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रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद जौहर ट्रस्ट पर बढ़ीं मुश्किलें, लग सकती है भारी पेनाल्टी

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रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। आयकर विभाग ने उनके परिवार से जुड़े 'जौहर ट्रस्ट' का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब इस ट्रस्ट पर भारी टैक्स, ब्याज और जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रस्ट के पास इस फैसले के खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील करने का विकल्प अभी भी खुला हुआ है।

यह दंडात्मक कार्रवाई साल 2023 में जौहर ट्रस्ट के विभिन्न ठिकानों पर मारे गए छापों के दौरान मिलीं वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आधार पर की गई है। विभाग ने इन वित्तीय कमियों को लेकर ट्रस्ट प्रबंधन से तय समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन ट्रस्ट की ओर से कोई भी संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद आयकर विभाग, लखनऊ के प्रधान आयुक्त (केंद्रीय) द्वारा पंजीकरण रद्द करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया गया।

चैरिटेबल दर्जा खत्म और व्यावसायिक दरों पर टैक्स

आयकर और टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, विभाग ने ट्रस्ट का महत्वपूर्ण '12एबी रजिस्ट्रेशन' समाप्त कर दिया है। इस तकनीकी बदलाव के बाद अब इस ट्रस्ट को मिलने वाला 'चैरिटेबल' यानी धर्मार्थ संस्था का दर्जा पूरी तरह खत्म हो गया है और इसकी पूरी कमाई को अब एक सामान्य बिजनेस (व्यावसायिक कारोबार) की तरह माना जाएगा। पंजीकरण निरस्त होने के बाद अब आयकर विभाग ट्रस्ट की चल और अचल संपत्तियों जैसे जमीन, आलीशान इमारतें और बैंक बैलेंस का मौजूदा बाजार मूल्य (मार्केट वैल्यू) पर मूल्यांकन करेगा। इसके साथ ही, कार्रवाई की अवधि से लेकर अब तक की कुल आय, मिले चंदे और संचित संपत्ति पर व्यावसायिक दरों से भारी टैक्स के साथ-साथ ब्याज और भारी पेनल्टी वसूली जाएगी।

क्या है धारा 12एबी और शिकायत का मुख्य आधार

आयकर अधिनियम की धारा 12एबी के तहत होने वाला पंजीकरण मुख्य रूप से गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), सोशल ट्रस्टों और गैर-लाभकारी संस्थाओं को दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि संस्था को दान या सरकारी अनुदान के रूप में मिलने वाली रकम पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता, बशर्ते उस पैसे का उपयोग पूरी तरह सामाजिक, शैक्षणिक या धार्मिक कार्यों में किया गया हो। जौहर ट्रस्ट के मामले में विभाग ने पाया कि इसकी गतिविधियां वास्तविक सामाजिक उद्देश्यों से परे थीं, जो कि पंजीकरण की शर्तों का सीधा उल्लंघन था। बता दें कि इस पूरे मामले की आधिकारिक शिकायत भाजपा विधायक आकाश सक्सेना द्वारा साक्ष्यों के साथ की गई थी, जिसके बाद रामपुर में निर्मित मोहम्मद अली जौहर निजी यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के खातों की जांच शुरू हुई थी।

इन गंभीर अनियमितताओं के चलते हुई कार्रवाई

जांच रिपोर्ट और विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, इस कड़ी कार्रवाई के पीछे कई गंभीर कारण और अनियमितताएं सामने आई हैं:

  • मंत्री पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराना।
  • यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर ही मस्जिद और समाजवादी पार्टी के कार्यालय भवन का निर्माण किया जाना।
  • प्रशासन से तय अनुमति से कहीं अधिक सरकारी और चक्रोड की भूमि पर अवैध कब्जा करना।
  • परिसर में बनी 59 आलीशान इमारतों की वास्तविक निर्माण लागत को दस्तावेजों में 10 गुना तक कम करके दिखाना।
  • टैक्स बचाने के उद्देश्य से बोगस डोनेशन (फर्जी चंदा) लेना और डमी ट्रस्टी बनाना।
  • ट्रस्ट के माध्यम से जनहित या सामाजिक भलाई का कोई भी काम धरातल पर न करना।
  • भवनों के निर्माण कार्य में सरकारी विभागों के धन और मशीनरी का दुरुपयोग करना।
  • वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 के दौरान बैंक खातों में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक नकदी जमा कराना।
  • चंदे या दान की रकम को लोगों की स्वेच्छा के बजाय कथित रूप से दबाव बनाकर जमा कराना।
  • बिना हिसाब-किताब वाली ब्लैक मनी को दान का रूप देकर बैंक खातों में खपाना।
  • बड़े निर्माण कार्यों के लिए संबंधित सरकारी विभागों से जरूरी नक्शे और अनुमतियां न लेना।
  • परिसर में सुरक्षा और अग्निशमन (फायर सेफ्टी) के अनिवार्य मानकों का पूरी तरह उल्लंघन करना।
  • पूरे ट्रस्ट और उसकी कार्यप्रणाली पर केवल आजम खां के पारिवारिक सदस्यों का ही वर्चस्व होना।

PTET परिणाम घोषित, सफल अभ्यर्थियों को मिलेगा B.Ed में एडमिशन

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कोटा। वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी (VMOU) कोटा द्वारा आयोजित की गई राजस्थान प्री-टीचर एजुकेशन टेस्ट (PTET-2026) का परिणाम आज, 25 जून 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया गया है। इस परीक्षा में शामिल हुए तमाम अभ्यर्थी यूनिवर्सिटी की प्राधिकृत वेबसाइट पर जाकर अपने प्राप्तांक देख सकते हैं। परिणाम जारी होने के साथ ही अब राज्य के बीएड (B.Ed) कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया का रास्ता भी साफ हो गया है। बता दें कि इस प्रवेश परीक्षा का आयोजन 14 जून को प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर किया गया था, जिसमें कुल पंजीकृत 1,26,600 आवेदकों में से 1,07,575 अभ्यर्थी परीक्षा में बैठे थे।

3 आसान स्टेप्स में ऐसे चेक करें अपना स्कोरकार्ड

परीक्षार्थी बिना किसी परेशानी के अपना रिजल्ट देखने के लिए इन स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:

  • स्टेप 1: सबसे पहले पीटीईटी (PTET) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और होम पेज पर दिए गए रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें।

  • स्टेप 2: इसके बाद '2 वर्षीय बीएड कोर्स' का विकल्प चुनें और अपना रोल नंबर व अन्य आवश्यक जानकारियां दर्ज करें।

  • स्टेप 3: सबमिट करते ही आपका परीक्षा परिणाम स्क्रीन पर आ जाएगा। भविष्य की दाखिला प्रक्रिया और काउंसलिंग के लिए इसका प्रिंटआउट जरूर सुरक्षित रख लें।

4 साल के इंटीग्रेटेड कोर्स बंद होने से इस बार प्रतिस्पर्धा रहेगी कम

इस साल बीएड कॉलेजों में सीट पक्की करने के लिए मुकाबला पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा आसान रहने की उम्मीद है। दरअसल, पहले पीटीईटी के माध्यम से 2 वर्षीय बीएड के अलावा 4 साल के इंटीग्रेटेड (BA-B.Ed और BSc-B.Ed) पाठ्यक्रमों में भी दाखिला होता था। लेकिन एनसीटीई (NCTE) के नए दिशा-निर्देशों के चलते इस बार 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स की प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। इस वजह से अब केवल दो वर्षीय पारंपरिक बीएड कोर्स में ही प्रवेश दिए जा रहे हैं।

935 कॉलेजों की 1 लाख से ज्यादा सीटों पर मिलेगा मौका, जुलाई से नया सत्र

परिणाम की घोषणा के बाद अब विश्वविद्यालय बहुत जल्द काउंसलिंग का शेड्यूल जारी करेगा, जिसमें सफल अभ्यर्थियों को अपनी पसंद के कॉलेज चुनने का मौका मिलेगा। इस सत्र में राजस्थान के लगभग 935 बीएड कॉलेजों की कुल 1,07,040 सीटों पर छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। मेरिट सूची और कॉलेज चॉइस के आधार पर सीटों का आवंटन किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रवेश प्रक्रिया तेजी से पूरी कर बीएड का नया शैक्षणिक सत्र जुलाई महीने से ही शुरू कर दिया जाएगा।

लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लें: आपातकाल की बरसी पर सीएम मोहन यादव का आह्वान

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भोपाल। देश में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की बरसी पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोकतंत्र प्रहरियों को नमन करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन बताया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के अहंकार के कारण देश पर आपातकाल थोपा गया था, जिसने संविधान की आत्मा और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से लोकतंत्र की रक्षा और राष्ट्रसेवा के लिए निरंतर समर्पित रहने का संकल्प लेने का आह्वान किया। गौरतलब है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने साल 2024 में 25 जून को हर वर्ष “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोकतंत्र सेनानियों को दी श्रद्धांजलि

आपातकाल की 51वीं बरसी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे भारतीय राजनीति का एक ऐसा काला अध्याय बताया जिसने देश के स्वाभिमान को गहरी चोट पहुँचाई थी। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले सभी लोकतंत्र योद्धाओं और प्रहरियों का देश सदैव ऋणी रहेगा। आइए, हम सब यह संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे।" मुख्यमंत्री ने आगे जोड़ा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने संविधान की मूल भावना को पूरी तरह कुचल दिया था। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च मानते हुए आगे बढ़ रहा है।

आपातकाल: भारतीय राजनीति का सबसे विवादित दौर

भारतीय इतिहास में 25 जून 1975 का दिन एक अमिट और विवादित मोड़ लेकर आया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर देश में इमरजेंसी की घोषणा की गई थी। यह आपातकाल 25 जून 1975 से लेकर 21 मार्च 1977 तक (करीब 21 महीने) लागू रहा। इस दमनकारी दौर के दौरान:

  • देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मुखर पत्रकारों को बिना शर्त गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया था।

  • मीडिया और प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई थी, जिससे अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह छिन गई थी।

  • आम नागरिकों को संविधान से मिलने वाली बुनियादी स्वतंत्रताओं और अधिकारों पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया था।

अनुच्छेद 352 और लोकतंत्र की सीख

तकनीकी रूप से देश में यह आपातकाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 (Article 352) के तहत आंतरिक अशांति के आधार पर घोषित किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों और इतिहासकारों का मानना है कि आपातकाल की ये ऐतिहासिक घटनाएं आज भी देश को लोकतंत्र के प्रति हमेशा सतर्क रहने की सीख देती हैं। उस दौर की कड़वी स्मृतियां हमें याद दिलाती हैं कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा और जिम्मेदारी होती है।

फर्जी गिरफ्तारी के नाम पर ठगी करने वालों पर CBI का बड़ा एक्शन

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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आज देश में सक्रिय साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' (डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला) से जुड़े मामलों में देश के 16 राज्यों में एक साथ 80 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह पूरी कार्रवाई सीबीआई द्वारा चलाए जा रहे विशेष 'ऑपरेशन चक्र' (Operation Chakra) के तहत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में पैर पसार रहे साइबर अपराध के नेटवर्क और उसके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तहस-नहस करना है।

16 राज्यों में 60 विशेष टीमों का महाअभियान

इस बड़े पैमाने पर की गई कार्रवाई को अंजाम देने के लिए सीबीआई ने 60 विशेष टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने देश के विभिन्न हिस्सों जैसे पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा सहित 16 राज्यों में छापेमारी कर तलाशी अभियान चलाया। सीबीआई का लक्ष्य देश भर में चल रहे डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों के 200 से अधिक मामलों से जुड़े अपराधियों के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। इस दौरान जांच एजेंसी ने शेल (फर्जी) कंपनियां बनाने और अवैध बैंक खाते खोलने के आरोप में दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया है। इन खातों का इस्तेमाल ठगी गई रकम को छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फर्जी वेबसाइट का भंडाफोड़

