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सीधी में बुजुर्ग महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म, दो आरोपित गिरफ्तार

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 सीधी ।   जिले में एक बुजुर्ग महिला के साथ हुई गैंगरेप की घटना से सनसनी फैल गई। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में दो आरोपियों ने शराब पिलाकर एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपितों ने महिला के गुप्त अंगों को चोट भी पहुंचाया। महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है। महिला का कड़ी सुरक्षा के बीच इलाज जिला अस्पताल में किया जा रहा है। सीधी पुलिस ने इस घटना में कार्रवाई करते हुए दो आरोपितों को पकड़ लिया है। मामले को लेकर पुलिस बताया कि सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ दो लोगों ने दुष्कर्म किया। इसके पहले दोनों ने जमकर शराबखोरी की। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस इस मामले की जांच करते हुए साक्ष्य जुटा रही है। बताया गया, आरोपित महिला को पहले से जानते थे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की ओर से इस तरह की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई करने के बावजूद लगातार दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं।

खरगोन टैंकर धमाके में 12 घायलों की स्थिति अत्यंत गंभीर, इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती

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खरगोन    खरगोन हादसे में झुलसे लोगों के एमवाय अस्पताल पहुंचने का सिलसिला बुधवार सुबह सवा 11 बजे से शुरू हो गया था। एक-एक करके 17 घायल अस्पताल पहुंचे। इनमें से 12 की स्थिति अत्यंत गंभीर है। झुलसे लोगों को एमवायएच की पुरानी बर्न यूनिट में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। डाक्टरों की टीम मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। एमवायएच अधीक्षक डा. पीएस ठाकुर ने बताया कि झुलसे लोगों के अस्पताल पहुंचने से पहले ही सूचना के आधार पर उपचार की व्यवस्था कर ली गई थी। मरीजों के इलाज में विशेष टीम तैनात कर दी गई है। मरीजों के पहुंचने का सिलसिला करीब ढाई बजे तक चलता रहा। संभागायुक्त डा. पवन कुमार शर्मा और पुलिस महानिरीक्षक राकेश गुप्ता खुद व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अस्पताल पहुंचे।

पांच मरीज 80 प्रतिशत से ज्यादा झुलसे

एमवायएच में जिन 17 मरीजों का उपचार चल रहा है उनमें से 12 की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। पांच लोग तो ऐसे हैं जो 80 प्रतिशत से ज्यादा झुलस गए हैं। हादसे में दो तरफ से मार पड़ी है। पहला तो आग की वजह से लोग झुलसे, दूसरा विस्फोट की वजह से भी उनकी स्थिति बिगड़ गई। डा. ठाकुर ने बताया कि ज्यादातर के शरीर का ऊपरी हिस्सा और कमजोर अंग झुलस गए हैं।

मंत्री सिलावट भी पहुंचे हाल जानने

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, संभागायुक्त डा. पवन कुमार शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक राकेश गुप्ता हादसे की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचे। संभागायुक्त पूरे समय अस्पताल में रहे और मरीजों का इलाज शुरू करवाया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना।

हादसे में घायल हुए

मालू बाई वेरसिंह 40 वर्ष, रामसिंह मानसिंह 30, राहुल कनया 17, कमला कालू 30, नथु नानसिंह 40, मुन्ना भावसिंह 40, अनिल नथु 30, कनया तेरसिंह 35, मीरा बबलू 28, सपना गोरेलाल चौहान 30, बादल भावसिंह 12, सुरमा प्रकाश 30, रमेश पिता सुभाष 30, हीरालाल सरदार 30, लक्ष्मी गोरेलाल 15, शिवानी प्रकाश 11, राहुल गोरेलाल चौहान 14, गोरेलाल सेकड़िया 45, जगदीश गोरेलाल 27, कमला गोरेलाल 41 और संजय शोभाराम 10 शामिल हैं।

