धनु राशि – सांसारिक सुखों की प्राप्ति, मित्र मिलाप, आमोद प्रमोद व्यापार में सफलता मिलेगी।
- मकर राशि – शैक्षणिक प्रगति में बाधा होवे, अनावश्यक व्यय से बचे, क्रोध अवश्य बढ़ेगा।
- कुंभ राशि – चतुराई व वाकपटुता में वृद्धि, बौद्धिक विकास तथा अधिकांश प्रयत्नों में विजय होगी।
- मीन राशि – विभिन्न रोगों से शरीर पीड़ित रहेगा, पराक्रम, वृद्धि होगी। मनोबल में वृद्धि होगी।
नई शिक्षा नीति गुरुकुल पद्धति से प्रेरित एक गेम चेंजर : उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव
भोपाल : उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति एक गेम चेंजर के रूप में, पश्चिमी शिक्षा पद्धति को छोड़ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की पहल है। उन्होंने कहा कि एनईपी गुरूकुल पद्धति से प्रेरित है और आउटकम बेस्ड मल्टी-डिस्प्लेनरी अप्रोच की बात करती है। डॉ. यादव बुधवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के दीक्षारम्भ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव प्रवेशिक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का स्वरूप वर्तमान परिस्थिति में बदल गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा और शोध की गुणवत्ता और कौशल पर जोर देती है, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक विरासत को शिक्षा का अधिकार बनाती है और ऐसी शिक्षा की बात करती है, जिसमें विद्यार्थी का चहुँमुखी विकास हो। उन्होंने कहा कि नए विद्यार्थियों का दीक्षारम्भ जहाँ शिक्षा सीखने के अधिकार की बात करता है, वहीं दीक्षा भारत की पुरानी परंपरा के अनुसार सीखने के अधिकार के साथ दायित्व और कर्त्तव्यों की बात भी करती है।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस के जैन ने कहा कि दीक्षारम्भ करने वाले विद्यार्थी विश्वविद्यालय का अभिन्न अंग बन कर नए कीर्तिमान स्थापित करने में सफल होंगे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ये संकल्प लें कि जितने वर्ष हम विश्वविद्यालय में इन्वेस्ट कर रहे हैं तो आउटपुट भी बेहतरीन ही होगा।
यूआईटी के निर्देशक प्रोफेसर नीरज गौर ने विश्वविद्यालय में संचालित पाठयक्रमों और विश्वविद्यालय में चल रहे इंक्यूबेशन सेंटर की जानकारी दी।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने “चार कदम तकनीकी की ओर’’ पत्रिका का विमोचन किया। श्री यादव ने 8 विद्यार्थियों को ऑफर लेटर भी प्रदान किये।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के लिये पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने कुक्षी में ऊजीकृत किया ट्रांसफार्मर
भोपाल : ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिहं तोमर ने जानकारी दी है किकुक्षी (धार) में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एन.वी.डी.ए. (नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण) मनावर के लिये 160 एम.व्ही.ए. का एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर प्राथमिकता से ऊर्जीकृत किया है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण मनावर संभागीय कार्यालय क्रं. 30 ने कुक्षी 220 के.व्ही. सबस्टेशन में चन्दनखेड़ी पपिंग स्टेशन के लिये 132 के.व्ही. के फीडर की माँग की थी। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने सक्रियता से कार्य करते हुये 220 के.व्ही. सबस्टेशन कुक्षी में यह ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया।
ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से एन.वी.डी.ए. की परियोजना कुक्षी, दही तथा अलीराजपुर माइक्रोलिफ्ट इरीगेशन सिस्टम के लिये विद्युत आपूर्ति का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इन्हें एन.वी.डी.ए. के चन्दनखेडी पपिंग स्टेशन सहित विभिन्न सब स्टेशनों से जुडे़ पंप हाउसों (पपिंग स्टेशनों) को विद्युत आपूर्ति की जायेगी।
