Home Blog Page 5701

कुछ ही देर में हिंदी में MBBS की पुस्तकों का विमोचन करेंगे अमित शाह, चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने की मंदिर में पूजा-अर्चना

0

भोपाल ।   रविवार (16 अक्टूबर) से देश में चिकित्सा शिक्षा का नया अध्याय शुरू हो रहा है। पहली बार चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में भी शुरू होने जा रही है। इसके लिए एमबीबीएस प्रथम वर्ष के तीन विषयों की हिंदी पुस्तकों का विमोचन करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भोपाल आ रहे हैं। यहां लाल परेड मैदान में आयोजित कार्यक्रम हिदी में ज्ञान का प्रकाश" में करीब 30 हजार विद्यार्थियों के अलावा चिकित्सा और हिंदी क्षेत्र के जानकार शामिल होंगे। इससे पहले प्रदेश के चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री विश्‍वास कैलाश सारंग आज सुबह छोला में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्‍होंने बजरंगबली के दरबार में मत्‍था टेका और पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश व देश के लिए ऐतिहासिक है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मुख्य आतिथ्य में व सीएम शिवराज सिंह चौहान जी की गरिमामय उपस्थित में देश में पहली बार हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का शुभारंभ व पुस्तकों का विमोचन किया जायेगा।

भारतीय शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन : अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी इसे भारतीय शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन बताया है। उन्‍होंने भोपाल आगमन से पूर्व ट्वीट करते हुए कहा कि आज भारतीय शिक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन है जब मध्य प्रदेश के भोपाल में मेडिकल की पढ़ाई को हिंदी में शुरू किया जा रहा है। भारतीय भाषाओं के सशक्‍तीकरण के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के संकल्प की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिससे बच्चे अपनी भाषा में पढ़ाई कर पाएंगे। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि 97 चिकित्सकों के दल ने चार महीने में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पुस्तकें तैयार की हैं। इनमें एनाटामी, फिजियोलाजी और बायोकेमेस्ट्री शामिल हैं।

कवि कुमार विश्‍वास ने दी बधाई

हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई शुरू होने को लेकर लोकप्रिय कवि कुमार विश्‍वास ने भी हर्ष व्‍यक्‍त किया है। उन्‍होंने इस उपलब्‍धि के लिए सीएम शिवराज सिंह और चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री विश्‍वास सारंग को बधाई भी दी है। उन्‍होंने इस संदर्भ में ट्वीट करते हुए कहा कि ज्ञान को अपनी भाषा में सहज-सुलभ कराने के इस बहुत समय से वांछित प्रयास को साकार करने के लिए सभी हिंदी-प्रेमियों की और से शिवराज सिंह चौहान तथा प्रिय भाई विश्‍वास सारंग को बधाइयां। अपनी माटी-बोली और संस्कार का पुनर्स्थापन, संकल्पों की दृढ़ता से ही संभव है। जय हिंद-जय हिंदी

अमित शाह का मध्यप्रदेश दौरा आज, प्रदेश को देंगे कई सौगात

0

भोपाल | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज मध्यप्रदेश का दौरा करने वाले हैं। अमित शाह मध्यप्रदेश के भोपाल और ग्वालियर जा रहे हैं। इस दौरान वो प्रदेश को कई सौगात भी देने वाले हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपने दौरे के दौरान भोपाल और ग्वालियर में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने वाले हैं। शाह 12 बजे भोपाल के लाल परेड मैदान में देश मे पहली बार हिंदी में मेडिकल पढ़ाई का शुभारंभ और एमबीबीएस के हिंदी पाठ्यक्रम का विमोचन करेंगे। वहीं दोपहर 3 बजे ग्वालियर में 500 करोड़ की लागत से बनने वाले राजमाता विजयाराजे सिंधिया हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का शिलान्यास करेंगे।

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव साल 2023 में होने वाले हैं, लेकिन भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। कहा जा रहा है कि अमित शाह का ये मध्यप्रदेश दौरा चुनावी तैयारियों के तहत जनता के बीच जाने और विकास कार्यों की सौगात देने से जोड़कर देखा जा रहा है।

पार्टी से जुड़े सूत्रों की माने तो जिन जिन राज्यों में 2024 लोकसभा से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां की कमान पूरी तरह से अमित शाह ने संभाल ली है। गौरतलब है कि इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मध्यप्रदेश का दौरा कर चुके है।

भूत भगाने के नाम पर महिला की पीट-पीटकर हत्या….. 