मप्र के मौसम पर नहीं दिखा किसी तरह का कोई असर 

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भोपाल । बांग्लादेश के तट से टकराने के बाद तूफान सितरंग का असर कमजोर पड गया है। बंगाल की खाडी में बना चक्रवाती तूफान का मध्यप्रदेश के मौसम पर कोई असर दिखाई नहीं पड रहा है।  वर्तमान में ऐसी कोई मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है, जिससे मध्य प्रदेश का मौसम प्रभावित हो। साथ ही हवा का रुख उत्तरी बना हुआ है। उत्तर भारत की तरफ से आ रही सर्द हवाओं के कारण तापमान में गिरावट होने लगी है। इसी क्रम में प्रदेश में सबसे कम 12 डिग्री सेल्सियस तापमान रायसेन एवं छिंदवाड़ा में दर्ज किया गया। राजधानी में रात का तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जो शहर का इस सीजन का सबसे कम तापमान रहा। अभी दो–तीन दिन तक तापमान में गिरावट का सिलसिला बना रहने की संभावना है। इस दौरान प्रदेश में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक चक्रवाती तूफान सितरंग बांग्लादेश के तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ गया है। वर्तमान में वह असम के आसपास कम दबाव के क्षेत्र के रूप में बना हुआ है। पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला के अनुसार, मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहने से आसमान साफ बना हुआ है। हवाओं का रुख भी उत्तरी बना रहने के कारण सर्दी बढ़ने लगी है। अभी दो–तीन दिन तक तापमान में गिरावट हाेने के आसार हैं। 30 अक्टूबर को एक पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत में पहुंचने की संभावना है। उसके प्रभाव से हवाओं का रुख बदलने से रात के तापमान में कुछ बढ़ोतरी होने लगेगी।उधर उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले दिनों हुई बर्फबारी से ठंड बढ़ने लगी है। हवाओं का रुख उत्तरी हाेने के कारण मध्य प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट होने लगी है। 

सरोगेसी मामले में नयनतारा-विग्नेश को मिली क्लीन चिट

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साउथ अभिनेत्री नयनतारा और विग्नेश शिवन ने सरोगेसी के कोई नियम नहीं तोड़े हैं। दरअसल, दोनों शादी के चार महीने बाद ही दो बेटों के मां-बाप बन गए थे। इस खबर के सामने आने के बाद बवाल मच गया। कहा जाने लगा कि दोनों ने सरोगेसी के नियम तोड़े हैं। जब विरोध बढ़ता चला गया तब तामिलनाडु सरकार ने तीन मेंबर का पैनल बनाकर इसकी जांच करवाई। अब सामने आई रिपोर्ट्स में राज्य सरकार की टीम द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि दोनों ने कोई नियम नहीं तोड़े हैं।

इतना ही नहीं राज्य सरकार की टीम ने रिपोर्ट्स में सरोगेसी की सुविधा देने वाले अस्पताल पर ब्लेम लगाया है। पैनल का कहना है कि 'स्टार कपल ने किसी भी कानून को नहीं तोड़ा है। उन्होंने किसी भी गलत चीज को सपोर्ट नहीं किया है। हालांकि, जिस अस्पताल ने सरोगेसी को अंजाम दिया है उस अस्पताल की तरफ से नियमों का उल्लंघन हुआ है। टीम ने यह भी बताया वह अब तक नयनतारा-विग्नेश के फैमिली डॉक्टर से बात नहीं कर पाए हैं क्योंकि वह भारत से बाहर हैं।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सरोगेट मां ने नवंबर 2021 में नयनतारा-विग्नेश के साथ अग्रीमेंट किया था और इस साल मार्च में भ्रूण को उनमें रखा गया। इस तरह अक्तूबर में बच्चों का जन्म हुआ। बता दें कि भारत में सरोगेसी रेगुलेशन एक्टर 2021 के तहत कमर्शियल सरोगेसी को बैन कर दिया गया था। हालांकि, यह नियम पिछले साल ही लागू हुआ था। यानी नयनतारा और विग्नेश ने जब इस प्रोसेस को शुरू किया था तब यह भारत में पूरी तरह लीगल था।

पैनल ने अपनी रिपोर्ट में उस निजी अस्पताल की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस मामले में अस्पताल को नोटिस भी भेजा है। बता दें कि नयनतारा और विग्नेश ने लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहने के बाद इसी साल जून में शादी की थी। दोनों की शादी में रजनीकांत, शाहरुख खान, विजय सेतुपति, ए आर रहमान, सूर्या जैसे कई स्टार्स शामिल हुए थे।

