छठ पूजा हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। सामान्यता यह त्योहार बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर-प्रदेश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में छठ पूजा को महापर्व घोषित कर छठ पूजा के दिन सरकारी छुट्टी भी लागू कर दी गई है। छठ पूजा का महत्व बहुत ज्यादा है। यह व्रत सूर्य भगवान, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित है। इस व्रत को करने से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है।
ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है। इस कारण हिन्दू शास्त्रों में सूर्य को भगवान मानते हैं। सूर्य के बिना कुछ दिन रहने की जरा कल्पना कीजिए। इनका जीवन के लिए इनका रोज उदित होना जरूरी है। कुछ इसी तरह की परिकल्पना के साथ पूर्वोत्तर भारत के लोग छठ महोत्सव के रूप में इनकी आराधना करते हैं।
छठ सूर्य की उपासना का पर्व है। भारत में सूर्य पूजा की परम्परा वैदिक काल से ही रही है। हिंदुओं के सबसे बड़े पर्व दीपावली को पर्वों की माला माना जाता है। पांच दिन तक चलने वाले ये पर्व छठ पूजा तक चलते है। उत्तर प्रदेश और बिहार में मनाया जाने वाला यह बेहद अहम पर्व है जो पूरे देश में धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं है बल्कि महापर्व है जो कुल चार दिन तक चलता है। नहाय खाय से लेकर उगते हुए भगवान सूर्य को अघ्र्य देने तक चलने वाले इस पर्व का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है।
छठ पर्व को किसने शुरू किया इसके पीछे कई ऐतिहासिक कहानियां प्रचलित हैं। लंका विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया और सूर्यदेव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशिर्वाद प्राप्त किया था। इसी के उपलक्ष्य में छठ पूजा की जाती है।
हमारे देश में सूर्य उपासना के कई प्रसिद्ध लोकपर्व हैं जो अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाए जाते हैं। सूर्य षष्ठी के महत्व को देखते हुए इस पर्व को सूर्य छठ या डाला छठ के नाम से संबोधित किया जाता है। इस पर्व को बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और नेपाल की तराई समेत देश के उन तमाम महानगरों में मनाया जाता है। जहां-जहां इन प्रांतों के लोग निवास करते हैं। यही नहीं, मॉरिशस, त्रिनिडाड, सुमात्रा, जावा समेत विदेशों में भी भारतीय मूल के प्रवासी छठ पर्व को बड़ी आस्था और धूमधाम से मनाते हैं। डूबते सूर्य की विशेष पूजा ही छठ का पर्व है। चढ़ते सूरज को सभी प्रणाम करते हैं।
छठ पर्व की परम्परा में वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी छिपा हुआ है। षष्ठी तिथि एक विशेष खगोलीय अवसर है। जिस समय धरती के दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य रहता है और दक्षिणायन के सूर्य की अल्ट्रावॉइलट किरणें धरती पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाती हैं। इन दूषित किरणों का सीधा प्रभाव जनसाधारण की आंखों, पेट, त्वचा आदि पर पड़ता है। इस पर्व के पालन से सूर्य प्रकाश की इन पराबैंगनी किरणों से जनसाधारण को हानि न पहुंचे। इस अभिप्राय से सूर्य पूजा का गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है। इसके साथ ही घर-परिवार की सुख- समृद्धि और आरोग्यता से भी छठ पूजा का व्रत जुड़ा हुआ है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पति, पत्नी, पुत्र, पौत्र सहित सभी परिजनों के लिए मंगल कामना से भी जुड़ा हुआ है।
छठ पर्व की सांस्कृतिक परम्परा में चार दिन का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भैया दूज के तीसरे दिन यानि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ हो जाते है। व्रत के पहले दिन को नहा-खा कहते हैं। जिसका शाब्दिक अर्थ है स्नान के बाद खाना। इस दिन पवित्र नदी में श्रद्धालु स्नान करते हैं। वैसे तो यह पर्व मूल रूप से गृहिणियों द्वारा मनाया जाता है। लेकिन आजकल पुरुष भी इसमें समान रूप से सहयोग देते हैं।
