सूर्यपुत्र शनिदेव न्याय के देवता हैं हालांकि लोग उनके कोप से भयभीत रहते हैं पर वह हमेशा ही कार्यों के अनुरुप परिणाम देते हैं। उनके कई वाहन हैं। शनि के वाहनों की बात करते हुए सामान्य रूप से कौवे के बारे में ध्यान आता है, लेकिन उनके कौवे सहित कुल 9 वाहन है। जिनमें से कई को ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व के अनुसार बेहद शुभ माना गया हैं। इसके बावजूद जरूरी नहीं है कि वे सभी आपके लिए भी शुभ ही हों। इसलिए ये जानना अत्यंत आवश्यक है कि कौन शुभ है और कौन अशुभ। शास्त्रों की माने तो शनि जिस वाहन में सवार होकर किसी व्यक्ति की कुंडली में प्रवेश करते हैं उसकी राशि की गणना करके तय होता है कि उनका आगमन व्यक्ति के लिए अच्छा है या बुरा।
इस गणना की विधि सुनने में कठिन लगती है पर है गणित के सूत्रों की तरह एक दम तय है। इसके लिए जन्म नक्षत्र की संख्या और शनि के राशि बदलने की तिथि के नक्षत्र की संख्या जोड कर उसके योगफल को नौ से भाग करना होता है। इस गणना से मिली संख्या के आधार पर ही शनि का वाहन निर्धारित होता है। एक दूसरी विधि भी है, इसमें शनि के राशि प्रवेश करने की तिथि की संख्या, ऩक्षत्र संख्या, वार संख्या और नाम के प्रथम अक्षर संख्या सभी को जोडकर योगफल को 9 से भाग देदें, जो शेष संख्या आयेगी वो शनि के वाहन की जानकारी देगी। दोनो विधियों मे यदि शेष 0 बचे तो मानना चाहिए कि आपकी अपेक्षित संख्या 9 है।
सूर्य देव का परिवार
रविवार को सूर्यदेव का दिन माना जाता है। यश और सम्मान हासिल करने के लिए सभी लोग उनकी पूजा करते हैं। पर क्या आप सूर्यदेव के परिवार को जानते हैं। सूर्य देव का परिवार काफी बड़ा है। उनकी संज्ञा और छाया नाम की दो पत्नियां और दस संताने हैं। जिसमे से यमराज और शनिदेव जैसे पुत्र और यमुना जैसी बेटियां शामिल हैं। मनु स्मृति के रचयिता वैवस्वत मनु भी सूर्यपुत्र ही हैं।
सूर्य देव की दो पत्नियां संज्ञा और छाया हैं। संज्ञा सूर्य का तेज ना सह पाने के कारण अपनी छाया को उनकी पत्नी के रूप में स्थापित करके तप करने चली गई थीं। लंबे समय तक छाया को ही अपनी प्रथम पत्नी समझ कर सूर्य उनके साथ रहते रहे। ये राज बहुत बात में खुला की वे संज्ञा नहीं छाया है। संज्ञा से सूर्य को जुड़वां अश्विनी कुमारों के रूप में दो बेटों सहित छह संताने हुईं जबकि छाया से उनकी चार संताने थीं।
देव शिल्पी विश्वकर्मा सूर्य पत्नी संज्ञा के पिता थे और इस नाते उनके ससुर हुए। उन्होंने ही संज्ञा के तप करने जाने की जानकारी सूर्य देव को दी थी।
धर्मराज या यमराज सूर्य के सबसे बड़े पुत्र और संज्ञा की प्रथम संतान हैं।
यमी यानि यमुना नदी सूर्य की दूसरी संतान और ज्येष्ठ पुत्री हैं जो अपनी माता संज्ञा को सूर्यदेव से मिले आर्शिवाद के चलते पृथ्वी पर नदी के रूप में प्रसिद्ध हुईं।
सूर्य और संज्ञा की तीसरी संतान हैं वैवस्वत मनु वर्तमान (सातवें) मन्वन्तर के अधिपति हैं। यानि जो प्रलय के बाद संसार के पुर्निमाण करने वाले प्रथम पुरुष बने और जिन्होंने मनु स्मृति की रचना की।
सूर्य और छाया की प्रथम संतान है शनिदेव जिन्हें कर्मफल दाता और न्यायधिकारी भी कहा जाता है। अपने जन्म से शनि अपने पिता से शत्रु भाव रखते थे। भगवान शंकर के वरदान से वे नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर नियुक्त हुए और मानव तो क्या देवता भी उनके नाम से भयभीत रहते हैं।
छाया और सूर्य की कन्या तप्ति का विवाह अत्यन्त धर्मात्मा सोमवंशी राजा संवरण के साथ हुआ। कुरुवंश के स्थापक राजर्षि कुरु का इन दोनों की ही संतान थे, जिनसे कौरवों की उत्पत्ति हुई।
