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सीएम राइज स्कूलों का भूमि-पूजन कार्यक्रम बेहतर ढंग से हो – मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल : मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इन्दौर में 29 अक्टूबर को होने जा रहे प्रदेश के 73 सीएम राइज स्कूलों के भूमि-पूजन कार्यक्रम का आयोजन बेहतर रूप में हो। मुख्यमंत्री  चौहान निवास पर आयोजन की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्य सचिव  इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा  रश्मि अरूण शमी सहित अधिकारी मौजूद थे।

रू. 2660 करोड़ की लागत के 73 सीएम राइज स्कूलों का भूमि-पूजन

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि इन्दौर में 2660 करोड़ रूपये की लागत के 73 सीएम राइज स्कूलों का भूमि-पूजन होगा, जो प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कार्यक्रम की बेहतर व्यवस्थाओं के साथ व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए।

भामाशाह पुरस्कार कार्यक्रम 3 नवम्बर को

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश भामाशाह पुरस्कार कार्यक्रम 3 नवम्बर को भोपाल में होगा। इसमें 5 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम में करदाताओं की सुविधा के लिए एक किट का विमोचन भी किया जाएगा। कार्यक्रम के बेहतर प्रचार-प्रसार और व्यापक पैमाने पर लोगों के कार्यक्रम को देख सकने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा स्थान तय कर लिया जाए, जिसमें अधिक से अधिक व्यापारी आ सकें।
 

मुख्यमंत्री चौहान ने गोवर्धन पूजा पर प्रदेशवासियों को पर्यावरण-संरक्षण के लिए दिलाए 9 संकल्प

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भोपाल : मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने गोवर्धन पूजा पर प्रदेशवासियों को पौध-रोपण करने, बिजली बचाने, पानी बचाने, लकड़ी के स्थान पर गो-काष्ठ का उपयोग करने, प्राकृतिक खेती अपनाने, गो-ग्रास के लिए योगदान देने, पराली नहीं जलाने और पर्यावरण-संरक्षण के लिए राज्य सरकार के साथ हरसंभव सहयोग देने का संकल्प दिलाया। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि गोवर्धन पूजा पर्यावरण और प्रकृति की पूजा ही है। मुख्यमंत्री  चौहान कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में गोवर्धन पूजा पर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पर्यावरण मंत्री  हरदीप सिंह डंग, चिकित्सा शिक्षा मंत्री  विश्वास सारंग, इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमिश्नर  गोरांग दास विशेष रूप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री  चौहान ने धर्मपत्नी  साधना सिंह के साथ कन्वेंशन सेंटर परिसर में बने गोवर्धन परिक्रमा पर्वत की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री  चौहान ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और संपन्नता की कामना की। कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। पर्यावरण-संरक्षण पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी हुआ। मुख्यमंत्री  चौहान ने प्रदेश के 16 नगर निगमों में शहरी पार्क, शहरी वन क्षेत्र, हरित परिवहन, वायु गुणवत्ता और सौर ऊर्जा के मापदंडों पर रैंकिंग के लिए ग्रीन सिटी इंडेक्स का सिंगल क्लिक से शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि प्रकृति के असंतुलन से मनुष्य के अस्तित्व पर संकट आएगा। हमारी संस्कृति, प्रकृति के दोहन का संदेश देती है, शोषण का नहीं। भारतीय संस्कृति में हर बिंदु पर पेड़ों की पूजा और जियो और जीने दो के सिद्धांत को व्यवहार में लाने का ध्यान रखा गया है। किसान जीव-जंतुओं के चारे के लिए घास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बीड़ के रूप में अपने गाँवों में स्थान छोड़ते थे। आज वही अवधारणा ग्रीन बेल्ट के रूप में लागू हो रही है। प्राणियों में सद्भावना और विश्व के कल्याण का भाव, भारतीय परंपरा में वर्षों से विद्यमान है।