0

बालाघाट मे दो तांत्रिकों ने भूत भगाने के नाम पर महिला के शरीर पर कई जगह दांतों से काटा और बेरहमी से पीटा। इस दौरान महिला की पसलियां, गर्दन और रीढ़ की हडि्डयां टूट गईं। हार्ट और फेफड़ों में भी चोंटें आई। दोनों तांत्रिकों ने महिला की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार कटंगी से करीब दो किमी दूर ग्राम चिचगांव कोल्हापुर में परिजन महिला की झाड़-फूंक करवाने लगे गए थे। महिला की हत्या की सूचना पर पुलिस पहुंची और दोनों तांत्रिकों को गिरफ्तार कर लिया। मृतका के पति सुंदरलाल बाहेश्वर ने बताया कि शुक्रवार रात को उसकी पत्नी गीता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जिसके बाद हम उसे गांव खजरी में तांत्रिक के पास पहुंचे। तांत्रिक जूनियर मात्रे और टामलाल बाहेश्वर ने गीता के शरीर में प्रेतात्मा घुसे होने की बात कही। इस बीच वे भगवान की सवारी आने का दावा करने लगे। इसके बाद उन्होंने गीता को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

पति ने बताया कि उन्होंने तांत्रिक को रोकने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माने। जब तक गीता बेहोश नहीं हो गई, मारते रहे। जब वो बेहोश हो गई तो डॉक्टर के पास ले जाने के लिए कहा। हम उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शनिवार को मृत महिला गीता बाई (40 वर्ष) का पोस्टमॉर्टम करवाया गया। कटंगी अस्पताल के बीएमओ डॉ. पंकज महाजन ने बताया कि पीएम में आंतरिक चोट होना पाया गया है।

‘पर्चे में श्री हरी के बाद हिंदी में लिखो क्रोसिन’, अंग्रेजी में दवाओं के नाम पर शिवराज का तंज

