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5 वीं 8 वीं बोर्ड पैटर्न से अभिभावकों को खरीदनी होंगी 40 करोड़ की किताबें

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भोपाल । राज्य सरकार ने निजी स्कूलों में भी पांचवीं और आठवीं की परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर करने का आदेश दे दिया है। इसका असर निजी स्कूलों में पढऩे वाले प्रदेश के 10 लाख बच्चों पर हुआ है और स्कूल संचालक उनसे बोर्ड आधारित किताबों का कोर्स मंगवा रहे हैं। उन्हें दोबारा कोर्स खरीदना पड़ रहा है। पांचवीं का कोर्स खरीदने पर 244 रुपए और आठवीं का कोर्स खरीदने पर 542 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहे हैं। इससे अभिभावकों पर करीब 40 करोड़ रुपए से ज्यादा का बोझ बढ़ गया है।
नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल से शुरू हुआ था। सरकारी स्कूलों के बच्चों को तो सरकार ने किताबें मुहैया करा दी। निजी स्कूलों के बच्चों को खुद किताबें खरीदना पड़ी। निजी स्कूलों ने अपने हिसाब से जो किताबें मंगाई वो अभिभावकों ने बच्चों को दिलवा दी और अप्रैल में पढ़ाई शुरू हो गई। इसके बाद सितंबर में सरकार ने आदेश जारी कर पांचवीं एवं आठवीं की परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर कर दी। इससे स्कूल संचालक बच्चों से बोर्ड द्वारा निर्धारित एनसीईआरटी की पुस्तकें मंगा रहे हैं। निजी स्कूलों में पांचवीं में 5 लाख 33 हजार 294 बच्चे दर्ज हैं। आठवीं में 5 लाख 46 बच्चे दर्ज हैं।

आदिवासियों का भरोसा जीतने भाजपा की नई रणनीति

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भोपाल । प्रदेश की 22 फीसदी आबादी यानी आदिवासियों को साधने के लिए भाजपा कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का पूरा फोकस आदिवासियों पर है। भाजपा अब सोशल मीडिया से जुड़े आदिवासियों को पार्टी से जोडऩा चाहती है। इसके लिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने निर्देश दिए हैं। शर्मा ने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनजातीय वर्ग के शिक्षित और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले युवाओं को पार्टी से जोड़ें। साथ ही आदिवासी बहुल गांवों में सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए भी टीम तैयार की जाए।
उधर, झाबुआ में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आदिवासी अंचलों में पार्टी की जीत को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, बीजेपी एसटी मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष कल सिंह भाबर भी मौजूद रहे।
47 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित
साल 2018 के चुनाव में आदिवासी क्षेत्रों की सीटें हारने की वजह से भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी। प्रदेश में करीब 47 विधानसभाएं आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। प्रदेश की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजाति की संख्या 21.1 प्रतिशत है। 2018 में कांग्रेस ने इनमें से 30 सीटें जीती थीं। भाजपा की संख्या घटकर 16 हो गई थी, जबकि 2013 के चुनाव में भाजपा के पास 31 सीटें थीं। यही कारण है कि सत्ता और संगठन ने आदिवासी वर्ग के बीच पैठ बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां शुरू की हैं। छिंदवाड़ा, झाबुआ, डिंडोरी में सभी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। इसके अलावा मंडला, बालाघाट, बैतूल, खरगोन, बड़वानी, धार, अनूपपुर में आधी से ज्यादा विधानसभाओं में कांग्रेस के विधायक हैं। इन जिलों को लेकर बीजेपी विशेष रणनीति बना रही है। एसटी मोर्चे की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आदिवासी वर्ग की उपजातियों के मुख्य लोगों को बीजेपी से जोडऩे को लेकर भी चर्चा हुई है। बीजेपी को प्रदेश के आदिवासी बहुल 16 जिलों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इन जिलों की एसटी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों को लेकर विशेष रणनीति बन रही है।
 सोशल मीडिया पर सक्रियता बड़ी चुनौती
झाबुआ में चल रही बैठक में इस बात पर मंथन हुआ है कि आदिवासी वर्ग के युवाओं की सक्रियता सोशल मीडिया पर बढ़ी है। जयस के साथ जुड़ रहे नौजवानों को लेकर भी चिंता जताई गई है। आदिवासी जिलों में लगातार हो रहे बड़े आंदोलनों के कारण बढ़ रहे असंतोष पर भी मंथन हुआ है। बैठक में तय हुआ है कि पढ़े-लिखे शिक्षित युवाओं को केन्द्र और राज्य सरकार की रोजगार और स्वरोजगार वाली योजनाओं से लाभान्वित कराने के लिए पार्टी स्तर पर एसटी मोर्चा अभियान चलाएगा। इन्हीं शिक्षित युवाओं को भाजपा सरकार की योजनाओं के प्रति आदिवासी वर्ग में जागरुकता बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई है।