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए वर्तमान में धरती की चिंता करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा लाइफ फॉर एनवायरमेंट कार्यक्रम आरंभ किया गया है। उनके संकल्पों को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध है। धरती बचाने के लिए जीवन शैली में परिवर्तन लाना आवश्यक है। हमें अपने जीवन में पानी बचाने, बिजली बचाने, अपने जन्म-दिवस, शादी की वर्षगाँठ सहित अन्य शुभ अवसरों पर पौधा लगाने को आदत में शामिल करना होगा। विकास और पर्यावरण-संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है। पर्यावरण-संरक्षण के संबंध में जन-साधारण से भी विचार आमंत्रित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों में समाज और सरकार साथ मिल कर कार्य करेंगे। प्रदेश में "ग्रीन एनर्जी-क्लीन एनर्जी" के लिए नवकरणीय ऊर्जा के स्रोतों को प्रोत्साहित करने की दिशा में गतिविधियाँ संचालित हैं।

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि गो-वंश के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार के साथ समाज को भी उठानी होगी। मशीनीकरण के कारण बैलों का उपयोग नहीं रहा है। दुग्ध उत्पादन के योग्य नहीं रही गायों को भी छोड़ दिया जाता है। प्रदेश में 1 करोड़ 87 लाख से अधिक गो-वंश है। बहुत बड़ी संख्या में गो-वंश सड़क पर है। इनके प्रबंधन के लिए समाज और सरकार को संयुक्त रूप से आगे आना होगा। गाय के गोबर से सीएनजी उत्पादन के लिए प्रदेश में प्रयास हो रहे हैं। साथ ही गो-मूत्र और गोबर के अन्य उपयोग भी हैं, इन्हें शामिल कर गो-शालाओं को बहुआयामी बना कर उन्हें आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। शहर और ग्रामों में पौध-रोपण के लिए स्थान निर्धारित किए जाएंगे। इन स्थानों की देख-रेख पंचायत तथा नगरीय निकाय करेंगे। यह स्थान गो-वंश के लिए भी सुरक्षित होंगे।

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग से हो रही खेतों की दुर्दशा को रोकने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है। सभी किसान भाई अपनी-अपनी कृषि भूमि के एक भाग में प्राकृतिक खेती को अपनाएँ। मध्यप्रदेश में जीडीपी की गणना में ग्रास एनवायरमेंटल प्रोडक्ट को भी जोड़ा जाएगा। प्राकृतिक संसाधन, वन और जैव विविधता को भी जीडीपी में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करेगी। प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना समय की मांग है। गोवर्धन पूजा कर्मकांड नहीं प्रकृति के संरक्षण का अभियान है। समाज और सरकार मिल-कर धरती बचाने का संकल्प लें।

इस्कॉन संस्था के  गोरांग दास जी ने कहा कि मुख्यमंत्री  चौहान द्वारा पर्यावरण हितैषी जीवन-शैली को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित सामाजिक नेतृत्व के इस कार्यक्रम की अवधारणा सराहनीय है। मानव समाज में भ्रांतियाँ विद्यमान हो गई हैं कि धन ही सुख का आधार है, तकनीक से शांति प्राप्त की जा सकती है, अस्त्रों से सुरक्षित रह जा सकता है, भूमि से भोग की सभी सामग्री प्राप्त की जा सकती है और अपशिष्ट के लिए पृथ्वी का निर्बाध उपयोग किया जा सकता है। जिससे प्राकृतिक व मनुष्य का आतंरिक पर्यावरण बिगड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ, जन-सामान्य में आत्म-संयम विकसित करने धर्म गुरुओं का सहयोग ले रही है। जीवन की निरंतरता के लिए पर्यावरण के प्रति नम्रता और कृतज्ञता का भाव आवश्यक है।

पर्यावरण मंत्री  हरदीप सिंह डंग ने कहा कि मुख्यमंत्री  चौहान की पर्यावरण संवेदी सोच के परिणाम स्वरूप ही गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम की संकल्पना साकार हुई। मातृ-भूमि को स्वच्छ सुंदर बनाना हमारा कर्त्तव्य है। प्राकृतिक संपन्नता से ही प्रदूषण की समस्या के समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रदेश में अंकुर अभियान में 16 लाख लोगों द्वारा पंजीयन कराया गया है।

पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) तथा मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सभी जिले और विकासखंड वर्चुअली शामिल हुए। विभिन्न टी.वी. चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मस से भी लोग कार्यक्रम से जुड़ें। कार्यक्रम में अंकुर अभियान के प्रतिभागी और ग्राम पंचायतों में प्रस्फुटन समितियों के सदस्य सहभागी रहें। गोवर्धन-पूजा के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश की सभी गोशालाएँ, कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि प्रशिक्षण केन्द्र, कृषि उपज मंडियाँ, नाबार्ड के एफपीओ, सहकारी समितियाँ, कृषि महाविद्यालय और विश्वविद्यालय वर्चुअली शामिल हुए।
 

शाजापुर में 3 नवंबर को कंस वधोत्‍सव, निभाएंगे 269 वर्ष पुरानी परंपरा

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शाजापुर  ।    कंस का दरबार सज गया है, अत्याचार व घमंड के प्रतीक कंस का यह राज ज्यादा दिन नहीं चलेगा, क्योंकि अत्याचारी कंस का जल्द वध होगा। भगवान श्रीकृष्ण अपने भाई बलराम व सखाओं के साथ आकर कंस को समाप्त कर देंगे। कंस वधोत्सव की यह अनूठी परंपरा का निर्वहन शाजापुर में किया जाएगा। 269 साल पुरानी इस परंपरा को निभाने के लिए कंस वधोत्सव समिति द्वारा तैयारी की जा रही है। इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में जिले सहित आसपास के क्षेत्र के लोग भी पहुंचेंगे। घमंड व अत्याचार के प्रतीक कंस के पुतले को कंस चौराहे पर बैठा दिया है, कंस के इस दरबार का विनाश दशमी के दिन किया जाएगा। शाजापुर शहर के सोमवारिया में कंस के पुतले को बैठा दिया गया है। देश के मथुरा के बाद शाजापुर में इस परंपरा का सैकड़ों सालों से इस परपंरा का निर्वहन किया जा रहा है। मथुरा के बाद शाजापुर में करीब 269 वर्षों से यह आयोजन लगातार हो रहा है। आयोजन को भव्यता पूर्वक मनाने के लिए समिति द्वारा तैयारियां की जा रही है। आयोजन समिति के संयोजक तुलसीराम भावसार, पदाधिकारी अजय उदासी बताते हैं कि कार्तिक माह की दशमी 03 नवंबर को कंस वधोत्सव होगा। आयोजन का यह 270 वां वर्ष रहेगा । संयोजक तुलसीराम भावसार ने बताया कि दशमी की शाम को देव व दानव की वेशभूषा में कलाकार तैयार होंगे। इसके पश्चात देव व दानवों का जुलूस निकला जाएगा। यह जुलूस बालवीर हनुमान मंदिर से, धानमंड़ी चौराहा, किलारोड, छोटा चौक होते हुए आजाद चौक में पहुंचेगा। यहां पर रात करीब 11 बजे तक देव व दानवों में चुटीले संवादों का वाक युद्ध होगा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे धजे कलाकार देर रात तक वाक युद्ध करेंगे। चुटीले संवादों का लोग लुत्फ लेंगे। रात 11 बजे कलाकार आजाद चौक से सोमवारिया बाजार में कंस चौराहा पर पहुंचेंगे। कंस चौराहा पर भी वाक युद्ध होगा। 11. 45 बजे गवली समाजजनों के पहुंचने पर वरिष्ठों का सम्मान किया जाएगा। इसके पश्चात रात 12 बजते ही कंस वध किया जाएगा। पांरपरिक वेषभूषा में श्रीकृष्ण बने कलाकार द्वारा कंस के पुतले का वध करेंगे। सिंहासन से नीचे गिरते हुए पुतले को गवली समाजजन लाठियां भांजते हुए पीटते हुए घसीटते हुए ले जाएंगे।

