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‘अल्लाह बुरी नजर से बचाए…’ शिवम दुबे के जन्मदिन पर पत्नी अंजुम का भावुक संदेश

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डबलिन। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर शिवम दुबे आज अपना 33वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस समय वे भारतीय टीम के साथ आयरलैंड के दौरे पर हैं। इस खास अवसर पर उनकी पत्नी अंजुम खान ने सोशल मीडिया पर उनके साथ बिताए खूबसूरत पलों की कुछ तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। अंजुम ने एक बेहद भावुक और प्यारे संदेश के जरिए अपने पति को जन्मदिन की बधाई दी और उनके शानदार करियर व बेहतर भविष्य के लिए प्रार्थना की। उन्होंने इस पोस्ट में अपनी जिंदगी के कुछ सबसे यादगार और खुशनुमा लम्हों का एक वीडियो संकलन भी शेयर किया है, जिसे प्रशंसकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है।

अंजुम खान ने इंटरनेट पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि वे अपने जीवनसाथी की बड़ी कामयाबी और बुलंदियों की कामना करती हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि शिवम का क्रिकेट करियर नई ऊंचाइयों को छुए, उन्हें जीवन की हर खुशी नसीब हो और वे हमेशा हर बुरी नजर से सुरक्षित रहें।

पत्नी की भावुक पोस्ट और जिंदगी के लिए दुआएं

अंजुम ने अपनी पोस्ट को आगे बढ़ाते हुए लिखा कि ईश्वर शिवम की जिंदगी को हमेशा असीम सुकून और खुशियों से सराबोर रखे। उनके सारे अधूरे सपने सच हों और उनका जीवन सदा आपसी प्यार, हंसी और खूबसूरत पलों से महकता रहे। उन्होंने दुआ की कि क्रिकेटर का आने वाला समय बेहद खुशहाल और बरकतों से भरा हुआ साबित हो। सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया यह पारिवारिक संदेश तेजी से प्रशंसकों के बीच वायरल हो रहा है और लोग इस जोड़ी पर जमकर प्यार लुटा रहे हैं।

शिवम दुबे ने जताया अपनी जीवनसंगिनी का आभार

अपनी पत्नी के इस बेहद दिल छू लेने वाले और स्नेहपूर्ण संदेश पर प्रतिक्रिया देने में शिवम दुबे ने भी देर नहीं लगाई। उन्होंने इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में जाकर अपनी पत्नी का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा, "थैंक यू सो मच माय लव अंजुम खान।" भारतीय ऑलराउंडर के इस छोटे लेकिन प्यारे जवाब ने प्रशंसकों का दिल जीत लिया है और दोनों की केमिस्ट्री की सोशल मीडिया पर काफी सराहना की जा रही है।

आगामी दौरे और भारतीय टीम का पूरा शेड्यूल

मौजूदा समय में शिवम दुबे आयरलैंड के खिलाफ होने वाली टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए भारतीय दल का मुख्य हिस्सा हैं। इस छोटी सीरीज के समाप्त होने के तुरंत बाद वे भारतीय टीम के साथ ही इंग्लैंड के दौरे पर रवाना हो जाएंगे, जहां भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की एक बेहद रोमांचक टी20 सीरीज खेली जानी तय हुई है। इस विदेशी दौरे के टी20 चरण की समाप्ति के बाद शिवम वापस स्वदेश लौट आएंगे, क्योंकि उन्हें इसके बाद होने वाली वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम के स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है।

‘ये तो होना ही था…’ कुलदीप पर DC मालिक की पोस्ट देख वॉर्नर ने किया ऐसा रिएक्ट, फैंस हैरान

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नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के 20वें सीजन (IPL 2027) के शुरू होने से पहले ऋषभ पंत और कुलदीप यादव के बीच हुई खिलाड़ियों की अदला-बदली (ट्रेड डील) इस समय क्रिकेट गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। इस चौंकाने वाले सौदे के तहत पंत अपनी सालाना फीस में 12 करोड़ रुपये का भारी नुकसान सहकर दोबारा दिल्ली कैपिटल्स की टीम में वापस आ गए हैं, जबकि उनके बदले स्टार स्पिनर कुलदीप यादव को लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम में भेज दिया गया है। इस बड़े बदलाव के बाद दिल्ली टीम के सह-मालिक पार्थ जिंदल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश लिखा, जिस पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर की टिप्पणी अब इंटरनेट पर जमकर सुर्खियां बटोर रही है।