जांच के दौरान सीबीआई ने एक बेहद शातिर चाल का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलती-जुलती एक फर्जी वेबसाइट (यूआरएल) बना रखी थी, जिसका डर दिखाकर वे मासूम लोगों को डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाते थे। सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से इस फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने केस दर्ज कर अपनी तफ्तीश शुरू की थी।

भारतीयों के साथ विदेशी नागरिकों को भी बनाया शिकार

सीबीआई की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी को ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि इस रैकेट का जाल सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं था। इन साइबर ठगों ने न केवल हजारों भारतीय नागरिकों को अपनी चंगुल में फंसाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी नागरिकों को भी निशाना बनाकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की है। फिलहाल, इस छापेमारी के बाद सीबीआई भारी मात्रा में डिजिटल सबूत और दस्तावेज खंगालने में जुटी हुई है।

छत्तीसगढ़ में अवैध खनन करने वालों की अब खैर नहीं, साय सरकार ने कसे शिकंजे

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से खनिजों के खनन, परिवहन और उनके भंडारण में लिप्त तत्वों के खिलाफ अब राज्य सरकार बेहद कड़ा रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने गौण खनिज नियमों में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल की मुहर लगने के बाद इन नए और सख्त नियमों को राज्य में लागू कर दिया गया है। इन संशोधनों का मुख्य लक्ष्य अवैध उत्खनन पर पूरी तरह रोक लगाना, सरकारी खजाने के राजस्व को बढ़ाना और खनिज संपदा का वैज्ञानिक व पारदर्शी तरीके से दोहन सुनिश्चित करना है।

संशोधित नियमों के तहत अवैध परिवहन और उत्खनन के मामलों में लगने वाले जुर्माने की दरों में भारी बढ़ोतरी की गई है। अब किसी भी पकड़े गए मामले में समझौता राशि की न्यूनतम सीमा 25 हजार रुपये तय की गई है। इसके अलावा, अवैध परिवहन के दौरान प्रति टन के हिसाब से 2 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क वसूला जाएगा और पकड़े गए खनिज की पूरी कीमत भी अलग से चुकानी होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई वाहन 35 टन अवैध खनिज ले जाते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे केवल जुर्माने के रूप में 70 हजार रुपये और खनिज का मूल्य अलग से देना होगा। यही नियम ट्रैक्टर से अवैध रेत ले जाने पर भी लागू होगा, जहां न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत की कीमत देना अनिवार्य कर दिया गया है।

जब्त वाहनों पर सख्ती और सरकारी कार्यों के लिए नियमों में ढील

अवैध खनन के काम में बार-बार वाहनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार ने जब्ती के नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब पकड़े गए वाहन, मशीनरी या अन्य उपकरणों को वापस पाने (सुपुर्दगी) से पहले संबंधित अदालत में वाहन की श्रेणी के आधार पर 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की जमानत राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही उन्हें छोड़ा जा सकेगा। दूसरी ओर, विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकारी निर्माण कार्यों हेतु उत्खनन क्षेत्र की सीमा को 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर और इसके अनुज्ञापत्र की समय-सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है।

खनिज अन्वेषण न्यास की स्थापना और समामेलन प्रक्रिया का सरलीकरण

खनिजों की खोज और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 'छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025' के गठन का निर्णय लिया है। इसके तहत गौण खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी का 2 प्रतिशत हिस्सा इस ट्रस्ट में जमा कराया जाएगा, जिससे हर साल राज्य को करीब 5.25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है। साथ ही, खनन पट्टों के समामेलन (मर्जर) की जटिल प्रक्रिया को भी बेहद आसान बना दिया गया है, जिससे अलग-अलग पट्टों के एकीकरण में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतें खत्म होंगी और सरकार को प्रीमियम राशि आसानी से मिल सकेगी।