ढाल व तलवार लिए कंस का पुतला

आयोजन समिति द्वारा चौराहे पर जो कंस का पुतला तैयार किया गया है उसके एक हाथ में तलवार तो दूसरे हाथ में ढाल है। लाल रंग के वस्त्र पहने हुए पुतला काफी क्रोधित मुद्रा में लग रहा है। लेकिन अत्याचार के प्रतीक कंस को भगवान श्री कृष्ण समाप्त करेंगे। कंस वधोत्सव की भगवान श्री कृष्ण की लीला पर आधारित आयोजन का क्षेत्रवासियों को इंतजार है।

पूर्व मंत्री इमरती देवी के विवादित बोल, हम किसी से नहीं डरने वाले, पुलिस हो या प्रशासन

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मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री और कट्टर सिंधिया समर्थक इमरती देवी का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें पूर्व मंत्री इमरती देवी विवादित हुए देते हुए नजर आ रही है। इस वायरल वीडियो में पूर्व मंत्री इमरती देवी अनुसूचित जाति की बैठक में संबोधित करते हुए बोल रही है कि हमें किसी से डरने की जरूरत नहीं है चाहे पुलिस हो या प्रशासन बल्कि यह हम से डरते हैं।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भूमाफिया हमारे समाज से ना टकराए और चाहे किसी से टकरा लें क्योंकि हमारे समाज का खून खोलता है तो हम किसी से नहीं डरते हैं। इसके साथ ही इस बैठक में यह नारे लगाए जा रहे हैं कि "जो जमीन सरकारी है वह हमारी है" मंच से यह कहती हुए नजर आ रही है कि आज पूरे देश भर में कहीं भी चले जाओ आधे गांव हमारे समाज से भरे पड़े हुए हैं जब हमारी इतनी जनसंख्या है तो हमें किसी से डरना है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कैसे डबरा विधानसभा में अच्छे अच्छों ने मुझे यहां से हटाने की कोशिश की लेकिन इमरती देवी किसी से भी नहीं डालें और ना ही वह डरने वाली है गौरतलब है कि यह वायरल वीडियो डबरा विधानसभा का है और इस वीडियो में पूर्व मंत्री इमरती देवी अपने समाज यानि अनुसूचित जाति की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंची थी

भाई ने टिफिन में रखकर पटाखा जलाया, उड़कर युवती के पेट में लगा

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 मंदसौर ।    मंदसौर जिले के भावगढ़ थाने के ग्राम करजू में गोवर्धन पूजा के दौरान एक दुखद घटना हो गई। इससे पूरे गांव में मातम छा गया। युवती के भाई की छोटी सी गलती से उसकी मौत हो गई। वह पटाखा चला रहा था इसी दौरान उसे शरारत सूझी और पटाखे पर स्टील का टिफिन रख दिया। इस समय युवती वीडियो बना रही थी। पटाखा चलते ही टिफिन का ढक्‍कन उड़ा और उसका नुकीला सिरा युवती के पेट में घुस गया। जिला अस्पताल लाते समय युवती की मौत हो गई। मंदसौर के भावगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम करजू में मस्ती-मस्ती में टिफिन में सुतली बम फोड़ना महंगा पड़ गया और एक पल में ही दीपावली की सारी खुशिया मातम में बदल गई। प्राथमिक तौर पर मिली जानकारी के अनुसार भावगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम करजू में बुधवार को गोवर्धन पूजा के बाद 20 वर्षीय युवती टीना पुत्री गोवर्धनलाल माली अपने भाई के साथ पटाखे चला रही थी। भाई स्टील के टिफिन में बम रखकर फोड़ रहा था और बहन उसका वीडियो बना रही थी। इसी दौरान बम के धमाके के साथ स्टील टिफिन का एक टुकड़ा उड़कर युवती के पेट में जा घुसा। थोड़ी ही देर में युवती की हालत गंभीर होने लगी। स्‍वजन तुरंत युवती को लेकर जिला अस्पताल के लिए निकले। तभी रास्ते में गंभीर घायल युवती ने दम तोड़ दिया। पटाखों से खेलने की लापरवाही से युवती की जान चली गई। वहीं परिवार की खुशियां मातम में बदल गई।