छठ का पौराणिक महत्व अनादिकाल से बना हुआ है। रामायण काल में सीता ने गंगा तट पर छठ पूजा की थी। महाभारत काल में कुंती ने भी सरस्वती नदी के तट पर सूर्य पूजा की थी। इसके परिणाम स्वरूप उन्हें पांडवों जैसे पुत्रों का सुख मिला था। द्रौपदी ने भी हस्तिनापुर से निकलकर गढ़ गंगा में छठ पूजा की थी। छठ पूजा का सम्बंध हठयोग से भी है। जिसमें बिना भोजन ग्रहण किए हुए लगातार पानी में खड़ा रहना पड़ता है। जिससे शरीर के अशुद्ध जीवाणु परास्त हो जाते हैं।
एक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। जिसकी शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और वो रोज घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है। छठ पर्व के बारे मे एक कथा और भी है। इस कथा के मुताबिक जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए तब दौपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया था।
लोक परम्परा के मुताबिक सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई। छठ पूजा अथवा छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। छठ से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और लोक गाथाओं पर गौर करें तो पता चलता है कि भारत के आदिकालीन सूर्यवंशी राजाओं का यह मुख्य पर्व था। छठ के साथ स्कंद पूजा की भी परम्परा जुड़ी है। भगवान शिव के तेज से उत्पन्न बालक स्कंद की छह कृतिकाओं ने स्तनपान करा रक्षा की थी। इसी कारण स्कंद के छह मुख हैं और उन्हें कार्तिकेय नाम से पुकारा जाने लगा। कार्तिक से संबंध होने के कारण षष्ठी देवी को स्कंद की पत्नी देवसेना नाम से भी पूजा जाने लगा।
लोक आस्था के महापर्व छठ का हिंदू धर्म में अलग महत्व है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें ना केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। पर्व का प्रारंभ नहाय-खाय से होता है, जिस दिन व्रती स्नान कर अरवा चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी का भोजन करते हैं। नहाय-खाय के दूसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी के दिनभर व्रती उपवास कर शाम में रोटी और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस पूजा को खरना कहा जाता है। इसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि को उपवास रखकर शाम को अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके अगले दिन यानी सप्तमी तिथि को सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके व्रत तोड़ा जाता है।
छठ पूजा के व्रत को जो भी रखता है। वह इन दिनों में जल भी नही ग्रहण करता है। इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस पूजा वैसे तो मुख्य रुप से सू्र्य देवता की पूजा की जाती है। लेकिन साथ ही सूर्य देव की बहन छठ देवी की भी पूजा की जाती है। जिसके कारण इस पूजा का नाम छठ पूजा पड़ा। इस दिन नदी के तट में पहुंचकर पुरुष और महिलाएं पूजा-पाठ करते है। साथ ही छठ माता की पूजा को आपके संतान के लिए भी कल्याणकारी होती है।
जन आस्था का महापर्व है छठ पूजा
सूर्य उपासना का पर्व छठ पूजा!
सूर्य उपासना से जुड़ा पर्व छठ पूजा का शुभारम्भ नहाये खाये से देश से लेकर विदेश तक व्रती परिवार में शुरू हो गया है जो इस वर्ष 30 अक्टूबर की संध्याकालीन पूजन के साथ 31 अक्टूबर को प्रातःकालीन पूजन के साथ समाप्त हो जायेगा। इस पर्व की महिमा दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। कोरोना काल में जहां हर पर्व मनाना बंद हो गया थ उस काल में यह पर्व अपने सीमित संसाधन से व्रती परिवार ने श्रद्धा पूर्वक मनाया। इस पर्व में पवित्रता का ध्यान सबसे पहले रखा जाता है। सूर्य उपासना का यह पर्व अपने आप में अनूठा पर्व है जहां डूबते सूर्य की भी उपासना होती है। उगते सूर्य की उपासना तो सभी करते है। यह पर्व परिवार की सुख शांति, समृद्धि, औलाद सहित हर तरह