निर्माण विभागों में एक समान रॉयल्टी और जिला पंचायतों को राजस्व में हिस्सेदारी

सभी निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी की कटौती को लेकर अब एक जैसी व्यवस्था लागू की गई है। नए नियमों के अनुसार, सभी सरकारी विभाग खनिज की कीमत के साथ रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर और सुरक्षा राशि की कटौती तय नियमों के मुताबिक करेंगे, जो खनिज विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद ही वापस होगी। इसके अलावा, एक बड़ा फैसला लेते हुए अब गौण खनिज से मिलने वाले राजस्व का हिस्सा नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ-साथ जिला पंचायतों को भी दिया जाएगा। करीब तीन दशकों के बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में भी वृद्धि की गई है, ताकि बंद पड़ी खदानों को दोबारा नीलामी प्रक्रिया में लाया जा सके और केवल गंभीर कारोबारी ही इस क्षेत्र में कार्य कर सकें।

भाजपा संगठन में बड़ा फेरबदल: राजनाथ सिंह के बेटे समेत कई नेताओं को नई जिम्मेदारी

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए अपने नए प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा जारी की गई इस नई टीम में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। संगठनात्मक नियुक्तियों के तहत इस बार कुल 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री और 19 मंत्रियों की नियुक्ति की गई है। इसके साथ ही राज्य के सभी छह प्रमुख क्षेत्रों यानी पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर के लिए नए क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों का भी एलान किया गया है।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस सूची के जरिए आगामी चुनावी समर के लिए अपनी नई रणनीतिक टीम मैदान में उतार दी है, जिसमें पुराने और अनुभवी चेहरों के साथ-साथ युवाओं को भी तरजीह दी गई है।

प्रदेश उपाध्यक्ष और महामंत्रियों को मिली कमान

संगठन में जिन 19 नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा गया है, उनमें सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता शामिल हैं। वहीं, संगठनात्मक कार्यों को गति देने के लिए 8 प्रदेश महामंत्री नियुक्त किए गए हैं, जिनमें रामप्रताप सिंह चौहान, गीता शाक्य, अभिजात मिश्रा, उपेंद्र रावत, संजय राय, शंकर लोधी, दिलीप पटेल और राजेश चौधरी को जिम्मेदारी मिली है।

संगठन मंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा

बीजेपी ने अपनी इस नई टीम में 19 नेताओं को प्रदेश मंत्री के पद से नवाजा है। इनमें विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विनय राजभर, प्रमेंद्र जांगड़ा विश्वकर्मा, किरण लोधी निषाद, एकेश बिंद, सचिता सिंह चौहान (लूनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर, दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेन्द्र शर्मा और आकांक्षा सोनकर शामिल हैं। प्रादेशिक स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर, ब्रज की पूरन लाल लोधी, कानपुर की राम किशोर साहू, अवध की अवधेश द्विवेदी, काशी की अशोक चौरसिया और गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी विनोद राय को क्षेत्रीय अध्यक्ष के तौर पर सौंपी गई है।

मोर्चा अध्यक्ष और कार्यालय पदाधिकारियों की नियुक्तियां

कार्यालय प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारत दीक्षित को कार्यालय मंत्री तथा अतुल अवस्थी और लक्ष्मण सिंह को कार्यालय सह-मंत्री बनाया गया है। चुनावी माहौल में मीडिया के बेहतर प्रबंधन के लिए दिनेश प्रताप सिंह को मुख्य प्रवक्ता, मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया संयोजक और हिमांशु राज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, पार्टी के विभिन्न विंग्स को सक्रिय करने के लिए रोहित मिश्रा को युवा मोर्चा, प्रकाश पाल को पिछड़ा मोर्चा, देवेन्द्र सिंह को किसान मोर्चा, अशोक रावत को अनुसूचित मोर्चा, सरोज कुशवाहा को महिला मोर्चा और विद्याभूषण गोंड को अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।

यूपी बीजेपी की नई टीम घोषित, कई नए चेहरों को मिला मौका

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लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश संगठन की नई टीम की औपचारिक घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा जारी की गई इस नई सूची में सामाजिक समीकरणों, विशेषकर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भारी तरजीह दी गई है। नई टीम में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह, पूर्व मंत्री सुरेश राणा और पूजा पाल समेत कई दिग्गजों को प्रदेश उपाध्यक्ष की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा की इस नई जंबो टीम में 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री, 19 मंत्री और सभी 6 क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों का एलान किया गया है।