सूर्य और छाया पुत्री विष्टि भद्रा नाम से नक्षत्र लोक में प्रविष्ट हुई। भद्रा काले वर्ण, लंबे केश, बड़े-बड़े दांत तथा भयंकर रूप वाली कन्या है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कड़क बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया है।
सूर्य और छाया की चौथी संतान हैं सावर्णि मनु। वैवस्वत मनु की ही तरह वे इस मन्वन्तर के पश्चात अगले यानि आठवें मन्वन्तर के अधिपति होंगे।
संज्ञा के बारे में जानकारी मिलने के बाद अपना तेज कम करके सूर्य घोड़ा बनकर उनके पास गए। संज्ञा उस समय अश्विनी यानि घोड़ी के रूप में थी। दोनों के संयोग से जुड़वां अश्विनीकुमारों की उत्पत्ति हुई जो देवताओं के वैद्य हैं। कहते हैं कि दधीचि से मधु-विद्या सीखने के लिये उनके धड़ पर घोड़े का सिर रख दिया गया था, और तब उनसे मधुविद्या सीखी थी। अत्यंत रूपवान माने जाने वाले अश्विनीकुमार नासत्य और दस्त्र के नाम से भी प्रसिद्ध हुए।
सूर्य की सबसे छोटी और संज्ञा की छठी संतान हैं रेवंत जो उनके पुनर्मिलन के बाद जन्मी थी। रेवंत निरन्तर भगवान सूर्य की सेवा में रहते हैं।
शनिदेव के हैं नौ वाहन
पानी की टंकी से क्लोरीन के रिसाव से भोपाल में अफरा-तफरी, हालात काबू में
भोपाल| मध्य प्रदेश के भोपाल में बुधवार देर रात एक टैंक से क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद कई लोगों ने आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की। मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कम से कम चार-पांच लोगों को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना भोपाल के ईदगाह इलाके में स्थित मदर इंडिया कॉलोनी की है।
हालात का जायजा लेने मौके पर पहुंचे जिला कलेक्टर अविनाश लावानिया ने बताया कि टैंक से क्लोरीन गैस निकलने से लोग घबरा गए और वे अपने घरों से बाहर निकल आए।
उन्होंने कहा, "पानी में क्लोरीन अधिक होने के कारण समस्या हुई, हालांकि स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। नगर निगम के अधिकारियों ने पानी में क्लोरीन के स्तर को कम करना शुरू कर दिया है। टैंक से पानी ओवरफ्लो हो गया और इससे लोगों को खुजली और सांस लेने में समस्या महसूस हुई। चार-पांच लोगों को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।"
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने भी घटनास्थल का दौरा किया और बाद में उन्होंने अस्पताल में भर्ती लोगों से भी मुलाकात की।
सारंग ने हमीदिया अस्पताल में प्रेस से बात करते हुए कहा, "स्थिति अब नियंत्रण में है और लोगों को घबराना नहीं चाहिए। किसी भी व्यक्ति की आंखों में जलन या सांस लेने में समस्या के बारे में शिकायत करने के लिए मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है। हम इस स्तर पर और कुछ भी कहने में असमर्थ हैं। यह समस्या कैसे हुई यह जानने के लिए मामले की जांच की जाएगी।"
इस घटना ने जनता में दहशत पैदा कर दी, क्योंकि राज्य की राजधानी के लोगों ने 1984 में भी यही स्थिति देखी थी, जब हानिकारक गैस के रिसाव ने कई लोगों की जान ले ली थी और हजारों लोग कई बीमारियों से बचे हुए थे। 1984 में 2-3 दिसंबर की दरम्यानी रात को भोपाल में एक यूनियन कार्बाइड कारखाने से गैस छोड़ी गई थी। इस घटना को दुनिया की सबसे बड़ी रासायनिक आपदा के रूप में जाना जाता है।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (27 अक्टूबर 2022)
- मेष राशि :- शरीर सुख, आर्थिक कठिनाई, संतान सुख तथा विद्या में उन्नति अवश्य होगी।
- वृष राशि – शरीर कष्ट, पत्नी को सुख होगा, आर्थिक पारिवारिक संतान आदि को कष्ट हो।
- मिथुन राशि – अपमान जनक स्थिति, कार्यक्षेत्र में परिवर्तक, संतान आदि को कष्ट अवश्य हो।