की मनोकामना पूर्ण होने की आस्था से जुड़ा हुआ है। इस पर्व की परम्परा प्राचीन काल से ही चली आ रही है जहां इस व्रत को प्राचीन काल से ही नाग, किन्नर, मानव में करने के प्रमाण मिलते है। संकट काल में द्वापर युग में दौपदी द्वारा इस व्रत को करने एवं पांडवों को अपना राज्य मिलने की भी बात प्रमुख रही है। यह व्रत विहार , झारखंड के हर परिवार में श्रद्धा के साथ प्रति वर्ष किया जाता है। इस प्रांत के निवासी देश, विदेश जहां भी रहते है, श्रद्धा के साथ वही इस व्रत को करते है। इसी करण यह व्रत आज अंतर्राष्टीय रुप ले चुका है। देश का हर कोना कोना आज इस व्रत की गूंज से गुंजयमान तो हो ही रहा है, मारिशश, फीजी, सूरीनामी आदि देश में भी इस छठ पूजा की धूम मची हुई है। इस पर्व को करने वाले की हर मनोकामना पूरी होती है।
यह पर्व नदी, तालाब या जलाशय के आस पास किया जाता है। षष्ठी तिथि को अस्थाचल होते हुए सूर्य को प्रथम अघ्र्य इस कामना एवं विश्वास के साथ कि उदय के समय हमारी झोली खुशियों से सूर्य देव की असीम कृपा से सदा के लिये भर जायेगी , दूसरे दिन उगते सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत की समाप्ति होती है। इस अवसर पर घाट का दृश्य अति मनोरम होता है। ईख से अच्छादित वातावरण हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है।
इस पर्व में प्रसाद के रूप में हर प्रकार के मौसमी फल केला, सेव, संतरा, निंबू, मौसमी, अनार, अन्नानाश, नारियल, मूली, अदरख , गन्ना, कद्दू,, जमीनकंद आदि के साथ आटा एवं गुड़ से बना ठेकुआ होता है। इस सारे प्रसाद को एक टोकरी में पीले वस्त्र में बांधकर कंधे पर ईख रखते हुये व्रती परिवार घाट तक पहुचता है जहां पूजा बेदी के सामने प्रसाद की टोकरी रखकर सूर्य की अराधना की जाती है। जल में खड़े होकर संध्याकाल में डूबते हुये सूर्य को पूजा थाली के साथ गंगाजल से अघ्र्य दिया जाता एवं दूसरे दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को गंगाजल एवं गाय के दूध के साथ अघ्र्य देते हुये पूजा की समाप्ति हो जाती। फिर प्रसाद वितरण किया जाता। यह दृश्य भी अपने आप में मन हरने वाला होता है जहां घाट पर अपनी झोली फैलाकर श्रद्धा के साथ प्रसाद मांगने की कत्तार लगी रहती। पूजा घट का भी दृश्य मनभावन होता है। छठ का गीत एवं घाट का मनभावन दृश्य इस पर्व की गरिमा में चार चांद लगा देता है। जिससे यह पर्व आज क्षेत्रीय न होकर अंतर्राष्ट्रीय हो चला है।
खुद तय करें कि अगले जन्म में क्या बनेंगे
अगले जन्म में आप धनवान बनेंगे या गरीब, एक्टर बनेंगे या डॉक्टर यह सब आप पर निर्भर है। हो सकता है कि आप इस पर यकीन न करें लेकिन सच यही है। इसका प्रमाण है श्रीमद्भगवत् गीता। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि आत्मा अमर है। एक शरीर को छोड़कर आत्मा दूसरा शरीर धारण कर लेती है। अर्जुन को समझाते हुए श्री कृष्ण ने कहा है कि ऐसा कोई समय नहीं है जब तुम और मैं नहीं थे। आने वाला ऐसा कोई समय नहीं है जब हम और तुम नहीं होंगे।
भगवान प्रत्यक्ष रूप से कहते हैं आत्मा निरंतर एक शरीर से दूसरे शरीर में पहुंचकर अपनी यात्रा जारी रखती है। यानी आप चाहें या न चाहें आपको अगल जन्म लेना है। आपके हाथ में बस इतना है कि आप अगले जन्म में खुद को किस रूप में देखना चाहते हैं यह तय करें। आप कहेंगे कि जब हम खुद ही तय कर सकते हैं कि हमें अगले जन्म में क्या बनना है तो हर व्यक्ति धनवान और सुखी होता है। लेकिन इस दुनियां में गरीब भी हैं और दुखी भी हैं। श्रीमद्भगवत् गीता में इस प्रश्न का भी उत्तर है। गीता के अष्टम में अध्याय में लिखा है, श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है ’’यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्। तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद् भावभावित: इसका अर्थ है, ’’ हे कुन्तीपुत्र अर्जुन! यह मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, उस उसको ही प्राप्त होता है, क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहा है।