अब बसपा और सपा भी आई चुनावी मोड में

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भोपाल  । मप्र में भाजपा और कांग्रेस के बाद अब बसपा और सपा भी चुनावी मोड में आ गई हैं। प्रदेश में लगातार कम हो रहे जनाधार को थामने की कोशिश में लगी बसपा अब संगठन को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। पार्टी का सदस्यता अभियान एक नवंबर से शुरू होगा और दिसंबर अंत तक चलेगा। रणनीति यह है कि पार्टी पदाधिकारी मतदान केंद्र स्तर पर जनसंपर्क करेंगे और लोगों को पार्टी की रीति-नीति से अवगत कराकर सदस्य बनाएंगे। इस दौरान निष्क्रिय पदाधिकारियों को चिन्हित भी किया जाएगा, ताकि उन्हें पदमुक्त कर सक्रिय सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी जा सके। वहीं सपा भी नवंबर में जिला, संभाग और राज्य स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलन करेगी। पार्टी की तैयारी चुनाव घोषणा के तीन माह पूर्व कम से कम 50 सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने की है।
प्रदेश में बसपा का ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में जनाधार है। 2003 में पार्टी को 7.26, 2008 में 8.72 और 2013 के विधानसभा चुनाव में 6.29 प्रतिशत मत मिले थे। 2018 के चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा और 5.1 प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए। भिंड और पथरिया विधानसभा क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशियों को विजय मिली। हालांकि, भिंड से विधायक संजीव कुशवाह भाजपा में शामिल हो गए हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रमाकांत पिप्पल का कहना है कि भले ही हमारे दो प्रत्याशी चुनाव जीते थे पर कई क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवार दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। आगामी चुनाव में पार्टी निर्णायक भूमिका में रहेगी। इसके लिए संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। नवंबर और दिसंबर में सदस्यता अभियान चलेगा। इसमें मतदान केंद्र तक पदाधिकारी जाएंगे और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान उन पदाधिकारियों की जानकारी भी ली जाएगी जो निष्क्रिय हैं। इन्हें हटाकर सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे लाया जाएगा। पार्टी संगठन तैयार करने के बाद प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया प्रारंभ करेगी।
उधर, सपा ने भी चुनाव की तैयारी प्रारंभ कर दी है। प्रदेश में पार्टी का बड़ा जनाधार तो नहीं है पर उत्तर प्रदेश से लगे क्षेत्रों में इसके प्रत्याशी खेल बिगाडऩे का काम करते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बिजावर क्षेत्र से पार्टी के राजेश कुमार शुक्ला जीते थे लेकिन राष्ट्रपति चुनाव के समय वे भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि, विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार अभी वे सपा के ही सदस्य हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामायण सिंह पटेल का कहना है कि उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी अच्छी स्थिति में है। हम उन क्षेत्रों को चिल्हित कर रहे हैं, जहां चुनाव से तीन माह पूर्व प्रत्याशी घोषित किए जा सकते हैं। हमारी तैयारी पचास सीटों पर पहले प्रत्याशी घोषित करनी है। इसके साथ ही जिला और संभाग स्तर पर सम्मेलन किए जाएंगे। नवंबर में ही राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन किया जाएगा।