अब एक्टिव होगी कांग्रेस, कमजोर कडिय़ों को मजबूत करेंगे कमलनाथ

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भोपाल ।  मध्य प्रदेश में 2023 में विधानसभा चुनाव है। उससे पहले पीसीसी चीफ कमलनाथ ने मप्र कांग्रेस संगठन को और मजबूत बनाने के लिए जुट गए हैं। अब कमलनाथ जहां जिला प्रभारियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे और कमजोर नेताओं की संगठन से छुट्टी की जाएगी। वहीं तहसील और गांवों तक पैठ बनाने के लिए 28 नए प्रकोष्ठ बनाए गए हैं।
दरअसल, कांग्रेस की कोशिश है कि संगठन को  इतना मजबूत और सक्रिय किया जाए है कि 2023 में सरकार बनाने में आसानी होगी। इसके लिए कांग्रेस ने पहली बार 28 प्रकोष्ठ गठित किए हैं। ये सभी प्रकोष्ठ पीसीसी चीफ कमलनाथ और उनकी कोर टीम से चर्चा कर तहसील और गांवों तक पैठ बना रहे हैं ताकि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव के हिसाब से संगठन को मजबूत बनाया जा सके। कांग्रेस ने 1 बूथ पांच यूथ का नारा दिया है। ये उसी बूथ से होंगे और हर वर्ग से होंगे ताकि कांग्रेस के पक्ष में वातावरण बना सकें।
मप्र में प्रदेश कांग्रेस द्वारा संचालित विभाग एवं प्रकोष्ठों के हर महीने के कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। इनमें मछुआरा समिति, सिंधी कल्याण समिति, पिछड़ा वर्ग विभाग, दलित पिछड़ा समाज संगठन, मप्र सफाई कामगार, बंजारा समाज, अनुसूचित जाति विभाग, कांग्रेस केश शिल्पी प्रकोष्ठ हैं। इन वर्गों को प्रदेश के हर ब्लाक में अपने वर्ग के 300 से 500 कार्यकर्ताओं को जोड़े जाने का लक्ष्य दिया गया है।
कांग्रेस में जो 28 नए प्रकोष्ठ गठित किए हैं उनमें से कई प्रकोष्ठ ऐसे हैं जो हर समस्या का निराकरण करेंगे। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन पंचायतों की समस्याओं के निराकरण के लिए यह संगठन बनाया है, जिसका अध्यक्ष हेमंत टाले को बनाया गया है। बतौर टाले हाल में हमने पंचायत चुनाव में गांवों तक पहुंचकर पैठ बनाई, जिसकी वजह से कांग्रेस को अपेक्षित सफलता मिली। कांग्रेस सांस्कृतिक प्रकोष्ठ को प्रदेश में सांस्कृतिक आयोजनों, महापपुरुषों के जन्म दिन और पुण्यतिथि मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस प्रकोष्ठ का अध्यक्ष रामबाबू शर्मा को बनाया गया है। शर्मा के अनुसार सालभर प्रदेश भर में सांस्कृतिक आयोजनों के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। वहीं असंगठित वर्ग के कामगारों के कल्याण के लिए अखिल भारतीय असंगठित श्रमिक विभाग बनाया गया इस वर्ग का अध्यक्ष आशुतोष बिसेन को बनाया गया है। प्रकोष्ठ ने असंगठित वर्ग के कामगारों के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें डा. उदित राज को आमंत्रित किया गया। इसमें असंगठित श्रमिकों के कल्याण की रूपरेखा तैयार की गई।
अखिल भारतीय विधि एवं मानवाधिकार विभाग का गठन किया गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर राजनीति से प्रेरित जो मुकदमे चलाए जा रहे हैं, उनका  निराकरण करने के लिए विधिक कार्रवाई की जा रही है। ताकि ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं पर चल रहे मुकदमों का निराकरण किया जा सके। मप्र खेत किसान मजदूर विभाग का गठन किया गया है। विभाग का अध्यक्ष दिनेश गुर्जर को बनाया गया है। खेत किसान विभाग कांग्रेस की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए सदस्यता अभियान चला रहा है। इसमें किसानों को जोड़ा जा रहा है। गुर्जर का कहना है कि प्रदेश में किसानों की दिक्कतों का निराकरण नहीं हो रहा है। मप्र कांग्रेस परिवहन प्रकोष्ठ परिवहन से जुड़े व्यवसायियों की समस्याओं के निराकरण के लिए बनाय गया है। प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नरेंद्र सिंह पांधे को बनाया गया है।
 दिवाली बाद कमलनाथ जिला प्रभारियों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे और कमजोर नेताओं की संगठन से छुट्टी की जाएगी। दो नवम्बर से अलग अलग दिन प्रभारियों को भोपाल बुलाया गया है। हर दिन 4-6 प्रभारियों से कमलनाथ मुलाकात करेंगे। प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। वन-टू-वन चर्चा के दौरान पूर्व सीएम कमलनाथ, जिला प्रभारियों से जरूरी संगठनात्मक चर्चा करेंगे। साथ ही आपसी सामंजस्य बनाने के लिए भी रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही कमजोर नेताओं की संगठन से छंटनी भी हो सकती है। हर जिले की रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तैयार होगी।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में अधिकारियों-कर्मचारियों का साथ पाने के लिए कांग्रेस कर्मचारी संगठनों से समन्वय बनाएगी। पार्टी ने दीपावली के बाद सेवानिवृत्त आइएएस-आइपीएस एवं आइएफएस अधिकारियों, पेंशनरों और अन्य कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक करने का निर्णय किया है। इसमें वचन पत्र में शामिल किए जाने वाले मुद्दों के अलावा उनकी मांगों को आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठाने को लेकर चर्चा की जाएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ सेवानिवृत्त अधिकारियों से संवाद करेंगे। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें राज्य और जिला स्तर पर होंगी। आगामी विधानसभा चुनाव में अधिकारियों-कर्मचारियों का साथ पाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा कर चुके हैं। वर्ष 2005 के पूर्व वाली पेंशन व्यवस्था लागू करने के लिए ज्यादातर कर्मचारी संगठन आंदोलन कर रहे हैं। इस बड़े मुद्दों को कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में शामिल करने का निर्णय लिया है। वहीं, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की घोषणा भी पहले ही की चुकी है। इसके अलावा कर्मचारियों के जो भी मुद्दे हैं, उन्हें समझने और वचन पत्र में शामिल करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर बैठकें की जाएंगी। पार्टी का सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ आइएएस, आइपीएस और आइएफएस अधिकारियों के साथ अलग बैठक करेगा। इसका जिम्मा सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी डीएस राय, वीके बाथम और अजीता वाजपेयी पांडे को दिया गया है। वहीं, कर्मचारी संगठनों से समन्वय बनाने का दायित्व कर्मचारी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष वीरेंद्र खोंगल के पास है। मोर्चा, प्रकोष्ठों के प्रभारी महामंत्री जेपी धनोपिया ने बताया कि कर्मचारी प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण धुरी हैं। कांग्रेस हमेशा कर्मचारी हितैषी रही है। वचन पत्र में इस बार भी कर्मचारियों से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी।