यानी आप अंत समय में जिन-जिन चीजों का ध्यान करेंगे अगले जन्म में उन चीजों को प्राप्त करेंगे। इसी मान्यता के कारण बहुत से लोग अपने बच्चों का नाम भगवान के नाम पर अर्थात राम, विष्णु, कृष्ण, गोविंद आदि रखते हैं। इसका उद्देश्य यह रहता है कि जीवन काल में संतान का नाम लेते हुए भगवान का भी स्मरण बना रहे।
आमतौर पर मनुष्य का अपनी संतान से बहुत अधिक मोह रहता है, मरते समय वह अपनी संतान का मुख देना चाहता है और उसे ही याद करता है। संतान का नाम ईश्वर के नाम पर होने से मरते समय संतान को याद करते हुए व्यक्ति ईश्वर का भी ध्यान कर लेता है जिससे मुक्ति मिल जाती है। इसलिए हमेशा उस बात का ध्यान करिये जो आप बनना चाहते हैं।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (30 अक्टूबर 2022)
- मेष राशि :- हानि हो सकती है, आलस्य प्रमोद से बचे, साझेदारी के कार्य न करें, ध्यान दें।
- वृष राशि – पुरानी निराशा समाप्त होगी, मंगल के अवसर प्राप्त होंगे, धन की बढ़ोत्तरी होगी।
- मिथुन राशि – नए मेहमान आने से खर्च बढ़ेगा, आमोद-प्रमोद का महत्व बढ़ेगा।
- कर्क राशि – व्यापारिक जिम्मेदारी निभाए, त्यौहार की प्रतिकूलता से बचे, स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
- fिसंह राशि – घर में खुशियों का आगमन होगा, लाभ के अवसर न गवाएं, कार्य होगा।
- कन्या राशि – सूझ-बूझ और संयम बरतने से ही लाभ होगा, समय का ध्यान रखें।
- तुला राशि – व्यवसाय में प्रगति होगी, सुख व सहयोग मिलेगा, ध्यान रखे।
- वृश्चिक राशि – परिश्रम से सफलता प्राप्त, बच्चों से सुख व सहयोग मिलें, ध्यान दे।
- धनु राशि – छुटपुट वातावरण व टकरार से दूर रहे, वातावरण आय के अनुकूल होगा।
- मकर राशि – आजातिय समस्या का निदान, प्रियजन से टकराव, व्यवसाय से लाभ होवे।
- कुंभ राशि – शत्रु पक्ष में हानि होने की आशंका, व्यय की अधिकता होगी, ध्यान रखे।
- मीन राशि – भाग्य की प्रबलता से सितारा बुलंद होगा, सफलता मिलें, परिश्रम लाभ होगा।
पर्वतारोही आशा साइकिल से प्रदेश के पर्यटन गंतव्यों का करेंगी प्रचार
भोपाल : राष्ट्रीय एथलीट और पर्वतारोही आशा राजूबाई मालवीय मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस- एक नवंबर को 20 हजार किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा कर देश के सम्पूर्ण राज्यों का भ्रमण करेंगी। यात्रा के दौरान वे प्रदेश के पर्यटन गंतव्यों, नैसर्गिक सौंदर्य, समृद्ध इतिहास और संस्कृति को देश के कोने-कोने तक पहुँचाने के अभियान का हिस्सा बनेंगी। पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री उषा ठाकुर साइकिल यात्रा को फ्लेग ऑफ करेंगी। प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्ला ने आशा को यात्रा में सहयोग के रूप में टूरिज्म बोर्ड की ओर से बेहद आधुनिक जीपीएस युक्त हाइब्रिड साइकिल रोम-2 और साइकिल किट सौंपी।
पर्यटन स्थलों को महिलाओं खास कर एकल महिला यात्रियों (सोलो फीमेल ट्रेवलर) के लिए और अधिक सुरक्षित तथा सुगम बनाने मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्राथमिकता पर विभिन्न योजना-परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर बोर्ड द्वारा खिलचीपुर, जिला राजगढ़ की रहने वाली राष्ट्रीय एथलीट एवं पर्वतारोही आशा राजूबाई मालवीय का साइकिल से देश भ्रमण का प्रस्ताव स्वीकार कर उनकी पहल का स्वागत किया है। यात्रा का समापन 11 माह बाद दिल्ली में होगा।
आशा नेपाल-भूटान-बांग्लादेश की सीमा पर स्थित तेनजिंग खान (19,545 फीट) एवं बीसी राय (20,500 फीट) जैसी बर्फीली चोटियों को फतह कर तिरंगा फहरा चुकी हैं। उनका नाम नेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड ओएमजी बुक में दर्ज है।
मुख्यमंत्री चौहान ने किया पौध-रोपण