अगले सप्ताह से बजने लगेगी शहनाई

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भोपाल । दीपावली के बाद अब शादियों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में सहालग की तैयारी व्यापारियों द्वारा की जा रही है। अगले सप्ताह, यानी 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी से शादियां शुरू हो जाएंगी। चूंकि नवंबर एवं दिसंबर माह में शादियों के करीब 9 एवं खरीदारी व अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभकारी माने जाने वाले 23 सर्वार्थ सिद्धी योग पड़ रहे हैं।
देवउठनी एकादशी के बाद कम तिथियों में अधिक शादियां होने के चलते मैरिज गार्डन, होटल एवं बैंकट हॉल की तेजी से बुकिंग होना शुरू हो गई है। लोग पूरी छमता के साथ बैंड-बाजों की बुकिंग कर रहे हैं, अधिक लोगों के लिए खाना बनवाने के ऑर्डर दे रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सराफा एवं ऑटोमोबाइल सेक्टर भी अब सहालग के कारण विशेष तैयारी कर रहा है।
हर सेक्टर में बढ़ेगा शादियों के कारण व्यापार
चूंकि इस साल बिना रोकटोक के शादियां होंगी, कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करना है। इस कारण शहर के मैरिज गार्डन, होटल की बुकिंग तेज हो गई है। वहीं लोग पूरी क्षमता के साथ बैंड बुक करा रहे हैं। करीब 20 हजार से 40 हजार रुपए में औसतन बैंड की बुकिंग होती है। जिसमें घोड़ा समेत 12 से 20 सदस्यीय बैंड-बाजे-तोरई आदि उपलब्ध कराते हैं। सराफा मेंशादियों के ऑर्डर आना शुरू हो चुका है। इस साल बीते दो साल के मुकाबले व्यापार अच्छा रहने का अनुमान है। इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों में लोग सामान की बुकिंग कराकर ऑफर का फायदा उठा रहे हैं। शादियों के लिए ऑटोमोबाइल के शो रूम में बुकिंग तेज हो गई है। शादी की तारीख तक आसानी से कार उपलब्ध हो जाए, वेटिंग का झंझट न रहे, इसलिए लोग किसी प्रकार का जोखिम नहीं ले रहे।
मांगलिक कार्यों के मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि 4 नवंबर को देवउठनी एकादशी के बाद बहुत कम मुहूर्त हैं। नवंबर में 21, 24, 25, 27 तारीख को बहुत अधिक शादियां होंगी। वहीं दिसंबर में 2, 7, 8, 9, 14 तारीख को शुभ विवाह मुहूर्त है। वहीं जनवरी 2023 में 15, 18, 25, 26, 27, 30, 31, फरवरी में 6, 7, 9, 10, 12, 13, 14, 22, 23 एवं 28 को सबसे अधिक शादियां होंगी। मार्च में 6, 9, 11, 13 तारीख तक शादियों के मुहूर्त हैं।
नवंबर में 11 एवं दिसंबर में 13 सर्वार्थसिद्धि योग बन रहे है।

दीपक की रोशनी भी कर सकती है सूर्य के प्रकाश जैसा काम

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चीन के सम्राट हुआन शी को पढ़ने का शौक था। उनका पुस्तकालय और सोने का कमरा दुनियाभर की किताबों से भरा रहता था। वह अपना अधिकतर समय पढ़ने में ही लगाते थे।
एक दिन सम्राट ने अपने मंत्री शान ची से कहा, ''मैं अब सत्तर वर्ष का हो चला हूं। मगर पढऩे की लालसा मन से जाती नहीं है। पर लगता है कि अब इस उम्र में पुस्तकों को अधिक समय नहीं दे पाऊंगा।''

मंत्री ने जवाब दिया, ''राजन, आप इस देश के सूर्य हैं। आपके ज्ञान के प्रकाश से ही देश का शासन सफलतापूर्वक चलता रहा है। अगर आप सूर्य नहं बने रहना चाहते तो कृपया दीपक बन जाइए।''

सम्राट को लगा कि मंत्री ने सूर्य से दीपक बनने को कहकर उन्हें उनके स्तर से गिराया है। उन्होंने नाराजगी भरे स्वर में कहा, ''शान ची, मैं गंभीर होकर यह बात कह रहा हूं और तुम इसे मजाक में ले रहे हो। मैं तो तुमसे मार्गदर्शन की अपेक्षा कर रहा था।''

