भोपाल । भोपाल के आसपास कलियासोत, केरवा और बड़े तालाब के बैकवाटर में मगरमच्छ, घड़ियाल की अच्छी खासी संख्या हो गई है, लेकिन इनमें से कोई भी क्षेत्र बाउंड्रीवाल युक्त नहीं है। यही वजह है कि ये आए दिन पानी से निकलकर बाहर आबादी वाले इलाकों व सड़कों तक पहुंच रहे है। ये इस तरह आबादी की ओर व सड़कों पर निकले तो इनकी जान को खतरा तय है। इन तमाम आशंकाओं को देखते हुए भोपाल सामान्य वन मंडल ने गर्मी में मगरमच्छ, घड़ियाल सर्वे करवाया था। जिसमें 15 दिन तक वन अमले ने मेहनत की थी। बाहर से बुलाए कई विशेषज्ञ ने सर्वे में हिस्सा लिया था। सर्वे के लिए संसाधन जुटाने पर लाखों रुपए खर्च किए गए थे। इस तरह सर्वे रिपोर्ट आई तो पता चला कि भोपाल के आसपास 22 मगरमच्छ व दो घड़ियाल है और इनकी सुरक्षा की सख्त जरूरत है इसको लेकर भोपाल सामान्य वन मंडल ने बाकायदा प्लान तैयार किया और वन्य प्राणी विभाग को भेजा था लेकिन इस पर आज पर्यंत तक सहमति नहीं बनी है। जिसके कारण इन पर खतरा बना हुआ है। मालूम हो कि भोपाल के आसपास पाए जाने वाले मगरमच्छ व घड़ियाल की संख्या और उनकी स्थिति पता करने के लिए सर्वे के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन इन प्राणियों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। इन्हें खतरा बढ़ता जा रहा है। इनकी मौजूदगी वाले क्षेत्रों को चिन्हित करके वहां तार फेंसिंग, बाउंड्रीवाल जैसे काम करने हैं। वरिष्ठ स्तर से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण ये काम नहीं किए जा रहे हैं। इसमें उदासीनता बरती गई तो इनकी बढ़ती संख्या को नुकसान पहुंचना तय है। नुकसान पहुंचने की कई वजह हो सकती है। सर्वे बीती गर्मी में कराया था। तब 22 मगरमच्छ व दो घड़ियाल मिले थे।इस बारे में भोपाल सामान्य वन मंडल के डीएफओ आलोक पाठक का कहना है कि मगरमच्छ व घड़ियालों की सुरक्षा की चिंता नहीं होती तो सर्वे ही नहीं कराते है। सर्वे से कुछ न कुछ तो फायदा हुआ ही है। आगे जैसे ही सहमति बनेगी, उस अनुरूप काम करेंगे। उधर भदभदा क्षेत्र में तीन बार मगरमच्छ बड़े तालाब के बेक वाटर से निकलकर सड़कों तक पहुंच चुके हैं, जहां वाहनों की चपेट में आने से नुकसान हो सकता है। गर्मी के दिनों में पानी कम हो जाता है, लोग बड़ी संख्या में मच्छलियां मारते हैं। जिसकी वजह से इन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है। ये पानी से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में भी प्रवेश करते हैं, जहां रहवासी बचाव में इन पर हमला कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने गुलमोहर, कचनार और बरगद के पौधे लगाए
भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान में सहकारिता एवं लोक सेवा प्रबंधन मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया के साथ गुलमोहर, कचनार और बरगद के पौधे लगाए। वरिष्ठ पत्रकार श्री सतीश एलिया भी पौध-रोपण में सम्मिलित हुए। अनुनय एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी की श्रीमती माही भजनी, डॉ. अजोय भट्टाचार्य, श्री अनुराग द्विवेदी, डॉ. नीलम चौधरी, सुश्री खुशी शर्मा, सुश्री देवी महिला सिंह, सुश्री ज्योति राजपूत और डॉ. अभिलाषा भार्गव ने भी पौध-रोपण में भाग लिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान के साथ सुश्री माधुरी सबले ने अपने जन्म-दिवस पर पौध-रोपण किया। श्री लक्ष्मी नारायण पटेल भी पौध-रोपण में साथ थे।
अनुनय एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी गत 11 वर्ष से बच्चों की शिक्षा के लिए कार्यरत है। पन्नी बीनने और भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों की कठिनाइयों को दूर करते हुए उन्हें स्कूल से जोड़ने के लिए संस्था कार्य कर रही है। संस्था द्वारा शाजापुर जिले के सुनेरा गाँव के शासकीय विद्यालयों में “पढ़ो मालवा” अभियान चलाया है। संस्था द्वारा स्कूली बच्चियों को आत्म-रक्षा प्रशिक्षण देने के साथ पौध-रोपण और पर्यावरण- संरक्षण गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाता है। संस्था टीचर्स ट्रेनिंग और कम्प्यूटर प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय है।
