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जैकलीन फर्नांडिस की याचिका वापस लेने पर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, क्या है पूरा विवाद?

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मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिज को देश की सर्वोच्च अदालत से अपनी एक अहम याचिका वापस लेने की मंजूरी मिल गई है। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसके तहत उन पर करोड़ों रुपये के धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में आरोप तय किए जाने का रास्ता साफ हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट से इस अर्जी को वापस लेने की अनुमति मिलने के बाद जैकलीन इस कानूनी लड़ाई को निचली अदालत में ही जारी रखेंगी।

शीर्ष अदालत के माननीय न्यायाधीश जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जैकलीन के कानूनी दल ने याचिका को वापस लेने का अनुरोध किया। अदालत ने उनके इस आग्रह को स्वीकार करते हुए औपचारिकताएं पूरी करने की अनुमति दे दी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत को खारिज करने और ट्रायल कोर्ट द्वारा अभिनेत्री पर आरोप तय करने के निर्णय को बदलने से साफ मना कर दिया था, जिसे जैकलीन ने चुनौती दी थी।

खुद को बेगुनाह बताकर मुकदमे का सामना करने का फैसला

जैकलीन फर्नांडिज इस पूरे विवाद में शुरुआत से ही खुद को पूरी तरह निर्दोष बताती आ रही हैं। उन्होंने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के समक्ष पेश होकर भी अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया था और मामले को मेरिट के आधार पर लड़कर मुकदमे का सामना करने की इच्छा जाहिर की थी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले अभिनेत्री ने इस मामले में सरकारी गवाह बनने के लिए दी गई अपनी पुरानी अर्जी को भी वापस ले लिया था, जिसका केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने कड़ा विरोध किया था।

सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों पर भी तय हुए आरोप

मनी लॉन्ड्रिंग के इस हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष निचली अदालत ने मुख्य आरोपी और कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर, उसकी पत्नी लीना मारिया पॉल सहित 14 अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ भी औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इन सभी आरोपियों ने अदालत के सामने खुद को बेगुनाह बताते हुए ट्रायल की मांग की है। कानून के मुताबिक अब इस पूरे मामले की आगामी कड़ियों और आगे की अदालती कार्यवाही के लिए निचली अदालत ने 16 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।

जांच एजेंसी के गंभीर आरोप और मुख्य विवाद

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जैकलीन फर्नांडिज मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की आपराधिक पृष्ठभूमि और उसके काले कारनामों से भली-भांति वाकिफ थीं, फिर भी वे लगातार उसके संपर्क में रहीं। एजेंसी के मुताबिक सुकेश ने अपराध की कमाई से जैकलीन को करीब 7 करोड़ रुपये के महंगे और लग्जरी उपहार, कीमती सामान और अन्य वित्तीय लाभ पहुंचाए थे। हालांकि, अभिनेत्री का हमेशा से यही पक्ष रहा है कि उन्हें सुकेश की अवैध गतिविधियों या उन उपहारों के लिए इस्तेमाल किए गए पैसों के मुख्य स्रोत के बारे में कोई भनक नहीं थी। गौरतलब है कि यह पूरा मामला रैनबैक्सी कंपनी के पूर्व प्रमोटरों शिविंदर सिंह और मलविंदर सिंह की पत्नियों से करीब 200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने से जुड़ा हुआ है।

बिजली संकट से परेशान जनता सड़कों पर उतरी, टायर जलाकर विरोध

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हाजीपुर। बिदुपुर पावर सब-स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में पिछले 36 घंटों से लगातार जारी बिजली कटौती ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। चिलचिलाती गर्मी और भारी उमस से बेहाल ग्रामीणों का गुस्सा गुरुवार सुबह फूट पड़ा। बिजली और पानी की भारी किल्लत से आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने बिदुपुर सब-स्टेशन के नजदीक पहुंचकर हाजीपुर-महनार मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच टायर जलाकर बिजली विभाग के खिलाफ उग्र नारेबाजी की, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