0

भोपाल, 'दवा के पर्चे पर Rx के बजाए 'श्री हरि' लिखें। दवाई का नाम क्रोसिन लिखना है, तो क्रोसिन हिंदी में भी लिखा जा सकता है। उसमें क्या दिक्कत है.? ऊपर 'श्री हरि' लिखो..और क्रोसिन लिख दो।'ये सलाह मध्य प्रदेश के CM शिवराज सिंह चौहान ने डॉक्टरों को दी है। वो शनिवार को भारत भवन में आयोजित हिंदी विमर्श कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने डॉक्टरों से कहा- यहां जो डॉक्टर मित्र बैठे हैं, वो अच्छा तरीका निकालेंगे।सीएम ने मजाकिया अंदाज में कहा- दवाई के नाम हिंदी में क्यों नहीं लिखे जा सकते? जब हिंदी भाषा घर-घर पहुंचेगी, तब अंग्रेजी की चुड़ैल उतरेगी।
CM ने कहा- जब मैंने पहली बार कहा कि मेडिकल की पढ़ाई हिन्दी में होगी, तो लोग हंस रहे थे। कुछ पीछे मुंह करके कह रहे थे इंस्पॉसिबल..। हमने कहा असंभव शब्द हमारे शब्दकोष में नहीं है। यह सामाजिक क्रांति है। कुछ भी असंभव नहीं है। अब हमने करके भी दिखा दिया है।
'विश्व हिंदी सम्मेलन' हम भोपाल में लेकर आए थे। हिंदी-हिंदी हम ही कर रहे हैं। समाज में हिंदी को चाहने वाले लोगों के साथ व्यापक विमर्श करना चाहिए, इसलिए आज भोपाल के हर वर्ग के लोग, चिकित्सक मित्र यहां बैठे हैं। रेल को 'लोहपथगामिनी' नहीं कहेंगे। लिवर को यकृत कहने की जरूरत नहीं है। सीएम शिवराज ने कहा- मुझे ज्यादा कुछ कहना नहीं है, क्योंकि हमें करना है। हिंदी विश्वविद्यालय उसी का परिणाम था, ये अलग बात है कि कम सफल हुआ या ज्यादा।मानस में परिवर्तन हो रहा है, आगे भी होगा, लेकिन कुछ शब्द जो अब व्यावहारिक हैं, उन्हें भी शामिल करना होगा। अगर हम व्यावहारिक नहीं होंगे, तो असफल हो जाएंगे। अंग्रेजी का विरोध नहीं है, लेकिन राष्ट्रभाषा के प्रति जागरूकता जरूरी है। यह मानसिकता गलत है कि अंग्रेजी के बिना काम नहीं हो सकता। मैंने कई मेडिकल कॉलेज के बच्चों को सिर्फ इसलिए कॉलेज छोड़ते देखा है, क्योंकि उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है।
कार्यक्रम में सीएम ने भोपाल की मेयर मालती राय से कहा कि अपने यहां जो बोर्ड लगे हैं, उन पर लिखवाएं…. 'झीलों की नगरी में आपका स्वागत है'… बाद में छोटे से अक्षरों में अंग्रेजी में भी लिख सकते हैं ''सिटी ऑफ लेक्स''। अंग्रेजी के विद्वानों ने महापुरुषों के रखे नाम को तोड़ा। सीएम ने कहा- 'आज के बच्चों को ये पता ही नहीं है कि टीटी नगर का मतलब क्या है। तात्या टोपे जी को कोई नहीं जानता।'
एक-एक महापुरुष के नाम पर रखे नाम को शॉर्ट फॉर्म करने के नाम पर क्या सत्यानाश किया है। हमने अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान बनाया, उसका नाम अगपा-फगपा कर दिया। चीजें हमको ठीक करनी पड़ेंगी। हमने अच्छे से रोड बनाया, उसका नाम 'बुलेवर्ड' रख दिया। मैंने कहा- अटल पथ करो, काहे का बुलेवर्ड। ये अंग्रेजी की मानसिकता वाले लोग उसमें जकड़ गए हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ नहीं है, क्योंकि हमें यह करना है. हिंदी विश्वविद्यालय उसी का परिणाम था. यह अलग बात है कि यह कम सफल रहा या अधिक. शिवराज ने कहा कि सरकार अंग्रेजी के खिलाफ नहीं है, लेकिन राष्ट्रभाषा के बारे में जागरूकता जरूरी है. आज यह मानसिकता गलत है कि अंग्रेजी के बिना काम नहीं हो सकता. कई मेडिकल कॉलेज के बच्चों को सिर्फ इसलिए मेडिकल कॉलेज छोड़ दिया है, क्योंकि उनकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है.
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुछ ऐसे देशों का उदाहरण दिया, जहां देशी भाषाओं में काम किया जाता है और जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में काफी प्रगति की है. उन्होंने कहा कि रूस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों में अंग्रेजी कौन बोलता है? हम गुलाम हो गए हैं. जब मैं अमेरिका गया तो मैंने हिंदी में भाषण दिया और अंग्रेजी में बोलने वाले लोगों की तुलना में अधिक प्रशंसा प्राप्त की. शिवराज ने कहा हिंदी विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश गीत और पाणिनी संस्कृत विश्वविद्यालय, विश्व हिंदी सम्मेलन भोपाल में हो, यह हिंदी के प्रति हमारे प्रेम का परिणाम है.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह एक सामाजिक क्रांति है. कुछ भी असंभव नहीं है. जब मैंने घोषणा की कि अब एमबीबीएस कोर्स हिंदी में भी होगा, तब कुछ लोग हंस भी रहे थे, लेकिन अब हमने इसे करके दिखाया है. शिवराज ने कहा कि एक सांसद हिंदी भाषी प्रांत से आते थे. जब सांसद महोदय ने बोलना शुरू किया तो शानदार फर्राटेदार अंग्रेजी में बोला. मैंने बाद में उनसे पूछा कि तुम तो हिंदी जानते हो. हिंदी भाषी प्रांत से जीतकर आए हो. अंग्रेजी में भाषण क्यों दे रहे थे? इस पर सांसद ने कहा कि अंग्रेजी बोलने से अलग इंप्रेशन पड़ता है. इस पर मैंने सांसद जी से पूछा कि अंग्रेजी में भाषण देकर चुनाव जीतकर आ जाओगे क्या?