कलंगी और तुर्रा सेनाओं के वीरों के बीच हिंगोट युद्ध, बरस रहे आग के गोले

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इंदौर ।   गौतमपुरा में हर वर्ष दीपावली के अगले दिन होने वाला हिंगोट युद्ध इस बार दीपावली के दो दिन बाद यानी आज बुधवार को हो रहा है। युद्ध के मैदान में कलंगी और तुर्रा सेनाओं के वीर एक दूसरे के सामने हैं। उनके हाथ में हैं सुलगते हिंगोट। युद्ध के पहले दोनों सेनाओं के योद्धाओं न भगवान देवनारायण के मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद लेंगे। गौतमपुरा में करीब दो सौ वर्षों से हिंगोट युद्ध की परंपरा चल रही है। हालांकि कोरोना महामारी की वजह से दो वर्ष इसका निर्वाहन नहीं हो सका था। हजारों लोग युद्ध की इस परंपरा के साक्षी बनते हैं। खास बात यह कि इस युद्ध में कोई हार-जीत नहीं होती। गले मिलकर योद्धा युद्ध की शुरुआत करते हैं और गले मिलकर ही युद्ध का समापन होता है। गौतमपुरा के योद्धाओं के दल का नाम तुर्रा होता है तो रूणजी गांव के योद्धाओं का कलंगी। युद्ध मैदान के पास बने देवनारायण भगवान के मंदिर में पूजा के साथ युद्ध की शुरुआत होती है। हिंगोट युद्ध कैसे शुरू हुआ और यह परंपरा में कैसे तब्दील हुआ इसका प्रमाण तो किसी के पास नहीं लेकिन बताया जाता है कि मुगल काल में गौतमपुरा क्षेत्र में रियासत की सुरक्षा में तैनात सैनिक मुगल सेना के घुड़सवारों पर हिंगोट दागते थे। निशाना सटीक बैठे इसके लिए वे कड़ा अभ्यास करते थे। धीरे-धीरे यही अभ्यास परंपरा में बदल गया।

यह होता है हिंगोट

हिंगोरिया के पेड़ का फल होता है हिंगोट। नींबू आकार के इस फल का बाहरी आवरण बेहद सख्त होता है। युद्ध के लिए पेड़ों से हिंगोट तोड़कर इसका गूदा निकालकर इसे सुखाया जाता है। फिर इसमें बारूद भरकर इसे तैयार किया जाता है। हिंगोट सीधी दिशा में चले, इसके लिए हिंगोट में बांस की पतली किमची लगाकर इसे तीर जैसा बना दिया जाता है।

महामारी की वजह से दो वर्ष टला युद्ध

गौतमपुरा में दीपावली के अगले दिन हिंगोट युद्ध की परंपरा करीब दो सौ वर्ष पुरानी है। कोरोना महामारी की वजह से दो वर्षों से इस परंपरा का निर्वाहन नहीं हो सका था। प्रशासन ने आयोजन की अनुमति ही नहीं दी थी। इस वर्ष आयोजन को लेकर ग्रामीणों में ही नहीं आसपास के शहरों में भी जबरदस्त उत्साह है।

12 से 15 रुपये में हिंगोट

गौतमपुरा में हिंगोट का मूल्य 12 से 15 रुपये प्रति नग है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि किसी समय हिंगोट एक-डेढ रुपये में आसानी से मिल जाता था लेकिन अब लागत बढ़ने की वजह से इसके दाम बढ़ गए हैं।