पार्थ जिंदल ने अपनी पोस्ट में कुलदीप यादव का आभार जताते हुए लिखा कि पिछले पांच वर्षों में फ्रेंचाइजी के लिए दिए गए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा और वे एक चैंपियन खिलाड़ी की तरह अपने गृह मैदान पर भी कमाल करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने ऋषभ पंत का स्वागत करते हुए खुशी जाहिर की और उम्मीद जताई कि पंत अपने पुराने घर दिल्ली में वापस लौटकर अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म हासिल करने में कामयाब होंगे।

डेविड वार्नर की तीखी और रहस्यमयी टिप्पणी

दिल्ली कैपिटल्स टीम का नेतृत्व कर चुके ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान डेविड वार्नर ने पार्थ जिंदल के इस आधिकारिक पोस्ट पर पहले हंसने वाली इमोजी बनाई और फिर एक ऐसा बयान जारी किया जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। वार्नर ने लिखा कि यह तो होना ही था; कई बार नीलामी (ऑक्शन) के दौरान परिस्थितियां आपके वश में नहीं होतीं, विशेषकर तब जब आप खराब फॉर्म से जूझ रहे हों और फ्रेंचाइजी आपसे दूरी बनाना चाह रही हो। उन्होंने आगे लिखा कि जब कोई दूसरा टीम मालिक आपको अपनी टीम में शामिल करने की इच्छा रखता है, लेकिन ऑक्शन की बोली में पीछे रह जाता है, तो वह ट्रेड के लिए बिल्कुल सही समय का इंतजार करता है।

खुद वार्नर भी झेल चुके हैं ऐसा ही दौर

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि डेविड वार्नर का यह दर्द उनके खुद के अनुभवों से जुड़ा हुआ है, क्योंकि वे खुद अपने आईपीएल करियर में इसी तरह के उतार-चढ़ाव भरे दौर से गुजर चुके हैं। वार्नर साल 2009 से 2013 तक शुरुआत में दिल्ली की टीम का हिस्सा थे, जिसके बाद वे सनराइजर्स हैदराबाद चले गए थे। हालांकि, बाद में हालात कुछ ऐसे बदले कि उन्हें एक बार फिर 2022 से 2024 तक दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलना पड़ा। साल 2024 के सीजन में उनके बेहद खराब प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली प्रबंधन ने उन्हें टीम से बाहर (रिलीज) कर दिया था।

आईपीएल करियर का दुखद अंत

वार्नर के शानदार आईपीएल इतिहास का अंत बेहद अप्रत्याशित रहा। साल 2025 की मेगा नीलामी के दौरान खराब फॉर्म और बढ़ती उम्र के चलते किसी भी फ्रेंचाइजी ने इस आक्रामक बल्लेबाज को खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई और वे अनसोल्ड (बिना बिके) रह गए। नीलामी में खरीदार न मिलने की वजह से आखिरकार उनके चमकदार आईपीएल सफर पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लग गया, यही वजह है कि वे मौजूदा समय में खिलाड़ियों और फ्रेंचाइजी मालिकों के बीच चलने वाले इस अंदरूनी समीकरण को बेहतर ढंग से समझते हैं।

51 वर्ष बाद भी आपातकाल की याद, बीजेपी ने मनाया संविधान हत्या दिवस

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नई दिल्ली: देश में लगाए गए आपातकाल की बरसी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गुरुवार को 'संविधान हत्या दिवस' मना रही है। इस मौके पर पार्टी की ओर से बिहार, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बीजेपी का कहना है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों की आजादी को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया था। इस दिन को मनाने का असल मकसद लोगों को आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं और उसके असर से रूबरू कराना है।