चाणक्य के अनुसार इन 5 चीजों को हमेशा रखें साथ, बहुत आएंगी काम

0

चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में जीवन रक्षा, सुरक्षा आदि से जुड़ी कई बातों का उल्लेख किया है। उनकी नीति आज भी प्रासंगिक हैं।
यदि आप चाणक्य की कही हुई बातों को अपना लेते हैं तो आपको जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं उठाना पड़ेगी। इस तरह चाणक्य ने यह भी कहा है कि व्यक्ति को अपने जीवन में किस चीजों का संग्रह करना चाहिए। आओ जानते हैं ऐसी ही 5 चीजें।
1. अन्न- चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को अन्न या अनाज का संग्रह करके रखना चाहिए। इसकी कमी नहीं होना चाहिए। यदि कोई अतिथि आए तो उसे भोजन अवश्‍य कराना चाहिए। ऐसा करने से घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। अन्न का संग्रह संकट काल में काम आता है।

2. धन- चाणक्य नीति के अनुसार आपके संकटकाल में आपना धन बहुत काम आता है। अत: धन का संचय जरूर करना चाहिए। धन हमें मुश्‍किलों से बचाता है।

3. औषधी- चाणक्य नीति के अनुसार हमारे दैनिक जीवन में कई तरह की शारीरिक और मानसिक कठिनाइयां आती और जाती रहती है। ऐसे में कुछ जीवन उपयोगी औषधियों या दवाओं का संग्रह करके रखना चाहिए। यदि संकट काल में वक्त पर दवा नहीं मिलती है तो जातक का जीवन संकट में आ जाता है।

4. धर्म- सत्य से धर्म की रक्षा होती है और धर्म से इंसान की। चाणक्य नीति के अनुसार दूसरों की सहायता करने और भगवान की आराधना करने से धर्म कमाया जाता है। मुश्‍किल वक्त में यही कमाया हुआ धर्म व्यक्ति को बचाता है।

5. गुरु का उपदेश- चाणक्य नीति के अनुसार गुरु का उपदेश या ज्ञान की बातें बहुत ही ध्यान से सुनकर संग्रह कर ली जाना चाहिए। गुरु के उपदेशों पर चरलकर ही व्यक्ति सभी तरह की समस्याओं से पार पा जाता है।

गंगाजल का ये उपाय खोलेगा बंद किस्मत के दरवाजे

0

पूजा-पाठ में तो गंगाजल का विशेष महत्व है ही साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी गंगाजल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

यही वजह है कि हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि दुनिया के सभी धर्मों में गंगा मां का महत्वपूर्ण स्थान है। इतना ही नहीं शास्त्रों में भी गंगाजल को अमृत माना गया है। इसी के चलते आपको बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में गंगाजल के कुछ ऐसे सरल व अचूक उपायों के बारे में बताया गया है। जिसको अगर कोई व्यक्ति श्रद्धा भाव से कर लेता है तो वह जीवन के सभी समस्याओं से निजात पा लेता है। तो ऐसे में देर न करते हुए चलिए आपको बताते हैं गंगाजल से जुड़े उन अचूक उपायों के बारे में-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कई बार ग्रहों की स्थिति कमजोर होने की वजह से व्यक्ति को जीवन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत करने के लिए प्रत्येक सोमवार के दिन शिव पूजन करें और शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें। इससे आपको ग्रह दोष के कारण होने वाली समस्याओं से मुक्ति मिलेगी और भगवान शिव की अत्यंत कृपा बरसेगी। लेकिन याद रखें कि जिस लोटे में गंगाजल डालकर आप शिवलिंग का अभिषेक करेंगे। वो लोटा पीतल का होना चाहिए। इससे घर की धन-संपन्नता बढ़ती है।

शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए। इसके लिए शनिवार के दिन एक पात्र में पानी लेकर उसमें थोड़ा सा गंगाजल डालकर पीपल की जड़ में अर्पित करें। इस उपाय को करने से यकीनन ही आपको शनि दोष से छुटकारा मिलेगा और जीवन सुखमय बनेगा।
तो वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर आप कर्ज से परेशान है। तो कर्ज से मुक्ति पाने के लिए पीतल की बोतल में गंगाजल भरकर अपने कमरे में उत्तर-पूर्व कोण में रख दें। मान्यता है कि ऐसा करने से कर्ज में डूबे व्यक्ति को राहत मिलती है और कर्ज की परेशानी के साथ अन्य परेशानियां भी दूर हो जाती है।

यदि आपके घर में नकारात्मकता बढ़ गई है और हमेशा क्लेश का वातावरण बना रहता है, तो इसके लिए प्रतिदिन पूजा के बाद अपने पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। इससे घर की सारी नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। लेकिन एक बात का भी ध्यान रखें कि गंगाजल को हमेशा मंदिर में ही रखें।

यदि घर में छोटे बच्चे को किसी की बुरी नजर लग गई है तो उसपर गंगाजल के छींटे मारने चाहिए। इससे नजर दोष का प्रभाव दूर होता है।
 