अफसरों ने काटे फोन; बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग, बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि करीब डेढ़ दिन से बिजली गायब होने के कारण घरों में लगे इनवर्टर और बैटरियां पूरी तरह बैठ चुकी हैं। बिजली न होने से पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं, जिसके चलते टंकियां खाली हो गई हैं और इलाके में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस नारकीय स्थिति के बीच सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। लोगों ने बताया कि समस्या की शिकायत के लिए जब उन्होंने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) से लेकर सब-डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) तक को फोन मिलाए, तो किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।

दो घंटे तक लगा रहा वाहनों का लंबा जाम, पुलिस की समझौता वार्ता के बाद खुला रास्ता

सुबह करीब 9:30 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन सुबह 11:30 बजे तक यानी पूरे दो घंटे तक जारी रहा। इस दौरान मुख्य मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिसमें कई एम्बुलेंस, स्कूली बसें और राहगीर भीषण गर्मी में फंसे रहे। हंगामे और आगजनी की सूचना मिलते ही बिदुपुर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित भीड़ को शांत कराया और बिजली विभाग के आला अफसरों से बात कर जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल कराने का पुख्ता आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम हटाया।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम; सप्लाई नॉर्मल नहीं हुई तो फिर होगा उग्र आंदोलन

जाम खोलने के बाद भी स्थानीय निवासियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन और बिजली कंपनी को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले दो घंटे के भीतर बिजली और पानी की आपूर्ति को सुचारू नहीं किया गया, तो वे दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि यदि उनकी जायज मांग को अब भी अनसुना किया गया, तो इस बार आंदोलन और ज्यादा उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।

प्रियंका चोपड़ा ने हॉलीवुड करियर पर की खुलकर बात, बोलीं- मेरा बेस्ट काम अभी आना बाकी है

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लॉस एंजिल्स। वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा उन गिने-चुने भारतीय कलाकारों में शुमार हैं, जिन्होंने बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं। जब उनका हिंदी सिनेमा का करियर बुलंदियों पर था, तब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अवसरों की ओर रुख किया और अमेरिका चली गईं। हालांकि, कई बड़े वैश्विक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने के बावजूद प्रियंका का मानना है कि हॉलीवुड में उनका अब तक का योगदान भारतीय सिनेमा में किए गए उनके शानदार काम की तुलना में काफी कम है।

प्रतिष्ठित 'कान लायंस' सम्मेलन में अपने हॉलीवुड सफर पर चर्चा करते हुए प्रियंका ने वैश्विक मंच पर और अधिक विविध काम करने की इच्छा जताई। 'बेवॉच', 'द मैट्रिक्स रेजरेक्शन्स' और हालिया एडवेंचर फिल्म 'द ब्लफ' जैसी हॉलीवुड फिल्मों में अभिनय करने के बाद भी उनका कहना है कि पश्चिमी सिनेमा में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना अभी बाकी है। उन्होंने साझा किया कि भारत में उन्होंने बेहतरीन निर्देशकों के साथ हर तरह के जॉनर और किरदारों को जिया है, लेकिन अमेरिका में अंग्रेजी भाषा के काम में वे अभी तक वैसी विविधता नहीं ला पाई हैं।

हॉलीवुड में विविधतापूर्ण किरदारों की तलाश

प्रियंका चोपड़ा ने अपने करियर के आगामी पड़ाव को लेकर अपनी योजनाएं साझा की हैं। उनका पूरा ध्यान अब इस बात पर केंद्रित है कि वे हॉलीवुड में भी उसी तरह के अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाएं, जैसे उन्होंने बॉलीवुड में निभाए थे। वे पश्चिमी फिल्म उद्योग में अपने किरदारों में विविधता लाने के नए रास्तों की तलाश कर रही हैं, ताकि वहां भी अपनी अभिनय क्षमता का पूरा दायरा दर्शकों के सामने रख सकें।

मातृत्व और विवाह के बाद प्राथमिकताओं में बदलाव

इस सम्मेलन के दौरान प्रियंका ने अपने निजी जीवन, शादी और मां बनने के बाद आए बदलावों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि अब उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है और उनकी प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। अब वे पहले की तरह साल में पांच फिल्में नहीं करतीं और न ही तुरंत सामान पैक करके किसी भी प्रोजेक्ट के लिए निकल पड़ती हैं। एक कामकाजी मां के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को संभालते हुए वे अपने समय और काम को लेकर बेहद सतर्क हो गई हैं, जिसके बाद अब उन्हें अपनी मां के प्रति सम्मान और ज्यादा बढ़ गया है।