बिहार में बड़े पैमाने पर आयोजन और सम्मान समारोह

बिहार में इस दिन को बेहद बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है, जहाँ राज्य के करीब 90,000 बूथों पर अलग-अलग कार्यक्रम रखे गए हैं। राजधानी पटना में आयोजित एक मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी शामिल हुए, जहाँ उन्होंने आपातकाल विरोधी आंदोलन का हिस्सा रहे करीब 450 जेपी सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे और सिर्फ राजनीतिक सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया गया था। इस अभियान के तहत 30 जून से 6 जुलाई तक बिहार के सभी 52 संगठनात्मक जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन और छात्र सम्मेलन भी कराए जाएंगे।

हरियाणा में आपातकाल को बताया लोकतंत्र का 'अंधकारमय दौर'

हरियाणा में भी बीजेपी नेताओं ने आपातकाल की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दौर बताया। उन्होंने कहा कि उस समय न सिर्फ लोगों के अधिकार कुचले गए, बल्कि मीडिया पर भी कड़ी पाबंदी (सेंसिरशिप) लगा दी गई थी। इस दौरान हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी गलती के जेलों में डाल दिया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और तत्कालीन भारतीय जनसंघ ने उस समय इस तानाशाही का कड़ा विरोध किया था और लोकतंत्र को वापस लाने के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाया था।

नई पीढ़ी को जागरूक करने की कोशिश

बीजेपी नेताओं का कहना है कि 'संविधान हत्या दिवस' मनाने का मुख्य उद्देश्य उन संघर्ष करने वाले वीर लोगों को सम्मान देना है जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए लाठियां और जेलें झेलीं। इसके साथ ही आज की नई पीढ़ी को भी आपातकाल के इतिहास और उसके गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक करना है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए। इसी सिलसिले में गुरुवार शाम को पंचकुला स्थित अटल सभागार में एक विशेष कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

राम मंदिर चढ़ावा केस में राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से किया इनकार

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नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसों में कथित गड़बड़ी और गबन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले की तुरंत जांच कराने की मांग को लेकर अदालत में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिस पर जल्द सुनवाई के लिए गुहार लगाई गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत में जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे सोमवार को एक बार फिर अवकाशकालीन पीठ (वैकेशन बेंच) के सामने अपनी इस मांग को रखें। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मामला बेहद गंभीर है, इसलिए इस पर तुरंत कोई आदेश जारी किया जाना बेहद जरूरी है, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सोमवार तक का इंतजार करने को कहा।

सीबीआई और एसआईटी जांच की मांग

दो वकीलों की तरफ से दायर की गई इस जनहित याचिका में राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पैसों में हेरफेर के आरोपों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। याचिका में मांग की गई है कि सबसे पहले इस मामले के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज की जाए। इसके बाद पूरे मामले की निष्पक्ष और समय पर जांच कराने के लिए सीबीआई के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एक मजबूत जांच से ही यह साफ हो पाएगा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के पैसों में कोई भ्रष्टाचार, गड़बड़ी या गबन हुआ है या नहीं।

फंड की निगरानी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की अपील

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी गुहार लगाई गई है कि वह उत्तर प्रदेश सरकार और रामजन्मभूमि ट्रस्ट को एक मजबूत ऑडिट व्यवस्था बनाने का निर्देश दे। इससे भविष्य में ट्रस्ट के फंड और संपत्तियों की बेहतर निगरानी हो सकेगी और ऐसी शिकायतों पर रोक लगेगी। इसके अलावा, कोर्ट से यह आदेश देने की भी मांग की गई है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और कंप्यूटर डेटा जैसे सभी जरूरी रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएं और किसी को भी इनके साथ छेड़छाड़ करने की अनुमति न दी जाए।

रवि किशन की सरप्राइज एंट्री के साथ रिलीज हुआ ‘मिर्जापुर- द मूवी’ का धमाकेदार टीजर