पौधों का महत्व
आज लगाए गए गुलमोहर की सुव्यवस्थित पत्तियों के बीच बड़े-बड़े गुच्छों में खिले फूल इस वृक्ष को अलग ही आकर्षण प्रदान करते हैं। यह वृक्ष औषधीय गुणों से भी समृद्ध है। कचनार सुंदर फूलों वाला वृक्ष है। प्रकृति ने कई पेड़-पौधों को औषधीय गुणों से भरपूर रखा है, इन्हीं में से कचनार एक है। बरगद का धार्मिक, औषधीय और पर्यावरणीय महत्व है।
मुख्यमंत्री चौहान को पत्रकार सतीश एलिया ने भेंट की अपनी पुस्तकें
भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को वरिष्ठ पत्रकार श्री सतीश एलिया ने अपनी पुस्तक “चुनाव एवं जनमत सर्वेक्षण” भेंट की। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक में जनमत और प्रोपेगेंडा, सर्वेक्षण क्या है, चुनावी सर्वेक्षण का इतिहास, जनमत सर्वेक्षण, पूर्वानुमान और विश्वसनीयता, भारत में चुनाव सर्वेक्षण की भविष्यवाणी और हकीकत तथा विशेषज्ञों के नजरिए पर विशेष अध्याय सम्मिलित हैं। वरिष्ठ पत्रकार श्री सतीश एलिया लगभग डेढ़ दशक से माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से अतिथि शिक्षक के रूप में जुड़े हैं। श्री एलिया आकाशवाणी, दूरदर्शन सहित विभिन्न क्षेत्रीय और राष्ट्रीय न्यूज चैनलों में सक्रिय हैं। श्री एलिया ने दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, नवभारत, दैनिक नई दुनिया, हरिभूमि और देशबंधु समाचार-पत्रों में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान को श्री सतीश एलिया ने अपने व्यंग्य संग्रह “अन्नं ब्रह्म” की प्रति भी भेंट की। उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ पत्रकार और लेखक श्री सतीश एलिया की पुस्तक अन्नं ब्रह्म का चयन मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन वर्ष 2021 ‘वागीश्वरी सम्मान’ के लिए हुआ है।
भोपाल जिले में लंपी का एक भी प्रकरण नहीं
भोपाल। उप संचालक, पशु चिकित्सा डॉ. अजय रामटेके ने बताया कि भोपाल जिले में गौवंश में लंपी स्किन डिसीज का अभी तक कोई केस नहीं आया है फिर भी प्रिकॉशन के तौर पर रेपिड एक्शन (RRT) टीम का गठन किया गया है। टीम राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम 0755-2767583 एवं ट्रोल नम्बर – 1962 से प्राप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्यवाही कर पशु की बीमारी परीक्षण एवं उपचार कराएगा। टीम के द्वारा पशुपालक एवं ग्रामवासियों को मार्गदर्शन एवं बीमारी से बचने के उपाये के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लंपी डिसीज जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है इसलिए गाय के दुध के उपयोग के बारे में नागरिकों से भ्रम नहीं फैलाने की अपील की है।
डॉक्टर रामटेके ने लंपी स्किन डिसीज बीमारी के प्रकोप को देखते हुए पशुपालकों से अनुरोध किया है कि वे पशुओं में बीमारी के शुरूआती लक्षण जैसे कि हल्का बुखार, पूरे शरीर में चमड़ी पर उभरी हुई गठाने दिखाई देने पर निकट्स्थ पशु चिकित्सा संस्था एवं पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचित करें। अभी तक भोपाल जिले में 6 हजार से अधिक इस वर्ष गौवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर गौवंश का अन्य बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लंपी स्किन डिसीज पशुओं की एक विषाणुजनित बीमारी है जो कि मच्छर, मक्खी एवं टिक्स (चिंचोडी/चीचड़े) आदि के काटने से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। बीमारी में अधिकतर संकमित पशु 2 से 3 सप्ताह में ठीक हो जाते है एवं मृत्युदर 1 से 5 प्रतिशत है। बीमारी से सुरक्षा एवं बचाव के उपाय के लिए पशु-पालक संक्रमित पशु को अन्य स्वस्थ पशु से तत्काल अलग करें। पशुशाला, घर आदि जगह पर साफ-सफाई, जीवाणु-विषाणु नाशक रसायन जैसे फिनाईल, फोर्मेलिन एवं सोडियम हायपोक्लोराईड आदि से करें। पशुपालकों को शाम के समय पशु शेड में नीम के पत्तों से धुआं करना चाहिये जिससे मक्खी-मच्छर से पशुओं का बचाव हो। साथ ही पशुपालक अपने शरीर की साफ सफाई का भी ध्यान रखें।