एसएस राजामौली की फिल्म से भारतीय सिनेमा में वापसी

अगर वर्कफ्रंट की बात करें, तो प्रियंका चोपड़ा हाल ही में कार्ल अर्बन के साथ 'सिटाडेल' के दूसरे सीजन और फिल्म 'द ब्लफ' में दिखाई दी थीं। अब वे काफी समय के बाद भारतीय सिनेमा में एक बेहद बड़े प्रोजेक्ट के साथ वापसी करने जा रही हैं। प्रियंका प्रसिद्ध निर्देशक एसएस राजामौली की भव्य पैन-इंडिया फिल्म 'वाराणसी' का हिस्सा बनेंगी, जिसमें उनके साथ सुपरस्टार महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। बड़े पैमाने पर तैयार होने वाली यह बहुप्रतीक्षित फिल्म साल 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

भारत सरकार का बड़ा कदम, एयर सुविधा पोर्टल पर देनी होगी स्वास्थ्य जानकारी

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नई दिल्ली। मध्य और पूर्वी अफ्रीका में पैर पसार रहे घातक 'इबोला वायरस' (Ebola Virus) के प्रकोप को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। इबोला प्रभावित देशों से आने वाले या वहां से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी के लिए 'एयर सुविधा पोर्टल' को फिर से एक्टिव कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों को भारत में उतरने से पहले ऑनलाइन 'सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म' (SDF) भरना अनिवार्य होगा, जिससे हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर स्क्रीनिंग की प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

फ्रांस में फ्लाइट के भीतर डॉक्टर मिला पॉजिटिव, संपर्क में आए 5 लोग आइसोलेट

अफ्रीका के बाद अब इस वायरस ने यूरोप में भी दस्तक दे दी है। फ्रांस में एक अनुभवी भारतीय या विदेशी डॉक्टर के इबोला संक्रमित मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट के मुताबिक, यह डॉक्टर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में एक चिकित्सा मिशन से लौटे थे। फ्लाइट में बैठते समय उनमें कोई लक्षण नहीं थे, लेकिन सफर के दौरान तेज सिरदर्द होने पर उन्होंने खुद ही अलर्ट जारी किया। पेरिस एयरपोर्ट पर लैंड करते ही डॉक्टर को तुरंत अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं, फ्लाइट में उनके संपर्क में आए 5 अन्य संदिग्ध यात्रियों की पहचान कर उन्हें भी 21 दिनों (इन्क्यूबेशन पीरियड) के लिए क्वारंटाइन कर दिया गया है।

यूरोप में खतरे का अनुमान कम, लेकिन कांगो में मौतों का आंकड़ा 290 के पार

यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) का मानना है कि यूरोपीय देशों के आम नागरिकों के लिए इस संक्रमण का खतरा फिलहाल बेहद कम है। इसके बावजूद सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, संक्रमण के मुख्य केंद्र डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कांगो सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक इबोला के 1,118 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 291 मरीजों की मौत हो चुकी है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण की इस चेन को तोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

महिला क्रिकेटरों के लिए बड़ी खुशखबरी! ICC के नए नियम से खुश हुए सचिन तेंदुलकर

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने महिला क्रिकेटरों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। आईसीसी ने मां बनने के बाद महिला खिलाड़ियों की मैदान पर सुरक्षित और आसान वापसी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक खास 'सिक्स-आर फ्रेमवर्क' (6-R Framework) नीति की शुरुआत की है। इस नई नीति का मुख्य लक्ष्य महिला क्रिकेटरों को गर्भावस्था के बाद चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से खेल में लौटने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करना है। आईसीसी का मानना है कि मातृत्व सुख किसी भी महिला खिलाड़ी के पेशेवर करियर का अंत नहीं होना चाहिए और इसी प्रगतिशील सोच के साथ तैयार किए गए इस नियम का वैश्विक क्रिकेट जगत में पुरजोर स्वागत किया जा रहा है।