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ओटीटी प्लेटफॉर्म पर तहलका मचाने वाली बेहद लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ अब बड़े पर्दे पर सिनेमा प्रेमियों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिल्म निर्माताओं ने प्रशंसकों के उत्साह को बढ़ाते हुए 'मिर्जापुर- द मूवी' का धमाकेदार टीजर जारी कर दिया है। इस शुरुआती झलक में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु अपने पुराने और बेहद खतरनाक अंदाज में वापस लौटे हैं, जिससे साफ है कि मिर्जापुर के सिंहासन के लिए छिड़ी यह खूनी जंग इस बार थिएटर में और अधिक खौफनाक रूप लेने वाली है। टीजर में अली फजल और दिव्येंदु जबरदस्त एक्शन और मारधाड़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इस बार सिनेमाई स्क्रीन पर दर्शकों को कुछ नए चेहरे भी देखने को मिलेंगे। फिल्म के टीजर में 'पंचायत' सीरीज के मशहूर अभिनेता जितेंद्र कुमार और दिग्गज कलाकार रवि किशन की अनोखी एंट्री दिखाई गई है। टीजर के दृश्यों को देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस कहानी में इन दोनों किरदारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। फिल्मी गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि चूंकि टीजर में विक्रांत मैसी नजर नहीं आ रहे हैं, इसलिए संभवतः जितेंद्र कुमार को बबलू पंडित के रूप में पेश किया जा सकता है।

टीजर के धांसू और रोंगटे खड़े करने वाले डायलॉग

फिल्म के इस टीजर में बेहतरीन एक्शन सीन्स के साथ-साथ कई दमदार संवाद भी सुनने को मिले हैं, जो दर्शकों को काफी प्रभावित कर रहे हैं। कालीन भैया के रूप में पंकज त्रिपाठी कहते हैं, 'काबिल औलाद बहुत मुश्किल से मिलती है और कभी-कभी नहीं भी मिलती है।' वहीं नए शामिल हुए जितेंद्र कुमार का डायलॉग है, 'हमें एम्पायर चलाना नहीं है गुड्डू भैया, बनाना है।' इसके अलावा रवि किशन का एक खौफनाक दृश्य सामने आया है जहां वे अपने साथी से कहते हैं, 'हम कब बोले कि नमक खाने में डालना है' और एक लहूलुहान व्यक्ति पर नमक छिड़क देते हैं। टीजर के अंत में कालीन भैया का एक और संवाद है, 'सारी प्रजा को मार देंगे, तो राज किसपर करेंगे' और शीबा चड्ढा बड़े रौब से कहती नजर आती हैं, 'जानते हो ना किसकी मम्मी हैं हम।'

वापसी करने वाले आइकॉनिक किरदार और बड़ी स्टारकास्ट

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसके चहेते पात्रों का बड़े पर्दे पर दोबारा एकजुट होना है। दर्शकों के सबसे पसंदीदा और चर्चित किरदार 'मुन्ना भैया' यानी दिव्येंदु की कहानी में सरप्राइज वापसी हो रही है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की स्टारकास्ट काफी बड़ी और प्रभावी है, जिसमें जितेंद्र कुमार, रवि किशन, अभिषेक बनर्जी, रसिका दुग्गल, श्वेता त्रिपाठी, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता गौड़, सुशांत सिंह, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, कुलभूषण खरबंदा, सोनल चौहान, प्रमोद पाठक और अनंगशा बिस्वास जैसे मंझे हुए कलाकार अपनी कला का जौहर दिखाते नजर आएंगे।

निर्माण टीम और बड़े पर्दे पर रिलीज की तारीख

इस भव्य क्राइम-ड्रामा फिल्म का कुशल निर्देशन गुरमीत सिंह द्वारा किया गया है, जबकि इसकी मुख्य पटकथा को पुनीत कृष्णा ने अपनी लेखनी से सजाया है। 'मिर्जापुर द मूवी' को एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले मशहूर निर्माता रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने मिलकर प्रोड्यूस किया है, वहीं इस बड़े प्रोजेक्ट के को-प्रोड्यूसर कासिम जगमगिया और विशाल रामचंदानी हैं। सभी जरूरी तकनीकी काम पूरे होने के बाद इस बहुप्रतीक्षित एक्शन-थ्रिलर फिल्म को आगामी 4 सितंबर 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में भव्य स्तर पर रिलीज किया जाएगा।