- कर्क राशि – कृषि व्यापार का लाभ, शारीरिक सुख, विरोधियों से भय होगा, कर्ज होगा।
- fिसंह राशि – धार्मिक कार्यों में रुचि, मातृ-पितृ कष्ट होवे, वाहन भय तथा पानी से दूर रहे।
- कन्या राशि – शारीरिक सुख, विरोधियों पर विजय, मित्रों की प्रगति के कार्य अवश्य बनेंगे।
- तुला राशि – स्वजनों से विरोध, आर्थिक हानि कार्य, परिवर्तन, संतान से सुख अवश्य होगा।
- वृश्चिक राशि – शारीरिक सुख, व्यापारिक यात्रा, धन हानि, नेत्र कष्ट विद्या बाधा होगी।
- धनु राशि – शारीरिक सुख, आर्थिक कष्ट, आकस्मिक धन लाभ होवे, कार्य में सफलता।
- मकर राशि – आर्थिक कष्ट, समाज विरोध, व्यापार, नौकरी से लाभ होवे, ध्यान रखे।
- कुंभ राशि – शारीरिक सुख, साधन की कमी होवे, स्वजन विरोध होगा।
- मीन राशि – शरीर कष्ट, नेत्र पीड़ा, धन हानि तथा शारीरिक रोग प्राप्त होगा।
आत्म-निर्भर भारत और विज्ञान के विकास के लिए तकनीकी का उन्नत होना जरूरी : मंत्री सखलेचा
भोपाल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्म-निर्भर भारत एवं विज्ञान के विकास की परिकल्पना के साथ तकनीकी विकास की गति को बढ़ावा देना हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए और यही समय की माँग भी है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा बुधवार को दिल्ली में तीन दिवसीय इंडियन स्पेस कांग्रेस-2022 कॉन्फ्रेंस एवं एक्सपो के शुभारंभ-सत्र को संबोधित कर रहे थे।
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अगले 25 वर्षों के लिए एक रोडमैप पर चर्चा करने के लिए सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन, एसआईए-इंडिया, अंतरिक्ष विभाग (इसरो), नीति आयोग, एनएसआईएल, दूर संचार विभाग, रक्षा मंत्रालय समेत कई भारतीय एवं विदेशी संस्थाओं के सहयोग से सम्मेलन एवं एक्सपो के पहला संस्करण 26 से 28 अक्टूबर तक किया जा रहा है। इसमें उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता, कानूनी पेशेवर और शिक्षाविद द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र पर आगामी रणनीति, विभिन्न तकनीकी समस्याओं के निराकरण और तरीकों पर मंथन किया जायेगा।
मंत्री सखलेचा ने कहा कि हमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ अंत्योदय के सपने को साकार करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति को सक्षम बनाना है। सखलेचा ने बताया कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और धर्म एक साथ चलते हैं। प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए इनका एक साथ अध्ययन किया जाना चाहिए।
प्रथम सत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष डॉ. सोमनाथ, संचार भवन के अध्यक्ष राजारमन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार, सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पावुलुरी सुब्बा राव उपस्थित थे।
मंत्री सारंग ने लिया छठ पूजा की तैयारियों का जायजा
भोपाल : चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि पूरी तैयारी के बाद पूजा स्थलों पर भव्यता के साथ छठ पूजा की जायेगी। सारंग ने लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के मद्देनजर भोपाल में विभिन्न स्थानों पर बने छठ पूजा स्थलों का निरीक्षण किया। मंत्री सारंग ने बुधवार को अन्ना नगर शाखा ग्राउंड, सुभाष नगर दुर्गा मंदिर, एकतापुरी दशहरा मैदान, राजेंद्र नगर, करोंद पर तैयार किये जा रहे छठ पूजा स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने जल कुंडों की साफ-सफाई, स्वच्छता, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था एवं छठ पूजा करने वालों की सुविधा और सुरक्षा संबंधी जानकारी ली।
