देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अपने ओएसडी के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान भारी नकदी मिलने की खबरों के बाद कांग्रेस कार्यसमिति और प्रदेश कमेटी के पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने हरीश रावत के फैसले को 'राजनीतिक संस्कारों' का परिचय बताया और कहा कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों (ED, CBI) के राजनीतिक दुरुपयोग का भी गंभीर आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि हरीश रावत ने उच्च नैतिक मूल्यों का तकादा रखते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया है।
भाजपा का तीखा हमला
भारतीय जनता पार्टी ने हरीश रावत के इस्तीफे और उनके सहयोगी के यहां हुई छापेमारी को लेकर कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया है। भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के मार्ग पर चलने वाली कांग्रेस पार्टी अब 'भारतीय राष्ट्रीय करप्शन' पार्टी बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि ओएसडी के घर से बरामद संपत्ति और कागजात उनके 'बॉस' (हरीश रावत) के ही हैं।
हरीश रावत का स्पष्टीकरण
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी देते हुए हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि उनके सहयोगी से जुड़े इस मामले के कारण पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष को किसी भी प्रकार की कमजोरी का सामना करना पड़े।