नेपोटिज्म पर कृति सेनन का बड़ा बयान, बोलीं- बिना टैलेंट के भी स्टारकिड्स को मिल जाते हैं मौके

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बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपनी हाल ही में सिनेमाघरों में आई फिल्म ‘कॉकटेल 2’ की सफलता को लेकर काफी चर्चा बटोर रही हैं। इस फिल्म को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और कृति के अभिनय व उनके किरदार की चौतरफा सराहना हो रही है। आज के समय में कृति फिल्म इंडस्ट्री की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार की जाती हैं, लेकिन फिल्मी दुनिया से बाहर (आउटसाइडर) होने के कारण उनके लिए इस मुकाम तक पहुंचना बिल्कुल भी आसान नहीं था।

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अभिनेत्री ने अपने फिल्मी सफर के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला है, बल्कि उन्होंने धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ी हैं। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों के उन पलों को भी याद किया जब वे अपने पहले फोटोशूट और पहले रैंप वॉक के बाद काफी निराश होकर रो पड़ी थीं। हालांकि, इन तमाम शुरुआती मुश्किलों के बाद भी उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ती रहीं।

शुरुआती असफलताएं और खुद पर संदेह का दौर

कृति सेनन ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि फिल्मी दुनिया का यह रास्ता बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। करियर के शुरुआती दौर में कई बार ऐसा समय भी आया जब उन्हें अपनी काबिलियत पर शक होने लगा था और मनमुताबिक काम न मिलने पर वे गहरी निराशा से घिर जाती थीं। उन्होंने बताया कि उनका पहला प्रोफेशनल फोटोशूट और पहला रैंप शो बेहद खराब रहा था, जिसके बाद वे रोते हुए अपने घर लौटी थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार मानने के बजाय दूसरे शो, नए फोटोशूट और अगले ऑडिशन के लिए खुद को तैयार किया और लगातार सीखने की इसी ललक ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।

भाई-भतीजावाद और स्टार किड्स को मिलने वाले अवसर

इस बातचीत के दौरान कृति ने फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) के मुद्दे पर भी अपनी बेबाक राय रखी। उनका मानना है कि फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को अक्सर बाहरी लोगों की तुलना में बहुत आसानी से और जल्दी बड़े प्रोजेक्ट्स मिल जाते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि फिल्मी बैकग्राउंड के कई कलाकार बेहद प्रतिभाशाली भी होते हैं; उदाहरण के तौर पर रणबीर कपूर और आलिया भट्ट जैसे कलाकारों ने अपनी बेहतरीन एक्टिंग के दम पर खुद को साबित किया है। कृति ने कहा कि स्टार किड्स को शुरुआत में अवसर भले ही आसानी से मिल जाएं, लेकिन उन्हें टिकने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

फिल्मी दुनिया की असमानता और 'कॉकटेल 2' की धूम

अभिनेत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उन्हें तब बुरा लगता है जब कोई स्टार किड खुद को एक बेहतरीन अभिनेता साबित किए बिना भी आठ-नौ सालों तक लगातार फिल्में पाता रहता है। फिल्मी बैकग्राउंड से न होने वाले कलाकारों के साथ दिक्कत यह है कि यदि वे शुरुआती दो-तीन वर्षों में खुद को साबित नहीं कर पाते, तो उन्हें तुरंत नजरअंदाज करके इंडस्ट्री से बाहर कर दिया जाता है। बता दें कि अपने 12 साल लंबे करियर में कृति ने 'मिमी' फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतकर और 'बरेली की बर्फी', 'दिलवाले' व 'क्रू' जैसी हिट फिल्में देकर खुद को साबित किया है और वर्तमान में वे होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी 'कॉकटेल 2' के लिए खूब वाहवाही लूट रही हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में बजट पर घमासान, शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार को घेरा

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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की मौजूदा महायुति सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने दावा किया है कि वार्षिक बजट पेश होने के मात्र तीन महीने के भीतर ही सरकार ने 97,706.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पूरक मांगें (सप्लीमेंट्री डिमांड्स) विधानसभा में रख दी हैं। पार्टी के मुताबिक, इतनी जल्दी इतनी बड़ी रकम की अतिरिक्त मांग करना यह साफ दर्शाता है कि राज्य का वित्तीय अनुशासन और आर्थिक नियंत्रण पूरी तरह से लड़खड़ा चुका है।