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान में केसिया, पीपल और गुलमोहर के पौधे लगाए। मुख्यमंत्री चौहान के साथ राजगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता के.पी.पंवार ने अपने जन्म-दिवस पर पौधा लगाया। नीलम सक्सेना, यशवंत सिंह तोमर और रामप्रताप परमार ने भी पौध-रोपण किया। विरूनी फाउंडेशन के विवेक चौरसिया ने भी अपने जन्म-दिवस पर पौधा लगाया। फाउंडेशन के रूचिन शर्मा, शिवम चौरसिया, आदित्य सिंह और नयन अग्रवाल पौध-रोपण में शामिल हुए। फाउंडेशन "एक संकल्प बेहतर भविष्य की ओर" का लक्ष्य रख समाज-सेवा, जरूरतमंदों को भोजन वितरण तथा पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। हरा-भरा मध्यप्रदेश अभियान में महा पुरूषों की जयंती पर वृक्षा-रोपण की गतिविधियाँ की जाती है।
भारत का अद्वैत दर्शन करायेगा विश्व को शाश्वत शांति का दिग्दर्शन : मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आज भौतिकता की अग्नि में दग्ध विश्व मानवता को शाश्वत शांति के पथ का दिग्दर्शन अपने अद्वैत दर्शन के माध्यम से भारत ही कराएगा। आज विश्व जिन विवादों में घिरा है, उनका हल भारत के पास है। हमारा दर्शन विश्व शांति और विश्व-कल्याण का है। हमारी विचारधारा "वसुधैव कुटुंबकम" एवं "सर्वे भवंतु सुखिन:" की है।
मुख्यमंत्री चौहान आज डेली कॉलेज इंदौर में प्रज्ञा प्रवाह के संयोजन में आयोजित यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव में शामिल हुए। कॉन्क्लेव में भारतीय चिंतन के विषय में युवा चिंतकों ने अपने विचार रखे। मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमारम, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुनील कुमार गुप्ता, देवी अहिल्या विश्व विद्यालय की कुलपति प्रोफेसर रेणु जैन, पाणिनी वैदिक विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर विजय कुमार मेनन, डॉ. अखिलेश कुमार पांडे और महापौर पुष्यमित्र भार्गव उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन से हुआ। मुख्यमंत्री चौहान का स्वागत डेली कॉलेज के अध्यक्ष विक्रम पवार ने किया। कॉन्क्लेव में समूचे भारत के 500 युवा शिरकत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हमारा अद्वैत दर्शन कहता है कि प्रत्येक जड़ और चेतन में एक ही चेतना है, हर आत्मा में परमात्मा है। अहम् ब्रह्मास्मि। मैं और तुम एक है। सभी एक हैं। यह जानने के बाद और कुछ जानने के लिए शेष नहीं रह जाता। हम प्रकृति की पूजा करते हैं, नदियाँ हमारे लिए माता हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भारत के दर्शन की गहराइयों में जाएँ तो विश्व के सारे विवादों का हल भारत के पास है। जिस प्रकार हमारे शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा होते हैं, उसी प्रकार समाज के भी शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा होते हैं। पूरी धरती और और उस पर रहने वाले शरीर है, सामूहिक संकल्प (मेरा देश, देश भक्ति) मन है, संविधान बुद्धि है और सबका कल्याण आत्मा है। सबके कल्याण में ही सारे विवादों का हल है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि विश्व की सारी विचारधाराएँ इसी चिंतन से निकली है कि सुखी कैसे रहा जाए। पश्चिम दर्शन कहता है कि शरीर की आवश्यकता है पूरी हो जाए तो मनुष्य सुखी हो जाएगा। हमारा दर्शन कहता है कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समुच्चय का सुख ही पूरा सुख है। शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का सुख चार पुरुषार्थ अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष से प्राप्त होता है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मैंने बचपन में स्वामी विवेकानंद का विचार पढ़ा और वही मेरे जीवन का दर्शन बन गया। मनुष्य ईश्वर का अंश है, अमृत का पुत्र है, अनंत शक्तियों का भंडार है। ऐसा कोई कार्य नहीं जो वह नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भारत में विमर्श की प्रक्रिया अनंत काल से चली आ रही है। गाँव-गाँव