आईसीसी द्वारा तैयार किए गए इस विशेष ढांचे को 'सिक्स-आर फ्रेमवर्क' नाम दिया गया है, जो मुख्य रूप से छह महत्वपूर्ण चरणों पर आधारित है। इसमें रेडी (तैयारी), रिव्यू (समीक्षा), रीस्टोर (पुनर्स्थापना), रीकंडीशन (फिर से फिटनेस हासिल करना), रिटर्न (वापसी) और रिफाइन (निरंतर सुधार) शामिल हैं। यह पूरा सिस्टम इस तरह काम करेगा जिससे मां बनने के बाद खिलाड़ी बिना किसी शारीरिक या मानसिक तनाव के दोबारा खेल के शीर्ष स्तर पर अपनी जगह बना सकें।

सचिन तेंदुलकर ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने आईसीसी की इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपना समर्थन व्यक्त करते हुए लिखा कि आईसीसी का यह कदम बेहद शानदार और अनुकरणीय है। खेलों में वास्तविक महिला सशक्तिकरण का मतलब यही है कि खिलाड़ियों के जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग मिले। सचिन ने आगे कहा कि पहले महिला खिलाड़ियों को मातृत्व या करियर में से किसी एक को चुनना पड़ता था, लेकिन अब दोनों को एक साथ लेकर चलने की यह व्यवस्था यह साबित करती है कि हमारा खेल बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह नीति दुनिया भर की महिला क्रिकेटरों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखेगी।

चिकित्सीय समिति ने स्पष्ट किए नीति के उद्देश्य

आईसीसी की मेडिकल सलाहकार समिति की सक्रिय सदस्य डॉ. फिलिपा इंगे ने इस दूरदर्शी नीति के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नियम को बनाने का असल मकसद खिलाड़ियों के मन से यह डर निकालना है कि बच्चा होने के बाद उनका खेल खत्म हो जाएगा। यह नीति यह साबित करेगी कि मां बनने के बाद भी वे खेल में अपनी बादशाहत दोबारा कायम कर सकती हैं। हमारा प्रयास सभी सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड्स को एक ऐसा ढांचा प्रदान करना है, जिससे वे अपनी महिला खिलाड़ियों को मातृत्व के बाद मैदान पर लौटने में पूरी तकनीकी और चिकित्सीय मदद दे सकें।

वैश्विक महिला क्रिकेटरों ने जताया आभार

इंग्लैंड महिला टीम की अनुभवी बल्लेबाज हीदर नाइट ने इस पहल को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि जो खिलाड़ी अपने जीवन में परिवार आगे बढ़ाना चाहती हैं, उनके लिए ऐसे स्पष्ट दिशा-निर्देशों का होना बेहद जरूरी था। इससे महिला खिलाड़ियों में यह विश्वास जगेगा कि वे मां बनने की जिम्मेदारी और क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को एक साथ बखूबी निभा सकती हैं। वहीं, वेस्टइंडीज की एफी फ्लेचर और आयरलैंड की पूर्व क्रिकेटर इसोबेल जॉयस ने भी अपने निजी अनुभव साझा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के जन्म के बाद शारीरिक, मानसिक और व्यावहारिक रूप से खुद को तैयार करना एक कठिन चुनौती होती है; ऐसे में आईसीसी का यह व्यवस्थित समर्थन हर महिला खिलाड़ी के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।

आकाश दीप की शादी में नहीं दिखे बड़े क्रिकेट सितारे, जानिए क्यों नहीं भेजा गया निमंत्रण

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वाराणसी। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप इन दिनों अपनी जिंदगी की नई पारी की शुरुआत को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने धार्मिक नगरी बनारस में अक्षिता राज के साथ विवाह रचाया। शादी संपन्न होने के बाद इस तेज गेंदबाज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इस खूबसूरत समारोह की कुछ खास तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जो प्रशंसकों के बीच काफी पसंद किए जा रहे हैं। इसी दौरान शादी के जश्न से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प वीडियो इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक मेहमान ने आकाश दीप से भारतीय क्रिकेट जगत के तीन दिग्गज खिलाड़ियों—महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा की अनुपस्थिति को लेकर एक मजेदार सवाल पूछ लिया।