पार्टी ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। राज्य पर कुल सार्वजनिक कर्ज का बोझ बढ़कर लगभग 11 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है, जिसके चलते हर साल सिर्फ कर्ज का ब्याज चुकाने में ही सरकारी खजाने से 60,000 करोड़ रुपये की मोटी रकम खर्च हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार बिना किसी दूरदर्शी नीति के राजकोष से पैसा बहा रही है।

पूरक मांगों का नया रिकॉर्ड और बजट अनुमानों की नाकामी

पार्टी ने सरकार की इस कार्यप्रणाली की तुलना उस विद्यार्थी से की है जो परीक्षा में बार-बार सप्लीमेंट्री कॉपियां तो लेता है, लेकिन अंत में जैसे-तैसे केवल पासिंग मार्क्स ही ला पाता है। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि मुख्य बजट के तुरंत बाद इतनी बड़ी धनराशि की मांग करना प्रशासनिक नाकामी को दर्शाता है। पिछले चार सालों के दौरान महायुति सरकार ने कुल मिलाकर करीब पांच लाख करोड़ रुपये की पूरक मांगें पेश की हैं, जो बजट से इतर खर्च करने का एक नया रिकॉर्ड है। अभी आगामी बजट में नौ महीने का समय शेष है, लेकिन सरकार के राजस्व और खर्च के शुरुआती सारे आकलन पहले तीन महीनों में ही पूरी तरह बेअसर साबित हो गए हैं।

विपक्ष में कुछ और, सत्ता में आकर बदले सुर

पार्टी ने पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि जब राज्य में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) की सरकार सत्ता में थी, तब आज के सत्ताधारी दल विपक्ष की भूमिका में हुआ करते थे। उस दौर में ये नेता बहुत कम राशि की पूरक मांगें लाने पर भी तत्कालीन सरकार की जमकर घेराबंदी करते थे और उसे वित्तीय कुप्रबंधन का नाम देते थे। आज वही चेहरे मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जैसे जिम्मेदार पदों पर आसीन हैं, लेकिन अब उन्हें पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक की ये पूरक मांगें वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं लगतीं। राजनीतिक लाभ के लिए मुख्य बजट में वास्तविक आवंटन को छिपाना और बाद में चोर दरवाजे से धन राशि मांगना अब सरकार की आदत बन चुका है।

आर्थिक विरासत और साख को लगा बड़ा बट्टा

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल ने तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार जनकल्याण के बजाय केवल राजनीतिक लाभ वाले अनुत्पादक कार्यों पर अंधाधुंध पैसा लुटा रही है, जिसने राज्य की पूरी वित्तीय योजना को पटरी से उतार दिया है। महाराष्ट्र कभी देश और दुनिया में अपने बेहतरीन वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी नीतियों और मजबूत आर्थिक विरासत के लिए जाना जाता था। पिछले चार वर्षों के दौरान सरकार की खर्चीली और अदूरदर्शी नीतियों के कारण राज्य की वह पुरानी साख और ईमानदारी का सम्मान पूरी तरह धूमिल हो गया है।

जैकलीन फर्नांडिस की याचिका वापस लेने पर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, क्या है पूरा विवाद?

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मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिज को देश की सर्वोच्च अदालत से अपनी एक अहम याचिका वापस लेने की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसके तहत उन पर करोड़ों रुपये के धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में आरोप तय किए जाने का रास्ता साफ हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट से इस अर्जी को वापस लेने की अनुमति मिलने के बाद जैकलीन इस कानूनी लड़ाई को निचली अदालत में ही जारी रखेंगी।

शीर्ष अदालत के माननीय न्यायाधीश जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जैकलीन के कानूनी दल ने याचिका को वापस लेने का अनुरोध किया। अदालत ने उनके इस आग्रह को स्वीकार करते हुए औपचारिकताएं पूरी करने की अनुमति दे दी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत को खारिज करने और ट्रायल कोर्ट द्वारा अभिनेत्री पर आरोप तय करने के निर्णय को बदलने से साफ मना कर दिया था, जिसे जैकलीन ने चुनौती दी थी।