शुरू हो गई प्रशासन की तैयारियां

बुधवार को युद्ध को लेकर प्रशासन तैयारियों में जुट गया था। युद्ध मैदान के दोनों ओर सुरक्षा जालियां लगाई हैं। बताया जा रहा है कि दोपहर से ही युद्ध स्थल के आसपास वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई। युद्ध मैदान के आसपास हिंगोट की बिक्री भी प्रतिबंधित कर दी गई ।

‘रामसेतु’ फिल्‍म देख आनंदित हुए गृहमंत्री नरोत्‍तम मिश्रा, अक्षय कुमार को दी बधाई, भाजपा प्रवक्‍ता ने की टैक्‍स-फ्री करने की मांग

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भोपाल ।   25 अक्टूबर को रिलीज हुई अक्षय कुमार की फिल्म 'रामसेतु' को प्रदेश में टैक्‍स-फ्री करने की मांग की जा रही है। दरअसल अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म की कहानी रामसेतु पर आधारित है। फिल्म में अक्षय एक पुरातत्वविद की भूमिका निभा रहे हैं, जो कि पौराणिक गाथाओं को वैज्ञानिक आधार पर स्थापित करने का काम करते हैं। फिल्म को लेकर मप्र के गृह मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा अक्षय कुमार को बधाई दे चुके हैं। गृह मंत्री नरोत्‍तम ने फिल्म की प्रशंसा करते हुए कहा है कि इस तरह की फिल्म सनातन धर्म को गौरवान्वित करती हैं। उन्‍होंने इस फिल्‍म को अद्भुत और अकल्पनीय बताते हुए कहा कि मिथकों से परे, वैज्ञानिक और तार्किक आधार पर रामसेतु के ऐतिहासिक निर्माण को प्रतिस्थापित करने वाले इस प्रयास के लिए अभिनेता अक्षय कुमार जी और फिल्म की पूरी टीम का अभिनंदन। इसके साथ-साथ उन्‍होंने इशारे-इशारे में कांग्रेस पर तंज कसा और कहा कि यह उन सभी लोगों के भ्रम को तोड़ती है जो भगवान श्रीराम को, आदि ग्रंथ रामायण को और रामसेतु को काल्पनिक बताने का प्रलाप करते रहते हैं।

डा. केसवानी ने की फिल्म को कर मुक्त करने की मांग

फिल्म को देखने के बाद भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. दुर्गेश केसवानी ने फिल्म को करमुक्त करने की मांग की है। डा. केसवानी ने सीएम को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि फिल्म को करमुक्त किया जाए, क्योंकि फिल्म में वैज्ञानिक और तार्किक आधार पर बताया है कि राम सेतु का निर्माण भगवान राम और उनकी वानर सेना ने किया था। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक यह फिल्म सनातन धर्म की आस्थाओं और सांस्कृतिक विरासत को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करती है और पूरी दुनिया में मौजूद 100 करोड़ से भी ज्यादा हिंदुओं को गौरवान्वित करती है। इस कारण फिल्म को प्रदेश में कर मुक्त किया जाना चाहिए।

कांग्रेस के दुष्प्रचार को झटका देती है फिल्म

फिल्म देखने के बाद भाजपा प्रवक्ता केसवानी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि फिल्म के विभिन्न वैज्ञानिक तर्कों के कारण कांग्रेस के रामसेतु के विरुद्ध किए गए दुष्प्रचार को भी झटका लगा है। कांग्रेस हमेशा यह कहती आई है कि रामसेतु का निर्माण भगवान राम के समय नहीं हुआ था। वहीं कई वैज्ञानिक तर्क मौजूद हैं, जो रामसेतु की प्रमाणिकता को सिद्ध करते हैं। फिल्म रामसेतु की कहानी भी इन्हीं प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ती है। फिल्म रामसेतु की पूरी कहानी त्रेता युग में निर्मित राम सेतु के आसपास घूमती है। अक्षय कुमार के अलावा फिल्म में जैकलीन फर्नांडीस, नस्सर, सत्यदेव और नुसरत भरूचा ने अहम भूमिका निभाई है।