विवाह समारोह में शिरकत करने आए एक अतिथि ने मजाकिया लहजे में आकाश दीप से सवाल किया कि उन्होंने इतने बड़े सितारों को अपनी शादी का न्योता क्यों नहीं दिया। इस पर आकाश दीप ने भी बेहद हाजिरजवाबी और मजाकिया अंदाज में उत्तर दिया, जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

भीड़ और सुरक्षा के मद्देनजर लिया फैसला

मेहमान के सवाल का जवाब देते हुए आकाश दीप ने हंसते हुए कहा कि अगर वे तीनों यहां आ जाते, तो क्या बनारस में शांति से शादी संपन्न हो पाती। उनके इस मजाकिया बयान ने साफ तौर पर यह इशारा किया कि एमएस धोनी, विराट कोहली और रोहित शर्मा की दीवानगी प्रशंसकों के सिर चढ़कर बोलती है। यदि ये तीनों महान खिलाड़ी इस समारोह का हिस्सा बनते, तो उन्हें देखने के लिए स्थानीय प्रशंसकों का एक बहुत बड़ा हुजूम उमड़ पड़ता, जिससे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को संभालना तथा शादी के कार्यक्रमों को सहजता से पूरा करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता।

सोशल मीडिया पर मिली खूब सराहना

आकाश दीप का यह बेबाक और व्यावहारिक जवाब अब विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जमकर ट्रेंड कर रहा है। क्रिकेट प्रेमी उनके इस समझदारी भरे और मजाकिया दृष्टिकोण की काफी सराहना कर रहे हैं और वीडियो पर मजेदार कमेंट्स कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट में इन तीनों दिग्गजों का कद इतना बड़ा है कि उनकी एक झलक पाने के लिए प्रशंसकों की भारी भीड़ जुटना बेहद स्वाभाविक है, यही वजह है कि क्रिकेटर ने अपनी शादी को निजी और स्थानीय स्तर तक ही सीमित रखना बेहतर समझा।

चोट से उबरने और मैदान पर वापसी की कोशिश

अगर खेल के मैदान पर आकाश दीप के सफर की बात करें, तो उन्होंने अब तक भारतीय टेस्ट टीम के लिए 10 मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 28 विकेट चटकाए हैं। उनके टेस्ट करियर का एक पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 60 रन देकर 6 विकेट और एक मैच में 112 रन देकर 10 विकेट लेना रहा है। पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम टेस्ट में उन्होंने 12 विकेट झटककर भारतीय टीम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। हालांकि, आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स टीम का हिस्सा होने के बावजूद वे पीठ के निचले हिस्से में स्ट्रेस इंजरी (खिंचाव) के कारण पूरे सीजन से बाहर रहे और फिलहाल मैदान से दूर रहकर राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में अपनी फिटनेस को दोबारा हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

भारत-आयरलैंड सीरीज में वैभव सूर्यवंशी की एंट्री पर सस्पेंस, जानिए संभावित Playing XI

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डबलिन। भारत और आयरलैंड के बीच 26 जून को होने वाले पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले को लेकर क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है। हाल ही में ट्राई सीरीज में अपने बल्ले से कोहराम मचाने वाले युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी भारतीय दल के साथ आयरलैंड पहुंच चुके हैं। इस दौरे पर क्रिकेट गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या वैभव को इस मैच में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने का मौका मिलेगा। इस विषय पर खेल विशेषज्ञ भी बंटे हुए नजर आ रहे हैं; जहां कुछ का मानना है कि उनकी मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उन्हें तुरंत मौका दिया जाना चाहिए, वहीं कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इस युवा खिलाड़ी के पास अभी करियर में काफी समय है और उन्हें थोड़ा इंतजार कराना बेहतर होगा।

रणनीतिक समीकरणों को देखें तो वैभव को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना कप्तान के लिए आसान नहीं होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, आयरलैंड के खिलाफ पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी अभिषेक शर्मा और विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के कंधों पर हो सकती है। ऐसे में यदि वैभव सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में जगह देनी है, तो प्रबंधन को अभिषेक या संजू में से किसी एक धाकड़ ओपनर को बेंच पर बैठाना पड़ेगा, जिसकी संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।