 अग्निवीर सेना भर्ती रैली आज से 

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भोपाल। अग्निवीर सेना भर्ती रैली का आयोजन गुरूवार, 27 अक्टूबर से 6 नवंबर तक मोतीलाल नेहरू स्टेडियम, लाल परेड ग्राउंड, भोपाल में होगा। भर्ती में भोपाल, राजगढ़, रायसेन, सीहोर, विदिशा बैतूल, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद (नर्मदापुरम) और हरदा के प्रत्याशी भाग ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त किसी अन्य जिले के युवा को इस भर्ती में मौका नहीं मिलेगा। अग्निवीर जनरल ड्यूटी,  अग्निवीर तकनीकी,  अग्निवीर क्लर्क,  अग्निवीर स्टोरकीपर तथा अग्निवीर ट्रेडमैन के लिए सेना भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है।
सेना भर्ती के डायरेक्टर ने बताया कि भोपाल में 27 अक्टूबर से सेना की भर्ती शुरू होगी जो 6 नवम्बर तक चलेगी। भारतीय सेना  में भर्ती के लिये जिन प्रत्याशियों ने आवेदन किए है और उन्हें अब तक एडमिट कार्ड नहीं मिले हैं वह सेना की अधिकारिक वेबसाइट www.join Indianarmy.nic.in पर लॉगिन कर एडमिट कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। 
आवेदक अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी भी देख सकते हैं। यदि किसी उम्मीदवार को समस्या आ रही है तो अपनी क्वेरी भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकता है। सेना कार्यालय के निर्देश अनुसार एडमिट कार्ड में दिए समय पर रैली अधिसूचना के मुताबिक दस्तावेज लेकर भर्ती के लिए आना होगा। आवेदन ठीक से भरा होने पर एडमिट कार्ड  भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जा चुके हैं।