बड़े लोगों की बजाए अब बेटियों के नाम पर होंगी प्रदेश की सड़कें – मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बड़े लोगों के नाम पर सड़क का नाम रखने की परंपरा पुरानी है। देश दुनिया में आज पहली बार बेटियों के नाम पर किसी मार्ग का नामकरण किया जा रहा है। भोपाल में भारत माता चौराहे से पॉलिटेक्निक चौराहे तक का मार्ग जो अभी स्मार्ट सिटी सड़क से जाना जाता है, अब "लाड़ली लक्ष्मी पथ" के रूप में जाना जाएगा। मुख्यमंत्री चौहान भारत माता चौराहे पर "लाड़ली लक्ष्मी पथ" लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बेटियों के सम्मान से बड़ा कोई दूसरा सम्मान नहीं है। हमने तय किया है कि प्रदेश के सभी 52 जिलों में "लाड़ली लक्ष्मी पथ" विकसित किए जाएंगे। इन पथ के दोनों ओर बालिकाओं और महिलाओं के कल्याण एवं उन्नति के लिए संचालित योजनाओं, महिला सशक्तिकरण से संबंधित जानकारियाँ प्रदर्शित की जाएंगी। इससे माँ-बहन, बेटियाँ और समाज जागरूक होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्वयन मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काम रहा है। बेटियाँ सक्षम हों, प्रसन्न रहें और अपने जीवन में उपलब्धियाँ अर्जित करें, यही मेरी कामना है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम में शामिल लाड़ली लक्ष्मियों का पुष्प-वर्षा कर अभिवादन किया और उन्हें आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री चौहान के साथ लाड़ली लक्ष्मियों ने सेल्फी भी ली। शहडोल से आई लाड़ली लक्ष्मी अवनि वास्तव ने बताया कि योजना से मिली राशि से उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिली है। अवनि वर्तमान में बीसीए का कोर्स कर रही हैं। अवनि ने लाड़ली लक्ष्मियों के पोषण, शिक्षण और केरियर का ध्यान रखने के लिए मुख्यमंत्री चौहान का आभार माना।
लाड़ली लक्ष्मियों के आगे बढ़ने और सफलता अर्जित करने में ही मेरे जीवन की सार्थकता – मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बेटियाँ प्रसन्न-सुखी रहें, प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर हों और जीवन में सफलता अर्जित करें, यही मेरी कामना और मेरे जीवन की सार्थकता है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जिन बेटियों को गोदी में लेकर लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रमाण-पत्र भेंट किए थे, वे आज कॉलेज जा रही हैं। बेटियाँ इसी प्रकार अपने जीवन में आगे बढ़ें, प्रगति करें मेरी यही कामना है। मुख्यमंत्री चौहान लाड़ली लक्ष्मी वाटिका में पौधे लगाने के बाद लाड़ली लक्ष्मियों को संबोधित कर रहे थे। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की श्रंखला में दूसरा दिन लाड़ली लक्ष्मियों के लिए समर्पित रहा। मुख्यमंत्री चौहान ने भोपाल में तात्या टोपे नगर स्टेडियम के पीछे विकसित लाड़ली लक्ष्मी वाटिका में लाड़ली बेटियों के साथ पौधे रोपे। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिलों में लाड़ली लक्ष्मी वाटिकाएँ विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हमारी सरकार ने हर जिले में “एक पार्क लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के नाम” विकसित करने का निर्णय लिया है। पेड़ लगाना जीवन रोपने के समान है, बेटियों द्वारा लगाए गए पौधे समय के साथ बड़े होंगे और जीव-जगत को विभिन्न स्वरूप में अपना योगदान देंगे। मनुष्य का जीवन भी पेड़ जैसा उपयोगी होना चाहिए। हम प्रदेश और देश की प्रगति और लोगों के जीवन में आशा और प्रसन्नता लाने के लिए कार्य करें, तभी हमारे जीवन की सार्थकता है। मुख्यमंत्री चौहान ने लाड़ली लक्ष्मियों के माता-पिता से कहा कि बेटियों के लालन-पालन और उनके आगे बढ़ने के मार्ग में हर कदम पर राज्य सरकार उनके साथ है।
मुख्यमंत्री चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान स्थित लाड़ली लक्ष्मी वाटिका में लाड़ली लक्ष्मी बालिकाओं के साथ हाइब्रिड प्रजाति के आम के पौधे लगाए। वाटिका में 151 पौधे लगाए गए। पौध-रोपण में कॉलेज में प्रवेश कर चुकी लाड़ली लक्ष्मियों ने भाग लिया। लाड़ली लक्ष्मी कुमारी साक्षी दुबे ने अपने अनुभव साझा किये। खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा, विधायक एवं पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा, विधायक कृष्णा गौर, भोपाल महापौर मालती राय भी शामिल हुई।