मंत्री सारंग ने कहा कि प्रत्येक त्यौहार बेहद हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। विगत 10 वर्षों से छठ पूजा के लिये सूर्य कुण्डों का निर्माण कर घाटों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान लोगों को असुविधा नहीं हो, इस के लिये छठ घाटों पर सुविधा एवं सुरक्षा का ध्यान रखते हुए व्यवस्था की जा रही है।
छठ घाटों के पास लगाये जायेंगे अस्थाई शौचालय
मंत्री सारंग ने कहा कि छठ पूजा के अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र की महिलायें पूजन में शामिल होती हैं। महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं हो, इसके लिये छठ घाटों के समीप नगर निगम द्वारा अस्थाई शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। निरीक्षण के दौरान महापौर मालती राय, एमआईसी सदस्य अशोक वाणी और आनंद अग्रवाल, क्षेत्रीय पार्षद, नगर निगम के अधिकारी एवं स्थानीय रहवासी उपस्थित रहे।
मंत्री सारंग ने गोवर्धन पूजा पर की गो-पूजा
मंत्री सारंग ने गोवर्धन पूजा के अवसर पर निज निवास पर विधि-विधान के साथ गो-माता की पूजा-अर्चना की। मंत्री सारंग ने गो-माता को रोटी खिलाकर आरती उतारी। मंत्री सारंग ने कहा कि सनातन संस्कृति में पूज्य एवं वेदों में प्रतिष्ठित गोमाता में सभी देवी-देवता विद्यमान रहते हैं। जिस प्रकार देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि देती हैं उसी प्रकार गो माता भी अपने दूध से जन-मानस को स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि गाय सम्पूर्ण मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गो-संवर्धन हमारा कर्त्तव्य और समाज की जरूरत भी है।
कटी हुई अंगुली से खुला मंदिर में चोरी करने वाले गिरोह का राज
रतलाम । एक माह पहले ग्राम मनुनिया स्थित प्रसिद्ध मनुनिया महादेव मंदिर में हुई सनसनीखेज चोरी की वारदात का पुलिस ने राजफाश कर दिया है। वारदात निम्बाहेड़ा (राजस्थान) के तीन सदस्यीय गिरोह (दो भाई व एक काका) ने की थी। वे मंदिर से चांदी के करीब आठ किलो वजनी छत्र, नाग व जलाधारी चुराकर ले गए थे। सीसीटीवी कैमरे में तीन नकाबपोश वारदात को अंजाम देते कैद हुए थे। इनमें से एक युवक के हाथ की अनामिका अंगुली कटी हुई थी, जिससे उसकी पहचान हुई। आरोपितों ने छत्र, नाग व जलाधारी को गलवा कर कुछ हिस्सा बेच दिया था। ताल पुलिस ने मुख्य आरोपित घनश्याम व चांदी खरीदने वाले गिरीराज को गिरफ्तार कर लिया है। एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि वारदात के बाद मंदिर के सीसीटीवी कैमरे चेक किए थे। फुटेज में तीन नकाबपोश कैद हुए थे, इनमें से एक के बाये हाथ की अनामिका अंगुली कटी दिखाई दी थी। अरोपितों की तलाश में 15 टीमें लगाई थी। फुटेज इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किए थे। आरोपितों की तलाश करने के दौरान निम्बाहेड़ा में लोगों को फुटेज दिखाकर मुखबिर लगाए गए। मुखबिरों से जानकारी मिली कि फुटेज में दिख रहे तीन में से दो युवक 27 वर्षीय घनश्याम पुत्र उदयलाल नायक निवासी अंबेमाता मंदिर के पास सेमलिया रोड निम्बाहेडा व उसका भाई पूरण नायक है, वे पहले निम्बाहेड़ा के मंदिर में चोरी करने के मामलों में पकड़े जा चुके हैं। निम्बाहेडा के कोतवाली थाना ने आरोपितों के बारे में जानकारी लेकर उनकी तलाश की गई। 25 अक्टूबर को घनश्याम को निम्बाहेड़ा से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि 18 सितंबर 2022 को वह भाई पूरण व रिश्ते के काका मिट्टू नायक के साथ निम्बाहेड़ा से बाइक पर ग्राम मनुनिया पहुंचे थे। रात में मंदिर के गर्भगृह का ताला तोड़कर वारदात की थी। घनश्याम की अंगुली बचपन में पत्थर तोड़ते समय कट गई थी।