पंचायत चुनाव में बढ़ा कांग्रेस का वोटबैंक

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भोपाल । मध्यप्रदेश में अब नई सरकार ही कृषि उपज मंडी के चुनाव करा सकती है। साल 2016-17 से बीजेपी-कांग्रेस के किसान नेताओं को मंडी चुनाव का इंतजार था, जो अब तक नहीं हो पाए। इस दौरान करीब डेढ़ साल तक राज्य में कांग्रेस सरकार भी रही, अब ढाई साल से बीजेपी ने भी चुनाव नहीं कराए। यानी, 2023 से पहले मंडी चुनावी संभावनाएं खत्म होती दिख रही है। ऐसे में ग्रामीण नेताओं का संगठन व विधानसभा चुनाव में दखल बढ़ेगा।
दूध का जला फूंक-फूंककर पीया जाता है। ऐसा ही मध्यप्रदेश की राजनीति में हो रहा है। भाजपा के ऑपरेशन लोटस से कमलनाथ सरकार गिरी। इसके बाद सक्ते में आई कांग्रेस ने निकाय व पंचायत चुनाव में इसी कहावत को चरितार्थ किया। नतीजा यह रहा कि, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जनपद, जिला पंचायत से लेकर सरपंच तक के वार्डों में इस बार तुलनात्मक कांग्रेस को दमदार सफलता मिली, जो पहले के मुकाबले अधिक रही। भाजपा शासन में चुनाव होने के चलते और दलगत राजनीति आधार पर ये चुनाव ना होने के चलते अध्यक्ष पदों पर भले ही भाजपा काबिज हो गई लेकिन सच्चाई है कि जिपं सदस्य और जनपद सदस्य से लेकर सरपंच, पंच पदों पर कांग्रेस मजबूती से उभरी है। इस तुलना में नगरीय निकाय में भाजपा का दम अधिक दिखा लेकिन कांग्रेस भी कम नहीं रही। कुल मिलाकर ग्रामीण क्षेत्र में कांग्रेस की उम्मीद जिंदा रही है, इस बात को बीजेपी ने भी महसूस किया है।
चुनाव टालने की इस बात को इसी से समझा जा सकता है कि ना तो कृषि मंडी को लेकर वार्ड परीसीमन हुआ ना ही वार्डों व अध्यक्ष पदों की आरक्षण प्रक्रिया। नाम बढ़ाने-घटाने पर भी काम नहीं हुआ। चुनाव की इस प्रक्रिया में ही तीन से चार माह का समय लग जाता है। ऐसे में पूरे आसार है कि अब मंडी चुनाव इस सरकार के शासन में नहीं होंगे। अभी एसडीएम प्रशासक के तौर पर पद संभाल रहे हैं। किसी भी राजनीतिज्ञ का अब सीधा दखल नहीं है।
ताजा स्थिति में अब विधानसभा चुनाव 2023 में सालभर से भी कम समय बचा है। ना केवल सत्तारूढ़ दल बीजेपी बल्कि कांग्रेस के कई नेता कृषि मंडी चुनाव को लेकर तैयारियों में है लेकिन अरमान अब तक अधूरे रहे हैं। 2023 में जो सरकार विधानसभा में चुनी जाएगी, उस वक्त ही चुनाव संभव हो पाएंगे। यही वजह है कि मंडी चुनाव से वंचित नेता विधानसभा दावेदारी को लेकर भी ताल ठोकते नजर आ सकते हैं।