शान ची ने हाथ जोड़ कर कहा, ''आपने मेरी बात ठीक से समझी नहीं शायद। कोई किशोर या युवा जब अध्ययन कर रहा होता है तो उसका भविष्य सूर्य के समान होता है, जिसमें अपार संभावनाएं छिपी होती हैं।प्रौढ़ावस्था में यही सूर्य दीपक के समान हो जाता है। दीपक में सूर्य जितना प्रकाश तो नहीं होता, फिर भी उसका उजाला अंधेरे में रोशनी दिखाकर भटकने से बचाता है। इसी प्रकार आप भी पढ़ने की अपनी रुचि का पूर्ण त्याग न करके इसमें मन लगाए रखें।''सम्राट को बात समझ में आ गई।
 

कार्तिक माह में तुलसी का रोपण, दान और पूजन से जीवन के कष्ट हो जाते हैं दूर

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हिंदू ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह में तुलसी पूजन से कई तरह के सकारात्मक बदलाव आते हैं, जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। भगवान नारायण की प्रिय तुलसी को देवी लक्ष्मी का ही रूप माना गया है इसलिए इसे घर में लगाना बेहद शुभ माना गया है।
कहा जाता है जहां पर तुलसी का पौधा होता है और उसकी पूजा-सेवा की जाती है, उस घर में लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है। शास्त्रों में माना गया है की रविवार, एकादशी और सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए, इसके साथ ही इस दिन तुलसी के पत्तों को भी नहीं तोड़ना चाहिए।

तुलसीदल के बिना नहीं लगता है भोग
भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा तुलसी दल के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। वहीं हनुमान जी को भी भोग में तुलसी दल बहुत ही प्रिय होती है। पद्मपुराण के अनुसार कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान,रोपण और धारण करने से वह समस्त पाप को जलाती है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करती है। यदि मंजरी युक्त तुलसी पत्रों के द्वारा भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाए तो अनंत पुन्यफलों की प्राप्ति होती है।

जहां पर तुलसी लगी हुई होती है वहीं भगवान श्री कृष्ण की समीपता है तथा वहीं ब्रह्मा और लक्ष्मीजी भी सम्पूर्ण देवताओं के साथ विराजमान होते हैं। तुलसीजी के निकट जो स्रोत्र -मंत्र आदि का जप किया जाता है,वह सब अनंत गुना फल देने वाला होता है। पूजा में कभी भी तुलसी के पत्ते और गंगाजल को बासी नहीं माना जाता। ये दोनों चीजें किसी भी परिस्थिति में बासी और अपवित्र नहीं मानी जाती। माना जाता है कि जिन घरों में रोजाना तुलसी की पूजा होती है वहां कभी यमदूत प्रवेश नहीं करते। इसके साथ ही घर की सुख-समृद्धि बनी रहती है। पुराणों में बताया गया है मृत्यु के समय गंगाजल संग तुलसी के पत्ते लेने से आत्मा को शान्ति और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

सेहत को सुधारती है तुलसी-
तुलसी के पौधे में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व एंटीबायोटिक गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में शरीर को सक्षम बनाते हैं। जहां तुलसी का पौधा लगा हुआ होता है वहां के आस-पास की हवा शुद्ध हो जाती है। तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है और व्यक्ति की आयु बढ़ती है। संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तुलसी बहुत कारगर उपाय है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन करें ये उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से खुल जाएगा बंद किस्मत का ताला

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हिन्दू धर्म शास्त्रों में वैसे तो प्रत्येक पूर्णिमा का अपना महत्व है। लेकिन कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि का एक अलग ही महतम्य है। कार्तिक माह सभी महीनों में उत्तम फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी माह में श्री हरि विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण किया था। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा का व्रत 8 नवंबर 2022 को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान-दान करने से पूरे माह की पूजा-पाठ करने के समान फल मिलता है। सिख धर्म के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन कुछ विशेष कार्य करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं और जातक के जीवन में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। मान्यता है कि यदि इस कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो घर में धन-धान्य बना रहता है और जीवन में कभी भी आर्थिक नुकसान नहीं झेलना पड़ता। आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा पर किए जाने वाले विशेष उपाय के बारे में।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन करें ये उपाय
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा-यमुना में कुशा स्नान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हाथ में कुशा लेकर पवित्र नदी में स्नान कर दान अवश्य करें। मान्यता है कि ऐसा करने से रोगमुक्ति होती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी के प्रवेश के लिए घर के मुख्य द्वार पर हल्दी मिश्रित जल से स्वास्तिक का निर्माण करें। इसके साथ ही आम के पत्तों का तोरण लगाएं। ऐसा करने से घर में माता लक्ष्मी का आगमन होता है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा घाट या किसी भी पवित्र नदी के घाट पर दीप जलाने और दीपदान करने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही घर में सुख समृद्धि आती है।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी के पास दीप जला कर, उसकी जड़ की मिट्टी का तिलक लगाने से हर कार्य में सफलता मिलती है।
कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव का पूजन भी किया जाता है। इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन शिव लिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगा जल का पंचामृत चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।