में सत्यनारायण की कथा में हम धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो, यह संकल्प लेते हैं। भारत ने विश्व की सभी विचारधाराओं का सम्मान किया है। सत्य एक है, उसे विभिन्न प्रकार से कहा जाता है। हमारे लिए सारी दुनिया एक परिवार है। वेद, उपनिषद, गीता में हमारा दर्शन है। शंकराचार्य और विवेकानंद जैसे विद्वानों ने हमारा दिग्दर्शन किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय दर्शन में जीवन यापन के जो भी तौर-तरीके बताये एवं अपनाए गये हैं, वास्तव में यदि समय रहते मानव ने अपने आपको विकासरूपी भ्रम जाल से बाहर निकालकर विश्व में शांति एवं समस्याओं के समाधान हेतु अंगीकार नहीं किया तो विश्व कल्याण की कल्पना व्यर्थ है। उन्होंने युवाओं का आहवान किया कि एक बार पुन: विश्व में भारतीय जीवन दर्शन का डंका बजाने के लिये शंखनाद किया जाए। यंग थिंकर फोरम के आशुतोष ठाकुर की मांग पर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि धार की वाग्देवी की प्रतिमा को इंग्लैण्ड से वापस लाने के लिए राज्य सरकार सभी संभव प्रयास करेगी।
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, साँसद शंकर लालवानी, विधायक मालिनी गौड़, डॉ. निशांत खरे, गौरव रणदिवे सहित जन-प्रतिनिधि मौजूद थे।
सीएम राइज स्कूल शिक्षा क्षेत्र में एक नई सामाजिक क्रांति – मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सीएम राइज योजना एक नई सामाजिक क्रांति है। इस योजना से शासकीय स्कूलों को सर्वसुविधा तथा संसाधनयुक्त बनाया जा रहा है। नये भवन बनाये जा रहे हैं। योग्य एवं कुशल, कर्मठ तथा लगनशील शिक्षकों की व्यवस्था कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की व्यवस्था शुरू की गई है। सीएम राइज स्कूलों में स्मार्ट क्लास,लायब्रेरी, प्रयोगशाला, खेल मैदान सहित अन्य सभी जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध करायी जायेंगी। सरकारी स्कूलों को प्रायवेट स्कूलों से बेहतर बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों के अध्यापकों एवं बच्चों में योग्यता और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्हें सिर्फ अवसर और सुविधाएँ देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षाकर्मी कल्चर को समाप्त किया गया है। शिक्षकों को बेहतर सम्मान और सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री चौहान आज इंदौर में राज्य स्तरीय समारोह में प्रदेश में शिक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने, विस्तारित करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये सीएम राइज योजना में 2519 करोड़ रूपये की लागत से प्रदेश में बनने वाले 69 सीएम राइज स्कूलों के नवीन भवन का भूमि-पूजन कर रहे थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने बच्चों से संवाद कर उन्हें पढ़ने, खेलने एवं आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सीएम राइज स्कूलों में चित्रकला, गीत-संगीत और खेलकूद के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने की सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी। मुख्यमंत्री चौहान ने बच्चों को पढ़ने, खेलने और आगे बढ़ कर आसमान छू लेने का संकल्प भी दिलवाया। उन्होंने बच्चों से कहा कि अच्छा सोचो, अच्छा करो एवं अच्छा नागरिक बनो। उन्होंने कहा कि जीवन में नई उँचाइयों को हासिल करने के लिये सीएम राइज योजना मील का पत्थर साबित होगी।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सीएम राइज स्कूल की परिकल्पना को साकार करने के लिए देश-विदेश के शिक्षाविदों एवं विद्वानों के साथ चर्चा एवं परामर्श कर योजना बनाई गई। निर्णय लिया गया कि स्कूल की बिल्डिंग सर्व सुविधा युक्त तो होगी ही साथ ही अच्छा फर्नीचर, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, खेल मैदान, खेल का सामान आदि सभी आवश्यक सुविधाएँ भी होंगी। स्मार्ट क्लास से विद्यार्थी देश-विदेश के योग्य शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि इन स्कूलों में योग्य, कर्मठ, समर्पित शिक्षक होंगे। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों का भविष्य बनाने में कोई कमी न छोड़ें। यह केवल नौकरी नहीं है अपितु साधना है, तपस्या है, राष्ट्र के नव-निर्माण का महायज्ञ है। उन्होंने बच्चों के माता-पिता से भी कहा कि बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें। मुख्यमंत्री चौहान ने सीएम राइज स्कूल की परिकल्पना को मूर्तरूप देने के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री और विभागीय अमले को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में एक और क्रांति हुई है। प्रदेश में अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिन्दी में भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सभी भाषाएँ सीखो परंतु शिक्षा अपनी मातृभाषा में ही प्राप्त करो। अच्छे गुण धारण करो, अच्छे नागरिक बनो, माता-पिता एवं गुरूजनों का सम्मान करो और नशे से दूर रहो।
मुख्यमंत्री चौहान ने पोलोग्राउंड में विकसित किये जा रहे सीएम राइज स्कूल शासकीय अहिल्या आश्रम उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-एक के प्रागंण में स्थापित प्रात: स्मरणीय अहिल्या माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किये। मुख्यमंत्री ने उपस्थित बालिकाओं पर पुष्प-वर्षा कर स्वागत-सत्कार किया और सीएम राइज स्कूल पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। सीएम राइज योजना पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार ने कहा कि सीएम राइज योजना से शासकीय स्कूलों की दशा एवं दिशाएँ बदली जा रही हैं। प्रदेश में 12वीं तक की शिक्षा एक ही कैंपस में देने की व्यवस्था की जा रही है। मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अन्य भाषाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा। प्रारंभ में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी ने स्वागत भाषणमें प्रदेश में निर्मित होने वाले सीएम राइज स्कूलों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम अध्यक्ष सावन सोनकर, जिला पंचायत अध्यक्ष रीना मालवीय, इंदौर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, विधायक रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ तथा महेंद्र हार्डिया, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, राजेश सोनकर, मनोज पटेल, आईडीए के पूर्व अध्यक्ष मधु वर्मा, गौरव रणदिवे, पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे आयुक्त लोक शिक्षण अभय वर्मा, संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा तथा कलेक्टर मनीष सिंह भी मौजूद थे।
कुल 9095 सीएम राइज स्कूल खुलेंगे
सीएम राइज स्कूल में के.जी. से लेकर कक्षा 12वीं तक शिक्षा दी जाएगी। प्रदेश में 2 चरण में 9हजार 95 सीएम राइज स्कूल खोले जायेंगे। इस चरण में वर्ष 2021-24 में प्रत्येक जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर 360 स्कूल खोले जायेंगे। दूसरे चरण में वर्ष 2024 से 2031 तक प्रत्येक 10 से 15 किलोमीटर में एक सीएम राइज स्कूल शुरू होगा और कुल 8 हजार 735 स्कूल खोले जायेंगे।
सीएम राइज स्कूल की विशेषताएँ
सीएम राइज स्कूल की 10 प्रमुख विशेषता निर्धारित की गई हैं। इन स्कूलों में विश्व-स्तरीय अधो-संरचना, परिवहन सुविधा, नर्सरी एवं पूर्व प्राथमिक कक्षाएँ, स्मार्ट क्लॉस एवं डिजिटल लर्निंग, शत-प्रतिशत स्टॉफ एवं सहायक स्टॉफ, स्टॉफ की क्षमता वृद्धि, सुसज्जित प्रयोगशालाएँ, वाचनालय, पाठ्येत्तर सुविधाएँ, 21वीं सदी की आवश्यकता के अनुरूप कौशल कार्यक्रम, व्यावसायिक शिक्षा और पालकों की सहभागिता रहेगी।
सीएम राइज स्कूल का विजन, मिशन और मूल्य