मध्यक्रम में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर संभालेंगे कमान

पहले टी20 मैच में नंबर तीन पर बल्लेबाजी के लिए ईशान किशन का उतरना लगभग तय माना जा रहा है। आईपीएल के बाद से ही ईशान का बल्ला जमकर रन उगल रहा है और उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे मैच में शानदार शतकीय पारी खेलकर अपनी बेहतरीन फॉर्म का नजारा पेश किया था। वहीं, चौथे नंबर पर खुद कप्तान श्रेयस अय्यर बल्लेबाजी के लिए उतर सकते हैं। श्रेयस लंबे समय बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में वापसी कर रहे हैं; उन्होंने अपना आखिरी टी20 मैच 3 दिसंबर 2023 को ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेला था।

तिलक वर्मा की दावेदारी और ऑलराउंडर्स का दम

मध्यक्रम को मजबूती देने के लिए नंबर पांच पर तिलक वर्मा को मौका मिलना तय है। तिलक ने हाल ही में संपन्न हुई ट्राई सीरीज में भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, जहां उन्होंने 5 मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 275 रन कूट डाले थे। टीम में ऑलराउंडर और फिनिशर की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी शिवम दुबे और अक्षर पटेल के कंधों पर होगी, जो अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और कसी हुई गेंदबाजी से मैच का पासा पलटने में माहिर हैं।

गेंदबाजी आक्रमण और भारतीय टीम का पूरा स्क्वॉड

आयरलैंड की पिचों पर भारतीय गेंदबाजी की कमान वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और लेग स्पिनर रवि बिश्नोई के हाथों में होगी। मैच के लिए भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा, रवि बिश्नोई और अर्शदीप सिंह को शामिल किया जा सकता है। वहीं, पूरे दौरे के लिए घोषित 15 सदस्यीय मुख्य स्क्वॉड इस प्रकार है: श्रेयस अय्यर (कप्तान), अक्षर पटेल, ईशान किशन, संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, वैभव सूर्यवंशी, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा, प्रिंस यादव और सुयश शेडगे।

नकली घी के कारोबार का भंडाफोड़, 900 किलो पाम ऑयल जब्त

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जैसलमेर। सीमावर्ती जिले का परमाणु क्षेत्र 'पोकरण' इन दिनों मिलावटखोरों और नकली खाद्य पदार्थों का केंद्र बनता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने यहाँ एक महीने के भीतर लगातार दूसरी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। मंगलवार की रात जैसलमेर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पोकरण के भवानीपुरा स्थित एक रिहायशी मकान में दबिश दी, जहाँ बड़े पैमाने पर नकली घी बनाने का अवैध कारोबार चल रहा था। एक महीने के भीतर नकली घी के खिलाफ हुई इस दूसरी बड़ी कार्रवाई से पूरे इलाके के व्यापारियों और मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।

ब्रांडेड डिब्बों और रैपर्स का खेल; पुलिस की मदद से 900 किलो पाम ऑयल बरामद

खाद्य सुरक्षा अधिकारी किशनाराम कड़वासरा के नेतृत्व में पोकरण पुलिस के सहयोग से देर रात तक चली इस कार्रवाई में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। इस अवैध फैक्ट्री से टीम ने 900 किलोग्राम पाम ऑयल और 453 किलोग्राम तैयार नकली घी बरामद किया है। इसके साथ ही मौके से नामचीन कंपनियों जैसे 'शक्ति' और 'डेयरी बैस्ट' सहित कई बड़े ब्रांड्स के नकली रैपर्स, खाली टिन, ढक्कन, पैकिंग मशीनें, गैस सिलेंडर और भट्टियां जब्त की गई हैं। मिलावटखोर इन नामी ब्रांड्स के डिब्बों में नकली घी भरकर धड़ल्ले से बाजार में असली के दाम पर बेच रहे थे।

केमिकल और एसेंस की 'वैज्ञानिक' ट्रिक; ऐसे बनता है पाम ऑयल से नकली घी

जांच में सामने आया कि मिलावटखोर बेहद शातिर और वैज्ञानिक तरीके से सस्ते पाम ऑयल को असली घी की शक्ल देते थे।