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ने विश्व-कल्याण के लिए पूरा जीवन समर्पित किया : मुख्यमंत्री चौहान
भोपाल : मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को नरसिंहपुर जिले के परमहंसी गंगा आश्रम झौंतेश्वर पहुँचे। उन्होंने ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पादुका पूजन किया। साथ ही द्वारका- शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती एवं बद्रिकाश्रम ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माला पहना कर वस्त्र पट्टिका ओढ़ाई।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यहाँ राजराजेश्वरी माँ त्रिपुरसुंदरी के दर्शन और पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख- समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने मंदिर में परिक्रमा भी लगाई।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ज्ञान, भक्ति एवं कर्म त्रिवेणी के संगम
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी ज्ञान, भक्ति एवं कर्म की त्रिवेणी के संगम थे। उन्हें अल्पायु में ही वेद-वेदांगों, उपनिषदों एवं सनातन धर्म के सार का ज्ञान था। वे ज्ञान मार्गी भक्त और क्रांतिकारी कर्मयोगी थे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया। उन्हें क्रांतिकारी संत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने जेल की यातनाऍ सहीं। स्वामी जी विश्व कल्याण के साथ ही गरीब, दलित, शोषित एवं पीड़ितों के कल्याण के लिए सदैव काम करते रहे। स्वामी जी में दीन-दुखियों के प्रति करूणा का भाव सदैव रहा। उन्होंने आत्मा के मोक्ष और जगत कल्याण के लिए कार्य किया। उनकी तपस्या एवं साधना ने इस क्षेत्र को ऊर्जा स्थल बनाया है। वे निरंतर जन-जन के कल्याण में लगे रहे और सेवा के अनेक प्रकल्प प्रारंभ किये।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी ने समान नागरिक संहिता, अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण और गौ-रक्षा जैसे विषयों पर हमेशा देश को जगाने का काम किया। उनके चेहरे का तेज और उनकी वाणी का ओज उनके ब्रह्मलीन होने के बाद भी सदैव दिखाई देता है। मुख्यमंत्री ने उनके चरणों में प्रणाम करते हुए कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने धर्म की जय, अधर्म के नाश, प्राणियों में सद्भावना और विश्व के कल्याण के लिए पूरा जीवन समर्पित किया। स्वामी जी ने झारखंड में विश्व कल्याण आश्रम हो या अलग-अलग राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए भी काम किया। चिकित्सालय, विद्यालय, संस्कृत पाठशाला सहित अनेक सेवा कार्यों में भी वे सदैव सक्रिय रहे।
केंद्रीय जल शक्ति, खाद्य प्र-संस्करण एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रदेश के गृह, जेल, संसदीय कार्य, विधि विधायी कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा ने स्वामी स्वरूपानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पादुका पूजन किया। राज्यसभा सांसद श्री कैलाश सोनी, विधायक श्री जालम सिंह पटेल, श्री अभिलाष मिश्रा ने भी स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
डायबिटीज़ के मरीज़ ये फल ज़रूर खाए
डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है, जिसमें खाने को लेकर कई तरह के परहेज़ करने पड़ते हैं। खाने की हर चीज़ को सोच समझकर खाना होता है, वरना आपका ब्लड शुगर का स्तर आसमान छू सकता है।फल विटामिन्स, खनीज और फाइबर से भरपूर होते हैं। अगर इन्हें सही तरीके से खाया जाए, तो इससे ब्लड शुगर का स्तर सही रह सकता है।
1. सेब : सेब को सबसे फायदेमंद फल माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पॉलीफेनॉल नाम का कम्पाउंड होता है, जो बीमारियों से लड़ने का काम करता है। इस फल का छिलका एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेटरी एजेंट की तरह काम करती है। सेब दिल, आंत और त्वचा की सेहत का खास ख्याल रखने का काम करते हैं। यह फल कैंसर से भी लड़ता है। सबसे अच्छा है अगर आप इस फल को सुबह नाश्ते के समय खाएं।
2. संतरा : शायद ही कोई ऐसा हो जिसे संतरे न पसंद हों? खट्टे, रस से भरे और पोषक तत्वों से पैक्ड संतरा, डायबिटिक के मरीज़ों के लिए भी फायदेमंद होता है। संतरे में मौजूद हेस्परिडिन आपके हृदय स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल के स्तर का ख्याल रखता है। यह फल फ्री रेडिकल्स से लड़ता है और आयरन के बेहतर अवशोषण में मदद करता है। इसमें पाया जाने वाला एक अन्य यौगिक फोलेट, गुर्दे की पथरी को बनने से रोकता है। संतरा एसिडिक होता है, इसलिए इसे खाली पेट या हेल्दी खाने के बाद न खाएं। इसकी जगह आप इसे मील्स के बीच में स्नैक के तौर पर खा सकते हैं।
3. अनार : क्या डायबिटीज़ में अनार खाया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है, तो काफी पूछा जाता है और इससे जुड़े मिथक भी आपको मिल जाएंगे। इसका जवाब है, हां। आप अगर डायबिटिक हैं, तो भी आप अनार खा सकते हैं। अनार एक ऐसा फल है, जो ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट्स से भरा होता है, यानी इसमें ग्रीन-टी से ज़्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आधे घंटे में शरीर पर असर दिखाना शुरू कर देते हैं।
अनार के बीज आपके शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ा सकते हैं और आपके रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यह फल एनीमिया को रोकता है, आपके पेट के लिए उपयुक्त है, और आपकी प्रतिरक्षा को बढ़ाता है। आप इसे खाने के साथ या बाद में खा सकते हैं।
4. कीवी : कीवी एक ऐसा फल है, जो आपके शरीर के हर अंग को फायदा पहुंचाता है। अच्छी बात यह है कि यह खाने में भी स्वादिष्ट होती है। कीवी में विटामिन-बी6, सी, मैग्नीशियम, कैल्शियम, और एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं। यह फाइबर से भरपूर होती है। कीवी ब्लड प्रेशर को कम करती है, और इसमें मौजूद विटामिन-के घाव को जल्दी भरता है, जो डायबिटीज़ में मददगार साबित होता है। यह फल मल त्याग, वज़न मैनेज और किडनी की पत्थरी से भी बचाने का काम करता है। साथ ही यह ब्ल़ शुगर के स्तर को भी कंट्रोल में रखता है। आप इसे सोने से पहले या फिर स्नैक की तरह खा सकते हैं।
BPSC लेक्चर भर्ती परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी
बिहार लोक सेवा आयोग/BPSC ने लेक्चरर के पदों पर भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा के प्रवेश पत्र को जारी कर दिया है। प्रवेश पत्र को 22 सितंबर, 2022 को ऑनलाइन मोड में जारी किया गया है। जो भी उम्मीदवार लेक्चरर भर्ती परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, वे अपने प्रवेश पत्र को बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट onlinebpsc.bihar.gov.in पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।
कब होगी परीक्षा?
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा लेक्चरर के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन 27 सितंबर, 2022 को किया जाएगा। परीक्षा राज्यभर में निर्धारित विभिन्न केद्रों पर एक पाली में दोपहर 12 बजे से लेकर 02 बजे तक आयोजित की जाएगी।
कैसै डाउनलोड करें प्रवेश पत्र?