खुद को बेगुनाह बताकर मुकदमे का सामना करने का फैसला

जैकलीन फर्नांडिज इस पूरे विवाद में शुरुआत से ही खुद को पूरी तरह निर्दोष बताती आ रही हैं। उन्होंने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष पेश होकर भी अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया था और मामले को मेरिट के आधार पर लड़कर मुकदमे का सामना करने की इच्छा जाहिर की थी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले अभिनेत्री ने इस मामले में सरकारी गवाह बनने के लिए दी गई अपनी पुरानी अर्जी को भी वापस ले लिया था, जिसका केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने कड़ा विरोध किया था।

सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों पर भी तय हुए आरोप

मनी लॉन्ड्रिंग के इस हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष निचली अदालत ने मुख्य आरोपी और कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर, उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल सहित 14 अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ भी औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इन सभी आरोपियों ने अदालत के सामने खुद को बेगुनाह बताते हुए ट्रायल की मांग की है। कानून के मुताबिक अब इस पूरे मामले की आगामी कड़ियों और आगे की अदालती कार्यवाही के लिए निचली अदालत ने 16 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।

जांच एजेंसी के गंभीर आरोप और मुख्य विवाद

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जैकलीन फर्नांडिज मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की आपराधिक पृष्ठभूमि और उसके काले कारनामों से भली-भांति वाकिफ थीं, फिर भी वे लगातार उसके संपर्क में रहीं। एजेंसी के मुताबिक सुकेश ने अपराध की कमाई से जैकलीन को करीब 7 करोड़ रुपये के महंगे और लग्जरी उपहार, कीमती सामान और अन्य वित्तीय लाभ पहुंचाए थे। हालांकि, अभिनेत्री का हमेशा से यही पक्ष रहा है कि उन्हें सुकेश की अवैध गतिविधियों या उन उपहारों के लिए इस्तेमाल किए गए पैसों के मुख्य स्रोत के बारे में कोई भनक नहीं थी। गौरतलब है कि यह पूरा मामला रैनबैक्सी कंपनी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह की पत्नियों से करीब 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने से जुड़ा हुआ है।

बिजली संकट से परेशान जनता सड़कों पर उतरी, टायर जलाकर विरोध

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हाजीपुर। बिदुपुर पावर सब-स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में पिछले 36 घंटों से लगातार जारी बिजली कटौती ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। चिलचिलाती गर्मी और भारी उमस से बेहाल ग्रामीणों का गुस्सा गुरुवार सुबह फूट पड़ा। बिजली और पानी की भारी किल्लत से आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने बिदुपुर सब-स्टेशन के नजदीक पहुंचकर हाजीपुर-महनार मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाकर बिजली विभाग के खिलाफ उग्र नारेबाजी की, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

अफसरों ने काटे फोन; बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग, बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि करीब डेढ़ दिन से बिजली गायब होने के कारण घरों में लगे इनवर्टर और बैटरियां पूरी तरह बैठ चुकी हैं। बिजली न होने से पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं, जिसके चलते टंकियां खाली हो गई हैं और इलाके में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस नारकीय स्थिति के बीच सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। लोगों ने बताया कि समस्या की शिकायत के लिए जब उन्होंने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) से लेकर सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) तक को फोन मिलाए, तो किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।

दो घंटे तक लगा रहा वाहनों का लंबा जाम, पुलिस की समझौता वार्ता के बाद खुला रास्ता

सुबह करीब 9:30 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन सुबह 11:30 बजे तक यानी पूरे दो घंटे तक जारी रहा। इस दौरान मुख्य मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसमें कई एम्बुलेंस, स्कूली बसें और राहगीर भीषण गर्मी में फंसे रहे। हंगामे और आगजनी की सूचना मिलते ही बिदुपुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और बिजली विभाग के आला अफसरों से बात कर जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल कराने का पुख्ता आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम हटाया।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम; सप्लाई नॉर्मल नहीं हुई तो फिर होगा उग्र आंदोलन