USB Type-C के साथ आएंगे iPhone

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Apple ने खुद कंफर्म की है कि वे जल्द ही USB Type-C चार्जिंग पोर्ट के साथ अपने iPhone की शिपिंग शुरू कर देगा। अभी तक, Apple अपने iPhone मॉडल को एक लाइटनिंग पोर्ट के साथ शिप करता है, जो उसके डिवाइसेस को USB Type-C चार्जर के साथ इन-कम्पैटिबल बनाता है जो कि इन दिनों अधिकांश स्मार्टफोन कंपनियों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। अब, कंपनी ने पुष्टि की है कि वह जल्द ही अपने iPhones में लाइटनिंग पोर्ट को यूएसबी-सी पोर्ट से बदल देगी।

ऐप्पल के वर्ल्डवाइड मार्केटिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ग्रेग जोस्वियाक ने पुष्टि की, जो वॉल स्ट्रीट जर्नल की सालाना टेक लाइव कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या ऐप्पल यूरोपीय संघ द्वारा पारित नए कानून का पालन करेगा, जो 2024 तक सभी कंपनियों के लिए यूएसबी टाइप-सी चार्जर के साथ अपने डिवाइसेस को शिप करना अनिवार्य बनाता है, एग्जीक्यूटिव ने कहा कि ऐप्पल नए कानूनों का पालन करेगा। हालांकि, उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ऐप्पल कब स्विच करेगा। Apple के एग्जीक्यूटिव ने इवेंट में कहा "जाहिर है, हमें इसका पालन करना होगा।"

जोसविआक ने कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए यह भी कहा कि ऐप्पल और यूरोपीय संघ लंबे समय से एक-दूसरे के साथ थे, यह बताते हुए कि यूरोपीय अधिकारी एक बार कैसे चाहते थे कि कंपनी माइक्रो-यूएसबी चार्जिंग पोर्ट को अपनाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उस समय यूरोपीय अधिकारियों द्वारा की गई मांगों का अनुपालन किया गया होता, तो न तो लाइटनिंग पोर्ट और न ही यूएसबी टाइप-सी पोर्ट का आविष्कार किया गया होता।

पहली बार इस iPhone मॉडल में मिलेगा टाइप-सी
यह ध्यान देने वाली बात है कि जबकि ऐप्पल के एग्जीक्यूटिव ने ठीक से पुष्टि नहीं की थी कि ऐप्पल अपने iPhone मॉडल में यूएसबी टाइप-सी पोर्ट का उपयोग करने के लिए कब स्विच करेगा, रिपोर्ट जल्द से जल्द होने वाले स्विच की ओर इशारा करती है। इस महीने की शुरुआत में अपने पावर ऑन न्यूज़लेटर में मार्क गुरमन द्वारा शेयर किए गए डिटेल्स के अनुसार, iPhone 15 जो कि 2023 के अंत में लॉन्च किया जाएगा, पहला iPhone मॉडल होगा जो USB टाइप-सी पोर्ट के साथ शिप होगा।

ऐप्पल ने पहले ही अपने मैक, कई आईपैड मॉडल और यूएसबी टाइप-सी पोर्ट के साथ एक्सेसरीज़ की शिपिंग शुरू कर दी है। उम्मीद की जा रही है कि कंपनी 2023 से iPhone 15 में यूनिवर्सल चार्जिंग पोर्ट, एंट्री-लेवल iPad और AirPods के चार्जिंग केस को शामिल करेगी।

बच्चों की ओरल हेल्थ का ख्याल रखने के लिए पता होनी चाहिए ये बातें

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हर पेरेंट बच्चों का ध्यान रखते हैं लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि उनके खाने-पीने और पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देते-देते हम कई छोटी-छोटी चीजें भूल जाते हैं। असल में ये बातें उनकी हेल्थ से जुड़ीं होती हैं। ओरल हेल्थ भी एक ऐसा ही टॉपिक है, जो बच्चों की ओवर हेल्थ से जुड़ा होता है। इसके बारे में हर पेरेंट को पता होना चाहिए और बच्चों की ओरल हेल्थ का ख्याल रखने की जिम्मेदारी पेरेंट की होती है।