  • सबसे पहले कच्चे पाम ऑयल को एक निश्चित तापमान पर उबाला जाता है।

  • इसके बाद इसका 'हाइड्रोजनीकरण' (Hydrogenation) किया जाता है, जिससे तेल गाढ़ा और शुद्ध घी की तरह दानेदार हो जाता है।

  • इसके बाद इसमें विशेष प्रकार के केमिकल और एसेंस (सुगंध) मिलाए जाते हैं, जिससे इसमें से हूबहू असली देसी घी जैसी खुशबू आने लगती है।

  • आखिरी चरण में इसमें कृत्रिम पीला रंग मिलाया जाता है, ताकि यह दिखने में पूरी तरह गाय या भैंस का शुद्ध घी लगे।

विशेषज्ञों की चेतावनी: हार्ट अटैक और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पाम ऑयल और खतरनाक रसायनों से तैयार यह नकली घी इंसानी शरीर के लिए किसी धीमे जहर से कम नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मिलावटी घी के सेवन से शरीर की धमनियां (Arteries) ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंग और एसेंस सीधे लिवर और किडनी को डैमेज करते हैं, जिससे इनके फेल होने की नौबत आ सकती है। लगातार इसके उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है, जबकि बच्चों में यह शारीरिक और मानसिक विकास को पूरी तरह रोक देता है। बाजार में बड़े ब्रांड के नाम पर मिल रहे इस जहर को लेकर अब आम जनता में भी भारी भय और चिंता का माहौल है।

बारिश, धूप या ठंड… मौसम के साथ क्यों बदल जाती हैं भावनाएं? एक्सपर्ट्स से जानें

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बदलते मौसम का प्रभाव केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह हमारे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और मानसिक भावनाओं को भी गहराई से प्रभावित करता है। अक्सर यह देखा जाता है कि चिलचिलाती गर्मियों के दौरान लोग अधिक आक्रामक और चिड़चिड़े हो जाते हैं, जबकि सर्दियों के आगमन के साथ ही स्वभाव में एक अजीब सा ठहराव और शांति आ जाती है। इसके मुख्य कारणों में चढ़ता-उतरता पारा, सूर्य की किरणों की उपलब्धता और हमारे शरीर के भीतर होने वाले रासायनिक बदलाव जिम्मेदार हैं।

वास्तव में, वातावरणीय बदलावों के कारण हमारे शरीर में मौजूद सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स का संतुलन डगमगा जाता है, जो सीधे तौर पर हमारे व्यवहार और मनोदशा को संचालित करते हैं। तेज धूप और गर्मी की वजह से जहां शरीर जल्दी थक जाता है और पानी की कमी के चलते दिमाग में तनाव बढ़ता है, वहीं सर्द मौसम में मानसिक और शारीरिक रूप से लोग खुद को अधिक सहज महसूस करते हैं। आइए समझने का प्रयास करते हैं कि प्रकृति का यह चक्र हमारे मानसिक स्वास्थ्य को वैज्ञानिक रूप से कैसे नियंत्रित करता है।

गर्मी का प्रकोप और बढ़ता हुआ चिड़चिड़ापन

ग्रीष्मकाल में जब वायुमंडल का तापमान तेजी से बढ़ता है, तो मानव शरीर को खुद को सामान्य बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है। अत्यधिक पसीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। नतीजतन, व्यक्ति बिना किसी बड़े कारण के भी घबराहट, थकान और गुस्से का अनुभव करने लगता है। इसके अतिरिक्त, उमस और अत्यधिक गर्मी के कारण रात की नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे मानसिक संतुलन और अधिक बिगड़ जाता है। यही मुख्य वजह है कि गर्मियों के महीनों में लोगों में आपसी विवाद और मानसिक तनाव की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं।