पांच सौ ग्राम चांदी बेच दी थी
घनश्याम ने ढाई किलो चांदी अपने घर में छिपाकर रखी थी। शेष आभूषण रायपुर (राजस्थान) के गिरिराज सोनी की दुकान पर गलवाकर बट्टिया बनवाई थी। गिरिराज को 500 ग्राम की एक बट्टी बेची थी। घनश्याम के घर से सात किलो 100 ग्राम चांदी की बट्टियां, बाइक, लोहे की राड व पेंचकस जब्त किया गया। बाद में रायपुर से आरोपित 46 वर्षीय गिरिराज पुत्र भेरुलाल सोनी निवासी कबीरद्वारा के पास रायपुर जिला भीलवाड़ा को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से गलाकर बनाई गई बट्टी बरामद की गई।
61 हजार रुपये का इनाम था घोषित
वारदात की खबर से लोगों में रोष फैल गया था। युवा कांग्रेस आदि ने एसपी को ज्ञापन सौंपकर चोरों को पकड़ने की मांग की थी। वहीं व्यापारियों ने एक दिन ताल बंद रखकर चोरों की गिरफ्तारी की मांग की थी। एसपी अभिषेक तिवारी ने चोरों की गिरफ्तारी पर दस हजार व मंदिर समिति ने 51 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
31 तक पुलिस रिमांड पर
घनश्याम ने वर्ष 2020 में भी साथियों के साथ मिलकर मनुनिया महादेव मंदिर के दानपात्र से रुपये चुराना, राजस्थान के कई मंदिरों की चोरी में गिरफ्तार होना, रतलाम के ग्राम भाटखेड़ा (जावरा) हनुमान मंदिर, होरी हनुमान मंदिर के पास रामदेवरा व आलोट में शिवजी के मंदिर के दानपात्र से रुपये चुराना बताया है। घनश्याम व गिरिराज को बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने गिरिराज को जेल भेज दिया व घनश्याम को 31 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर रखने के आदेश दिए हैं। उससे उसके साथियों व अन्य वारदातों के बारे में पूछताछ की जा रही है।
मुख्यमंत्री चौहान ने स्व. विद्यार्थी की जयंती पर नमन किया
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्म, लेखनी और विचारों की पवित्र त्रिवेणी, महान स्वतंत्रता सेनानी, भारतीय पत्रकारिता के पुरोधा श्रद्धेय स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’ का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को इलाहाबाद में हुआ था। वे एक निडर और निष्पक्ष पत्रकार, समाज-सेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास में उनका नाम अजर-अमर है। उन्होंने अपनी लेखनी की ताकत से भारत में अंग्रेज़ी शासन की नींद उड़ा दी थी। साथ ही अपनी कलम और वाणी के साथ अहिंसावादी विचारों और क्रांतिकारियों को समान रूप से समर्थन और सहयोग दिया। वे ‘कर्मयोगी’ और ‘स्वराज्य’ जैसे क्रांतिकारी पत्रों से जुड़े और इनमें अपने लेख भी लिखे। वे समाचार-पत्र “प्रताप” के संपादक भी रहे। अपनी क्रांतिकारी पत्रिकारिता के कारण उन्हें बहुत कष्ट झेलने पड़े। सरकार ने उन पर कई मुक़दमे किये, भारी जुर्माना लगाया और कई बार गिरफ्तार कर जेल भी भेजा। उनका निधन 25 मार्च 1931 को कानपुर में हुआ।
मुख्यमंत्री चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान में पौध-रोपण किया
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान में गुलमोहर, शहतूत और पिथोरिया के पौधे लगाए। मुख्यमंत्री चौहान के साथ स्वदेशी जागरण मंच की महिला प्रकोष्ठ मध्य भारत प्रांत की सह प्रमुख सीमा भारद्वाज और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने भी अपने जन्म-दिवस पर पौध-रोपण किया। प्रमोद भारद्वाज और अभिजात्य भारद्वाज भी शामिल हुए। लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी भोपाल के राष्ट्रीय कैडेट कोर के सर्व आर्यमन सिंह, अनिरूद्ध शर्मा, शिवांग गुप्ता, श्रद्धा गौतम और तरनजीत कौर भी पौध-रोपण में शामिल हुईं। कैडेट्स समाज-सेवा के साथ पौध-रोपण में भी निरंतर सक्रिय हैं।