हर व्यक्ति के होते हैं एक इष्ट देव या देवी 

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सभी देवी –देवताओं की पूजा–उपासना करने के बाद भी अक्सर इंसान का मन भटकता ही रहता है। हर इंसान का मन किसी एक देवी या देवता की ओर सबसे ज्यादा आकर्षित होता है और वही देवी या देवता आपके इष्ट देव हो सकते हैं। अगर आपकी कोई कुल देवी या देवता हैं तो वो भी आपके इष्ट हो सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में हर व्यक्ति के एक इष्ट देव या देवी होते हैं
इनकी उपासना करके ही व्यक्ति जीवन में उन्नति कर सकता है
इष्ट देव या देवी का निर्धारण लोग कुंडली के आधार पर करते हैं
वास्तव में ग्रहों और ज्योतिष का ईष्टदेव से सम्बन्ध नहीं होता
ईष्टदेव या देवी का निर्धारण आपके जन्म-जन्मान्तर के संस्कारों से होता है
बिना किसी कारण के ईश्वर के जिस स्वरुप की तरफ आपका आकर्षण हो, वही आपके ईष्ट देव हैं
ग्रह कभी भी ईश्वर का निर्धारण नहीं कर सकते
ग्रहों की समस्या को दूर करने के लिए विशेष देवी देवताओं की उपासना की जा सकती है
धार्मिक परंपराओं में ईश्वरीय शक्ति की उपासना अलग-अलग रूपों में की जाती है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवताओं को उपासना के योग्य माना गया है। अलग-अलग शक्तियों के रूप में उनकी पूजा की जाती है। अगर आपकी कुंडली में ग्रहों से जुड़ी कोई समस्या है तो आइए जानते हैं कि कौन से ग्रह के लिए कौन से देव की उपासना सबसे उत्तम होगी।
ग्रहों की समस्या के लिए क्या करें?
सूर्य के लिए सूर्य की ही उपासना करें या गायत्री मंत्र की साधना करें
चन्द्रमा के लिए भगवान शिव की उपासना करना उत्तम होगा
मंगल के लिए कुमार कार्तिकेय या हनुमान जी की उपासना करें
बुध के लिए मां दुर्गा की उपासना करें
बृहस्पति के लिए श्रीहरि की उपासना करें
शुक्र के लिए मां लक्ष्मी या मां गौरी की उपासना करें
शनि के लिए श्रीकृष्ण या भगवान शिव की उपासना करें
राहु के लिए भैरव बाबा की उपासना करें  
केतु के लिए भगवान गणेश की उपासना करें
विशेष समस्याओं के लिए किसकी उपासना करें ?
मानसिक समस्याओं के लिए शिवजी की उपासना करें
शारीरिक दर्द और चोट -चपेट की समस्या के लिए हनुमान जी की उपासना करें
शीघ्र विवाह के लिए पुरुष मां दुर्गा उपासना करें
शीघ्र  विवाह के लिए स्त्रियां भगवान शिव की उपासना करें
बाधाओं के नाश के लिए भगवान गणेश की पूजा करें
धन के लिए मां लक्ष्मी की उपासना करें  
मुक्ति मोक्ष या आध्यात्मिक उपलब्धि के लिए श्रीकृष्ण या महादेव की उपासना करें  
ज्योतिष के जानकारों की मानें तो हर व्यक्ति के इष्ट देवी या देवता निश्चित होते हैं। अगर समय रहते उन्हें पहचान लिया जाए तो ग्रहों के हर दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। तो आप भी अपने इष्ट देव को पहचानें और उनकी उपासना करें। फिर सुखी जीवन के लिए किसी दूसरे उपाय की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
 

अपनी हथेली के से जानिये भविष्य 

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भविष्य की बातें जानने की उत्कंठा सभी के मन में होती है। इसके लिए लोग ज्योतिषियों के पास जाते हैं। अगर आप चाहें तो 
हथेलियों से और उसके रंग से भाग्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिल सकती हैं।  हथेलियों के रंग से स्वभाव , स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति के बारे में आसानी से जाना जा सकता है परन्तु हथेलियों को देखने के लिए सुबह का ही समय सबसे उत्तम होता है, अन्यथा न तो रंग जान पायेंगे , न ही रेखा.
लाल हथेली से क्या पता चलता है ?
मंगल प्रधान लोगों की हथेलियां लाल होती हैं
ऐसे लोग क्रोधी और तुनकमिजाज़ होते हैं
अगर अंगूठा छोटा हो तो ये हिंसक भी हो जाते हैं
ऐसे लोगों को खान पान और वाहन चलाने में सावधानी रखनी चाहिए
पीली हथेली क्या कहती है ?
बृहस्पति के कमजोर होने पर हथेली पीली हो जाती है
यह बीमारी , चिडचिड़ाहट और आलस्य की सूचना है
ऐसे लोग किसी न किसी कारण से परेशान होते रहते हैं
ऐसे लोगों को उपवास जरूर रखना चाहिए साथ ही नशे से परहेज करना चाहिए
कालापन लिए हुए हथेली का अर्थ क्या है ?
जब शनि और राहु जीवन में नकारात्मक होते हैं , तब ऐसे हथेलियाँ होती हैं
यह जीवन में अत्यधिक संघर्ष और उतार चढ़ाव के बारे में बताता है
ऐसे लोगों को कदम कदम पर मेहनत करनी होती है , और ये करते भी हैं
इनको दान और अपने माता – पिता की सेवा जरूर करनी चाहिए  
गुलाबी हथेली का अर्थ ?
गुलाबी हथेलियों को सर्वश्रेष्ठ हथेली माना जाता है
यह शुक्र के मजबूत प्रभाव के बारे में बताता है
जैसे जैसे व्यक्ति उन्नति करता जाता है , उसकी हथेलियाँ गुलाबी होती जाती हैं
जिनकी हथेलियाँ शुरू से गुलाबी होती हैं , ऐसे लोग जन्म से ही समृद्ध होते हैं
इनको अहंकार और गलत आकर्षण से बचना चाहिए।
 