नीरज सिंह और सुरेश राणा समेत 19 नेता बने उपाध्यक्ष

भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने के लिए 19 उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व मंत्री सुरेश राणा, नीरज सिंह, पूजा पाल और मोहित बेनीवाल शामिल हैं। उपाध्यक्षों की पूरी सूची इस प्रकार है:

  • सुरेश राणा

  • सत्यपाल सैनी

  • ब्रज बहादुर

  • डॉ. धर्मेंद्र सिंह

  • मोहित बेनीवाल

  • देवेश कोरी

  • प्रियंका रावत

  • दुर्विजय शाक्य

  • रमेश सिंह

  • नीरज सिंह

  • अर्चना मिश्रा

  • पूजा पाल

  • शंकर गिरी

  • कामेश्वर सिंह

  • कृतिका अग्रवाल

  • सुरेश मौर्य

  • राजेश यादव

  • कृष्ण बिहारी राय

  • आलोक गुप्ता

संगठन को रफ्तार देने के लिए 8 महामंत्री और 19 मंत्री नियुक्त

पार्टी ने संगठनात्मक कार्यों को धार देने के लिए 8 प्रदेश महामंत्रियों की नियुक्ति की है। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर काम करने के लिए 19 प्रदेश मंत्रियों की भी फौज उतारी गई है, जिनमें युवाओं और महिलाओं की अच्छी भागीदारी है।

प्रदेश महामंत्री:

  • रामप्रताप सिंह चौहान

  • गीता शाक्य

  • अभिजात मिश्रा

  • उपेंद्र रावत

  • संजय राय

  • शंकर लोधी

  • दिलीप पटेल

  • राजेश चौधरी

प्रदेश मंत्री: विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विनय राजभर, प्रमेंद्र जांगड़ा विश्वकर्मा, किरण लोधी निषाद, एकेश बिंद, सचिता सिंह चौहान (लूनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर, दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेन्द्र शर्मा और आकांक्षा सोनकर।

सभी 6 क्षेत्रों के नए क्षेत्रीय अध्यक्ष घोषित

उत्तर प्रदेश को संगठनात्मक रूप से जिन 6 क्षेत्रों में बांटा गया है, उनके लिए भी नए कप्तानों (क्षेत्रीय अध्यक्षों) के नामों का एलान कर दिया गया है:

  • पश्चिम: नवाब सिंह नागर

  • ब्रज: पूरन लाल लोधी

  • कानपुर: राम किशोर साहू

  • अवध: अवधेश द्विवेदी

  • काशी: अशोक चौरसिया

  • गोरखपुर: विनोद राय

मोर्चों के अध्यक्ष और मीडिया टीम की जिम्मेदारी

भाजपा ने अपने सभी प्रमुख छह विंग्स (मोर्चों) के प्रदेश अध्यक्षों की भी घोषणा की है। युवा मोर्चा की कमान रोहित मिश्रा को सौंपी गई है, जबकि पिछड़ा वर्ग मोर्चा की जिम्मेदारी प्रकाश पाल को मिली है। महिला मोर्चा की अध्यक्ष सरोज कुशवाहा बनाई गई हैं। किसान मोर्चा के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह, अनुसूचित मोर्चा के अशोक रावत और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष विद्याभूषण गोंड होंगे।

इसके अलावा, कार्यालय प्रबंधन के लिए भारत दीक्षित को कार्यालय मंत्री तथा अतुल अवस्थी और लक्ष्मण सिंह को कार्यालय सह-मंत्री बनाया गया है। मीडिया और कम्युनिकेशन को मजबूत करने के लिए दिनेश प्रताप सिंह को मुख्य प्रवक्ता, मनीष दीक्षित को प्रदेश मीडिया संयोजक और हिमांशु राज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