सड़कों के रेस्टोरेशन में विलंब करने वाले ठेकेदारों पर कार्यवाही की जाए – मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भोपाल की सड़कों को तुरंत दुरूस्त किया जाए। सड़कों के रख-रखाव के लिए नगर निगम और पीडब्ल्यूडी परस्पर समन्वय कर कार्य करें। सीवरेज और पानी की पाईप लाईन के लिए खोदी गई सड़कों का रेस्टोरेशन जिन ठेकेदारों ने नहीं किया है, उन पर कार्यवाही की जाए। एक पखवाड़े के बाद मैं पुन: सड़कों का निरीक्षण करूँगा।
मुख्यमंत्री चौहान प्रात:कालीन बैठक में भोपाल की सड़कों की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। नगर निगम आयुक्त वी.एस.कोलसानी उपस्थित थे। प्रमुख सचिव लोक निर्माण नीरज मंडलोई तथा प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास मनीष सिंह वुर्चअली शामिल हुए। बताया गया कि तुलनात्मक रूप से अधिक वर्षा के कारण सड़कें प्रभावित हुई हैं।
गौ-संरक्षण को सामाजिक दायित्व बनाना आवश्यक – मुख्यमंत्री चौहान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी बैठक में कहा कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से आयोजित गोवर्धन पूजा के माध्यम से हमें जन-जन को वृक्षारोपण, गो-वंश के संरक्षण और प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करना है। गोवर्धन पूजा सही अर्थों में पर्यावरण और प्रकृति की पूजा है, इसका आरंभ भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। उन्होंने बृजवासियों से कहा था कि गोवर्धन पर्वत जंगल, घास और फल-फूल के माध्यम से लोगों और पशुओं को जीवन देता है। गोवर्धन पूजा का अर्थ पर्यावरण की रक्षा करना है और जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के संकट और प्रभावों को देखते हुए गोवर्धन पूजा अधिक प्रासंगिक हो गई है। आज आयोजित गोवर्धन पूजा से अधिक से अधिक किसान, पर्यावरण प्रेमी और जन-सामान्य को जोड़ा जाएँ।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि गो-वंश की व्यवस्था के लिए गो-शालाओं को आत्म-निर्भर बनाने के लिए भी गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी। सड़कों पर रह रहे गो-वंश की सुरक्षा के लिए गो-वंश को गो-शाला तक लाने के कार्य को सामाजिक दायित्व के रूप में निभाने के लिए हर व्यक्ति को प्रेरित करें। वर्तमान में 1663 गो-शालाएँ संचालित हैं। साथ ही अन्य गो-शालाओं को भी सक्रिय किया जाएगा। पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देना आवश्यक है। वृक्षा-रोपण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भावी पीढ़ी को बचाने का उपयुक्त माध्यम है। गोवर्धन पूजा से वृक्षा-रोपण, प्राकृतिक खेती और गो-वंश के संरक्षण की गतिविधियों में अधिक से अधिक लोगों और गो-संरक्षण के लिए सक्रिय संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री चौहान ने गोवर्धन पूजा की
भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ निवास में गोवर्धन पूजा की। उन्होंने निवास के उद्यान में बनाई गई गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति की परिक्रमा भी की। मुख्यमंत्री चौहान ने गो-माता एवं बछियों को दुलार कर पूजा की और उन्हें आहार खिलाया। मुख्यमंत्री चौहान ने प्रकृति, जीव-जन्तुओं के संरक्षण, प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और संपन्नता की कामना की। पूजन में वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, विधायक रामेश्वर शर्मा तथा पारिवारिक मित्र शामिल हुए।