सुबह उठते ही ब्रश करना
अपने बच्चों को सिखाएं कि उन्हें उठने के बाद फ्रेश होना है और ब्रश करना बहुत जरूरी है। बिना ब्रश किए बच्चों को कुछ भी खाने के लिए न दें। बिना ब्रश किए खाना खाने से उनकी ओरल हेल्थ खराब होती है।

रात में ब्रश करके सोना
सुबह उठने पर ब्रश करना बहुत जरूरी है। इससे अलावा अपने बच्चों को कहें कि रात को खाना खाने के बाद ब्रश करके सोना चाहिए। इससे बच्चों की ओरल हेल्थ ठीक रहेगी और उनके दांत भी मजबूत होंगे।

बच्चों को ज्यादा पानी पिलाएं
बड़ों की तरह बच्चों का पानी पीना भी बहुत जरूरी है इसलिए बच्चों को पानी पीने की आदत डालें। पानी पीने से बच्चों का डाइजेशन बेहतर होता है। पेट सही रहने से बच्चों की ओरल हेल्थ भी अच्छी रहेगी।

चॉकलेट और शुगर का कम इस्तेमाल
बच्चों को ऐसी चीजें न खाने दें, जिनसे कि उनकी ओरल हेल्थ खराब हो। चॉकलेट, शुगर, कैंडी से परहेज करने को कहें। बच्चों को ज्यादा फ्राइड फूड भी नहीं देना चाहिए। इससे बच्चोंं के दांत खराब होते हैं।

चीन में बाजार का हाल खराब, विदेशी निवेशक कर रहे बाहर निकलने की तैयारी

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चीन में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के पांच वर्षों के बाद हुए सम्मेलन के बाद वहां शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दिखी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन में आने वाले समय में विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर बिकवाली कर सकते हैं। बता दे कि पिछले दिनों चीन ने अपने सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े को देर से जारी करने का एलान किया। खबरों के अनुसार पहली बार चीन से विदेशी निवेशक बाहर निकलने की तैयारी कर रहे हैं। इसका असर आने वाले दिनों में वहां के शेयर बाजार पर दिख सकता है। चीन की सत्ताधारी पार्टी के सम्मेलन में सहायक नीतियों में हुई कटौती और नए सिरे से कोविड प्रतिबंधों के कारण बाजार में निवेशकों की चिंताएं बढ़ने लगी है।

इस वजह से विदेशी निवेशक चीन में मार्केट से अपने फंड की निकासी का मन बना रहे हैं। ब्लूमबर्ग केक आंकड़ों के अनुसार सोमवार को विदेशी निवेशकों ने बाजार में जबरदस्त बिकवाली की है। विदेशी निवेशकों ने सोमवार को हांगकांग के साथ ट्रेडिंग लिंक के जरिए मेनलैंड शेयरों में रिकॉर्ड 17.9 अरब युना की नेट बिकवाली की है। बाजार में फिलहाल अब तक स्मॉल नेट आउटफ्लो दिखा है। जानकारों के मुताबिक, अगर ये आउटफ्लो वर्ष के आखिर तक बना रहा, तो 2014 में शुरू हुए स्टॉक कनेक्ट प्रोग्राम के बाद से यह पहली सालाना गिरावट होगी।

बता दें कि पिछले दिनों चीन ने अपने सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े को देर से जारी करने का ऐलान किया था। चीन 18 अक्टूबर को अपनी जीडीपी के आंकड़े जारी करने वाला था, लेकिन इसे आखिरी मौके पर 17 अक्टूबर को भविष्य के लिए टाल दिया था। वहीं ब्लूमबर्ग के सर्वे के अनुसार, अर्थशास्त्रियों ने उम्मीद जताई थी कि अप्रैल-जून तिमाही की अवधि में लगभग जीरो ग्रोथ दिखने के बाद चीन की जीडीपी तीसरी तिमाही में 3.3 फीसदी रह सकती है।  

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