कटनी स्टेशन पर लापरवाही! 5 घंटे तक प्लेटफॉर्म पर पड़ा रहा महिला का शव

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कटनी/जबलपुर। कटनी मुख्य रेलवे जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर एक अज्ञात महिला का शव मिलने से स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया। इस घटना ने रेलवे प्रशासन, आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) की कार्यप्रणाली, उनकी गश्त के दावों और मानवीय संवेदनाओं पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस प्लेटफॉर्म पर चौबीसों घंटे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों की भारी आवाजाही रहती है, वहां घंटों एक शव लावारिस हालत में पड़ा रहा। लोग आते-जाते रहे, लेकिन किसी ने शव को ढकने तक की जहमत नहीं उठाई। जिम्मेदार सुरक्षा एजेंसियां और रेल प्रशासन इस दौरान पूरी तरह मूकदर्शक बने रहे, जो सीधे तौर पर शव की अवमानना को दर्शाता है।

ओवरब्रिज के पास संदिग्ध हालत में मिली लाश, सुबह ही दी गई थी सूचना

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मृत महिला का शव प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर जबलपुर छोर की तरफ बने ओवरब्रिज के पास संदिग्ध परिस्थितियों में देखा गया था। शव को देखते ही सजग यात्रियों ने तुरंत इसकी जानकारी वहां तैनात स्थानीय रेल स्टाफ को दी थी। लेकिन इसके बाद प्रशासनिक सुस्ती का जो नजारा दिखा, उसने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।

लापरवाही की टाइमलाइन: 5 घंटे तक फाइलों और मेमो में उलझा रहा सिस्टम

इस पूरी घटना के दौरान रेलवे और पुलिस की कछुआ चाल को इन समय-सीमाओं से आसानी से समझा जा सकता है:

  • सुबह 06:00 बजे: स्टेशन पर तैनात रेल अधिकारियों और कर्मचारियों को प्लेटफॉर्म पर अज्ञात महिला का शव होने की पुख्ता जानकारी मिल चुकी थी।

  • सुबह 07:30 बजे: सूचना मिलने के बावजूद, रेलवे प्रशासन को जीआरपी को केवल एक आधिकारिक मेमो (लिखित सूचना) भेजने में पूरे डेढ़ घंटे का लंबा वक्त लग गया।

  • सुबह 11:00 बजे तक: मेमो मिलने के बाद भी जीआरपी की सुस्ती का आलम यह रहा कि सुबह 11 बजे तक शव को प्लेटफॉर्म से नहीं उठाया गया था।

कुल मिलाकर 5 घंटे से अधिक समय तक शव उसी हालत में यात्रियों के बीच पड़ा रहा। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन इस घोर लापरवाही को लेकर यात्रियों में भारी आक्रोश है।

तेज रफ्तार कार बनी काल, सड़क हादसे में दो युवकों ने गंवाई जान

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जबलपुर। भेड़ाघाट थाना क्षेत्र के कूड़न गांव के पास बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ एक तेज रफ्तार हेरियर कार ने बाइक से अपने गांव खैरी लौट रहे दो युवकों को जोरदार टक्कर मार दी। यह भिड़ंत इतनी भीषण थी कि 40 वर्षीय वीरेंद्र भूमिया की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथी 42 वर्षीय नरेश भूमिया ने मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों मृतक पेशे से ड्राइवर थे और अपने पीछे दो-दो बच्चों का परिवार छोड़ गए हैं। हादसे के बाद आरोपी कार चालक वाहन छोड़कर मौके से भाग निकला।

सड़क पर तड़पता रहा घायल, भीड़ बनी रही तमाशबीन

हादसे का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि दुर्घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ तो जुट गई, लेकिन किसी ने भी घायल की मदद नहीं की। वीरेंद्र की तत्काल मौत हो चुकी थी, जबकि नरेश सड़क पर गंभीर हालत में तड़पते हुए मदद की गुहार लगाते रहे। सूचना पर पहुंची भेड़ाघाट थाना पुलिस ने जब वहां मौजूद लोगों से घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए मदद मांगी, तब भी कोई आगे नहीं आया। आखिरकार पुलिसकर्मियों ने खुद ही नरेश को एम्बुलेंस से मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी खून बह जाने के कारण डॉक्टरों की कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका।