- सबसे पहले उम्मीदवार BPSC की आधिकारिक वेबसाइट onlinebpsc.bihar.gov.in पर जाएं।
- अब होम पेज पर दिखाई दे रहे लेक्चरर भर्ती परीक्षा के प्रवेश पत्र से संबंधित लिंक पर क्लिक करें।
- अब आप एक नए पेज पर आ जाएंगे।
- यहां मांगी जा रही जानकारी को दर्ज कर के सबमिट करें।
- अब आपका प्रवेश पत्र सामने की स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा।
- इसे डाउनलोड कर लें और आगे की जरूरत के लिए इसका प्रिंट भी निकलवा लें।
बिहार डायरेक्ट्रेट ऑफ लैंड रिकॉर्ड सर्वे ने 2506 पदों पर निकाली भर्ती
बिहार डायरेक्ट्रेट ऑफ लैंड रिकॉर्ड सर्वे ने 2506 खाली पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए है। उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन ऑफिशियल वेबसाइट dlrs.bihar.gov.in पर जाकर करना होगा। इस भर्ती के लिए बिहार डायरेक्ट्रेट ऑफ लैंड रिकॉर्ड सर्वे ने तीन भर्ती विज्ञापन 01/2022, 02/2022, 03/2022 जारी किए हैं।
आवेदन की शुरुआती तारीख : 27 सितंबर 2022
आवेदन की आखिरी तारीख : 21 अक्टूबर 2022
वैकेंसी डिटेल्स
स्पेशल सर्वे असिस्टेंट/ सेटलमेंट ऑफिसर- 96
स्पेशल सर्वे कानूनगो- 240
स्पेशल सर्वे अमीन- 1944
स्पेशल सर्वे क्लर्क- 226
योग्यता
स्पेशल सर्वे असिस्टेंट- बीई/बीटेक सिविल इंजीनियरिंग और दो साल का अनुभव।
स्पेशल सर्वे कानूनगो- सिविल इंजीनियरिंग में दो साल का डिप्लोमा, दो साल का अनुभव।
स्पेशल सर्वे अमीन- सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा।
स्पेशल सर्वे क्लर्क- ग्रेजुएशन।
आयु सीमा
न्यूनतम आयु- 18 साल
पुरुष कैंडिडेट की अधिकतम आयु- 37 साल
ओबीसी और सामान्य वर्ग की महिलाओं की अधिकतम आयु : 40 साल
एससी और एसटी- 40 साल
सैलरी
स्पेशल सर्वे असिस्टेंट- 59000
स्पेशल सर्वे कानूनगो- 36000
स्पेशल सर्वे अमीन- 31000
स्पेशल सर्वे क्लर्क- 25000
सिलेक्शन प्रोसेस
अमीन, क्लर्क, कानूनगो और एएसओ पदों पर भर्ती मेरिट के आधार पर होगी। यह मेरिट न्यूनतम शैक्षिक योग्यता में हासिल अंकों के आधार पर बनेगी।
गुजरात चुनाव तय करेगा-राष्ट्रीय राजनीति की दिशा…

आगामी गुजरात विधानसभा की लड़ाई भविष्य की राजनीति के लिये एक बहुत बड़ा संकेत बनने जा रही है। पिछले दो दशक के अधिक समय से गुजरात में सत्तासीन भाजपा के लिये राष्ट्रीय राजनीति में अपनी दावेदारी को मजबूत करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। गुजरात द्वारा राजनीति में स्थापित परम्पराओं के अनुसार अस्मिता और भाषाई एकता के संस्कार राज्य से केन्द्र की राजनीति को बल देते हैं। प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी गृह मंत्री के रूप में अमित शाह की राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि को गुजरात राष्ट्रीय राजनीति में क्रांतिय गौरव को स्थापित करने से जोड़ कर देखता है।
यह माना जाता है कि गुजराती समाज मूलतः व्यवसायिक होता है और सामाजिक, धार्मिक मान्यताओं एवं कार्यक्रमों को भी किसी न किसी रूप में व्यवसायी की उन्नति और विकास से जोड़कर भी देखता है। गुजरात में द्वारका की उपस्थिति समूचे प्रान्त में जय श्री कृष्णा के उद्घोश से परिलक्षित होती है। अपने छोटे से दायरे में अधिक से अधिक खुशियों को बटोर लेने वाले गुजराती समाज के लोग आम तौर सीधे और सरल माने जाते है। पर व्यवसाय की दृष्टि से संभावनाओं की तलाश और छोटे से छोटे कुटीर उद्योग को एक बड़े उद्योग में परिवर्तित कर देने में वे पारंगत भी है। गुजराती समाज के लोगों का समर्पण विभिन्न रंगों के प्रति और प्रकृति के प्रति स्पष्ट नजर आता है।