सीएम राइज स्कूल का उद्देश्य ऐसे स्कूल समुदाय का निर्माण करना है, जो सभी विद्यार्थियों में कठिनाइयों से निपटने की क्षमता और उनके संपूर्ण विकास को बढ़ावा देगा। उन्हें समाज में योगदान देने और संवैधानिक मूल्यों को बरकरार रखने के लिए सशक्त बनायेगा। इन स्कूलों की स्थापना में राज्य सरकार का मिशन, विकास में सहायक, समावेशी और आनंदमय स्कूल समुदाय का निर्माण करना है। कौशल तथा एकीकृत समग्र शिक्षा को प्रोत्साहित करके विद्यार्थियों को जिज्ञासु एवं रचनात्मक कार्यों में सक्षम और आत्म-निर्भर बनने के लिए प्रेरित करना है। सीएम राइज स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा से उनके द्वारा चुने गए पथ पर आगे बढ़ने, अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने में समर्थ बनाने और परिपूर्ण जीवन जीने के लिए अवसर एवं सहायता मिलेगी।
1 नवंबर को सरकारी कर्मचारियों को आधे दिन की छुट्टी
भोपाल मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस 1 नवंबर को राज्य के सरकारी दफ्तरों में आधे दिन ही काम होगा। 1 नवंबर को सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी का आदेश शनिवार दोपहर जारी कर दिए गए। सरकारी ऑफिसों में आधे दिन की छुट्टी घोषित किए जाने का आदेश सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव मेहताब सिंह ने जारी किए हैं।
छतरपुर में हाथ में मोर पंख लेकर जमकर झूमे सीएम शिवराज
छतरपुर छतरपुर जिले के बिजवार में शनिवार को मौनिया महोत्सव मनाया गया। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। स्थानीय कलाकारों को नृत्य करते देख सीएम इतना खुश हुए कि खुद भी उनके साथ मंच पर मौनिया नृत्य करने लगे। हाथ में मोर पंख लेकर वे जमकर नाचे। लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बिजावर विधानसभा क्षेत्र में 18 करोड़ रुपए राशि के विकास कार्यों को स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने गोवंश की रक्षा के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग करने की अपील की।
शिवराज बोले- मेरा मन नाचने का कर रहा है
मंच पर कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान स्थानीय कलाकारों को देख सीएम शिवराज सिंह चौहान बोले कि मुझे मौनिया नृत्य देखकर इनके साथ नाचने का मन हो रहा है। इसके बाद वे मौनिया कर रहे लोगों के पास पहुंचे और उनके साथ मौनिया नृत्य करने लगे।
जटाशंकर धाम के कायाकल्प की घोषणा की
सीएम शनिवार को बिजावर नगर के श्रीजानकी निवास मेला ग्राउंड परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे। यहां उन्होंने जटाशंकर धाम का विकास तीर्थ स्थल के रूप में करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मौनिया नृत्य की पौराणिक कथा का जिक्र करते हुए कहा कि गोवंश पर संकट है। गोवंश की रक्षा के लिए समाज का सहयोग आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री जटाशंकर धाम को अद्भुत स्थल बनाएंगे।
कोई गरीब बगैर राशन के नहीं रहेगा
मुख्यमंत्री ने सीएम जनसेवा शिविर के बारे में भी जानकारी दी और अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश की धरती पर कोई गरीब बगैर राशन के ना रहे। जिन बड़े आदमियों के नाम इसमें जुड़े हैं, वह काट दिए जाएं। इससे पहले कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि बिजावर विधानसभा क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिसके चलते पलायन होता है। इस दौरान विधायक ने क्षेत्रीय विकास से संबंधित मांग पत्र भी पढ़ा।
फसल बीमा देने का जिक्र
सीएम ने फसल का सर्वे करवाकर राहत राशि और फसल बीमा का लाभ देने की भी बात की। केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 44 हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया और कहा कि इस परियोजना के पूरे हो जाने से प्रदेश में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। घर-घर पीने का भी पानी पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में करवाए जाने को भी बड़ी उपलब्धि बताया।