पिता से बात होने के ठीक 10 मिनट बाद आया मौत का पैगाम

मृतक वीरेंद्र के पिता ने रोते हुए बताया कि हादसे से महज 10 मिनट पहले ही उनकी बेटे से फोन पर बात हुई थी। वीरेंद्र ने कहा था कि वह कुछ ही देर में सीधे घर पहुंच रहा है, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। घर पर बेटे का इंतजार कर रहे परिवार के पास कुछ देर बाद पुलिस का फोन आया, जिसने परिजनों को झकझोर कर रख दिया। मामले की जांच कर रहे भेड़ाघाट थाने के एएसआई तेजराम ने बताया कि पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। दुर्घटना में शामिल हेरियर कार को पुलिस ने जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश में नाकेबंदी की जा रही है।

सिर्फ ₹1500 ज्यादा कमाए, तो क्या देना होगा ₹60,000 टैक्स? समझें नियम

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नई दिल्ली। पहली बार देखने पर न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) थोड़ा सख्त लग सकता है। कई टैक्सपेयर्स को अक्सर यह डर सताता है कि यदि उनकी सालाना टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख की तय सीमा से महज एक रुपया भी ऊपर निकल गई, तो वे धारा 87A के तहत मिलने वाले पूरे टैक्स रिबेट (Tax Rebate) से हाथ धो बैठेंगे और उन पर भारी-भरकम टैक्स का बोझ आ गिरेगा। लेकिन इनकम टैक्स कानून में इस डर का एक बेहद शानदार इन-बिल्ट समाधान मौजूद है, जिसे 'मार्जिनल रिलीफ' (Marginal Relief) कहा जाता है। यह प्रावधान आपकी थोड़ी सी बढ़ी हुई कमाई पर आपको बहुत बड़े टैक्स के झटके से बचाता है।

₹1500 एक्स्ट्रा आमदनी पर कितना देना होगा टैक्स? समझिए पूरा गणित

मान लीजिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (कैलेंडर वर्ष 2026) में आपकी कुल टैक्सेबल इनकम $1,201,500$ रुपये है। चूंकि यह आय रिबेट की ₹12 लाख की सीमा को पार कर चुकी है, तो स्लैब रेट के हिसाब से तकनीकी रूप से आपका टैक्स ₹60,225 बनता है। किसी को भी यह बात गलत लग सकती है कि सिर्फ ₹1500 ज्यादा कमाने की वजह से ₹60,000 से ऊपर का टैक्स चुकाना पड़े।

यहीं पर काम आता है मार्जिनल रिलीफ का नियम। न्यू टैक्स रिजीम के तहत नियम यह है कि यदि आपकी आय ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर जाती है, तो आपका कुल देय टैक्स केवल उसी बढ़ी हुई रकम तक सीमित कर दिया जाएगा जो सीमा से ऊपर है।

  • आपकी आय: $1,201,500$ रुपये (₹12 लाख की सीमा से ₹1500 अधिक)।

  • मार्जिनल रिलीफ के बाद टैक्स: ₹60,225 के बजाय सिर्फ ₹1500

  • टैक्स विभाग से मिली राहत: कुल ₹58,725 की पूरी छूट।

ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वालों को नहीं मिलता यह फायदा, न्यू रिजीम है बेहतर

करदाताओं के लिए यहाँ ध्यान देना जरूरी है कि मार्जिनल रिलीफ का यह बेहतरीन फायदा केवल न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनने वालों को ही मिलता है। ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में ऐसी कोई राहत व्यवस्था नहीं है; वहाँ जैसे ही आपकी टैक्सेबल आय ₹5 लाख की सीमा को पार करती है, आपको बिना किसी मार्जिनल रिलीफ के शुरुआती स्लैब रेट से पूरा टैक्स भरना पड़ता है। इसलिए, सीमा के बिल्कुल नजदीक रहने वाले मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए न्यू टैक्स रिजीम एक सुरक्षित और ज्यादा फायदेमंद सौदा साबित हो रहा है।

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