नीम पेड़ के नीचे है भगवान सूर्य की प्राचीन मूर्ति, आराधना से मन्नतें होती हैं पूरी

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लोक आस्था और नेम निष्ठा का महापर्व छठ को लेकर उत्साह का माहौल है.रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया. सोमवार को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा. इसके साथ ही चार दिवसीय महापर्व संपन्न हो जायेगा. रांची के बुंडू प्रखंड के हेठ बूढ़ाडीह स्थित नीम पेड़ के नीचे सूर्य की प्राचीन मूर्ति झारखंड की धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर है, जहां पर प्रतिदिन ग्रामीण पूजा-अर्चना करते हैं. सप्त रथी में विराजमान भगवान सूर्य की मूर्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है. ये कांची नदी के किनारे स्थित है. महापर्व छठ के मौके पर श्रद्धालुओं व व्रतियों ने अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की.

सातवीं शताब्दी की मूर्ति
बताया जाता है कि यह प्राचीन मूर्ति सातवीं शताब्दी की है. छठ व्रती कांची नदी में अर्घ्य देकर सूर्य मंदिर में आकर पूजा-अर्चना करते हैं. देवस्थल पर श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होती हैं. इसीलिए यहां पर सालोंभर दूरदराज से लोग पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं. इस स्थान को ग्रामीणों द्वारा भव्य रूप से सजाया है और भव्य मंदिर का निर्माण कार्य जारी है.

बुंडू सूर्य मंदिर में महापर्व छठ
रांची के बुंडू स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में महापर्व छठ पर बुंडू सहित पूरे पंच परगना के अलावा राजधानी रांची के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचे. यहां छठ घाट की साफ-सफाई, विद्युत सज्जा की गयी है. रांची के बुंडू प्रखंड के एदेलहातु स्थित रांची-टाटा राष्ट्रीय मार्ग-33 के किनारे विशाल सूर्य मंदिर की धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचान है. इस मंदिर के निर्माण के लिए यहां के तत्कालीन मुंडारी खूंटकट्टी जमींदार स्वर्गीय प्रधान सिंह मुंडा ने 27 अप्रैल 1988 को एक सादा पट्टा में तत्कालीन संस्कृति बिहार के अध्यक्ष सीताराम मारू को 11 एकड़ जमीन सूर्य मंदिर निर्माण के लिए दी थी. मंदिर का निर्माण कार्य 4 वर्षों में पूरा कर लिया गया था.

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (31 अक्टूबर 2022)

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  • मेष राशि :- नई उपलब्धि होगी, जमीन जायदाद का सुख, वाहन आदि का सुख होगा।
  • वृष राशि – संगति से प्रेम बढ़े, मेहनत से सितारा चमके, श्रम मन में अशांति पैदा करें।
  • मिथुन राशि – घर परिवार में संतुलन बनाए रखे तथा बच्चें की जिम्मेदारी पर ध्यान दें।
  • कर्क राशि – समय उलझन पूर्ण होगा, धैर्य धारण करें, सफलता कदम चूमेगी।
  • fिसंह राशि – संभव हो तो लंबी यात्रा टाल दे, वाहन चलाते समय सावधानी रखें, कार्य होवे।
  • कन्या राशि – यात्रा लाभकारी  रहे, व्यवसाय में उन्नति होवे, भाईयों से मनमुटाव होगा, समय का ध्यान दें।
  • तुला राशि – अभीष्ट सिद्धी की प्राप्ति हो, लेनदेन से अच्छा लाभ होगा, शुभ कार्य होवे।
  • वृश्चिक राशि – लंबी यात्रा सुखद रहे, प्रियजनों से विद्रोह, चिंता का अंत होगा, परंतु व्यय होगा।
  • धनु राशि – समाज में मान सम्मान तथा यश बढ़ेगा, आशा लाभ की प्राप्ति होगी, ध्यान रखे।
  • मकर राशि – राजकीय आश्वासन अधूरी रहेगी, आवागमत में व्यय बढ़ेगा, ध्यान दे।
  • कुंभ राशि – दिनचर्या अव्यवस्थित होने पर स्वास्थ्य, हानि होने पर व्यवसाय में हानि होगी।
  • मीन राशि – कानून व विवाद में न उलझे, धैर्य से कार्य लेवे, शत्रु से मान बढ़ेगा, समय का ध्यान रखे।
     