अपूर्णता से पूर्णता की ओर

0

मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर मोटर की दिशा में मनचाहा बदलाव कर सकता है। उसी प्रकार, जीवन के बाहरी ढर्रे में भारी और आश्चर्यकारी परिवर्तन हो सकता है। वाल्मीकि और अंगुलिमाल जैसे भयंकर डाकू क्षण भर में परिवर्तित होकर इतिहास प्रसिद्ध संत बन गये। गणिका और आम्रपाली जैसी वीरांगनाओं को सती-साध्वी का प्रात: स्मरणीय स्वरूप ग्रहण करते देर न लगी। वामित्र और भतृहरि जैसे विलासी राजा उच्च कोटि के योगी बन गये। नृशंस अशोक बौद्ध धर्म का महान प्रचारक बना। तुलसीदास की कामुकता का भक्ति भावना में परिणत हो जाना प्रसिद्ध है। ऐसे असंख्य चरित्र इतिहास में पढ़े जा सकते हैं। छोटी श्रेणी में छोटे-मोटे आश्चर्यजनक परिवर्तन नित्य ही देखने को मिल सकते हैं। 
इससे स्पष्ट है कि जीवन का बाहरी ढर्रा जो चिर प्रयत्न से बना हुआ होता है, विचारों में भावनाओं में परिवर्तन आते ही बदल जाता है। मित्र को शत्रु बनते, शत्रु को मित्र रूप में परिणत होते, दुष्ट को संत बनते, संत को दुष्टता पर उतरते, कंजूस को उदार, उदार को कंजूस, विषयी को तपस्वी, तपस्वी को विषयी बनते देर नहीं लगती। आलसी उद्योगी बनते हैं और उद्योगी आलस्यग्रस्त होकर दिन बिताते हैं। दुगरुणियों में सद्गुण बढ़ते और सद्गुणी में दुगरुण उपजते देर नहीं लगती। इसका एकमात्र कारण इतना ही है कि उनकी विचारधारा बदल गई, भावनाओं में परिवर्तन हो गया।  
संसार का जो भी भला-बुरा स्वरूप हमें दृष्टिगोचर हो रहा है, समाज में जो कुछ भी शुभ-अशुभ दिखाई पड़ रहा है, व्यक्ति के जीवन में जो कुछ उत्कृष्ट-निकृष्ट है, उसका मूल कारण उसकी अंत:स्थिति ही होती है। धनी-निर्धन, रोग-नीरोग, अकाल मृत्यु-दीर्घ जीवन, मूर्ख-विद्वान, घृणित-प्रतिष्ठत और सफल-असफल का बाहरी अंतर देखकर उसके व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाता है। यह बाहरी भली-बुरी परिस्थितियां मनुष्य के मनोबल, आस्था और अंत:प्रेरणाओं की प्रतीक हैं।  
भाग्य यदि कभी कुछ करता होगा तो निश्चय ही उसे पहले मनुष्य की मनोरुचि में ही प्रवेश करना पड़ता होगा, जिसकी अंत:गतिविधियां सही दिशा में चलने लगीं हैं। किंतु जिसका मानसिक स्तर चंचलता, अवसाद, अवास, आलस्य, आवेश, दैन्य आदि से दूषित हो रहा है, उसके लिए अच्छी परिस्थितियां और अच्छे साधन उपलब्ध होने पर भी दुर्गति का ही सामना करना पड़ेगा।  

धनतेरस की पूजा कैसे करें, जानिए सरल पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

0

जीवन का सबसे बड़ा धन उत्तम स्वास्थ है, इसलिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि के अवतरण दिवस यानि धनतेरस पर स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए यह त्योहार मनाया जाता है।
23 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। आओ जानते हैं कि धनतेरस की क्या है सरल तरीके की पूजा विधि।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम 5 बजकर 44 मिनट से से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

धनतेरस की पूजा विधि | Dhanteras puja vidhi

– इस दिन प्रात: उठकर नित्यकर्म से निवृ‍त्त होकर पूजा की तैयारी करें। घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए।

– पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। पूजा के समय सभी एकत्रित होकर पूजा करें। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें।

– इस दिन धन्वंतरि देव की षोडशोपचार पूजा करना चाहिए। अर्थात 16 क्रियाओं से पूजा करें। पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए।

 
– इसके बाद धन्वं‍तरि देव के सामने धूप, दीप जलाएं। फिर उनके के मस्तक पर हलदी कुंकू, चंदन और चावल लगाएं। फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं।