जाम खोलने के बाद भी स्थानीय निवासियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन और बिजली कंपनी को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले दो घंटे के भीतर बिजली और पानी की आपूर्ति को सुचारू नहीं किया गया, तो वे दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि यदि उनकी जायज मांग को अब भी अनसुना किया गया, तो इस बार आंदोलन और ज्यादा उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।

प्रियंका चोपड़ा ने हॉलीवुड करियर पर की खुलकर बात, बोलीं- मेरा बेस्ट काम अभी आना बाकी है

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लॉस एंजिल्स। वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा उन गिने-चुने भारतीय कलाकारों में शुमार हैं, जिन्होंने बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं। जब उनका हिंदी सिनेमा का करियर बुलंदियों पर था, तब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अवसरों की ओर रुख किया और अमेरिका चली गईं। हालांकि, कई बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने के बावजूद प्रियंका का मानना है कि हॉलीवुड में उनका अब तक का योगदान भारतीय सिनेमा में किए गए उनके शानदार काम की तुलना में काफी कम है।

प्रतिष्ठित 'कान लायंस' सम्मेलन में अपने हॉलीवुड सफर पर चर्चा करते हुए प्रियंका ने वैश्विक मंच पर और अधिक विविध काम करने की इच्छा जताई। 'बेवॉच', 'द मैट्रिक्स रेजरेक्शन्स' और हालिया एडवेंचर फिल्म 'द ब्लफ' जैसी हॉलीवुड फिल्मों में अभिनय करने के बाद भी उनका कहना है कि पश्चिमी सिनेमा में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना अभी बाकी है। उन्होंने साझा किया कि भारत में उन्होंने बेहतरीन निर्देशकों के साथ हर तरह के जॉनर और किरदारों को जिया है, लेकिन अमेरिका में अंग्रेजी भाषा के काम में वे अभी तक वैसी विविधता नहीं ला पाई हैं।

हॉलीवुड में विविधतापूर्ण किरदारों की तलाश

प्रियंका चोपड़ा ने अपने करियर के आगामी पड़ाव को लेकर अपनी योजनाएं साझा की हैं। उनका पूरा ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि वे हॉलीवुड में भी उसी तरह के अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाएं, जैसे उन्होंने बॉलीवुड में निभाए थे। वे पश्चिमी फिल्म उद्योग में अपने किरदारों में विविधता लाने के नए रास्तों की तलाश कर रही हैं, ताकि वहां भी अपनी अभिनय क्षमता का पूरा दायरा दर्शकों के सामने रख सकें।

मातृत्व और विवाह के बाद प्राथमिकताओं में बदलाव

इस सम्मेलन के दौरान प्रियंका ने अपने निजी जीवन, शादी और मां बनने के बाद आए बदलावों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि अब उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है और उनकी प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। अब वे पहले की तरह साल में पांच फिल्में नहीं करतीं और न ही तुरंत सामान पैक करके किसी भी प्रोजेक्ट के लिए निकल पड़ती हैं। एक कामकाजी मां के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को संभालते हुए वे अपने समय और काम को लेकर बेहद सतर्क हो गई हैं, जिसके बाद अब उन्हें अपनी मां के प्रति सम्मान और ज्यादा बढ़ गया है।

एसएस राजामौली की फिल्म से भारतीय सिनेमा में वापसी

अगर वर्कफ्रंट की बात करें, तो प्रियंका चोपड़ा हाल ही में कार्ल अर्बन के साथ 'सिटाडेल' के दूसरे सीजन और फिल्म 'द ब्लफ' में दिखाई दी थीं। अब वे काफी समय के बाद भारतीय सिनेमा में एक बेहद बड़े प्रोजेक्ट के साथ वापसी करने जा रही हैं। प्रियंका प्रसिद्ध निर्देशक एसएस राजामौली की भव्य पैन-इंडिया फिल्म 'वाराणसी' का हिस्सा बनेंगी, जिसमें उनके साथ सुपरस्टार महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। बड़े पैमाने पर तैयार होने वाली यह बहुप्रतीक्षित फिल्म साल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

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