अपनी पोशाकों के माध्यम से किन्हीं भी स्थितियों में रंग बिखेर देने में सिर्फ गुजराती समाज की हर धारा के साथ बहुत आसानी के साथ जुड़ जाते हैं। यही कारण है कि समूचे भारत के उद्योगों में एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरात के निवासियों का भी है। उनकी सभ्यता और संस्कृति खान-पान को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली हुई है। परंतु आश्चर्य यह होता है कि इतने सहज माने जाने वाले गुजरातियों के राज्य में इतना बड़ा सामाजिक दंगा कैसे हो जाता है। क्या सामान्य से दिखने वाले इस समाज में हिन्सक प्रवृतियां इतने बडे़ आकार में छिपकर रह सकती है। दंगो के काल में जिस तरह गुजरात में मारकाट मची और खून बहा, उसमें कई प्रश्न वर्तमान मानव सभ्यता के सामने खड़े कर दिये हैं। क्या गुजराती समाज जिस कोमल व्यवहार और स्पर्श से विश्व को आकर्षित करता है, वही समाज दंगों की विभीषिका के समय इतना क्रूर हो सकता है।
राजनैतिक रूप से यह मान्यता है कि गुजराती समाज समग्र की ओर सोचता है। पहनावा, खान-पान और व्यवहार के अतिरिक्त यह समाज भविष्य के सामाजिक और राजनैतिक सुधारों को भी न सिर्फ महसूस करता है बल्कि उसकी आधारशिला भी रखता है। इन स्थितियों में गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव क्या केवल गुजराती अस्तित्व की पहचान के प्रश्न पर सिमित रह जायेगी या आम आदमी पार्टी द्वारा दिये जा रहे आश्वासन उनकी विचारधारा में कोई परिवर्तन ला पायेगा, गुजराती एक स्वतंत्र सोच का समाज है। भाजपा में गुजरात चुनाव को लेकर फेली हुई बैचेनी यह स्पष्ट करती है कि राज्य का मतदाता कोई घुटन महसूस कर रहा है और परिवर्तन की और बढ़ना चाहता है। गुजराती एक प्रायोगिक समाज है जो नित्य नूतन प्रयोगों पर विश्वास करता है। राष्ट्रीय राजनीति में मिली पहचान को गुजराती स्वयं कितना राष्ट्र और समाज हित मे मानते हैं। कितना वे इस अधिपत्य से एकाकार हो पाते हैं, यह गुजरात का चुनाव स्पष्ट कर देगा। जिसके परिणाम राष्ट्रीय राजनीति को न सिर्फ प्रभावित करेंगे बल्कि उसकी दिशा का निर्धारण भी कर देंगे।
Sudhir Pandey Ke Facebook Wall Se
नेस्ले भारत में करेगी 5,000 करोड़ रुपये का निवेश
दुनिया की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले ने शुक्रवार को भारत में निवेश योजनाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया। कंपनी ने कहा कि 2025 तक 5,000 करोड़ रुपये का निवेश करने योजना है। ये निवेश कंपनी के पोर्टफोलियो विस्तार और कोर बिजनेस को भारत में और मजबूत करने में मदद करेगा।समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के सीईओ मार्क श्नाइडर ने कहा कि आने वाले 3.5 साल यानी 2025 तक कंपनी भारत में 5000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है। इस निवेश को कंपनी के पूंजीगत निवेश, नए प्लांट लगाने, अधिग्रहण और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के विस्तार के लिए उपयोग किया जाएगा।श्नाइडर ने आगे कहा कि भारत उनके टॉप 10 बाजारों में शामिल हैं। इस निवेश से भारत में बड़े स्तर नौकरियां पैदा होंगी। हालांकि निवेश सरकार से कंपनी की योजनाओं को मंजूरी मिलने पर निर्भर करता है।नेस्ले के मुताबिक, कंपनी ने 1960 में भारत में उत्पादन शुरू करने के बाद से अब तक कुल 8,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। अब और अधिक निवेश करने का फैसला किया गया है।