– पूजन में अनामिका अंगुली गंध अर्थात चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी आदिलगाना चाहिए। इसी तरह उपरोक्त षोडशोपचार की सभी सामग्री से पूजा करें। पूजा करते वक्त उनके मंत्र का जाप करें।

– पूजा करने के बाद प्रसाद चढ़ाएं। ध्यान रखें कि नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है। प्रत्येक पकवान पर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।

– अंत में उनकी आरती करके नैवेद्य चढ़ाकर पूजा का समापन किया जाता है।

– मुख्‍य पूजा के बाद अब मुख्य द्वार या आंगन में प्रदोष काल में दीये जलाएं। एक दीया यम के नाम का भी जलाएं। रात्रि में घर के सभी कोने में भी दीए जलाएं।

2022 में कब है रमा एकादशी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण समय व पूजन विधि

0

कार्तिक का महीना चल रहा है और बता दें कि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। यह महीना और एकादशी तिथि दोनों ही भगवान विष्णु को अति प्रिय है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस माह की रमा एकादशी का व्रत रखकर श्री हरि की पूजा अर्चना करता है उस पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है और मोक्ष के साथ साथ सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जी हां, इतना ही नहीं इस दिन विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करना भी बहुत शुभ और मंगलकारी होता है। तो ऐसे में आइए जानते हैं इस साल कार्तिक माह की रमा एकादशी कब है साथ ही इसके शुभ मुहूर्त, व्रत पारण का समय व पूजन विधि के बारे में भी पूरी जानकारी देंगे।

पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 04 पर होगा और इसका समापन 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के हिसाब से रमा एकादशी का व्रत 21 अक्टूबर, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा और व्रत का पारण अगले दिन 22 अक्टूबर, दिन शनिवार को किया जाएगा। बताते चलें कि व्रत पारण का समय सुबह 06 बजकर 29 मिनट से 08 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसी के साथ रमा एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।

1100 रुपए मूल्य की जन्म कुंडली मुफ्त में पाएं । अपनी जन्म तिथि अपने नाम , जन्म के समय और जन्म के स्थान के साथ हमें 96189-89025 पर वाट्स ऐप करें

रमा एकादशी की पूजन विधि-
एकादशी के दिन सुबह प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें और विधि पूर्वक भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। फिर उन्हें पूजा के समय तुलसी दल और फल का भोग लगाएं। भगवान को रोली व अक्षत का तिलक लगाएं। बता दें कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी के भी मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद रात में भगवान का स्मरण और भजन करें। वहीं फिर एकादशी के अगले दिन द्वादशी पर एकादशी व्रत का पारण कर जरूरतमंदों को फल, चावल आदि चीजों का दान करें। ध्यान रखें एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें।

रमा एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को सभी पापों से मुक्ति मिलती हैं और मृत्यु उपरांत विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि रमा एकादशी पर संध्या के समय दीपदान करने से देवी लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं। इससे सुख-समृद्धि, धन में वृद्धि होती है और समस्त बिगड़े काम बन जाते हैं।
 

राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन (16 अक्टूबर 2022)

0

मेष :- कार्य-कुशलता से संतोष, व्यवसायिक वृत्ति में सुधार तथा योजना फलीभूत होगी।
वृष :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा, समय स्थिति का ध्यान रखें।
मिथुन :- मनोबल उत्साहवर्धक रहे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि, कार्यकुशलता से संतोष होगा।
कर्क :- मनोबल संवेदनशील रहे, भाग्या का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बन जायेंगे।
सिंह :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, कार्य- कुशलता से संतोष एवं व्यापार अनुकूल होगा।
कन्या :- इष्ट-मित्रों से मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, ध्यान रखें।
तुला :- कुटुम्ब की समस्याओं में धन व्यय होगा, भ्रमणशील स्थति बनी ही रहेगी।
वृश्चिक :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, सफलता के साधन बनेंगे, इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, कार्य बनेंगे।
धनु :- धन लाभ, अधिकारियों से मेल-मिलाप होगा, कार्य-कुशलता अच्छी रहेगी।
मकर :- कार्य वृत्ति में सुधार होगा, स्थिति पर नियंत्रण रखें, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास अवश्य ही होगा।
कुम्भ :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, मानसिक उद्विघ्नता बनेगी, कार्य अवरुद्ध होगा।
मीन :- प्रयास सफल होंगे, इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, दैनिक कार्य में उत्तम सफलता अवश्य मिलेगी।
 

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group