इसलिए चढ़ाए जाते हैं नारियल और नींबू 

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आदिकाल से ही दुनिया के लगभग सभी धर्मों में बलि देने की प्रथा मौजूद रही है हालांकि ईश्वर भाव का भूखा होता हैं। आजतक किसी ने भगवान को कभी किसी वस्तु का उपभोग करते हुए नहीं देखा है। भारत में भी कई जगहों पर देवी देवताओं को जानवरों की बलि दी जाती रही है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि बलि क्यों दी जाती हैं? ऐसा नहीं है कि बलि देने से भगवान प्रसन्न होते हैं न ही भगवान उस बलि के जानवर का उपभोग करेंगे। इसका मूल कारण तंत्र में छिपा हुआ है। इस प्रथा को समझने के लिए सबसे पहले हमें तंत्रशक्ति का अध्ययन करना होगा क्योंकि बलि की शुरुआत तंत्र में ही हुई है। हर देवी-देवता के लिए अलग-अलग ध्वनियां विकसित की गई, उनके साथ कुछ विशेष विधि-विधानों को जोड़ा, उन्हें ऊर्जा से परिपूर्ण करने के लिए कुछ प्रयोग किए। 
तंत्र के अनुसार एक ऊर्जा को दूसरी ऊर्जा को बदला जा सकता है और उससे मनमाना काम लिया जा सकता है। ऊर्जा आपको किसी से भी मिल सकती है, चाहे वो एक नींबू हो या जानवर। इनकी बलि देकर इनकी जीवन ऊर्जा को मुक्त कर दिया जाता है और फिर उसी ऊर्जा को नियंत्रित कर उससे मनचाहा कार्य किया जा सकता है। मां काली तथा भैरव के मंदिरों में दी जाने वाली बलि इसी का उदाहरण है। वहां जीवों की ऊर्जा को मुक्त कर उसे नियंत्रित किया जाता है और उससे तांत्रिक शक्तियॉ प्राप्त की जाती है। परन्तु इस तरह करने में सबसे बड़ी बाधा यह है कि जब तक आप बलि देते रहेंगे, आपकी ऊर्जा और शक्तियॉ  बनी रहेंगी, जब भी बलि नहीं दी जाएगी, उनकी शक्तियॉ खत्म होनी आरंभ हो जाएगी और एक दिन वो आम आदमी की तरह बन जाएंगे। इसीलिए तांत्रिक अनुष्ठान करने वाले नियमित रूप से बलि देते हैं।  
अघोर पर लिखी पुस्तक में भी एक ऐसा उदाहरण मिलता है जब एक तांत्रिक ने नरबलि देने के लिए कुछ आत्माओं को वश में किया और फिर मां काली को उनकी बलि चढ़ाई थी। यह भी ऊर्जा के परिवर्तन का ही एक उदाहरण है। इस प्रक्रिया से उन प्रेतात्माओं की मुक्ति का मार्ग भी खुलता है। मंदिरों में नारियल फोड़ना या नींबू की बलि देना भी इसी का एक उदाहरण है। नारियल और नींबू में मौजूद जीवनउर्जा को मुक्त कर उसे अपने देवता को समर्पित किया जाता है ताकि वो अन्य कार्यों में इस ऊर्जा का उपयोग कर सकें।   
 

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