कर्म ऐसे हों, जो स्वयं और दूसरों का भी भला करें – मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भगवत गीता हमें जीवन से भागने नहीं अपितु सात्विक कार्यकर्ता के रूप में निरंतर कर्मरत रहने का संदेश देती है। आवश्यक यह है कि कर्म ऐसे हों, जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों का भी भला करें। रामचंद्र मिशन के पूज्य कमलेश दाजी हार्टफुलनेस अभियान के माध्यम से हमें ज्ञान का प्रकाश और सदबुद्धि प्रदान करते हुए सन्मार्ग पर बने रहने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चल कर हम अपने पारिवारिक और व्यावसायिक दायित्व निभाते हुए आध्यात्मिक प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर हो सकते हैं। उनके द्वारा प्रतिपादित आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की पद्धति अपने आप में संपूर्ण है। मुख्यमंत्री चौहान हैदराबाद में हार्टफुलनेस संस्थान के कान्हा शांति वनम में आयोजित ध्यान सत्र के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में रामचंद्र मिशन के पूज्य कमलेश दाजी, साधना सिंह विशेष रूप से उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री चौहान ने योग व ध्यान के माध्यम से नशे की लत को छुड़ाने की विधियों पर केन्द्रित पुस्तक “यस यू केन डू ईट” के हिंदी अनुवाद “जी, हाँ आप कर सकते हैं” का विमोचन किया। पुस्तक हार्टफुलनेस संस्थान द्वारा प्रकाशित की गई है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि केवल भौतिक प्रगति व्यक्ति को सुख और आनंद नहीं दे सकती। व्यक्ति अधिकतम आयु और सुख, शांति और आनंद से परिपूर्ण जीवन चाहता है। सभी विचार धाराएँ और पद्धतियाँ, सुख और आनंद की खोज की ओर जाती हैं। पूज्य दाजी द्वारा दिखाया गया मार्ग वर्तमान जीवन की व्यस्तताओं के बीच आध्यात्मिक उन्नति के उच्चतम सोपान तक पहुँचने और व्यक्ति की सुख, शांति और आनंद का मार्ग प्रशस्त करता है। हार्टफुलनेस कार्यक्रम प्रेम, करूणा और दया से परिपूर्ण है।

मुख्यमंत्री चौहान ने रामचंद्र मिशन द्वारा कृषि, पर्यावरण-संरक्षण, योग, ध्यान प्राणायाम के प्रसार के लिए संचालित गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मिशन ने प्रदेश में जावरा जिला रतलाम में पर्यावरण-संरक्षण के लिए अभियान चलाया है। मिशन के सहयोग से मध्यप्रदेश में शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, जीवन निर्माण और नशामुक्ति के लिए गतिविधियाँ संचालित करने की योजना है।

पूज्य कमलेश दाजी ने मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री चौहान द्वारा पर्यावरण-संरक्षण, शिक्षा, कृषि आदि के क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश के हृदय क्षेत्र मध्यप्रदेश को हार्टफुल स्टेट के रूप में विकसित किया जाएगा। पूज्य दाजी ने कहा कि यदि व्यक्ति अशांत और चिंतित होगा तो वह सुखी रह ही नहीं सकता। सुख के लिए शांति आवश्यक है। शांति मनन से संभव है। मनन एकाग्र मस्तिष्क से संभव है, जो ध्यान से प्राप्त किया जा सकता है। अत: ध्यान से सुख का गहरा संबंध है।
 

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