सर्द मौसम में मानसिक राहत और सुकून

इसके विपरीत, सर्दियों के दिनों में जब तापमान में गिरावट आती है, तो शरीर को एक प्राकृतिक राहत मिलती है और ऊर्जा का स्तर काफी बेहतर हो जाता है। शीतल हवाएं और शांत वातावरण मानसिक रूप से बेहद आरामदायक साबित होते हैं। इस मौसम में अमूमन लोग गहरी और सुकून भरी नींद ले पाते हैं, जिससे जागने के बाद दिमाग पूरी तरह तरोताजा रहता है और विचारों में सकारात्मकता बनी रहती है। यही कारण है कि सर्दियों के दौरान लोग सामान्य तौर पर अधिक खुशमिजाज, शांत और संतुलित व्यवहार करते नजर आते हैं।

धूप, वर्षा और हार्मोन्स का आंतरिक विज्ञान

सूर्य का प्रकाश हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी मदद से शरीर में विटामिन डी का निर्माण होता है, जो मानसिक तंदुरुस्ती के लिए अनिवार्य माना गया है। धूप के संपर्क में आने से 'हैप्पी हार्मोन' कहे जाने वाले सेरोटोनिन का स्राव बढ़ता है, जो अवसाद को दूर रखता है। हालांकि, बहुत तेज धूप थकान का कारण भी बन सकती है। इसी तरह मानसून का मौसम भी हमारी भावनाओं को प्रभावित करता है। जहां बारिश की फुहारें कई लोगों को मानसिक शांति और ताजगी देती हैं, वहीं कुछ लोगों में धूप की कमी और अत्यधिक उमस के कारण आलस्य, सुस्ती और एक अनजानी सी उदासी भी पनपने लगती है। संक्षेप में कहें तो, मौसम के अनुसार हार्मोन्स के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव ही हमारी नींद, ऊर्जा और पूरे दिन के व्यवहार को तय करते हैं।

राजस्थान को बड़ी सौगात, 2 नए रेल प्रोजेक्ट्स को मिली हरी झंडी

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बीकानेर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों के विकास को गति देने और सामरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए ₹2374 करोड़ के भारी-भरकम बजट से दो नई रेल लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कुल 186 किलोमीटर लंबा नया रेल नेटवर्क बिछाया जाएगा। इस सौगात से अनूपगढ़ से बीकानेर के बीच सीधी रेल सेवा का वर्षों पुराना सपना धरातल पर उतरेगा। इस बड़ी योजना की रूपरेखा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने बीकानेर दौरे के दौरान रखी थी, जिस पर अब केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है।

इन रूटों पर दौड़ेगी ट्रेन, सीमावर्ती कस्बों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल के तहत इस परियोजना को दो हिस्सों में पूरा किया जाएगा:

  • पहला रूट: अनूपगढ़ से कानासर तक 131 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनेगी।

  • दूसबर रूट: रोजड़ी से खाजूवाला के बीच 54 किलोमीटर का नया रेल ट्रैक तैयार होगा। इस नए रेल मार्ग के विकसित होने से सरहद के पास बसे अनूपगढ़, पतरोड़ा, घड़साना, रावला और खाजूवाला जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को पहली बार सीधी रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकेगा।

किसानों और युवाओं के लिए खुलेंगे नए रास्ते, व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

यह रेल नेटवर्क इस इलाके की अर्थव्यवस्था को बदलने वाला साबित होगा। अनूपगढ़ और इसके आस-पास के बेल्ट में गेहूं, सरसों, कपास, ग्वार, मूंग और किन्नू का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। ट्रेन सुविधा मिलने से कृषि उपजों का परिवहन बेहद सस्ता और तेज हो जाएगा, जिससे किसानों को अपनी फसलों के बेहतर दाम मिल सकेंगे। इसके अलावा, रेल लाइन के निर्माण कार्य से स्थानीय युवाओं, इंजीनियरों, मशीन ऑपरेटरों और श्रमिकों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। इस सुगम कनेक्टिविटी से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी।

सामरिक दृष्टि से बेहद अहम; सेना और बीएसएफ की बढ़ेगी ताकत

भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब होने के कारण यह प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। वर्तमान में सीमावर्ती चौकियों तक सैन्य साजो-सामान और रसद पहुंचाने के लिए पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। नई रेल लाइन बिछने के बाद भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए जवानों, हथियारों और सैन्य उपकरणों को बेहद कम समय में सरहद तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। यह नया ट्रैक आपातकालीन स्थितियों में देश की त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया को कई गुना मजबूत करेगा।

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